पेशाब में दिखा ये बदलाव तो रुकिए! कहीं शरीर किसी बड़ी बीमारी का इशारा तो नहीं कर रहा?
प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में पाए जाने वाले प्रमुख कैंसर में शामिल है। चिंता की बात यह है कि शुरुआती दौर में कई बार इसके लक्षण बहुत स्पष्ट नहीं होते, लेकिन बीमारी बढ़ने पर पेशाब और मूत्र संबंधी आदतों में बदलाव दिखाई दे सकते हैं। यही वजह है कि उम्र बढ़ने के साथ होने वाली सामान्य परेशानी समझकर ऐसे बदलावों को लंबे समय तक नजरअंदाज करना सही नहीं माना जाता।
हालांकि, एक जरूरी बात यह भी है कि नीचे बताए गए लक्षण सिर्फ प्रोस्टेट कैंसर के कारण ही नहीं होते। प्रोस्टेट का बढ़ना, यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन और दूसरी मूत्र संबंधी समस्याएं भी इनके पीछे हो सकती हैं। इसलिए किसी एक लक्षण के आधार पर खुद से कैंसर का निष्कर्ष निकालने के बजाय डॉक्टर से उचित जांच कराना जरूरी है।
1. बार-बार पेशाब आना, खासकर रात में
अगर पहले की तुलना में बार-बार पेशाब लगने लगा है और रात में कई बार नींद खुलकर बाथरूम जाना पड़ रहा है, तो इस बदलाव पर ध्यान देना चाहिए।
प्रोस्टेट में होने वाले बदलाव मूत्रमार्ग और मूत्राशय के काम को प्रभावित कर सकते हैं। इसकी वजह से बार-बार पेशाब आने या पेशाब करने की इच्छा महसूस हो सकती है।
खासकर अगर यह समस्या लगातार बनी हुई है और रोजमर्रा की नींद या जीवनशैली प्रभावित होने लगी है, तो इसे केवल उम्र का सामान्य असर मानकर टालना उचित नहीं है।
2. पेशाब शुरू करने में दिक्कत
कुछ पुरुषों में पेशाब करने की इच्छा होने के बावजूद पेशाब की धार तुरंत शुरू नहीं होती। कई बार पेशाब शुरू करने के लिए जोर लगाना पड़ता है या कुछ समय इंतजार करना पड़ता है।
इसके अलावा पेशाब की धार कमजोर होना, रुक-रुककर पेशाब आना या पेशाब करने के बाद भी मूत्राशय पूरी तरह खाली न होने जैसा महसूस होना भी प्रोस्टेट से जुड़ी समस्याओं में देखा जा सकता है।
इन लक्षणों का मतलब सीधे तौर पर प्रोस्टेट कैंसर नहीं है। प्रोस्टेट का गैर-कैंसरकारी रूप से बढ़ना भी इसका आम कारण हो सकता है। फिर भी समस्या लगातार बनी रहे तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
3. पेशाब में खून दिखना
पेशाब का रंग गुलाबी, लाल या भूरा दिखाई देना अथवा साफ तौर पर खून नजर आना ऐसा लक्षण है जिसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
पेशाब में खून आने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें संक्रमण, पथरी, मूत्राशय या किडनी से जुड़ी समस्याएं और अन्य स्थितियां शामिल हो सकती हैं। कुछ मामलों में यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से भी जुड़ा हो सकता है।
इसलिए अगर पेशाब में खून दिखाई दे, तो बिना जांच के इसका कारण मान लेना सही नहीं है। डॉक्टर जरूरत के अनुसार यूरिन टेस्ट और अन्य जांचों की सलाह दे सकते हैं।
4. पेशाब या वीर्य में दर्द और खून
पेशाब करते समय दर्द, जलन या असहजता महसूस होना भी जांच की जरूरत वाला संकेत हो सकता है। इसी तरह वीर्य में खून दिखाई देना भी पुरुषों के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
हालांकि, इन लक्षणों के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं और हर मामले में कैंसर होना जरूरी नहीं है। संक्रमण या प्रोस्टेट से जुड़ी अन्य समस्याएं भी इसकी वजह बन सकती हैं।
लेकिन अगर दर्द या खून बार-बार दिखाई दे रहा है, लंबे समय तक बना हुआ है या इसके साथ पेशाब संबंधी दूसरी परेशानियां भी हैं, तो यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना समझदारी है।
5. कमर, कूल्हे या हड्डियों में लगातार दर्द
प्रोस्टेट कैंसर के उन्नत चरण में कैंसर के शरीर के दूसरे हिस्सों तक फैलने की स्थिति बन सकती है। ऐसे मामलों में कुछ पुरुषों को कमर, कूल्हे या हड्डियों में लगातार दर्द की शिकायत हो सकती है।
खासकर ऐसा दर्द जो बिना किसी स्पष्ट चोट या कारण के शुरू हुआ हो और लंबे समय तक बना रहे, उसकी चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है।
हालांकि, कमर या हड्डियों में दर्द के अनगिनत सामान्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए केवल दर्द के आधार पर प्रोस्टेट कैंसर की आशंका तय नहीं की जा सकती।
क्या हर पेशाब की समस्या प्रोस्टेट कैंसर है?
बिल्कुल नहीं। यह सबसे महत्वपूर्ण बात है जिसे समझना जरूरी है।
पुरुषों में उम्र बढ़ने के साथ प्रोस्टेट का आकार बढ़ना आम समस्या हो सकती है, जिसे बिनाइन प्रोस्टेटिक हाइपरप्लासिया (BPH) कहा जाता है। इसमें भी बार-बार पेशाब आना, रात में पेशाब के लिए उठना, कमजोर धार और पेशाब शुरू करने में परेशानी जैसे लक्षण हो सकते हैं।
इसी तरह यूरिनरी इंफेक्शन, पथरी और दूसरी मूत्र संबंधी समस्याएं भी समान लक्षण पैदा कर सकती हैं। इसलिए लक्षणों को देखकर खुद से कैंसर मान लेना उचित नहीं है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर पेशाब की आदत में लगातार बदलाव दिखाई दे रहा है, पेशाब शुरू करने में परेशानी हो रही है, धार कमजोर हो गई है, पेशाब में खून दिखाई देता है या पेशाब/वीर्य के साथ दर्द और खून जैसी समस्या बार-बार हो रही है, तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
डॉक्टर आपकी उम्र, लक्षणों और स्वास्थ्य इतिहास को देखते हुए जरूरी जांचों की सलाह दे सकते हैं। इनमें PSA ब्लड टेस्ट, शारीरिक जांच और जरूरत के अनुसार अन्य परीक्षण शामिल हो सकते हैं।
यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि PSA बढ़ना अपने आप में प्रोस्टेट कैंसर की पुष्टि नहीं करता। PSA का स्तर प्रोस्टेट की अन्य स्थितियों में भी बढ़ सकता है। इसलिए किसी भी रिपोर्ट की व्याख्या डॉक्टर द्वारा लक्षणों और दूसरी जांचों के साथ की जानी चाहिए।
प्रोस्टेट कैंसर का नाम सुनकर घबराने के बजाय शरीर में होने वाले लगातार बदलावों पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है। पेशाब की आदत में अचानक या लगातार बदलाव, पेशाब में खून, दर्द या लंबे समय तक रहने वाली असामान्य परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
समय पर डॉक्टर से सलाह और उचित जांच से बीमारी का सही कारण पता लगाया जा सकता है और जरूरत पड़ने पर इलाज की दिशा जल्दी तय की जा सकती है।

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