Viral Video: अचानक क्लास में पहुंचीं DM… और सीधे जाकर पीछे वाली बेंच पर बैठ गईं! फिर बच्चों से पूछ लिया ऐसा सवाल कि शिक्षक भी रह गए हैरान!
जहानाबाद: सरकारी स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों की पढ़ाई का स्तर जानने के लिए अधिकारी अक्सर निरीक्षण करते हैं। लेकिन बिहार के जहानाबाद में जिला पदाधिकारी का औचक निरीक्षण उस समय चर्चा का विषय बन गया, जब वह स्कूल का जायजा लेने के लिए सीधे कक्षा में पहुंचीं और अधिकारियों की तरह सामने खड़े रहने के बजाय बच्चों के बीच जाकर पीछे वाली बेंच पर बैठ गईं।
जहानाबाद की जिला पदाधिकारी छिरिङ वाई भूटिया अचानक निरीक्षण के लिए पहुंचीं। उनके इस अंदाज को देखकर स्कूल में मौजूद शिक्षक और विद्यार्थी भी हैरान रह गए। डीएम ने कक्षा में बैठकर न केवल शिक्षक के पढ़ाने के तरीके को देखा, बल्कि विद्यार्थियों से सीधे बातचीत कर उनकी पढ़ाई और शैक्षणिक स्थिति को समझने की कोशिश की।
इस दौरान उन्होंने बच्चों से विषय से जुड़े सवाल पूछे और यह जानने का प्रयास किया कि उन्हें पढ़ाई में किस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
अचानक कक्षा में पहुंचीं DM
बताया गया कि जिला पदाधिकारी छिरिङ वाई भूटिया स्कूल के निरीक्षण के लिए पहुंचीं। आमतौर पर किसी बड़े अधिकारी के स्कूल में आने पर शिक्षक और कर्मचारी उनके स्वागत और निरीक्षण की तैयारी में जुट जाते हैं। लेकिन इस औचक निरीक्षण में स्थिति कुछ अलग रही।
डीएम सीधे कक्षा में पहुंचीं और वहां चल रही पढ़ाई को देखने लगीं। उन्होंने शिक्षक से पढ़ाए जा रहे विषय के बारे में जानकारी ली और कुछ देर तक कक्षा की गतिविधियों का अवलोकन किया।
इसके बाद वह विद्यार्थियों के बीच पहुंच गईं और पीछे की बेंच पर बैठकर पढ़ाई देखने लगीं।
अधिकारी को अपने बीच बैठा देखकर शुरुआत में बच्चे भी थोड़े आश्चर्यचकित नजर आए। लेकिन कुछ ही देर में माहौल सहज हो गया।
शिक्षक पढ़ाते रहे और पीछे बैठकर देखती रहीं DM
कक्षा में शिक्षक विद्यार्थियों को पढ़ा रहे थे। इसी दौरान डीएम ने पीछे बैठकर यह देखने की कोशिश की कि शिक्षक किस तरह बच्चों को विषय समझा रहे हैं और विद्यार्थी पढ़ाई में कितनी रुचि ले रहे हैं।
यह निरीक्षण केवल कक्षा की व्यवस्था या उपस्थिति तक सीमित नहीं रहा। डीएम ने विद्यार्थियों से सीधे संवाद किया और उनके ज्ञान का स्तर समझने के लिए विषय से जुड़े सवाल पूछे।
बच्चों से सवाल पूछने का उद्देश्य केवल उनका परीक्षण करना नहीं था, बल्कि यह समझना भी था कि कक्षा में पढ़ाए जा रहे विषय को विद्यार्थी वास्तव में कितना समझ पा रहे हैं।
अचानक बच्चों के बीच जाकर पीछे वाली बेंच पर बैठ गईं DM..!
— Sadan Singh Rajput (@SadanJee) September 8, 2026
जहानाबाद जिला पदाधिकारी छिरिङ वाई भूटिया अचानक औचक निरीक्षण करने पहुंचीं। लेकिन निरीक्षण का अंदाज देखकर हर कोई हैरान रह गया!
DM सीधे एक कक्षा में पहुंचीं और विद्यार्थियों के साथ पीछे की बेंच पर बैठकर पढ़ाई देखने लगीं।… pic.twitter.com/kCQkRganGi
बच्चों से सीधे पूछे पढ़ाई से जुड़े सवाल
कक्षा में बैठने के बाद डीएम ने विद्यार्थियों से बातचीत शुरू की। उन्होंने बच्चों से उनके विषयों और पढ़ाई को लेकर सवाल किए।
उन्होंने यह समझने की कोशिश की कि विद्यार्थियों को किसी विषय को समझने में परेशानी तो नहीं होती, शिक्षक नियमित रूप से पढ़ाते हैं या नहीं और बच्चे पढ़ाई को लेकर किन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं।
अधिकारी के सीधे बच्चों के बीच जाकर बातचीत करने से उन्हें जमीनी स्थिति समझने का मौका मिला।
अक्सर स्कूलों के निरीक्षण में अधिकारी शिक्षकों और प्रधानाध्यापक से जानकारी लेकर व्यवस्था का आकलन करते हैं। लेकिन विद्यार्थियों से सीधे बातचीत करने पर उन्हें स्कूल की वास्तविक स्थिति के बारे में अलग तरह की जानकारी मिल सकती है।
बच्चों की शैक्षणिक समस्याओं को समझने की कोशिश
निरीक्षण के दौरान डीएम ने विद्यार्थियों की शैक्षणिक समस्याओं को समझने पर विशेष ध्यान दिया। उन्होंने बच्चों से यह जानने का प्रयास किया कि उन्हें पढ़ाई में किस तरह की दिक्कतें आती हैं।
किसी विद्यार्थी को विषय समझने में समस्या है या पढ़ाई के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं हैं, ऐसी जानकारियां सीधे बच्चों से बातचीत के दौरान सामने आ सकती हैं।
इस तरह का निरीक्षण अधिकारियों को यह समझने में मदद करता है कि कागजों पर दर्ज व्यवस्थाओं और कक्षा में मौजूद वास्तविक स्थिति के बीच कोई अंतर तो नहीं है।
सिर्फ रिकॉर्ड नहीं, कक्षा में दिखी वास्तविक स्थिति
स्कूल निरीक्षण के दौरान केवल रजिस्टर और दस्तावेज देखने से शिक्षा व्यवस्था की पूरी तस्वीर सामने नहीं आ सकती। असली स्थिति कक्षा में बच्चों और शिक्षकों के बीच होने वाली बातचीत से भी पता चलती है।
यही वजह है कि डीएम का विद्यार्थियों के बीच बैठकर पढ़ाई देखना खास माना जा रहा है।
पीछे की बेंच पर बैठकर उन्होंने उस स्थिति को देखने की कोशिश की, जिसमें सामान्य दिनों में विद्यार्थी कक्षा में बैठकर पढ़ते हैं। इससे शिक्षक के पढ़ाने के तरीके और विद्यार्थियों की प्रतिक्रिया को करीब से समझने का अवसर मिला।
अधिकारियों के निरीक्षण का बदला अंदाज
डीएम के इस अंदाज ने सरकारी स्कूलों के निरीक्षण को लेकर एक अलग संदेश भी दिया है। अधिकारी अगर केवल औपचारिक निरीक्षण करने के बजाय सीधे विद्यार्थियों और शिक्षकों के बीच जाकर वास्तविक स्थिति समझें तो समस्याओं की पहचान ज्यादा प्रभावी तरीके से की जा सकती है।
बच्चों के बीच बैठना अपने आप में एक छोटा कदम लग सकता है, लेकिन इससे विद्यार्थियों के साथ संवाद का माहौल सहज हो जाता है। कई बार बच्चे किसी अधिकारी के सामने खुलकर अपनी परेशानी नहीं बता पाते। लेकिन जब अधिकारी उनके बीच बैठकर सामान्य तरीके से बातचीत करता है तो बच्चे अपनी बात आसानी से रख सकते हैं।
बच्चों से बातचीत से सामने आ सकती हैं जमीनी समस्याएं
सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की समस्याएं कई तरह की हो सकती हैं। किसी बच्चे को किताब या शैक्षणिक सामग्री की जरूरत हो सकती है, किसी को किसी विषय में अतिरिक्त मदद की आवश्यकता हो सकती है, जबकि कुछ विद्यार्थियों को नियमित उपस्थिति या घर के माहौल से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
ऐसे में स्कूल प्रशासन और अधिकारियों के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वे सिर्फ आंकड़ों और रिकॉर्ड के आधार पर निर्णय न लें, बल्कि विद्यार्थियों से भी बातचीत करें।
जहानाबाद डीएम के निरीक्षण के दौरान भी विद्यार्थियों से संवाद इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
शिक्षक की पढ़ाने की शैली पर भी नजर
डीएम ने कक्षा में बैठकर शिक्षक के पढ़ाने के तरीके को भी करीब से देखा। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि शिक्षक विद्यार्थियों को विषय किस तरीके से समझा रहे हैं और बच्चे उस प्रक्रिया में कितने सक्रिय हैं।
कक्षा में बच्चों की भागीदारी, सवाल पूछने की क्षमता और शिक्षक के साथ उनका संवाद शिक्षा की गुणवत्ता को समझने के महत्वपूर्ण पहलू हैं।
पीछे की बेंच पर बैठने से अधिकारी को कक्षा का माहौल बिना किसी विशेष बदलाव के देखने का मौका भी मिला।
सोशल मीडिया पर चर्चा में आया अंदाज
डीएम के इस औचक निरीक्षण का अंदाज लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। खासतौर पर उनका बच्चों के साथ पीछे की बेंच पर बैठना लोगों को पसंद आ रहा है।
अक्सर सरकारी अधिकारियों के निरीक्षण की तस्वीरों में अधिकारी स्कूल प्रशासन और शिक्षकों के साथ खड़े नजर आते हैं। लेकिन यहां जिला पदाधिकारी ने विद्यार्थियों के बीच बैठकर कक्षा की गतिविधियों को समझने की कोशिश की।
यही वजह है कि उनका यह निरीक्षण लोगों का ध्यान खींच रहा है।
शिक्षा व्यवस्था सुधारने के लिए जरूरी है जमीनी निरीक्षण
स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नियमित निरीक्षण महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन निरीक्षण तभी प्रभावी माना जा सकता है जब उसके जरिए वास्तविक समस्याओं की पहचान हो और बाद में उनके समाधान के लिए कदम उठाए जाएं।
कक्षा में विद्यार्थियों के बीच बैठकर पढ़ाई देखना और उनसे सीधे सवाल करना इसी तरह के जमीनी निरीक्षण का हिस्सा माना जा सकता है।
इससे अधिकारी यह समझ सकते हैं कि बच्चों को पढ़ाई में क्या परेशानी आ रही है, शिक्षक किन परिस्थितियों में पढ़ा रहे हैं और स्कूल में उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किस तरह हो रहा है।
DM के इस कदम से बच्चों में भी बढ़ा आत्मविश्वास
किसी बड़े अधिकारी का सीधे बच्चों के बीच बैठना विद्यार्थियों के लिए भी उत्साह बढ़ाने वाला अनुभव हो सकता है। इससे बच्चों को यह महसूस होता है कि उनकी पढ़ाई और उनकी समस्याओं को प्रशासन गंभीरता से देख रहा है।
जब अधिकारी उनसे सीधे सवाल करते हैं तो बच्चों को अपनी बात रखने और अपनी जानकारी प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है।
जहानाबाद में हुए इस निरीक्षण का सबसे खास पहलू यही रहा कि जिला पदाधिकारी ने निरीक्षण को केवल औपचारिक प्रक्रिया नहीं बनाया, बल्कि कक्षा में बैठकर विद्यार्थियों के साथ समय बिताया।
पीछे की बेंच पर बैठकर पढ़ाई देखना, बच्चों से सवाल करना और उनकी शैक्षणिक समस्याओं को समझने की कोशिश करना यह बताता है कि स्कूल की वास्तविक स्थिति जानने के लिए जमीनी स्तर पर जाकर निरीक्षण कितना महत्वपूर्ण हो सकता है।
अब इस निरीक्षण के बाद स्कूल में सामने आने वाली समस्याओं पर किस तरह की कार्रवाई होती है और शिक्षा व्यवस्था में क्या बदलाव देखने को मिलते हैं, इस पर भी लोगों की नजर रहेगी।

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