सुबह तकिए पर दिखती है लार तो संभल जाइए! नींद में मुंह से पानी निकलना सिर्फ आदत नहीं, इन बीमारियों का हो सकता है संकेत
सुबह उठने के बाद तकिए पर लार के निशान देखना कई लोगों के लिए बेहद सामान्य बात लग सकती है। अक्सर लोग इसे सिर्फ सोने की पोजीशन या गहरी नींद से जोड़कर देखते हैं। कभी-कभार नींद में मुंह से लार निकल जाना वास्तव में सामान्य हो सकता है। खासकर जब कोई व्यक्ति करवट लेकर सोता है, मुंह खुला रहता है या उस दौरान नाक से सांस लेने में परेशानी होती है। लेकिन अगर लगभग हर रात ऐसा हो रहा है और तकिए पर काफी मात्रा में लार दिखाई देती है, तो इसके पीछे किसी दूसरी वजह की भी भूमिका हो सकती है।
सोते समय शरीर की कई प्रक्रियाएं जागने की अवस्था की तुलना में धीमी हो जाती हैं। इनमें निगलने की प्रक्रिया भी शामिल है। जागते समय मुंह में बनने वाली लार को व्यक्ति सामान्य रूप से निगलता रहता है, लेकिन नींद के दौरान निगलने की आवृत्ति कम हो सकती है। अगर उसी समय मुंह खुला हुआ हो, तो लार मुंह से बाहर निकल सकती है। यही वजह है कि सुबह उठने पर तकिए पर गीले निशान दिखाई देते हैं।
हालांकि, लगातार लार टपकने की समस्या को केवल नींद की आदत मानना हमेशा सही नहीं होता। नाक बंद रहने, मुंह से सांस लेने, खर्राटों, स्लीप एपनिया और कुछ मामलों में निगलने से जुड़ी परेशानी के कारण भी यह समस्या बढ़ सकती है।
नींद में लार बाहर आने का सबसे सामान्य कारण क्या है?
नींद के दौरान जबड़े और मुंह की मांसपेशियां पूरी तरह सक्रिय नहीं रहतीं। अगर व्यक्ति का मुंह थोड़ा खुला हुआ है, तो मुंह में मौजूद लार बाहर निकल सकती है। करवट लेकर सोने पर यह संभावना और बढ़ जाती है, क्योंकि गुरुत्वाकर्षण के कारण लार मुंह के किनारे से बाहर आ सकती है।
कुछ लोग पेट के बल या एक तरफ मुंह करके सोते हैं। ऐसी स्थिति में भी लार के बाहर निकलने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए यदि यह समस्या कभी-कभार ही होती है और इसके साथ कोई दूसरा लक्षण नहीं है, तो आमतौर पर घबराने की जरूरत नहीं होती।
लेकिन जब लार का अत्यधिक बहना लगातार होने लगे, तब इसके पीछे मौजूद कारण पर ध्यान देना जरूरी हो जाता है।
नाक बंद रहने पर बढ़ सकती है समस्या
लगातार नाक बंद रहना सोते समय लार टपकने की एक महत्वपूर्ण वजह हो सकता है। सर्दी-जुकाम, एलर्जी, साइनस की समस्या या नाक के रास्ते में दूसरी तरह की रुकावट होने पर व्यक्ति के लिए नाक से सांस लेना मुश्किल हो सकता है।
ऐसी स्थिति में शरीर स्वाभाविक रूप से मुंह से सांस लेने लगता है। रात में लंबे समय तक मुंह खुला रहने के कारण लार बाहर आने की संभावना बढ़ जाती है।
अगर किसी व्यक्ति को अक्सर रात में मुंह सूखने, नाक बंद रहने और मुंह खोलकर सोने की आदत के साथ लार टपकने की शिकायत है, तो सिर्फ लार को रोकने के बजाय नाक बंद रहने की मूल वजह पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
खर्राटे भी हो सकते हैं संकेत
जिन लोगों को सोते समय तेज खर्राटे आते हैं, उनमें भी मुंह से लार निकलने की समस्या देखी जा सकती है। खर्राटों के दौरान कई लोग मुंह खोलकर सांस लेते हैं। इससे लार के बाहर निकलने की संभावना बढ़ जाती है।
लेकिन अगर खर्राटे बहुत तेज हैं और उनके साथ नींद में सांस रुकने जैसी शिकायत भी होती है, तो इसे सामान्य खर्राटे समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यह ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया से जुड़ा संकेत हो सकता है।
स्लीप एपनिया में सोते समय सांस लेने का रास्ता बार-बार संकरा या अवरुद्ध हो सकता है। इससे व्यक्ति की नींद बार-बार प्रभावित होती है और वह कई बार अनजाने में मुंह से सांस लेने लगता है।
अगर किसी व्यक्ति को तेज खर्राटों के साथ नींद में सांस रुकने, अचानक हांफकर उठने, सुबह सिरदर्द या दिनभर अत्यधिक नींद आने जैसी समस्या रहती है, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी हो सकता है।
निगलने में परेशानी भी हो सकती है वजह
लार बाहर निकलने का एक और कारण निगलने में परेशानी हो सकता है। सामान्य स्थिति में शरीर लगातार बनने वाली लार को निगलता रहता है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति को निगलने की प्रक्रिया में दिक्कत हो रही है, तो लार मुंह में जमा हो सकती है और बाद में बाहर निकल सकती है।
कुछ न्यूरोलॉजिकल स्थितियों या चेहरे, जीभ और मुंह की मांसपेशियों से जुड़ी कमजोरी में निगलने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। ऐसे मामलों में केवल लार टपकने पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। इसके साथ दिखाई देने वाले दूसरे लक्षण भी महत्वपूर्ण होते हैं।
यदि किसी व्यक्ति को अचानक निगलने में परेशानी, बोलने में दिक्कत, चेहरे के एक हिस्से में कमजोरी, हाथ-पैर में कमजोरी या शरीर के संतुलन में अचानक बदलाव महसूस हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है।
क्या सोने की पोजीशन बदलने से फायदा हो सकता है?
कुछ लोगों में सोने की पोजीशन बदलने से लार टपकने की समस्या कम हो सकती है। अगर किसी व्यक्ति को खास तौर पर एक तरफ करवट लेकर सोने पर लार ज्यादा निकलती है, तो वह अपनी सोने की स्थिति बदलकर देख सकता है।
हालांकि, हर व्यक्ति में इसका असर एक जैसा नहीं होता। अगर समस्या का कारण नाक बंद रहना, खर्राटे या निगलने से जुड़ी कोई परेशानी है, तो सिर्फ सोने की पोजीशन बदलना पर्याप्त नहीं होगा।
इसलिए लगातार समस्या होने पर मूल कारण का पता लगाना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
बच्चों में क्यों होती है यह समस्या?
बच्चों में कभी-कभी सोते समय लार निकलना सामान्य हो सकता है। लेकिन अगर बच्चा लगातार मुंह खोलकर सोता है, खर्राटे लेता है या नाक से सांस लेने में परेशानी महसूस करता है, तो इसकी वजह की जांच कराना उपयोगी हो सकता है।
कुछ बच्चों में बढ़े हुए एडिनॉइड्स या टॉन्सिल जैसी समस्याएं नाक से सांस लेने में परेशानी पैदा कर सकती हैं। इसके कारण बच्चा रात में मुंह से सांस ले सकता है और लार तकिए पर गिर सकती है।
यदि बच्चे को लंबे समय से ऐसी परेशानी है, तो बाल रोग विशेषज्ञ या संबंधित डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहता है।
लार कम करने के लिए क्या किया जा सकता है?
सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि समस्या किस कारण से हो रही है। यदि नाक लगातार बंद रहती है, तो उसके कारण का पता लगाना चाहिए। एलर्जी, साइनस या नाक से जुड़ी दूसरी समस्या होने पर डॉक्टर उचित उपचार की सलाह दे सकते हैं।
अगर खर्राटे ज्यादा आते हैं या स्लीप एपनिया का संदेह है, तो इसकी चिकित्सकीय जांच जरूरी हो सकती है। बिना सलाह के नींद या एलर्जी से जुड़ी दवाएं लेना उचित नहीं है।
सोने की पोजीशन में बदलाव भी कुछ लोगों के लिए मददगार हो सकता है। कमरे में धूल, धुआं या ऐसे पदार्थों से बचना भी उपयोगी हो सकता है जो एलर्जी को बढ़ाते हैं, खासकर तब जब नाक बंद रहने की समस्या बार-बार होती हो।
कब इसे गंभीरता से लेना चाहिए?
अगर कभी-कभार सोते समय लार निकलती है और कोई दूसरी परेशानी नहीं है, तो आमतौर पर इसे लेकर ज्यादा चिंता करने की जरूरत नहीं होती। लेकिन अगर यह समस्या लगभग रोज हो रही है, लार की मात्रा काफी ज्यादा है या इसके साथ दूसरे लक्षण भी मौजूद हैं, तो चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।
खास तौर पर तेज खर्राटे, नींद में सांस रुकना, रात में बार-बार घुटन या हांफने जैसा महसूस होना, निगलने में कठिनाई, बोलने में बदलाव या चेहरे की कमजोरी जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कुल मिलाकर, सुबह तकिए पर लार के निशान दिखना अपने आप में किसी गंभीर बीमारी का प्रमाण नहीं है। कई बार यह सिर्फ मुंह खुला रहने या सोने की पोजीशन के कारण होता है। लेकिन जब यह लगातार होने लगे या इसके साथ दूसरे असामान्य लक्षण दिखाई दें, तो शरीर के इस संकेत को समझना जरूरी है। सही कारण का पता लगाकर ही उचित समाधान किया जा सकता है।

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