40 दिन में डायबिटीज खत्म करने का दावा! नाभि पर लगाते ही क्या वाकई कंट्रोल होगी शुगर?
डायबिटीज यानी हाई ब्लड शुगर आज दुनिया भर में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल है। भारत में भी बड़ी संख्या में लोग डायबिटीज या प्री-डायबिटीज से प्रभावित हैं। यह ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर में ब्लड ग्लूकोज का स्तर सामान्य से ज्यादा रहने लगता है। लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित न रहने पर आंखों, किडनी, नसों, दिल और रक्त वाहिकाओं पर गंभीर असर पड़ सकता है। यही वजह है कि डायबिटीज को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी माना जाता है।
डायबिटीज के इलाज और नियंत्रण के लिए डॉक्टर आमतौर पर खान-पान में बदलाव, नियमित शारीरिक गतिविधि, वजन को नियंत्रित रखने और जरूरत के अनुसार दवाओं की सलाह देते हैं। कई लोग इसके साथ आयुर्वेदिक या घरेलू उपाय भी अपनाते हैं। सोशल मीडिया और पारंपरिक चिकित्सा से जुड़े दावों में ऐसे कई नुस्खे बताए जाते हैं, जिनके बारे में ब्लड शुगर कम करने की बात कही जाती है।
इसी तरह इन दिनों तुंबा फल और सौंठ से तैयार किए जाने वाले एक देसी नुस्खे की चर्चा की जा रही है। दावा किया जाता है कि इसके इस्तेमाल से हाई ब्लड शुगर को नियंत्रित किया जा सकता है और कुछ दावों में 40 दिनों के भीतर डायबिटीज खत्म होने तक की बात कही गई है। हालांकि, यहां सबसे जरूरी बात यह है कि डायबिटीज को 40 दिनों में खत्म करने की गारंटी वाला दावा वैज्ञानिक रूप से स्थापित इलाज नहीं माना जा सकता।
क्या है तुंबा फल?
तुंबा एक कड़वा फल है, जिसे कई जगहों पर इंद्रायण या विषलुंबा के नाम से भी जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम Citrullus colocynthis है। यह पौधा गर्म और शुष्क क्षेत्रों में पाया जाता है और राजस्थान, गुजरात तथा मध्य प्रदेश के कुछ रेगिस्तानी इलाकों में भी इसकी मौजूदगी देखी जाती है।
पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में इस पौधे और इसके फल का इस्तेमाल अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किया जाता रहा है। इसके औषधीय गुणों को लेकर भी शोध किए गए हैं। कुछ अध्ययनों में इसके संभावित एंटी-डायबिटिक प्रभावों की जांच की गई है और ब्लड ग्लूकोज तथा HbA1c जैसे संकेतकों में बदलाव की संभावना सामने आई है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। किसी पौधे या उसके किसी हिस्से पर शोध में संभावित प्रभाव दिखाई देना और उस पौधे को घरेलू तरीके से इस्तेमाल करके डायबिटीज का इलाज हो जाना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।
तुंबा और सौंठ का नुस्खा क्या है?
वायरल दावे के अनुसार तुंबा फल और सौंठ को बराबर मात्रा में लेकर दोनों को अच्छी तरह पीसकर बारीक पाउडर तैयार किया जाता है। इसके बाद इस मिश्रण की थोड़ी मात्रा लेकर उसमें पानी की कुछ बूंदें मिलाई जाती हैं और पेस्ट जैसा तैयार किया जाता है।
दावे के मुताबिक इस पेस्ट को नाभि पर लगाया जाता है और कई घंटों तक वहां रखा जाता है। इसे अपनी जगह पर बनाए रखने के लिए टेप आदि के इस्तेमाल की बात भी कही जाती है।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि नाभि पर किसी पेस्ट को लगाने से ब्लड शुगर नियंत्रित होने का मजबूत वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं माना जाता। शरीर में दवा या किसी औषधीय पदार्थ के असर के लिए उसका शरीर में किस तरह अवशोषण होता है, कितनी मात्रा पहुंचती है और उसका प्रभाव किस तंत्र के जरिए होता है—इन सभी चीजों का वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी होता है।
इसलिए इस तरह के नुस्खे को डायबिटीज की प्रमाणित चिकित्सा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
सौंठ क्या है?
सौंठ वास्तव में सूखी हुई अदरक का पाउडर है। अदरक को सुखाने के बाद उसे पीसकर सौंठ तैयार की जाती है। भारतीय खान-पान और पारंपरिक चिकित्सा में इसका इस्तेमाल लंबे समय से होता रहा है।
अदरक में मौजूद कुछ प्राकृतिक यौगिकों को लेकर वैज्ञानिक शोध भी हुए हैं। कुछ अध्ययनों में अदरक के सेवन और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म से जुड़े संभावित प्रभावों की जांच की गई है। कुछ शोधों में ब्लड शुगर और इंसुलिन से संबंधित मापदंडों में सुधार की संभावना दिखाई गई है।
लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सौंठ अकेले डायबिटीज का इलाज कर सकती है। किसी खाद्य पदार्थ या मसाले में संभावित लाभकारी गुण होना और उसे दवा की तरह इस्तेमाल करना अलग-अलग विषय हैं।
क्या 40 दिनों में डायबिटीज खत्म हो सकती है?
यही इस पूरे दावे का सबसे बड़ा सवाल है।
टाइप-2 डायबिटीज में कई लोगों का ब्लड शुगर खान-पान, व्यायाम, वजन में कमी और दवाओं की मदद से काफी बेहतर नियंत्रित हो सकता है। कुछ लोगों में लंबे समय तक सामान्य शुगर लेवल बना रहने की स्थिति को चिकित्सकीय भाषा में रेमिशन कहा जाता है। लेकिन इसे हर व्यक्ति में होने वाली स्थायी बीमारी की समाप्ति नहीं माना जा सकता।
इसलिए किसी घरेलू नुस्खे के बारे में यह कहना कि 40 दिनों में डायबिटीज पूरी तरह खत्म हो जाएगी, बहुत बड़ा दावा है। इस तरह की गारंटी के लिए बड़े, अच्छी तरह नियंत्रित और लंबे समय तक किए गए वैज्ञानिक परीक्षणों की जरूरत होती है।
किसी व्यक्ति का ब्लड शुगर कुछ दिनों या हफ्तों में कम दिखाई देना भी यह साबित नहीं करता कि उसकी डायबिटीज खत्म हो गई है। इसके लिए डॉक्टर HbA1c, फास्टिंग ग्लूकोज और जरूरत के अनुसार अन्य जांचों को देखते हैं।
तुंबा को लेकर सावधानी क्यों जरूरी है?
तुंबा एक बेहद कड़वा औषधीय पौधा है और इसके सेवन को लेकर विशेष सावधानी की जरूरत होती है। किसी भी शक्तिशाली औषधीय पौधे को सिर्फ इसलिए सुरक्षित नहीं मान लेना चाहिए क्योंकि वह प्राकृतिक है।
तुंबा की गलत मात्रा या गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर शरीर में नुकसान होने की आशंका हो सकती है। खासकर यदि कोई व्यक्ति पहले से ब्लड शुगर कम करने वाली दवाएं ले रहा है, तो किसी भी अतिरिक्त औषधीय पदार्थ का इस्तेमाल बिना विशेषज्ञ की सलाह के करना जोखिम भरा हो सकता है।
इसी तरह गर्भवती महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों को किसी भी ऐसे पारंपरिक नुस्खे का इस्तेमाल खुद से नहीं करना चाहिए।
डायबिटीज मरीजों को क्या करना चाहिए?
अगर किसी व्यक्ति को डायबिटीज है, तो सबसे पहले अपने डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार और दवाओं का पालन करना चाहिए। दवाएं अचानक बंद करना या उनकी मात्रा कम करना खतरनाक हो सकता है।
इसके साथ रोजाना शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और वजन को नियंत्रित रखने पर ध्यान देना भी महत्वपूर्ण है। मीठे पेय, अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ और जरूरत से ज्यादा कैलोरी लेने से बचना भी ब्लड शुगर नियंत्रण में मदद कर सकता है।
घरेलू या आयुर्वेदिक नुस्खे को अपनाने की इच्छा हो तो डॉक्टर या योग्य आयुर्वेद विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है, खासकर तब जब व्यक्ति पहले से डायबिटीज की दवा ले रहा हो।
नाभि पर पेस्ट लगाने से पहले सोचें
तुंबा और सौंठ के पेस्ट को नाभि पर लगाने वाला नुस्खा पारंपरिक दावे के रूप में सामने आया है, लेकिन इसे डायबिटीज का प्रमाणित इलाज मानना सही नहीं होगा। नाभि के जरिए किसी पेस्ट से ब्लड शुगर में चिकित्सकीय रूप से महत्वपूर्ण कमी आने का पर्याप्त प्रमाण नहीं है।
यदि कोई व्यक्ति इस तरह का पेस्ट लगाने के बाद त्वचा पर जलन, लालिमा, खुजली या सूजन महसूस करता है, तो उसका इस्तेमाल बंद करना चाहिए। त्वचा पर लगाने वाली किसी भी चीज से एलर्जी या जलन हो सकती है।
सबसे अहम बात यह है कि डायबिटीज को नियंत्रित करना संभव है, लेकिन किसी एक घरेलू नुस्खे से बीमारी खत्म होने की गारंटी मानना खतरनाक हो सकता है। तुंबा और सौंठ में मौजूद संभावित औषधीय गुणों पर शोध जरूर हुए हैं, लेकिन शोध के परिणामों को घरेलू उपचार की गारंटी में बदलना सही नहीं है।
इसलिए अगर आपका ब्लड शुगर बढ़ा हुआ है, तो पहले जांच कराएं, डॉक्टर से सलाह लें और अपने इलाज की निगरानी कराएं। कोई भी देसी या आयुर्वेदिक नुस्खा अपनाने से पहले यह जरूर सुनिश्चित करें कि वह आपकी मौजूदा दवाओं और स्वास्थ्य स्थिति के साथ सुरक्षित है। डायबिटीज में सबसे बड़ा लक्ष्य केवल शुगर की एक रिपोर्ट को नीचे लाना नहीं, बल्कि लंबे समय तक ब्लड शुगर को सुरक्षित सीमा में बनाए रखना और इससे होने वाली जटिलताओं से बचना है।

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