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महिलाओं में हार्ट अटैक की पहचान अब बदलेगी! नई गाइडलाइन ने खोले दिल के 3 छिपे राज, डॉक्टरों को भी दी बड़ी सलाह



हार्ट अटैक का नाम आते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में दिल की नस में जमा कोलेस्ट्रॉल या खून का थक्का और उसके कारण ब्लॉकेज की तस्वीर सामने आती है। लेकिन हर हार्ट अटैक की वजह एक जैसी नहीं होती। खासकर महिलाओं में कुछ ऐसे कारण भी हार्ट अटैक के पीछे हो सकते हैं, जिन्हें लंबे समय तक कम पहचाना गया।

अब दुनिया की चार प्रमुख हृदय संस्थाओं ने हार्ट अटैक की परिभाषा और उसके वर्गीकरण को लेकर बड़ा बदलाव किया है। नई Fifth Universal Definition of Myocardial Infarction 2026 को European Society of Cardiology (ESC), American College of Cardiology (ACC), American Heart Association (AHA) और World Heart Federation (WHF) ने मिलकर तैयार किया है। नई व्यवस्था में हार्ट अटैक को पुराने Type 1, Type 2, Type 3, Type 4 और Type 5 जैसे नंबरों से अलग तरीके से वर्गीकृत किया गया है।

इस बदलाव की सबसे बड़ी खासियत यह है कि महिलाओं में अपेक्षाकृत ज्यादा देखे जाने वाले तीन कम सामान्य कारणों—SCAD, coronary artery spasm और coronary embolism—को अब प्राथमिक हार्ट अटैक के दायरे में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे ऐसे मरीजों की पहचान और इलाज बेहतर हो सकता है, जिनका हार्ट अटैक सामान्य ब्लॉकेज वाले पैटर्न से अलग होता है।

हार्ट अटैक की पुरानी तस्वीर से अलग है नई कहानी

अब तक आमतौर पर हार्ट अटैक को कोरोनरी धमनी में plaque rupture और उसके बाद बनने वाले blood clot से जोड़कर देखा जाता था। लेकिन नई परिभाषा मानती है कि दिल की मांसपेशी तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होने के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं।

नई classification के अनुसार myocardial infarction को तीन बड़े clinical settings में बांटा गया है—primary MI, secondary MI और procedure-related MI

Primary MI तब होता है जब दिल की coronary artery में कोई acute समस्या सीधे हार्ट अटैक पैदा करती है। इसमें सामान्य plaque-related blockage के अलावा SCAD, artery spasm और coronary embolism भी शामिल हैं।

Secondary MI में किसी दूसरी गंभीर स्थिति के कारण दिल को मिलने वाली ऑक्सीजन और उसकी जरूरत के बीच असंतुलन पैदा होता है। वहीं procedure-related MI किसी cardiac procedure या surgery से जुड़ी complication के कारण हो सकता है।

महिलाओं से जुड़ा पहला बड़ा खतरा—SCAD

SCAD यानी Spontaneous Coronary Artery Dissection एक ऐसी स्थिति है जिसमें coronary artery की दीवार की परत में अचानक tear या dissection हो सकता है। इससे रक्त का सामान्य प्रवाह प्रभावित हो सकता है और हार्ट अटैक हो सकता है।

यह स्थिति विशेष रूप से महिलाओं में महत्वपूर्ण मानी जाती है। British Heart Foundation के अनुसार SCAD के करीब 80 प्रतिशत मामले महिलाओं में होते हैं और यह गर्भावस्था के दौरान या उसके तुरंत बाद भी हो सकता है।

सबसे बड़ी परेशानी यह है कि SCAD सामान्य cholesterol blockage वाले हार्ट अटैक से अलग है। इसलिए यदि डॉक्टर केवल पारंपरिक blockage को ही ध्यान में रखकर जांच करें तो वास्तविक कारण को पहचानना मुश्किल हो सकता है।

2026 में ESC ने भी SCAD को युवा और अपेक्षाकृत स्वस्थ महिलाओं में हार्ट अटैक का एक महत्वपूर्ण और कम पहचाना जाने वाला कारण बताया है।

दूसरा कारण—दिल की नस में अचानक ऐंठन

नई गाइडलाइन में coronary artery spasm को भी primary heart attack के कारणों में शामिल किया गया है।

इस स्थिति में coronary artery अचानक सिकुड़ या ऐंठ सकती है। इससे कुछ समय के लिए दिल की मांसपेशी तक रक्त और ऑक्सीजन की आपूर्ति कम हो सकती है और गंभीर स्थिति में हार्ट अटैक हो सकता है।

ऐसी ऐंठन emotional stress, exercise या अत्यधिक ठंड जैसी परिस्थितियों से जुड़ी हो सकती है।

यह स्थिति इसलिए चुनौतीपूर्ण है क्योंकि यहां समस्या हमेशा किसी स्थायी blockage के रूप में दिखाई दे, ऐसा जरूरी नहीं है। यानी किसी व्यक्ति की artery में पारंपरिक cholesterol plaque का बड़ा blockage न होने के बावजूद हार्ट अटैक हो सकता है।

तीसरा कारण—खून का थक्का कहीं और से आकर नस में फंसना

नई classification में coronary embolism को भी प्राथमिक myocardial infarction के कारणों में शामिल किया गया है।

इस स्थिति में कोई blood clot या अन्य material रक्त प्रवाह के साथ coronary artery तक पहुंचकर वहां blockage पैदा कर सकता है। इससे दिल की मांसपेशी को अचानक रक्त की कमी हो सकती है और हार्ट अटैक हो सकता है।

यानी हार्ट अटैक हमेशा उसी जगह बनने वाले clot से नहीं होता। कभी-कभी clot शरीर के किसी दूसरे हिस्से से यात्रा करके coronary artery तक पहुंच सकता है।

महिलाओं में हार्ट अटैक की पहचान में क्यों हुई देरी?

विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में cardiovascular disease को लंबे समय तक पुरुषों के नजरिए से समझने की कोशिश की गई। इसके कारण कुछ मामलों में महिलाओं के हार्ट अटैक को पहचानने में देरी हो सकती है।

नई गाइडलाइन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा sex-specific troponin thresholds से जुड़ा है। Troponin एक ऐसा cardiac biomarker है जो हृदय की मांसपेशी को नुकसान होने पर खून में बढ़ सकता है।

नई परिभाषा में पुरुषों और महिलाओं के लिए troponin की अलग-अलग reference limits के इस्तेमाल की जरूरत पर जोर दिया गया है। ESC के अनुसार ऐसा करने से महिलाओं में myocardial injury की कम पहचान होने से जुड़ा bias कम किया जा सकता है।

अब डॉक्टरों को जांच में क्या बदलाव करना होगा?

नई गाइडलाइन में imaging और अन्य diagnostic tests की भूमिका पर भी जोर दिया गया है। खासकर suspected myocardial infarction में यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि आखिर हार्ट अटैक का वास्तविक कारण क्या था।

Coronary angiography जैसी जांच coronary arteries की तस्वीर दिखाने में मदद करती है। इससे SCAD, coronary spasm या embolism जैसी स्थितियों की पहचान में मदद मिल सकती है।

नई classification का उद्देश्य सिर्फ बीमारी का नाम बदलना नहीं है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि जिस कारण से हार्ट अटैक हुआ है, उसी के अनुसार मरीज का इलाज किया जाए।

गलत कारण समझने पर इलाज भी गलत हो सकता है

यही इस बदलाव की सबसे महत्वपूर्ण वजहों में से एक है।

अगर किसी मरीज के हार्ट अटैक की असली वजह artery spasm है, तो उसका management सामान्य blockage वाले हार्ट अटैक से अलग हो सकता है। इसी तरह coronary embolism और SCAD के मामलों में भी treatment strategy अलग हो सकती है।

British Heart Foundation ने उदाहरण देते हुए बताया है कि कुछ coronary spasm वाले मरीजों को ऐसी दवाएं दी जा सकती हैं जो उनकी स्थिति के लिए उपयुक्त न हों, जबकि coronary embolism और SCAD के मामलों में भी कारण के हिसाब से treatment अलग हो सकता है।

इसलिए नई गाइडलाइन का जोर सिर्फ यह पता लगाने पर नहीं है कि हार्ट अटैक हुआ या नहीं, बल्कि यह पता लगाने पर भी है कि हार्ट अटैक आखिर हुआ क्यों।

क्या हर महिला को इन तीन बीमारियों का डर होना चाहिए?

नहीं। यह खबर डर पैदा करने के लिए नहीं है। SCAD, coronary spasm और coronary embolism सभी हार्ट अटैक के संभावित कारण हैं, लेकिन हर महिला को इनका खतरा नहीं होता।

फिर भी महिलाओं के लिए यह जानकारी महत्वपूर्ण है क्योंकि हार्ट अटैक केवल उम्रदराज पुरुषों की बीमारी नहीं है। युवा और मध्यम उम्र की महिलाओं में भी गंभीर cardiac problems हो सकती हैं।

विशेषकर अचानक सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना, कमजोरी, चक्कर, या दर्द का हाथ, पीठ, गर्दन या जबड़े तक जाना जैसे लक्षण हों तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

नई गाइडलाइन को क्यों माना जा रहा है बड़ा बदलाव?

इस नई परिभाषा को चार प्रमुख cardiac organisations ने मिलकर तैयार किया है। ESC के अनुसार यह पहली बार है जब ESC, ACC, AHA और WHF ने मिलकर myocardial infarction की universal definition विकसित की है।

पुरानी numerical classification को हटाकर नई व्यवस्था में बीमारी के underlying cause पर ज्यादा जोर दिया गया है। इससे डॉक्टरों के बीच diagnosis अधिक consistent होने और मरीजों को उनकी बीमारी समझाने में आसानी होने की उम्मीद है।

साथ ही WHO के साथ ICD-11 coding को नई classification के अनुरूप बनाने का काम भी प्रस्तावित किया गया है। इससे भविष्य में SCAD और दूसरे कम पहचाने जाने वाले heart attack mechanisms पर बेहतर global data उपलब्ध हो सकता है।

महिलाओं के लिए सबसे बड़ा संदेश

नई गाइडलाइन का सबसे बड़ा संदेश यही है कि हर हार्ट अटैक एक जैसा नहीं होता।

खासकर महिलाओं में कुछ ऐसे cardiac events हो सकते हैं जिनके पीछे सामान्य cholesterol blockage के बजाय artery की दीवार में tear, अचानक artery spasm या कहीं और बने clot का coronary artery में पहुंचना जिम्मेदार हो सकता है।

नई वैश्विक परिभाषा इन कारणों को ज्यादा स्पष्ट रूप से पहचानने की दिशा में बड़ा कदम है। इससे उम्मीद है कि आने वाले समय में महिलाओं के हार्ट अटैक की जल्दी पहचान होगी, सही जांच हो सकेगी और मरीज को उसके वास्तविक कारण के अनुसार उपचार मिल पाएगा।

हालांकि, किसी भी व्यक्ति में हार्ट अटैक के लक्षण दिखने पर नई गाइडलाइन का इंतजार नहीं करना चाहिए। सीने में अचानक दर्द या दबाव, सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर लक्षण होने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

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