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कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर शरीर में दिखते हैं ये 7 खतरनाक संकेत? 1 गलती पड़ सकती है भारी!



आज के समय में कोलेस्ट्रॉल की समस्या तेजी से आम होती जा रही है। खास बात यह है कि शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने के बावजूद शुरुआत में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। व्यक्ति सामान्य महसूस करता रहता है, लेकिन अंदर ही अंदर धमनियों में बदलाव शुरू हो सकते हैं। यही वजह है कि हाई कोलेस्ट्रॉल को कई बार 'साइलेंट रिस्क' माना जाता है।

खून में खासतौर पर LDL यानी खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर लंबे समय तक अधिक रहने पर यह धमनियों की अंदरूनी दीवारों में जमा होकर प्लाक बना सकता है। समय के साथ धमनियां संकरी और कठोर हो सकती हैं। इस स्थिति को एथेरोस्क्लेरोसिस (Atherosclerosis) कहा जाता है। इससे शरीर के अलग-अलग हिस्सों तक रक्त का प्रवाह प्रभावित हो सकता है और हृदय रोग तथा स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।

लेकिन सवाल यह है कि आखिर शरीर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर क्या होता है और किन संकेतों पर ध्यान देना चाहिए?

1. शुरुआत में कोई खास लक्षण नहीं दिखते

हाई कोलेस्ट्रॉल की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि अधिकतर लोगों में इसके शुरुआती चरण में कोई खास लक्षण नहीं दिखाई देता। न दर्द होता है और न ही ऐसी स्पष्ट परेशानी जिससे व्यक्ति तुरंत समझ सके कि उसका कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है।

इसी कारण केवल शरीर के संकेतों का इंतजार करना सही तरीका नहीं है। नियमित स्वास्थ्य जांच और जरूरत के अनुसार लिपिड प्रोफाइल ब्लड टेस्ट कराना अधिक भरोसेमंद तरीका है।

2. धमनियों में धीरे-धीरे जमा होने लगता है प्लाक

जब LDL कोलेस्ट्रॉल लंबे समय तक बढ़ा रहता है तो यह धमनियों की दीवारों में जमा होकर फैटी प्लाक बना सकता है। धीरे-धीरे प्लाक बढ़ने से धमनियां संकरी और कम लचीली हो सकती हैं।

इस प्रक्रिया का असर अचानक नहीं, बल्कि लंबे समय में दिखाई देता है। यही कारण है कि व्यक्ति को कई वर्षों तक कोई खास परेशानी महसूस नहीं हो सकती।

3. शरीर के अंगों तक रक्त पहुंचने में आ सकती है परेशानी

धमनियों में प्लाक बढ़ने के कारण रक्त के प्रवाह के लिए उपलब्ध जगह कम हो सकती है। इसका असर उस हिस्से पर निर्भर करता है जहां धमनियां प्रभावित हुई हैं।

यदि हृदय की धमनियां प्रभावित होती हैं तो हृदय तक रक्त की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। वहीं दिमाग की रक्त वाहिकाओं में समस्या होने पर स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है। पैरों की धमनियों में रुकावट होने पर चलने के दौरान दर्द जैसी समस्या सामने आ सकती है।

4. दिल से जुड़े संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें

अगर हृदय की धमनियों में प्लाक जमा हो जाए तो कुछ लोगों में शारीरिक मेहनत या व्यायाम के दौरान सीने में दबाव, जकड़न या दर्द महसूस हो सकता है। इसके साथ सांस फूलना या सामान्य काम करने पर असामान्य थकान भी महसूस हो सकती है।

हालांकि, इन लक्षणों का मतलब हमेशा हाई कोलेस्ट्रॉल ही नहीं होता। इनके पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं।

यदि सीने में अचानक तेज दबाव या दर्द हो, सांस लेने में गंभीर परेशानी हो, ठंडा पसीना आए, चक्कर आए या दर्द हाथ, कंधे, पीठ या जबड़े तक फैलने लगे, तो इसे आपात स्थिति मानकर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

5. दिमाग की नसों पर असर बढ़ा सकता है स्ट्रोक का खतरा

धमनियों में रुकावट या प्लाक से जुड़ी समस्या दिमाग तक रक्त की आपूर्ति को प्रभावित कर सकती है। ऐसी स्थिति में स्ट्रोक का खतरा बढ़ सकता है।

स्ट्रोक के दौरान अचानक चेहरे का एक हिस्सा टेढ़ा या झुका हुआ दिखाई देना, एक हाथ या पैर में कमजोरी या सुन्नपन और बोलने या समझने में परेशानी जैसे संकेत सामने आ सकते हैं।

ऐसे लक्षण अचानक दिखाई दें तो इंतजार नहीं करना चाहिए। तुरंत इमरजेंसी मेडिकल सहायता लेना जरूरी है, क्योंकि स्ट्रोक में समय पर इलाज बेहद महत्वपूर्ण होता है।

6. चलते समय पैरों में दर्द भी हो सकता है संकेत

कोलेस्ट्रॉल से जुड़ी धमनियों की बीमारी का असर सिर्फ दिल या दिमाग तक सीमित नहीं रहता। पैरों की धमनियां भी प्रभावित हो सकती हैं।

Peripheral Artery Disease (PAD) में चलने या व्यायाम करने के दौरान पिंडलियों, जांघों या पैरों में दर्द, भारीपन या ऐंठन हो सकती है और आराम करने पर यह परेशानी कम हो सकती है।

ऐसा बार-बार हो तो इसे केवल थकान समझकर नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

7. कुछ लोगों की त्वचा या आंखों के आसपास दिख सकते हैं निशान

बहुत अधिक या आनुवंशिक रूप से बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल के कुछ मामलों में शरीर में कोलेस्ट्रॉल के जमाव के कारण Xanthomas दिखाई दे सकते हैं। ये त्वचा के नीचे या टेंडन के आसपास पीले रंग की गांठ या जमाव के रूप में नजर आ सकते हैं।

इसी तरह आंखों की पलकों के आसपास पीले रंग के जमाव को Xanthelasma कहा जाता है।

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि ऐसे निशान हर हाई कोलेस्ट्रॉल वाले व्यक्ति में दिखाई नहीं देते। इसलिए त्वचा या आंखों के आसपास किसी बदलाव का न होना यह साबित नहीं करता कि कोलेस्ट्रॉल सामान्य है।

क्या आंखों, पैरों या त्वचा में बदलाव ही पहली निशानी हैं?

जरूरी नहीं। यही हाई कोलेस्ट्रॉल की सबसे बड़ी चुनौती है। अधिकांश लोगों में कोई बाहरी संकेत नहीं होता और समस्या का पता जांच के दौरान चलता है।

इसलिए शरीर में किसी खास लक्षण के दिखाई देने का इंतजार करना सही रणनीति नहीं है। यदि डॉक्टर को आपके जोखिम के आधार पर जांच की जरूरत लगती है, तो लिपिड प्रोफाइल कराया जा सकता है। इसमें आमतौर पर कुल कोलेस्ट्रॉल, LDL, HDL और ट्राइग्लिसराइड्स की जांच की जाती है।

किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए?

जिन लोगों की डाइट में संतृप्त वसा और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ ज्यादा हैं, शारीरिक गतिविधि कम है या वजन अधिक है, उन्हें अपने हृदय स्वास्थ्य को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। धूम्रपान, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास भी जोखिम को प्रभावित कर सकता है।

इसके अलावा कुछ लोगों में आनुवंशिक कारणों से LDL का स्तर काफी अधिक हो सकता है। ऐसे मामलों में कम उम्र में भी जांच और चिकित्सकीय सलाह जरूरी हो सकती है।

बचाव के लिए क्या करें?

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने के लिए संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि महत्वपूर्ण हैं। खाने में सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें और फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ शामिल करें। तले-भुने और अत्यधिक संतृप्त वसा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करें।

नियमित व्यायाम करें, वजन को स्वस्थ सीमा में रखने की कोशिश करें और धूम्रपान से बचें। यदि डॉक्टर ने कोलेस्ट्रॉल कम करने की दवा दी है, तो उसे अपनी मर्जी से बंद या कम नहीं करना चाहिए।

सबसे जरूरी बात

हाई कोलेस्ट्रॉल अक्सर बिना आवाज किए बढ़ता है। पैरों में दर्द, आंखों के आसपास पीले निशान या त्वचा पर गांठें कुछ लोगों में दिखाई दे सकती हैं, लेकिन इन्हें हाई कोलेस्ट्रॉल की अनिवार्य निशानी नहीं माना जा सकता।

सबसे भरोसेमंद तरीका समय पर जांच कराना और रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टर से सलाह लेना है। खासकर यदि आपके हृदय रोग के जोखिम कारक हैं, तो केवल लक्षणों का इंतजार करना नुकसानदायक हो सकता है।

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