सुबह उठते ही दिखने वाले ये 5 संकेत कहीं फैटी लिवर का खतरा तो नहीं? चौथे संकेत को बिल्कुल नजरअंदाज न करें!
नई दिल्ली। बदलती लाइफस्टाइल, अनियमित खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी, बढ़ता वजन और शराब का सेवन लिवर की सेहत पर असर डाल सकते हैं। इन्हीं वजहों से फैटी लिवर की समस्या तेजी से चर्चा में है। मेडिकल भाषा में इसके कई मामलों को अब मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टिएटोटिक लिवर डिजीज (MASLD) कहा जाता है। इस स्थिति में लिवर में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है।
सबसे बड़ी परेशानी यह है कि फैटी लिवर को अक्सर ‘साइलेंट’ बीमारी माना जाता है। यानी शुरुआती चरण में व्यक्ति को कोई खास लक्षण महसूस नहीं हो सकता। अमेरिका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज (NIDDK) के मुताबिक, फैटी लिवर से पीड़ित बहुत से लोगों में कोई लक्षण नहीं होते। अगर लक्षण दिखाई दें भी तो थकान या पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में असहजता जैसी सामान्य शिकायतें हो सकती हैं।
भारत में भी यह समस्या चिंता का विषय है। 2022 में प्रकाशित एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में भारत के वयस्कों में नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर डिजीज की अनुमानित संयुक्त व्यापकता करीब 38.6 प्रतिशत पाई गई थी। वहीं दिल्ली में 6,146 लोगों पर किए गए एक बड़े अध्ययन में मेटाबॉलिक एसोसिएटेड फैटी लिवर डिजीज की व्यापकता 56.4 प्रतिशत पाई गई। अलग-अलग अध्ययनों के आंकड़े आबादी और जांच की पद्धति के अनुसार बदल सकते हैं।
इसी वजह से शरीर में होने वाले लगातार बदलावों को नजरअंदाज न करना जरूरी है। सोशल मीडिया पर हेल्थ एक्सपर्ट डॉ. शालिनी सिंह सालुंके ने फैटी लिवर से जुड़े कुछ संभावित संकेतों का जिक्र किया है। हालांकि, यह समझना बेहद जरूरी है कि किसी एक लक्षण को देखकर फैटी लिवर का निदान नहीं किया जा सकता। इसके लिए डॉक्टर की सलाह और जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट तथा इमेजिंग जैसी जांच कराई जाती हैं।
1. सुबह उठते ही थकान और आलस बना रहना
अगर रात में पर्याप्त नींद लेने के बाद भी सुबह उठते ही शरीर में भारीपन, थकान या सुस्ती महसूस होती है, तो इसे लगातार नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लिवर से जुड़ी बीमारियों में थकान एक संभावित शिकायत हो सकती है।
हालांकि, यहां यह समझना जरूरी है कि सुबह की थकान केवल फैटी लिवर की वजह से नहीं होती। नींद पूरी न होना, तनाव, एनीमिया, थायरॉयड की समस्या, डायबिटीज, खराब खानपान या दूसरी कई स्थितियां भी इसके पीछे हो सकती हैं।
इसलिए अगर थकान लंबे समय से बनी हुई है और इसके साथ वजन बढ़ना, पेट के आसपास चर्बी बढ़ना या शुगर जैसी समस्या भी है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
2. सुबह मुंह से तेज बदबू आना
सुबह उठने पर मुंह से बदबू आना बहुत आम समस्या है और इसका सबसे सामान्य संबंध मुंह की सफाई, बैक्टीरिया, मसूड़ों की समस्या या रातभर मुंह सूखने से हो सकता है।
सोशल मीडिया पर इसे फैटी लिवर के संभावित संकेतों में शामिल किया जाता है, लेकिन सिर्फ मुंह की बदबू को देखकर फैटी लिवर का अंदाजा लगाना सही नहीं है। इसके लिए मजबूत चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
अगर बदबू लगातार रहती है, ब्रश करने और ओरल हाइजीन के बावजूद ठीक नहीं होती या इसके साथ मसूड़ों से खून आना, दांतों में दर्द या मुंह सूखना जैसी समस्या है, तो पहले डेंटिस्ट या डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
यानी मुंह की बदबू को फैटी लिवर का पक्का संकेत मानना ठीक नहीं होगा।
3. भूख में बदलाव और पेट के आसपास बढ़ती चर्बी
फैटी लिवर का खतरा उन लोगों में अधिक हो सकता है जिनका वजन बढ़ा हुआ है, कमर का घेरा ज्यादा है, टाइप-2 डायबिटीज है, इंसुलिन रेजिस्टेंस है या ब्लड में ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल का स्तर असामान्य है।
ऐसे में अगर किसी व्यक्ति की शारीरिक गतिविधि बहुत कम है और लगातार पेट के आसपास चर्बी बढ़ रही है, तो उसे अपनी मेटाबॉलिक हेल्थ पर ध्यान देना चाहिए।
भूख कम होना भी लिवर की कुछ बीमारियों में देखा जा सकता है, लेकिन इसे अकेले फैटी लिवर का लक्षण नहीं माना जा सकता। अगर भूख में अचानक और लगातार कमी आई है, बिना कोशिश वजन घट रहा है या खाना खाने के बाद बार-बार मितली और असहजता हो रही है, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
4. पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में भारीपन या असहजता
लिवर शरीर के पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में स्थित होता है। फैटी लिवर से जुड़े कुछ लोगों में इसी हिस्से में हल्का दर्द या असहजता महसूस हो सकती है। NIDDK भी फैटी लिवर में ऊपरी दाहिने पेट में discomfort को संभावित लक्षण के रूप में बताता है।
अगर आपको इस हिस्से में बार-बार भारीपन, दबाव या दर्द महसूस होता है, खासकर अगर यह लगातार बना रहता है, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।
लेकिन यहां भी सावधानी जरूरी है। पेट के दाहिने हिस्से में दर्द केवल लिवर की वजह से नहीं होता। गैस, पित्ताशय, आंतों या दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं भी इसके पीछे हो सकती हैं।
इसलिए दर्द का कारण खुद तय करने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना ज्यादा सुरक्षित तरीका है।
5. ऑयली खाना खाने के बाद पेट फूलना
तला-भुना या बहुत ज्यादा वसायुक्त खाना खाने के बाद पेट फूलना, गैस या भारीपन होना आम समस्या हो सकती है। इसे सीधे फैटी लिवर का लक्षण मानना सही नहीं होगा।
अगर बार-बार ऐसा होता है, तो इसके पीछे पाचन संबंधी समस्या, खाने की आदतें, गैस, फूड इनटॉलरेंस या दूसरी वजहें हो सकती हैं। फैटी लिवर की पुष्टि के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच, ब्लड टेस्ट और इमेजिंग टेस्ट का सहारा लेते हैं।
इसलिए सिर्फ यह देखकर कि ऑयली खाना खाने के बाद पेट फूल रहा है, यह निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए कि लिवर में फैट जमा हो गया है।
फैटी लिवर किन लोगों में ज्यादा हो सकता है?
फैटी लिवर का जोखिम केवल शराब पीने वालों तक सीमित नहीं है। मेटाबॉलिक कारणों से होने वाला फैटी लिवर उन लोगों में भी हो सकता है जो शराब नहीं पीते।
अधिक वजन या मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, इंसुलिन रेजिस्टेंस, हाई ट्राइग्लिसराइड, असामान्य कोलेस्ट्रॉल, मेटाबॉलिक सिंड्रोम और शारीरिक गतिविधि की कमी इसके जोखिम को बढ़ा सकते हैं।
यही वजह है कि केवल शरीर का वजन देखकर भी फैटी लिवर को खारिज नहीं किया जा सकता। कुछ सामान्य वजन वाले लोगों में भी यह समस्या हो सकती है।
पता कैसे चलता है कि लिवर में फैट जमा है?
फैटी लिवर की पहचान केवल लक्षणों से नहीं की जाती। डॉक्टर पहले व्यक्ति की मेडिकल हिस्ट्री, वजन, कमर का घेरा, डायबिटीज और अन्य जोखिम कारकों को देखते हैं। इसके बाद जरूरत के अनुसार लिवर फंक्शन से जुड़े ब्लड टेस्ट और अल्ट्रासाउंड जैसी इमेजिंग जांच कराई जा सकती है। कुछ परिस्थितियों में डॉक्टर अन्य जांचों की सलाह भी दे सकते हैं।
इसलिए सोशल मीडिया पर बताए गए किसी ‘एक मिनट के टेस्ट’ से फैटी लिवर की पुष्टि संभव नहीं है। अगर आपको जोखिम कारक हैं या ऊपर बताए गए लक्षण लगातार बने हुए हैं, तो डॉक्टर से उचित जांच कराना ही सही तरीका है।
लाइफस्टाइल में बदलाव से मिल सकती है मदद
फैटी लिवर से बचाव और इसके प्रबंधन में लाइफस्टाइल की बड़ी भूमिका है। स्वस्थ खानपान, जरूरत के अनुसार वजन कम करना, नियमित शारीरिक गतिविधि और मीठे पेय तथा ज्यादा कैलोरी वाले भोजन को सीमित करना मददगार हो सकता है। NIDDK के अनुसार, स्वस्थ डाइट, हिस्से का ध्यान रखना और स्वस्थ वजन बनाए रखना फैटी लिवर की रोकथाम में मदद कर सकता है।
डाइट में सब्जियां, फल, साबुत अनाज और बेहतर गुणवत्ता वाले वसा स्रोतों को शामिल करना तथा अत्यधिक मीठे पेय और अधिक शुगर वाले खाद्य पदार्थों को कम करना उपयोगी हो सकता है। शराब का सेवन करने वालों को इसे सीमित करने या डॉक्टर की सलाह के अनुसार इससे बचने पर विचार करना चाहिए, क्योंकि शराब लिवर को अतिरिक्त नुकसान पहुंचा सकती है।
फैटी लिवर की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि शुरुआत में अक्सर कोई स्पष्ट संकेत नहीं मिलता। थकान, भूख में बदलाव या पेट के दाहिने हिस्से में असहजता जैसे लक्षण हो सकते हैं, लेकिन इनसे अकेले बीमारी की पुष्टि नहीं होती।
अगर आपका वजन बढ़ रहा है, कमर का घेरा ज्यादा है, डायबिटीज या कोलेस्ट्रॉल की समस्या है, शारीरिक गतिविधि कम है या डॉक्टर ने पहले कभी लिवर से जुड़ी कोई असामान्यता बताई है, तो नियमित स्वास्थ्य जांच को नजरअंदाज न करें।
याद रखें—फैटी लिवर का पता लक्षण देखकर नहीं, बल्कि उचित मेडिकल जांच से चलता है। समय पर पहचान और सही लाइफस्टाइल बदलाव कई मामलों में लिवर की सेहत को बेहतर रखने में मदद कर सकते हैं।
डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। इसमें बताए गए किसी भी लक्षण को फैटी लिवर का पक्का प्रमाण न मानें। लगातार थकान, पेट दर्द, भूख में बदलाव, पीलिया, तेजी से वजन कम होना या अन्य परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करें। अपनी रिपोर्ट और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार जांच व उपचार का निर्णय योग्य चिकित्सक ही कर सकते हैं।

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