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डायबिटीज का खतरा! सिर्फ प्यास और बार-बार पेशाब नहीं, शरीर के ये 8 संकेत भी देते हैं ‘शुगर’ की दस्तक, कहीं आप तो नहीं कर रहे नजरअंदाज?



आज के समय में डायबिटीज यानी शुगर की बीमारी तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल हो चुकी है। यह बीमारी अब केवल उम्रदराज लोगों तक सीमित नहीं रह गई है। बदलती जीवनशैली, खान-पान की खराब आदतें, शारीरिक गतिविधि की कमी, बढ़ता वजन और लंबे समय तक तनाव जैसी कई वजहों के कारण कम उम्र में भी टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बढ़ रहा है। कई मामलों में लोगों को लंबे समय तक यह पता ही नहीं चलता कि उनका ब्लड शुगर सामान्य से ज्यादा है।

डायबिटीज की सबसे बड़ी परेशानी यही है कि इसके शुरुआती लक्षण कई बार इतने सामान्य होते हैं कि लोग उन्हें थकान, ज्यादा काम या मौसम में बदलाव से जोड़कर नजरअंदाज कर देते हैं। कुछ लोगों को बार-बार प्यास लगने और पेशाब आने जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, लेकिन इनके अलावा भी शरीर कई ऐसे संकेत देता है, जिन पर ध्यान देना जरूरी है।

अगर इन संकेतों को समय रहते पहचान लिया जाए और ब्लड शुगर की जांच कराई जाए, तो बीमारी को शुरुआती स्तर पर पहचानने और उसे नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।

आखिर क्या है डायबिटीज?

डायबिटीज एक ऐसी क्रॉनिक बीमारी है, जिसमें शरीर में ब्लड ग्लूकोज यानी रक्त में मौजूद शुगर का स्तर सामान्य से ज्यादा हो जाता है। हमारे शरीर के लिए ग्लूकोज ऊर्जा का महत्वपूर्ण स्रोत है, लेकिन इसे कोशिकाओं तक पहुंचाने और इस्तेमाल कराने में इंसुलिन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

इंसुलिन अग्न्याशय यानी पैंक्रियाज द्वारा बनाया जाने वाला हार्मोन है। टाइप-2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता। इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। समय के साथ पैंक्रियाज पर्याप्त इंसुलिन बनाने में भी सक्षम नहीं रह सकता है। नतीजा यह होता है कि ब्लड में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ती रहती है।

अगर लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित न रहे, तो इसका असर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों पर पड़ सकता है। आंखों, किडनी, नसों और हृदय से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए डायबिटीज को केवल "शुगर बढ़ने" की समस्या समझना सही नहीं है।

बार-बार पेशाब और ज्यादा प्यास लगना

डायबिटीज के सबसे चर्चित लक्षणों में बार-बार पेशाब आना और सामान्य से ज्यादा प्यास लगना शामिल है। जब ब्लड में ग्लूकोज की मात्रा ज्यादा हो जाती है, तो शरीर अतिरिक्त ग्लूकोज को पेशाब के जरिए बाहर निकालने की कोशिश करता है। इससे बार-बार पेशाब लग सकता है और शरीर में पानी की कमी महसूस होने के कारण प्यास भी ज्यादा लग सकती है।

लेकिन समस्या यह है कि हर डायबिटीज मरीज में ये लक्षण शुरुआत से दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है। खासकर टाइप-2 डायबिटीज धीरे-धीरे विकसित हो सकती है और कई लोगों में शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखता।

यही वजह है कि केवल इन दो लक्षणों का इंतजार करना सही नहीं है।

बार-बार भूख लगना भी हो सकता है संकेत

डायबिटीज के दौरान कुछ लोगों को सामान्य से ज्यादा भूख लग सकती है। व्यक्ति खाना खाने के बाद भी जल्दी भूख महसूस कर सकता है।

ऐसा इसलिए हो सकता है क्योंकि शरीर में ग्लूकोज मौजूद होने के बावजूद कोशिकाएं उसका प्रभावी तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पातीं। शरीर को ऊर्जा की जरूरत महसूस होती रहती है और व्यक्ति को बार-बार खाने की इच्छा हो सकती है।

हालांकि ज्यादा भूख लगने के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं। इसलिए सिर्फ इस एक लक्षण के आधार पर डायबिटीज का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।

बिना कोशिश के वजन कम होना

अगर कोई व्यक्ति न तो डाइटिंग कर रहा है और न ही एक्सरसाइज बढ़ाई है, फिर भी उसका वजन लगातार कम हो रहा है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

अनियंत्रित डायबिटीज में शरीर ऊर्जा के लिए दूसरे स्रोतों का इस्तेमाल करना शुरू कर सकता है। इससे कुछ लोगों का वजन बिना किसी स्पष्ट कारण के कम होने लगता है।

अचानक या लगातार वजन कम होना कई दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत भी हो सकता है। इसलिए ऐसा होने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

हर समय थकान और चिड़चिड़ापन

क्या आपको पर्याप्त नींद लेने के बाद भी लगातार थकान महसूस होती है? क्या छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन बढ़ गया है? तो इसे भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

ब्लड ग्लूकोज का सही तरीके से इस्तेमाल न हो पाने के कारण शरीर में ऊर्जा की कमी जैसा महसूस हो सकता है। इसके चलते व्यक्ति को कमजोरी, थकान और सुस्ती महसूस हो सकती है।

हालांकि थकान के पीछे नींद की कमी, तनाव, एनीमिया और कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए लगातार थकान होने पर केवल डायबिटीज ही मान लेना सही नहीं है।

आंखों से धुंधला दिखाई देना

ब्लड शुगर बढ़ने पर आंखों की रोशनी में अस्थायी बदलाव हो सकते हैं। कुछ लोगों को चीजें धुंधली दिखाई देने लगती हैं या फोकस करने में परेशानी हो सकती है।

अगर अचानक नजर धुंधली होने लगे या बार-बार ऐसा हो रहा हो, तो इसे केवल चश्मे की समस्या समझकर टालना नहीं चाहिए। ब्लड शुगर की जांच के साथ डॉक्टर से आंखों की जांच कराने की जरूरत भी हो सकती है।

घाव देर से भरना

डायबिटीज का एक महत्वपूर्ण संकेत यह भी हो सकता है कि चोट या घाव सामान्य समय की तुलना में देर से ठीक हो।

अगर किसी व्यक्ति को बार-बार चोट लगती है और घाव भरने में अपेक्षा से ज्यादा समय लग रहा है, तो ब्लड शुगर की जांच कराना उपयोगी हो सकता है।

खासकर पैरों में होने वाले घावों को डायबिटीज मरीजों को गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर नसों और रक्त संचार को प्रभावित कर सकता है।

बार-बार UTI या यीस्ट इंफेक्शन

कुछ लोगों में बार-बार यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी UTI या यीस्ट इंफेक्शन की समस्या भी देखी जा सकती है। ब्लड शुगर लंबे समय तक ज्यादा रहने पर शरीर में संक्रमण के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं।

अगर किसी व्यक्ति को बार-बार ऐसे संक्रमण हो रहे हैं और उनका कोई स्पष्ट कारण समझ नहीं आ रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेकर ब्लड ग्लूकोज की जांच कराना बेहतर है।

गर्दन और बगल की त्वचा पर काले धब्बे

डायबिटीज या इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़े कुछ लोगों में गर्दन, बगल या शरीर की त्वचा की सिलवटों के आसपास त्वचा मोटी और गहरे रंग की दिखाई दे सकती है।

खासकर गर्दन के पीछे या बगल में कालेपन को कई लोग गंदगी या टैनिंग समझ लेते हैं। लेकिन कुछ मामलों में यह इंसुलिन रेजिस्टेंस से जुड़ा त्वचा परिवर्तन हो सकता है।

ऐसा होने पर डॉक्टर से जांच करवाना जरूरी है, खासकर अगर साथ में वजन बढ़ना या परिवार में डायबिटीज का इतिहास भी हो।

हाथ-पैर में सुन्नपन या झुनझुनी

हाथों या पैरों में बार-बार झुनझुनी, सुन्नपन या जलन महसूस होना भी लंबे समय से बढ़े हुए ब्लड शुगर से जुड़ी नसों की समस्या का संकेत हो सकता है।

इसे सामान्य कमजोरी समझकर लंबे समय तक नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है। अगर यह समस्या लगातार बनी हुई है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

बच्चों और युवाओं में भी बढ़ रहा खतरा

डायबिटीज को केवल बुजुर्गों की बीमारी समझना अब सही नहीं है। बच्चों और युवाओं में भी डायबिटीज के मामले सामने आ रहे हैं। हालांकि बच्चों में डायबिटीज का प्रकार अलग हो सकता है और हर बच्चे में टाइप-2 डायबिटीज नहीं होती।

बच्चों में वजन बढ़ना, शारीरिक गतिविधि कम होना, अस्वास्थ्यकर खान-पान और परिवार में डायबिटीज का इतिहास जैसे कारक टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।

अगर बच्चे में अत्यधिक प्यास, बार-बार पेशाब, असामान्य थकान, वजन में बदलाव या अन्य चिंताजनक लक्षण दिखाई दें, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

डायबिटीज से बचने के लिए क्या करें?

हर तरह की डायबिटीज को रोका नहीं जा सकता, लेकिन टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने के लिए स्वस्थ जीवनशैली महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

इसके लिए भोजन में सब्जियों, दालों, साबुत अनाज और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थों को जगह देना चाहिए। अत्यधिक चीनी, मीठे पेय, पैकेज्ड फूड और बहुत ज्यादा तला-भुना भोजन सीमित करना बेहतर है।

इसके साथ नियमित शारीरिक गतिविधि भी जरूरी है। रोजाना चलना, व्यायाम करना या अपनी क्षमता के अनुसार कोई अन्य शारीरिक गतिविधि वजन और मेटाबॉलिक हेल्थ को बेहतर रखने में मदद कर सकती है।

धूम्रपान से दूरी और शराब का सेवन न करना या इसे सीमित करना भी बेहतर स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित करना भी स्वस्थ जीवनशैली का हिस्सा है।

समय पर जांच सबसे जरूरी

डायबिटीज की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कई लोगों में शुरुआत में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देता। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी की पहचान करना पर्याप्त नहीं है।

अगर परिवार में डायबिटीज का इतिहास है, वजन ज्यादा है, शारीरिक गतिविधि कम है या डॉक्टर ने ब्लड शुगर की जांच की सलाह दी है, तो नियमित जांच कराना जरूरी है।

डायबिटीज के लक्षण केवल बार-बार पेशाब आने और ज्यादा प्यास लगने तक सीमित नहीं हैं। बार-बार भूख लगना, बिना कोशिश वजन कम होना, लगातार थकान, धुंधला दिखाई देना, घाव देर से भरना, बार-बार संक्रमण, गर्दन या बगल की त्वचा का काला पड़ना और हाथ-पैर में झुनझुनी जैसे संकेत भी ध्यान देने लायक हैं।

हालांकि इनमें से कोई भी लक्षण अकेले डायबिटीज की पुष्टि नहीं करता। इन लक्षणों के पीछे कई अन्य कारण भी हो सकते हैं। इसलिए यदि ऐसे बदलाव लगातार दिखाई दे रहे हैं, तो घबराने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेकर उचित ब्लड शुगर जांच कराना सबसे सही कदम है।

डायबिटीज का समय पर पता चलना महत्वपूर्ण है, क्योंकि शुरुआती स्तर पर ब्लड शुगर को नियंत्रित करने के लिए जीवनशैली में बदलाव, नियमित निगरानी और जरूरत पड़ने पर उपचार शुरू किया जा सकता है। स्वस्थ खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाकर टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।

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