डेंगू ने बजाई खतरे की घंटी! सितंबर के सिर्फ 11 दिन में 7 मरीज, हर दो दिन में सामने आ रहा नया केस
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में बारिश के मौसम के बीच डेंगू का खतरा एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। सितंबर के शुरुआती 11 दिनों में ही डेंगू के 7 नए मामलों की पुष्टि हुई है। जिला मलेरिया कार्यालय के आंकड़ों के अनुसार इस महीने अब तक सामने आए मामले पिछले साल सितंबर में दर्ज किए गए मामलों की संख्या से अधिक हैं। स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता की बात यह भी है कि औसतन करीब हर दो दिन में एक नया डेंगू मरीज सामने आ रहा है।
डेंगू के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। बारिश के बाद जगह-जगह जमा पानी मच्छरों के प्रजनन के लिए अनुकूल माहौल तैयार करता है। ऐसे में आने वाले दिनों में डेंगू और दूसरी मच्छरजनित बीमारियों के मामलों में और वृद्धि होने की आशंका जताई जा रही है।
सितंबर में तेजी से बढ़े मामले
भोपाल में सितंबर की शुरुआत से ही डेंगू के मामले सामने आने लगे हैं। जिला मलेरिया कार्यालय के मुताबिक 11 सितंबर तक सात लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी थी। खास बात यह है कि पूरे सितंबर का आंकड़ा अभी सामने आना बाकी है, लेकिन महीने के शुरुआती 11 दिनों में ही पिछले साल सितंबर के आंकड़े को पार कर लिया गया है।
स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए यह स्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मानसून के बाद मच्छरों की संख्या बढ़ने लगती है। जगह-जगह पानी जमा होने और मौसम में नमी रहने के कारण डेंगू फैलाने वाले मच्छरों को पनपने का अवसर मिलता है।
डेंगू का संक्रमण मुख्य रूप से एडीज मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर साफ पानी में भी पनप सकता है और घरों के आसपास रखे कूलर, गमले, टायर, पानी की टंकियों और दूसरे छोटे-बड़े कंटेनरों में जमा पानी इसके लिए प्रजनन स्थल बन सकता है।
हर दो दिन में सामने आ रहा नया मरीज
भोपाल में सितंबर के दौरान डेंगू संक्रमण की रफ्तार ने स्वास्थ्य विभाग का ध्यान खींचा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक करीब हर दो दिन में एक नया मामला सामने आ रहा है। सात मामलों का आंकड़ा भले ही बहुत बड़ा न दिखाई दे, लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए शुरुआती दिनों में लगातार नए मामले मिलना संभावित बढ़ोतरी का संकेत हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार डेंगू के मामलों में शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना नुकसानदायक हो सकता है। तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, कमजोरी, उल्टी या त्वचा पर दाने जैसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
हर तेज बुखार डेंगू नहीं होता, लेकिन बारिश के मौसम में लगातार बुखार रहने पर जांच कराने में देरी नहीं करनी चाहिए।
भोपाल ही नहीं, मध्य प्रदेश में भी निगरानी बढ़ी
डेंगू और मलेरिया सहित मच्छरजनित बीमारियों की स्थिति को देखते हुए मध्य प्रदेश में निगरानी बढ़ाई गई है। हाल ही में राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र की निदेशक डॉ. तनु जैन ने राज्य के कई जिलों का दौरा कर डेंगू और मलेरिया की स्थिति की समीक्षा की। इस दौरान भोपाल, सीहोर और रायसेन में स्वास्थ्य केंद्रों का जायजा लिया गया तथा अन्य जिलों में सामने आए मामलों की भी समीक्षा की गई।
इससे साफ है कि मानसून के बाद मच्छरजनित बीमारियों को लेकर स्वास्थ्य विभाग सतर्क है। डेंगू के साथ-साथ मलेरिया और चिकनगुनिया जैसे संक्रमणों पर भी नजर रखी जा रही है।
घर में जमा पानी बन सकता है सबसे बड़ा खतरा
डेंगू से बचाव के लिए सबसे जरूरी कदम मच्छरों के प्रजनन को रोकना है। इसके लिए घर और आसपास पानी जमा नहीं होने देना चाहिए। कूलर का पानी नियमित रूप से बदलना, पानी की टंकियों को ढककर रखना और गमलों के नीचे जमा पानी को हटाना जरूरी है।
पुराने टायर, टूटे बर्तन, प्लास्टिक के डिब्बे और ऐसी अन्य चीजें जिनमें बारिश का पानी जमा हो सकता है, उन्हें खुले में नहीं छोड़ना चाहिए। छतों और आंगन में भी समय-समय पर जांच करनी चाहिए कि कहीं पानी जमा तो नहीं है।
डेंगू का मच्छर केवल गंदे पानी में ही पैदा होता है, यह धारणा सही नहीं है। एडीज मच्छर साफ और ठहरे हुए पानी में भी पनप सकता है। इसलिए घर में साफ दिखाई देने वाले पानी के छोटे स्रोतों पर भी ध्यान देना जरूरी है।
तेज बुखार को न करें नजरअंदाज
स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सलाह के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति को अचानक तेज बुखार आता है और उसके साथ शरीर में दर्द, सिरदर्द, कमजोरी या अन्य लक्षण दिखाई देते हैं, तो बिना चिकित्सकीय सलाह के दवाएं लेने से बचना चाहिए।
विशेष रूप से लगातार बुखार रहने, अत्यधिक कमजोरी, पेट में तेज दर्द, लगातार उल्टी, खून आने, सांस लेने में परेशानी या असामान्य सुस्ती जैसे गंभीर लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
डेंगू की पुष्टि के लिए चिकित्सक लक्षणों और बीमारी की अवधि के आधार पर उचित जांच की सलाह दे सकते हैं। समय पर जांच और चिकित्सकीय निगरानी से गंभीर स्थिति के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
प्लेटलेट्स को लेकर भी सावधानी जरूरी
डेंगू का नाम सामने आते ही अक्सर लोगों में प्लेटलेट्स को लेकर चिंता बढ़ जाती है। हालांकि केवल प्लेटलेट्स की संख्या को देखकर मरीज की स्थिति का आकलन करना सही नहीं है। डॉक्टर मरीज की पूरी स्थिति, लक्षण, रक्त जांच और अन्य चिकित्सकीय संकेतकों को देखकर उपचार का निर्णय लेते हैं।
इसलिए डेंगू की आशंका होने पर सोशल मीडिया या आसपास के लोगों की सलाह पर खुद से इलाज करने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना ज्यादा सुरक्षित है।
आने वाले दिनों में बढ़ सकती है चुनौती
भोपाल में सितंबर के शुरुआती 11 दिनों में सात डेंगू मामलों का सामने आना स्वास्थ्य विभाग के लिए सतर्क रहने का संकेत है। बारिश के बाद मच्छरों की संख्या और प्रजनन स्थलों में वृद्धि होने पर संक्रमण के मामले आगे भी बढ़ सकते हैं। उपलब्ध ताजा आंकड़ों में सितंबर में करीब हर दो दिन में एक नया मामला सामने आने की बात सामने आई है।
ऐसे में प्रशासन की निगरानी के साथ आम लोगों की भूमिका भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। केवल सरकारी स्तर पर फॉगिंग या दवा छिड़काव से डेंगू पर पूरी तरह नियंत्रण पाना मुश्किल है, जब तक घरों और आसपास मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म नहीं किया जाता।
बारिश के मौसम में सप्ताह में कम से कम एक दिन घर और आसपास की पूरी सफाई कर यह जांचना जरूरी है कि कहीं पानी जमा तो नहीं है। कूलर, गमले, छत, नालियां और पानी की टंकियां विशेष रूप से जांच के दायरे में रखनी चाहिए।
फिलहाल भोपाल में सितंबर के शुरुआती 11 दिनों में सात पुष्ट डेंगू मामलों ने खतरे की घंटी जरूर बजा दी है। आने वाले दिनों में संक्रमण का आंकड़ा किस दिशा में जाता है, यह स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और बारिश के बाद बनने वाली परिस्थितियों पर काफी हद तक निर्भर करेगा। ऐसे में सावधानी, साफ-सफाई और लक्षण दिखने पर समय पर चिकित्सकीय जांच ही डेंगू से बचाव का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है।
नोट: यह खबर उपलब्ध स्वास्थ्य विभागीय आंकड़ों और विशेषज्ञों की सामान्य चिकित्सकीय सलाह पर आधारित है। किसी भी बीमारी के लक्षण होने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।

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