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आसमान में छाए काले बादल और समुद्र में बढ़ा दबाव, 23 सितंबर को सामने आ सकता है बड़ा खतरा



भारत के पूर्वी तट पर मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। बंगाल की खाड़ी में बना दबाव अब और मजबूत हो गया है और भारत मौसम विज्ञान विभाग यानी IMD ने इसके जल्द ही गहरे दबाव (Deep Depression) में बदलने की चेतावनी दी है। मौसम विभाग के मुताबिक यह सिस्टम लगातार पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है और इसके 23 सितंबर की रात से 24 सितंबर की शुरुआती सुबह के बीच उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तट के बीच से गुजरने की संभावना है।

फिलहाल इसे चक्रवाती तूफान कहना जल्दबाजी होगी। हालांकि मौसम विशेषज्ञों के अनुसार परिस्थितियां अनुकूल रहने पर सिस्टम आगे चलकर चक्रवाती तूफान की ताकत हासिल कर सकता है। अगर यह चक्रवाती तूफान के स्तर तक पहुंचता है, तो क्षेत्रीय नामकरण क्रम के अनुसार इसका नाम ‘Arnab’ होगा। यह नाम बांग्लादेश ने दिया है।

बंगाल की खाड़ी में तेजी से बढ़ रहा सिस्टम

IMD के मुताबिक 22 सितंबर 2026 की सुबह 8:30 बजे यह डिप्रेशन पश्चिम-मध्य और उससे सटे उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में करीब 17.9 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 86.0 डिग्री पूर्वी देशांतर के पास स्थित था।

यह सिस्टम पिछले छह घंटे में करीब 18 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पश्चिम दिशा की ओर बढ़ा था। उस समय यह ओडिशा के गोपालपुर से लगभग 200 किलोमीटर दक्षिण-पूर्व, आंध्र प्रदेश के कालिंगपट्टनम से करीब 200 किलोमीटर पूर्व-दक्षिण-पूर्व, पुरी से लगभग 210 किलोमीटर दक्षिण और विशाखापत्तनम से करीब 290 किलोमीटर पूर्व में था।

मौसम विभाग का अनुमान है कि यह आगे पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ते हुए अगले कुछ घंटों में गहरे दबाव में बदल सकता है। इसके बाद सिस्टम के तट की ओर बढ़ने के साथ बारिश और तेज हवाओं का प्रभाव बढ़ने की संभावना है।

23 से 24 सितंबर के बीच तट पार करने का अनुमान

मौसम विभाग ने बताया है कि यह सिस्टम 23 सितंबर की रात से 24 सितंबर की शुरुआती सुबह के बीच उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तट को पार कर सकता है।

IMD के अनुसार इसके तट पार करने का संभावित क्षेत्र विशाखापत्तनम और गोपालपुर के बीच है। फिलहाल इसके गहरे दबाव के रूप में तट पार करने का अनुमान है।

इस दौरान तटीय क्षेत्रों में तेज हवाओं के साथ भारी बारिश हो सकती है। समुद्र की स्थिति भी खराब से बहुत खराब हो सकती है, इसलिए मछुआरों और समुद्र में जाने वाले लोगों के लिए सावधानी बेहद जरूरी हो जाती है।

ओडिशा और आंध्र प्रदेश पर सबसे ज्यादा नजर

इस मौसम प्रणाली का सबसे ज्यादा असर दक्षिण ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में देखने को मिल सकता है।

IMD के तटीय बुलेटिन के अनुसार उत्तर आंध्र प्रदेश के तट पर व्यापक बारिश और गरज-चमक के साथ भारी बारिश की संभावना है। कुछ इलाकों में तेज हवाएं भी चल सकती हैं। विशाखापत्तनम, कालिंगपट्टनम, गंगावरम और आसपास के तटीय क्षेत्रों में समुद्री गतिविधियों को लेकर पहले से सावधानी बरती जा रही है।

ओडिशा के दक्षिणी हिस्सों में भी कई स्थानों पर बारिश और गरज-चमक की संभावना जताई गई है। तटीय इलाकों में समुद्र की स्थिति सामान्य से अधिक खराब हो सकती है।

ओडिशा में स्कूल बंद, प्रशासन अलर्ट

मौसम की गंभीरता को देखते हुए ओडिशा में प्रशासन ने भी तैयारी शुरू कर दी है। राज्य के कुछ जिलों में स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्रों को बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक खुर्दा, गंजाम, जगतसिंहपुर और गजपति जैसे जिलों में अलग-अलग अवधि के लिए शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का फैसला लिया गया है। प्रशासन का उद्देश्य भारी बारिश, जलभराव और संभावित बाढ़ की स्थिति में बच्चों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

ओडिशा सरकार ने आपदा प्रबंधन व्यवस्था को भी मजबूत किया है। रिपोर्टों के अनुसार राज्य में 33 ODRAF टीमों को तैनात या रिजर्व रखा गया है, ताकि जरूरत पड़ने पर राहत और बचाव अभियान तेजी से शुरू किया जा सके।

भारी बारिश से बाढ़ का खतरा

इस सिस्टम की वजह से केवल तटीय इलाकों में ही नहीं, बल्कि अंदरूनी राज्यों में भी बारिश बढ़ सकती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार सिस्टम जब जमीन की ओर बढ़ेगा तो इसकी वजह से आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, ओडिशा और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश का दौर देखने को मिल सकता है।

तेज बारिश के कारण नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ सकता है। निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति पैदा हो सकती है। जिन क्षेत्रों में पहले से बारिश हुई है, वहां अतिरिक्त बारिश होने पर बाढ़ का खतरा और बढ़ सकता है।

स्काईमेट के अनुमान के मुताबिक सिस्टम के जमीन की ओर बढ़ने के बाद बारिश का प्रभाव तेलंगाना और मध्य भारत के कुछ हिस्सों तक पहुंच सकता है। इसके बाद विदर्भ, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश तक बारिश का असर देखने को मिल सकता है।

तेलंगाना और मध्य भारत में भी असर

सिस्टम के तट पार करने के बाद इसके कमजोर होने के बावजूद बारिश का प्रभाव कई राज्यों में जारी रह सकता है। विशेष रूप से तेलंगाना में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है।

इसके अलावा विदर्भ, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और झारखंड के कुछ हिस्सों में भी बारिश बढ़ सकती है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार तक इसका असर पहुंचने की संभावना मौसम विशेषज्ञों ने जताई है।

इस तरह बंगाल की खाड़ी में बना यह सिस्टम केवल समुद्र तट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जमीन के अंदर बढ़ने के साथ मध्य और पूर्वी भारत के कई हिस्सों के मौसम को प्रभावित कर सकता है।

क्या यह चक्रवाती तूफान बनेगा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिस्टम चक्रवाती तूफान में बदलेगा। फिलहाल इसका जवाब निश्चित नहीं है।

स्काईमेट ने पहले अनुमान लगाया था कि सिस्टम में चक्रवाती तूफान बनने की क्षमता हो सकती है। समुद्र की सतह का तापमान, हवा की स्थिति और वातावरण की अन्य परिस्थितियां इसके मजबूत होने के लिए कुछ हद तक अनुकूल बताई गई थीं। हालांकि अंतिम स्थिति सिस्टम की वास्तविक तीव्रता और उसके आसपास के वातावरण पर निर्भर करेगी।

अगर यह सिस्टम Cyclonic Storm की श्रेणी तक पहुंचता है, तो इसका नाम Arnab रखा जाएगा। ‘Arnab’ नाम बांग्लादेश द्वारा दिया गया है और इसका अर्थ बंगाली भाषा में समुद्र से जुड़ा है।

इसलिए फिलहाल ‘Arnab तूफान’ कहना तकनीकी रूप से सही नहीं है। अभी इसे डिप्रेशन और संभावित डीप डिप्रेशन के रूप में देखा जा रहा है।

समुद्र में जाने वालों के लिए चेतावनी

तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए अगले दो दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं। मछुआरों को समुद्र में न जाने की सलाह दी जा रही है और समुद्र में मौजूद लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर लौटने की जरूरत है।

IMD के तटीय बुलेटिन में उत्तर आंध्र प्रदेश के तट पर तेज हवाओं, खराब दृश्यता और समुद्र की स्थिति के खराब होने की चेतावनी दी गई है। कुछ बंदरगाहों पर सावधानी संकेत भी लगाए गए हैं।

भारी बारिश के दौरान लोगों को नदी, नाले और जलभराव वाले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी जाती है। प्रशासन की ओर से जारी स्थानीय निर्देशों का पालन करना भी जरूरी होगा।

अगले 48 घंटे बेहद अहम

बंगाल की खाड़ी में मौजूद यह मौसम प्रणाली फिलहाल तेजी से आगे बढ़ रही है। 22 सितंबर को इसके गहरे दबाव में मजबूत होने की संभावना है और 23 से 24 सितंबर के बीच इसके उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा तट के बीच से गुजरने का अनुमान है।

इस दौरान ओडिशा और आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में भारी बारिश, तेज हवाओं और खराब समुद्री परिस्थितियों का सामना करना पड़ सकता है। इसके बाद सिस्टम के अंदरूनी हिस्सों की ओर बढ़ने पर तेलंगाना और मध्य तथा पूर्वी भारत के कई राज्यों में बारिश का प्रभाव दिखाई दे सकता है।

फिलहाल सबसे जरूरी बात यह है कि लोग अफवाहों पर भरोसा न करें और मौसम विभाग तथा स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों पर ध्यान दें। सिस्टम की दिशा और तीव्रता में बदलाव संभव है, इसलिए अगले कुछ मौसम बुलेटिन इस पूरे घटनाक्रम के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे।

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