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रोज दर्द की गोली खाने वालों सावधान! किडनी को लेकर सामने आया ऐसा खतरा, जानकर चौंक जाएंगे



नई दिल्ली: सिरदर्द हो, कमर में दर्द हो, बदन टूट रहा हो या हल्का बुखार—बहुत से लोग बिना डॉक्टर से सलाह लिए सीधे दर्द की गोली ले लेते हैं। कुछ लोगों के घर में तो ऐसी दवाएं हमेशा मौजूद रहती हैं और दर्द होते ही तुरंत एक टैबलेट खा ली जाती है। शुरुआत में यह आदत बेहद सामान्य लग सकती है, क्योंकि गोली खाने के कुछ समय बाद दर्द कम भी हो जाता है। लेकिन अगर दर्द की दवाओं का इस्तेमाल बार-बार, ज्यादा मात्रा में या लंबे समय तक किया जाए, तो यह शरीर के कुछ महत्वपूर्ण अंगों पर असर डाल सकता है।

खासकर किडनी को लेकर अब एक महत्वपूर्ण चेतावनी सामने आई है। भारत के Central Drugs Standard Control Organization (CDSCO) ने 22 सितंबर 2026 को NSAIDs और एंटीबायोटिक्स के अनुचित इस्तेमाल तथा Chronic Kidney Disease यानी CKD के जोखिम को लेकर एक सर्कुलर जारी किया है।

इस चेतावनी के बाद दर्द की दवाओं के इस्तेमाल को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर कौन-सी दर्द की दवाएं किडनी के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं और किन लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

दर्द की दवा आखिर किडनी को कैसे प्रभावित कर सकती है?

दर्द कम करने वाली दवाओं में NSAIDs यानी Non-Steroidal Anti-Inflammatory Drugs का इस्तेमाल काफी आम है। इनमें ibuprofen, naproxen, diclofenac, indomethacin, celecoxib और meloxicam जैसी दवाएं शामिल हैं। इनमें से कई दवाएं दर्द और सूजन कम करने के लिए इस्तेमाल की जाती हैं।

National Kidney Foundation के अनुसार NSAIDs किडनी में जाने वाले रक्त प्रवाह को कम कर सकती हैं। खासकर ज्यादा मात्रा में या लंबे समय तक इस्तेमाल किए जाने पर इनसे Acute Kidney Injury (AKI) का जोखिम बढ़ सकता है और पहले से मौजूद Chronic Kidney Disease भी बिगड़ सकती है।

यानी समस्या हर बार एक गोली खाने से नहीं होती, बल्कि दवा का प्रकार, मात्रा, इस्तेमाल की अवधि और व्यक्ति की पहले से मौजूद स्वास्थ्य स्थिति महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

सबसे ज्यादा खतरा किन लोगों को हो सकता है?

हर व्यक्ति में दर्द की दवा का जोखिम समान नहीं होता। जिन लोगों को पहले से किडनी की बीमारी है, उन्हें विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है।

National Kidney Foundation के अनुसार CKD वाले लोगों में NSAIDs से बचने की सलाह दी जाती है, खासकर जब kidney function कम हो। इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, हार्ट डिजीज, हार्ट फेलियर या कुछ ब्लड प्रेशर की दवाएं लेने वाले लोगों को भी NSAIDs के इस्तेमाल को लेकर डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।

डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर भी किडनी की बीमारी के महत्वपूर्ण जोखिम कारक हैं। ऐसे लोगों को खुद से बार-बार दर्द की दवा लेना और भी सावधानी से देखना चाहिए।

कौन-कौन सी दर्द की दवाएं NSAIDs में आती हैं?

कई लोगों को यह पता ही नहीं होता कि वे जो दवा ले रहे हैं वह NSAID है या नहीं। इसलिए दवा का नाम और उसमें मौजूद active ingredients जानना जरूरी है।

आम NSAIDs में ibuprofen, naproxen, diclofenac, indomethacin, celecoxib और meloxicam जैसी दवाएं शामिल हैं। कुछ दर्द और सर्दी-जुकाम की दवाओं में भी अलग-अलग ingredients का combination हो सकता है। इसलिए एक साथ कई OTC medicines लेने पर एक ही ingredient की मात्रा अनजाने में ज्यादा हो सकती है।

यही कारण है कि डॉक्टर या फार्मासिस्ट को यह बताना जरूरी है कि आप पहले से कौन-कौन सी दवाएं ले रहे हैं।

क्या हर दर्द की गोली किडनी खराब करती है?

नहीं। यह कहना सही नहीं होगा कि हर दर्द की गोली किडनी को नुकसान पहुंचाती है।

दवा का असर उसके प्रकार, dose, कितने समय तक ली जा रही है और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है। उदाहरण के तौर पर National Kidney Foundation के अनुसार acetaminophen यानी paracetamol सामान्य तौर पर recommended dose में किडनी के लिए NSAIDs की तुलना में सुरक्षित माना जाता है, लेकिन इसे भी डॉक्टर की सलाह और निर्धारित मात्रा के अनुसार ही लेना चाहिए।

खासकर अगर किसी व्यक्ति को liver disease है या वह नियमित रूप से alcohol का सेवन करता है, तो acetaminophen लेने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

इसलिए इंटरनेट या किसी परिचित की सलाह पर अपनी बीमारी के लिए खुद दवा चुनना सही तरीका नहीं है।

दर्द दब रहा है, लेकिन बीमारी का कारण नहीं

दर्द की गोली का एक फायदा यह है कि वह दर्द या सूजन को कम कर सकती है। लेकिन दर्द का कारण हमेशा खत्म नहीं होता।

उदाहरण के लिए लगातार कमर दर्द किसी muscle problem, arthritis, injury या दूसरी स्वास्थ्य समस्या से जुड़ा हो सकता है। लगातार सिरदर्द के पीछे भी कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं।

अगर कोई व्यक्ति रोज दर्द की गोली खाकर दर्द को दबाता रहे लेकिन मूल कारण की जांच न कराए, तो बीमारी की पहचान में देरी हो सकती है। इसलिए बार-बार होने वाले या लंबे समय तक बने रहने वाले दर्द को केवल दवा से दबाने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

किडनी की बीमारी कई बार देर से पता चलती है

किडनी की बीमारी को लेकर सबसे बड़ी परेशानी यह है कि शुरुआती चरणों में कई लोगों में स्पष्ट लक्षण नहीं होते। इसी वजह से कुछ लोग तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं जब kidney function पहले ही प्रभावित हो चुका होता है।

अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या किडनी की बीमारी का जोखिम है, तो नियमित स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

किडनी की कार्यक्षमता का आकलन करने के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार blood और urine tests करा सकते हैं। इनमें kidney function और urine में protein जैसी चीजों की जांच की जा सकती है।

दर्द की दवा कब ज्यादा खतरनाक हो सकती है?

NSAIDs से जुड़े जोखिम खासकर तब बढ़ सकते हैं जब इनका इस्तेमाल उच्च मात्रा में या लंबे समय तक किया जाए। National Kidney Foundation भी ऐसे मामलों में kidney injury और CKD के बिगड़ने के जोखिम की चेतावनी देता है।

इसके अलावा शरीर में पानी की कमी जैसी स्थिति भी जोखिम बढ़ा सकती है। इसलिए बीमारी, उल्टी-दस्त, तेज बुखार या dehydration की स्थिति में बिना डॉक्टर की सलाह NSAIDs लेना विशेष रूप से उचित नहीं माना जाता।

अगर किसी व्यक्ति को पहले से kidney disease है, तो उसे OTC painkiller लेने से पहले डॉक्टर या फार्मासिस्ट से पूछना चाहिए।

एक साथ कई दवाएं लेना भी बन सकता है समस्या

आजकल कई लोग अलग-अलग समस्याओं के लिए अलग-अलग OTC दवाएं लेते हैं। उदाहरण के लिए सिरदर्द के लिए एक गोली और सर्दी-जुकाम के लिए दूसरी दवा।

समस्या तब हो सकती है जब दोनों दवाओं में समान या एक-दूसरे से मिलते-जुलते ingredients मौजूद हों। इससे कुल dose अनजाने में बढ़ सकती है।

इसलिए किसी भी OTC medicine को खरीदने से पहले label पढ़ना जरूरी है। अगर दवा के ingredients समझ में नहीं आ रहे हैं तो डॉक्टर या फार्मासिस्ट से जानकारी लेना बेहतर है।

दर्द की गोली कब न लें?

अगर आपको बार-बार दर्द हो रहा है, दर्द कई दिनों से बना हुआ है या दर्द इतना ज्यादा है कि रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित होने लगी हैं, तो लगातार खुद से painkiller लेते रहने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

इसी तरह अगर आपको पहले से kidney disease, heart disease, high blood pressure या liver disease है, तो painkiller लेने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है। National Kidney Foundation विशेष रूप से CKD वाले लोगों को NSAIDs के इस्तेमाल को लेकर सावधानी बरतने की सलाह देता है।

क्या दर्द के लिए हमेशा दवा ही जरूरी है?

हर स्थिति में नहीं। दर्द के कारण के आधार पर डॉक्टर दवा के साथ या उसके बजाय दूसरे उपाय भी सुझा सकते हैं।

National Kidney Foundation के अनुसार कई तरह के दर्द में stretching, physical therapy, exercise, massage और अन्य non-drug approaches भी उपचार का हिस्सा हो सकते हैं।

हालांकि, कौन-सा तरीका आपके लिए सही है, यह दर्द के कारण और आपकी स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।

सरकार की ताजा चेतावनी को हल्के में न लें

CDSCO की 22 सितंबर 2026 की ताजा circular listing में NSAIDs और antibiotics के indiscriminate use तथा Chronic Kidney Disease से जुड़े जोखिम को स्पष्ट रूप से विषय बनाया गया है।

इसका मतलब यह नहीं है कि डॉक्टर द्वारा बताई गई हर दर्द की दवा बंद कर देनी चाहिए। इसका संदेश मुख्य रूप से दवाओं के अनुचित और अंधाधुंध इस्तेमाल से बचने से जुड़ा है।

अगर डॉक्टर ने आपको कोई दवा लिखी है तो उसे अपनी मर्जी से बंद या बदलने के बजाय डॉक्टर से बात करनी चाहिए।

आपकी छोटी सी आदत बन सकती है बड़ा जोखिम

दर्द होते ही बिना सोचे गोली खाना आज बहुत से लोगों की आदत बन चुकी है। कभी-कभार सही दवा और सही dose में painkiller का इस्तेमाल चिकित्सकीय रूप से जरूरी और सुरक्षित हो सकता है। लेकिन समस्या तब शुरू हो सकती है जब कोई व्यक्ति लगातार दर्द को दबाने के लिए खुद से दवा लेने लगे।

खासकर NSAIDs का लंबे समय तक या ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल किडनी के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

इसलिए अगली बार जब दर्द हो और आप तुरंत दवा लेने के बारे में सोचें, तो पहले यह जरूर देखें कि दर्द का कारण क्या है, आप कौन-सी दवाएं पहले से ले रहे हैं और क्या आपको कोई ऐसी स्वास्थ्य समस्या है जिसमें painkiller का जोखिम बढ़ सकता है।

यह खबर स्वास्थ्य जागरूकता के उद्देश्य से है। दर्द की हर दवा किडनी को नुकसान नहीं पहुंचाती और दवा का जोखिम व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति, दवा के प्रकार, dose और इस्तेमाल की अवधि पर निर्भर करता है। डॉक्टर द्वारा लिखी गई दवा को अपनी मर्जी से बंद न करें। अगर आपको किडनी, लीवर, हृदय, ब्लड प्रेशर या अन्य बीमारी है, या आप नियमित रूप से दर्द की दवा लेते हैं, तो डॉक्टर/फार्मासिस्ट से सलाह लेकर ही दवा का इस्तेमाल करें।

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