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17.29 करोड़ के बाद अब 70 करोड़ का खेल! सहारनपुर में नकली सिक्कों की फैक्ट्री से खुला बड़ा राज



सहारनपुर। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में नकली करेंसी के 17.29 करोड़ रुपये के मामले के बाद पुलिस ने नकली सिक्कों के एक बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश किया है। पुलिस का दावा है कि तीतरों क्षेत्र में चल रही नकली सिक्कों की फैक्ट्री के जरिए अब तक 70 करोड़ रुपये से अधिक के नकली सिक्के बाजार में खपाए जा चुके हैं। इस मामले में पुलिस ने अंतरराज्यीय गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। मौके से बड़ी संख्या में तैयार और अधबने नकली सिक्कों के साथ उन्हें बनाने वाली मशीनें, डाई, हिसाब-किताब के रजिस्टर और अन्य सामान बरामद किया गया है।

इस कार्रवाई को कोतवाली नगर पुलिस, एसओजी, स्वाट और सर्विलांस की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया। पुलिस के मुताबिक, गिरोह तीतरों क्षेत्र में एक ठिकाना बनाकर बड़े स्तर पर नकली सिक्कों का उत्पादन कर रहा था। यहां छह मशीनों के जरिए रोजाना हजारों सिक्के तैयार किए जाते थे। इसके बाद इन्हें अलग-अलग राज्यों और जिलों में एजेंटों के जरिए बाजार में खपाया जाता था।

छह मशीनों से रोज बनते थे 10 से 12 हजार सिक्के

एसएसपी अभिनंदन सिंह ने रविवार को पुलिस लाइन सभागार में पत्रकारों से बातचीत में पूरे नेटवर्क की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि आरोपी छह मशीनों की मदद से रोजाना करीब 10 से 12 हजार नकली सिक्के तैयार करते थे। एक सिक्का तैयार करने में गिरोह का खर्च करीब पांच से छह रुपये आता था। इसके बाद इन्हें एजेंटों को 12 से 15 रुपये में बेच दिया जाता था।

पुलिस के अनुसार, गिरोह ने नकली सिक्कों को बाजार में पहुंचाने के लिए बाकायदा एजेंटों का नेटवर्क तैयार किया था। एजेंट इन सिक्कों को अलग-अलग दुकानों और कारोबारी स्थानों पर कमीशन के जरिए चलाते थे। खास तौर पर शराब के ठेके, टोल प्लाजा और किराना दुकानों को निशाना बनाया जाता था।

गिरोह के लिए शराब के ठेके प्रमुख बाजार बने हुए थे। यहां बड़ी मात्रा में नकदी का लेनदेन होने के कारण नकली सिक्कों को असली मुद्रा के साथ मिलाकर चलाने का मौका मिलता था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क में कितने एजेंट और कारोबारी जुड़े हुए थे।

मौके से 6400 नकली सिक्के बरामद

संयुक्त पुलिस टीम ने कार्रवाई के दौरान फैक्ट्री से 6,400 तैयार नकली सिक्के बरामद किए। इन सिक्कों की कीमत करीब 1.28 लाख रुपये बताई गई है। इसके अलावा करीब पांच लाख रुपये कीमत के अधबने सिक्के भी बरामद किए गए हैं।

पुलिस को मौके से छह मशीनें, सिक्के तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला अन्य सामान और बड़ी संख्या में डाई भी मिली हैं। बरामद सामान से अंदाजा लगाया जा रहा है कि यहां छोटे स्तर पर नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर नकली सिक्कों का उत्पादन किया जा रहा था।

पुलिस ने मौके से 59 डाई, सात हिसाब रजिस्टर और आठ मोबाइल फोन भी कब्जे में लिए हैं। अब इन सामानों की जांच के जरिए गिरोह के पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

मुख्य आरोपी 2001 से कर रहा था यह धंधा

पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य आरोपी उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह, निवासी मोहाली, पंजाब शामिल है। उसके साथ हिमांशु उर्फ गुल्लू, कुलदीप, संतोष चौरसिया उर्फ जनार्धन और अनुराग पाल उर्फ लंकेश को भी गिरफ्तार किया गया है।

पुलिस का कहना है कि मुख्य आरोपी उपकार लूथरा वर्ष 2001 से नकली करेंसी और नकली सिक्कों के कारोबार से जुड़ा हुआ था। इससे पता चलता है कि आरोपी लंबे समय से इस तरह की गतिविधियों में सक्रिय रहा है।

जांच में यह भी सामने आया है कि वर्ष 2017 में दिल्ली पुलिस उसे गिरफ्तार कर चुकी है। उस समय उस पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित था। इसके बावजूद वह कथित तौर पर दोबारा इसी तरह के नेटवर्क में सक्रिय हो गया।

पंजाब से लेकर पश्चिमी यूपी तक फैला नेटवर्क

पूछताछ और शुरुआती जांच में गिरोह के तार कई राज्यों और उत्तर प्रदेश के अलग-अलग जिलों तक जुड़े होने की जानकारी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक, इस नेटवर्क के कनेक्शन पंजाब, बिहार, भदोही, बदायूं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक मिले हैं।

अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि तीतरों की फैक्ट्री में तैयार होने वाले सिक्के किन-किन इलाकों में भेजे जाते थे। इसके लिए आरोपियों के मोबाइल फोन, रजिस्टर और अन्य दस्तावेजों की जांच की जा रही है।

सात हिसाब रजिस्टर पुलिस के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। इनमें उत्पादन, बिक्री, एजेंटों को भुगतान और सिक्कों की सप्लाई से जुड़ी जानकारी मिलने की संभावना है। पुलिस इन रिकॉर्ड के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने की कोशिश कर रही है।

70 करोड़ रुपये से ज्यादा के नकली सिक्के बाजार में खपाने का दावा

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में आरोपियों ने अब तक 70 करोड़ रुपये से अधिक के नकली सिक्के बाजार में चलाने की बात बताई है। अगर जांच में यह दावा सही साबित होता है तो यह नकली सिक्कों से जुड़े बड़े नेटवर्क में से एक हो सकता है।

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि बाजार में चलाए गए इन नकली सिक्कों की कुल संख्या कितनी थी और किन इलाकों में इनकी सबसे ज्यादा सप्लाई हुई। इसके अलावा एजेंटों और सिक्के खपाने वाले लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में है।

17.29 करोड़ की नकली करेंसी के बाद बड़ी कार्रवाई

सहारनपुर में इससे पहले 17.29 करोड़ रुपये की नकली करेंसी से जुड़ा मामला सामने आया था। इसके बाद नकली सिक्कों की फैक्ट्री का खुलासा होने से पुलिस और जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है।

अब यह भी जांच का विषय है कि नकली करेंसी और नकली सिक्कों के दोनों मामलों के बीच किसी तरह का संबंध है या नहीं। फिलहाल पुलिस दोनों मामलों के नेटवर्क, आरोपियों के संपर्क और पैसों के लेनदेन की अलग-अलग स्तर पर जांच कर रही है।

सहारनपुर को बड़ा उत्पादन केंद्र बनाने की थी तैयारी

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने तीतरों क्षेत्र में नकली सिक्कों की मैन्युफैक्चरिंग के लिए नया ठिकाना तैयार किया था। यहां छह मशीनों के जरिए बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू किया जा चुका था। गिरोह की योजना सहारनपुर को नकली सिक्कों के बड़े उत्पादन केंद्र के तौर पर विकसित करने की थी।

मौके से बरामद मशीनें और 59 डाई इस बात की ओर इशारा करती हैं कि गिरोह केवल कुछ सिक्के तैयार करने तक सीमित नहीं था। उत्पादन बढ़ाने के लिए मशीनों और अन्य संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

संपत्तियों की भी होगी जांच

पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों की संपत्तियों और आर्थिक गतिविधियों की भी जांच करेगी। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश करेंगी कि नकली सिक्कों के कारोबार से अर्जित रकम कहां-कहां लगाई गई और आरोपियों ने इस पैसे से कौन-कौन सी संपत्तियां खरीदीं।

एसएसपी अभिनंदन सिंह के अनुसार, पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है और मामले की जांच अभी जारी है। पुलिस बरामद मोबाइल फोन, रजिस्टर, डाई और अन्य दस्तावेजों के आधार पर सप्लाई नेटवर्क की कड़ियां जोड़ रही है।

फिलहाल पुलिस की कार्रवाई के बाद नकली सिक्कों के इस कथित अंतरराज्यीय नेटवर्क को बड़ा झटका लगा है। हालांकि 70 करोड़ रुपये से अधिक के नकली सिक्के बाजार में चलाने का दावा जांच का विषय है। पुलिस अब गिरोह के बाकी सदस्यों, एजेंटों और नकली सिक्कों को बाजार में खपाने वाले लोगों की तलाश में जुटी है। आने वाले दिनों में पूछताछ और दस्तावेजों की जांच से इस नेटवर्क से जुड़े और भी नाम सामने आने की संभावना है।

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