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डेंगू के खिलाफ भारत में खुलने वाला है नया रास्ता! पहली वैक्सीन को मिली मंजूरी, 2027 में क्या बदलेगी तस्वीर?



नई दिल्ली। भारत में डेंगू के खिलाफ लड़ाई को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। देश में पहली बार डेंगू से बचाव के लिए किसी वैक्सीन को आधिकारिक मंजूरी मिल चुकी है। जापानी फार्मास्युटिकल कंपनी Takeda की Qdenga वैक्सीन को भारत के केंद्रीय औषधि नियामक CDSCO ने जुलाई 2026 में मार्केटिंग अथॉराइजेशन दिया था। अब इस वैक्सीन को भारत के निजी बाजार में उपलब्ध कराने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है।

Dr Reddy’s Laboratories और Takeda Pharmaceutical के बीच हुए समझौते के बाद Qdenga को भारत में प्रमोट और वितरित करने की जिम्मेदारी Dr Reddy’s को मिलेगी। कंपनियों के मुताबिक आवश्यक स्थानीय नियामकीय और गुणवत्ता संबंधी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद वैक्सीन 2027 की पहली छमाही में भारत में उपलब्ध हो सकती है।

भारत में पहली डेंगू वैक्सीन को मिली मंजूरी

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, CDSCO ने जुलाई 2026 में Dengue Tetravalent Vaccine (Live, Attenuated) – Qdenga को भारत में डेंगू की रोकथाम के लिए मार्केटिंग अथॉराइजेशन दिया था।

सरकार के अनुसार यह देश में डेंगू की रोकथाम के लिए मंजूर की गई पहली वैक्सीन है। वैक्सीन को गुणवत्ता, सुरक्षा और प्रभावशीलता से जुड़े वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद मंजूरी दी गई। भारत में इसे 4 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों के लिए मंजूरी मिली है।

हालांकि, वैक्सीन को मंजूरी मिलने का मतलब यह नहीं है कि इसे अभी से बाजार में खरीदा जा सकता है। व्यावसायिक उपलब्धता से पहले कई स्थानीय प्रक्रियाओं को पूरा करना जरूरी है।

2027 की पहली छमाही में बाजार में आने की उम्मीद

Dr Reddy’s Laboratories ने 18 सितंबर 2026 को बताया कि उसने Takeda के साथ Qdenga के प्रचार और वितरण के लिए समझौता किया है।

कंपनी के मुताबिक वैक्सीन को भारत में 2027 की पहली छमाही में उपलब्ध कराने की उम्मीद है। हालांकि इसके लिए जरूरी नियामकीय और गुणवत्ता संबंधी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी। इसलिए इसे फिलहाल संभावित समयसीमा के तौर पर देखा जा रहा है, न कि निश्चित लॉन्च डेट के रूप में।

यह शुरुआती उपलब्धता निजी बाजार में होगी। इसका मतलब है कि Qdenga को फिलहाल भारत के सरकारी नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किए जाने की घोषणा नहीं हुई है।

4 से 60 साल तक के लोगों के लिए मंजूरी

भारत में Qdenga को 4 से 60 वर्ष की उम्र के लोगों के लिए मंजूरी दी गई है।

यह जानकारी खास तौर पर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि डेंगू केवल बच्चों की बीमारी नहीं है। बच्चों के अलावा युवा और वयस्क भी डेंगू संक्रमण की चपेट में आते हैं। भारत के कई हिस्सों में मानसून और उसके बाद डेंगू के मामले स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चुनौती बनते हैं।

हालांकि, किसी व्यक्ति को वैक्सीन लगवानी चाहिए या नहीं और उसके लिए यह उपयुक्त है या नहीं, इसका निर्णय उम्र, स्वास्थ्य स्थिति और चिकित्सकीय सलाह को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

Qdenga में कितनी डोज लगती हैं?

Qdenga को दो डोज के रूप में दिया जाता है। Reuters के मुताबिक प्रत्येक डोज 0.5 मिलीलीटर की है और दोनों डोज के बीच लगभग तीन महीने का अंतर रखा जाता है। एक महत्वपूर्ण बात यह है कि इसे व्यक्ति के पहले डेंगू संक्रमण के इतिहास की परवाह किए बिना इस्तेमाल किया जा सकता है, इसलिए वैक्सीनेशन से पहले डेंगू संक्रमण की जांच की आवश्यकता नहीं बताई गई है।

यह पहलू उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है जिन्हें पहले डेंगू हो चुका है और वे भविष्य में संक्रमण के जोखिम को लेकर चिंतित रहते हैं।

डेंगू के चारों सीरोटाइप के खिलाफ वैक्सीन

डेंगू वायरस के चार प्रमुख सीरोटाइप माने जाते हैं—DENV-1, DENV-2, DENV-3 और DENV-4

Qdenga को एक टेट्रावैलेंट डेंगू वैक्सीन के रूप में विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य इन चारों डेंगू वायरस सीरोटाइप के खिलाफ प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया तैयार करना है।

वैक्सीन DENV-2 आधारित प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करती है और इसमें DENV-1, DENV-3 तथा DENV-4 से जुड़े संरचनात्मक घटक शामिल हैं।

यही वजह है कि इसे डेंगू के अलग-अलग वायरस प्रकारों के खिलाफ व्यापक सुरक्षा देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

भारत में क्यों अहम है यह वैक्सीन?

भारत में डेंगू लंबे समय से एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती बना हुआ है। यह बीमारी संक्रमित एडीज मच्छर के काटने से फैलती है और इसके मामले देश के अलग-अलग हिस्सों में सामने आते हैं।

Reuters के मुताबिक WHO ने 2024 में दुनिया भर में डेंगू के रिकॉर्ड 1.44 करोड़ मामले और 11,201 मौतें दर्ज की थीं। इनमें भारत में 2,32,425 मामले और 233 मौतें रिपोर्ट की गई थीं।

ऐसे में भारत में पहली डेंगू वैक्सीन की मंजूरी को बीमारी की रोकथाम के प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

हालांकि, वैक्सीन अकेले डेंगू की समस्या खत्म नहीं कर सकती। मच्छरों की संख्या नियंत्रित करना, घरों के आसपास पानी जमा नहीं होने देना, मच्छरदानी और रिपेलेंट का इस्तेमाल तथा मच्छरों से बचाव के अन्य उपाय भी महत्वपूर्ण रहेंगे।

क्या सरकारी अस्पतालों में मुफ्त लगेगी वैक्सीन?

फिलहाल ऐसा नहीं कहा जा सकता।

Qdenga की भारत में प्रस्तावित शुरुआती उपलब्धता निजी बाजार के जरिए होगी। Takeda ने यह भी कहा है कि भारत के सार्वजनिक टीकाकरण कार्यक्रम में वैक्सीन को शामिल करना एक दीर्घकालिक उद्देश्य है, लेकिन फिलहाल इसे सरकारी नियमित टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।

इसलिए लोगों को फिलहाल यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि 2027 में यह वैक्सीन सरकारी केंद्रों पर मुफ्त उपलब्ध होगी।

कीमत कितनी होगी?

Qdenga की भारत में कीमत को लेकर अभी अंतिम घोषणा नहीं हुई है।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने कहा है कि स्थानीय प्रक्रियाएं पूरी होने से पहले कीमत पर अनुमान लगाना जल्दबाजी होगी। इसलिए फिलहाल वैक्सीन की संभावित कीमत को लेकर सोशल मीडिया या अनौपचारिक स्रोतों से सामने आने वाले आंकड़ों पर भरोसा करना उचित नहीं होगा।

जब कंपनी और संबंधित नियामकीय प्रक्रियाएं पूरी हो जाएंगी, तब कीमत और उपलब्धता से जुड़ी अधिक जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

क्या वैक्सीन लगने के बाद डेंगू से बचाव के दूसरे उपाय जरूरी नहीं होंगे?

ऐसा बिल्कुल नहीं है।

वैक्सीन उपलब्ध होने के बावजूद डेंगू से बचाव के लिए मच्छरों की रोकथाम जरूरी रहेगी। डेंगू फैलाने वाला एडीज मच्छर घरों और आसपास जमा साफ पानी में भी पनप सकता है। इसलिए कूलर, गमले, टायर, बाल्टी, छत या अन्य स्थानों पर पानी जमा होने से रोकना जरूरी है।

इसके अलावा मच्छर के काटने से बचने के लिए पूरी बाजू के कपड़े पहनना और आवश्यकतानुसार मच्छर निरोधक उपायों का इस्तेमाल करना भी महत्वपूर्ण है।

Indian Express की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी की ओर से भी इस बात पर जोर दिया गया है कि वैक्सीनेशन के साथ निगरानी, जागरूकता और मच्छर नियंत्रण जैसे उपाय जारी रहने चाहिए।

वैक्सीन के संभावित सामान्य साइड इफेक्ट क्या हैं?

क्लीनिकल ट्रायल कार्यक्रम में Qdenga से जुड़े कुछ सामान्य प्रतिक्रियाएं रिपोर्ट की गई हैं। इनमें इंजेक्शन वाली जगह पर दर्द या लालिमा, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द और बुखार जैसी प्रतिक्रियाएं शामिल हैं।

हालांकि, हर व्यक्ति में वैक्सीन के बाद प्रतिक्रिया अलग हो सकती है। किसी भी वैक्सीन को लेने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्यकर्मी से सलाह लेना जरूरी है, खासकर यदि व्यक्ति को कोई विशेष स्वास्थ्य समस्या या एलर्जी का इतिहास हो।

डेंगू के खिलाफ भारत की लड़ाई में नया अध्याय

Qdenga की मंजूरी और 2027 में संभावित निजी बाजार उपलब्धता भारत के लिए डेंगू रोकथाम की दिशा में एक नया कदम है। पहली बार देश में डेंगू से बचाव के लिए एक वैक्सीन को नियामकीय मंजूरी मिली है।

अब अगला बड़ा सवाल इसकी वास्तविक बाजार उपलब्धता, कीमत, लोगों तक पहुंच और भविष्य में सरकारी टीकाकरण कार्यक्रम में संभावित शामिल किए जाने से जुड़ा होगा।

फिलहाल इतना स्पष्ट है कि भारत में डेंगू की पहली मंजूर वैक्सीन Qdenga 2027 की पहली छमाही में उपलब्ध हो सकती है, लेकिन इसके लिए जरूरी स्थानीय नियामकीय और गुणवत्ता संबंधी प्रक्रियाएं पूरी होना बाकी हैं।

इस बीच डेंगू से बचाव के पारंपरिक उपायों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। वैक्सीन आने के बाद भी मच्छरों पर नियंत्रण और समय पर चिकित्सा सलाह डेंगू से बचाव की रणनीति का अहम हिस्सा बने रहेंगे।

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