Video : ‘जाको राखे साइयां, मार सके न कोय’—11 दिन तक मलबे में दबी थी सांसें! चौथी मंजिल पर जो मिला, उसे देखकर रेस्क्यू टीम भी रह गई हैरान
नुवाकोट। नेपाल में कुदरत के कहर और लगातार तबाही के बीच एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने राहत और बचाव अभियान में जुटे लोगों के साथ-साथ हर किसी को हैरान कर दिया। नुवाकोट के बेत्रावती इलाके में बाढ़ और मलबे की चपेट में आए एक चार मंजिला मकान की ऊपरी मंजिल से 64 वर्षीय महिला को बचाव अभियान के 11वें दिन जिंदा बाहर निकाल लिया गया। इतने लंबे समय तक मलबे के बीच फंसे रहने के बाद महिला का जीवित मिलना किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है।
बाढ़ की भयावहता ने बेत्रावती क्षेत्र में भारी तबाही मचाई है। पानी के तेज बहाव के साथ आए मलबे ने कई घरों और दूसरी संपत्तियों को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते पूरा इलाका मलबे के ढेर में बदल गया। इसी दौरान एक चार मंजिला मकान भी बुरी तरह प्रभावित हुआ। मकान का बड़ा हिस्सा मलबे और पानी के बीच दब गया था।
हादसे के बाद राहत और बचाव दल लगातार लोगों की तलाश में जुटे हुए थे। मलबे में किसी के दबे होने की आशंका को देखते हुए अभियान चलाया जा रहा था। दिन बीतते गए, लेकिन मलबे के अंदर से किसी के जिंदा होने की उम्मीद लगातार कम होती जा रही थी। ऐसे में 11वें दिन जो हुआ, उसने बचाव दल को भी स्तब्ध कर दिया।
11वें दिन मिली जिंदगी की खबर
बचाव अभियान के दौरान चार मंजिला मकान के ऊपरी हिस्से तक पहुंचने की कोशिश की गई। इसी दौरान वहां से 64 वर्षीय महिला के जीवित होने के संकेत मिले। इसके बाद बचावकर्मियों ने बेहद सावधानी से अभियान शुरू किया।
काफी मशक्कत के बाद महिला को मलबे से बाहर निकाल लिया गया। 11 दिनों तक कठिन परिस्थितियों में फंसी रहने के बावजूद महिला का जिंदा मिलना राहत और बचाव दल के लिए बड़ी सफलता थी। महिला को सुरक्षित बाहर निकालने के बाद उसकी स्थिति का आकलन किया गया और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई गई।
यह घटना इसलिए भी असाधारण है क्योंकि बाढ़ और मलबे जैसी भयावह परिस्थितियों में इतने लंबे समय तक किसी व्यक्ति का जीवित रहना बेहद मुश्किल माना जाता है। चारों तरफ तबाही, मलबे का दबाव और मदद का इंतजार—इन परिस्थितियों के बीच महिला ने जिस तरह जिंदगी की जंग लड़ी, वह अपने आप में प्रेरणादायक है।
जब उम्मीद लगभग खत्म हो चुकी थी, तभी मिली खुशखबरी
प्राकृतिक आपदा के बाद राहत एवं बचाव अभियानों में सबसे बड़ी चुनौती मलबे में फंसे लोगों तक पहुंचना होती है। समय गुजरने के साथ जीवित लोगों को खोज निकालने की संभावना भी कम होती जाती है। ऐसे में 11वें दिन 64 वर्षीय महिला का जिंदा मिलना उन सभी लोगों के लिए उम्मीद की एक बड़ी किरण बनकर सामने आया, जो अपने परिजनों के सुरक्षित लौटने की आस लगाए बैठे हैं।
इस घटना ने एक बार फिर यह दिखाया है कि आपदा के बीच बचाव अभियान को जल्दबाजी में खत्म नहीं किया जा सकता। मलबे के नीचे जिंदगी के निशान कब और कहां मिल जाएं, इसका अनुमान लगाना मुश्किल होता है। यही वजह है कि बचावकर्मी लगातार संभावित स्थानों पर तलाश जारी रखते हैं।
कुदरत के कहर के बीच उम्मीद की किरण
नेपाल के नुवाकोट के बेत्रावती में प्रकृति के कहर के बीच एक चमत्कारिक घटना सामने आई। बाढ़ के मलबे में दबे चार मंज़िला मकान की ऊपरी मंज़िल से 64 वर्षीय महिला को बचाव अभियान के 11वें दिन ज़िंदा बाहर निकाला गया। 🙏
— Naresh Rana 🇮🇳 (@Rana009) September 5, 2026
तभी तो कहते हैं—ईश्वर बार-बार हमारे सामने उदाहरण प्रस्तुत करता है और… pic.twitter.com/cJxVc8EUY6
नेपाल में हाल के दिनों में बाढ़ और भूस्खलन ने कई इलाकों में भारी तबाही मचाई है। तेज बारिश के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ा और कई जगह पानी के तेज बहाव के साथ मलबा बस्तियों तक पहुंच गया। सड़कों, पुलों और मकानों को नुकसान पहुंचा है। कई परिवारों के सामने अपने घर और सामान खोने का दर्द है।
ऐसे माहौल में बेत्रावती से आई यह खबर लोगों के लिए भावुक कर देने वाली है। जहां एक तरफ आपदा ने बड़ी संख्या में लोगों को मुश्किल में डाला, वहीं दूसरी तरफ 11 दिन बाद एक महिला को जिंदा बचाया जाना बताता है कि उम्मीद को आखिरी पल तक नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
बचाव अभियान में शामिल लोगों के लिए भी यह घटना विशेष महत्व रखती है। लगातार कई दिनों तक मलबे में तलाश करना आसान नहीं होता। शारीरिक थकान के साथ यह मानसिक दबाव भी रहता है कि कहीं बहुत देर न हो जाए। इसके बावजूद बचाव दलों ने अपना अभियान जारी रखा और आखिरकार उन्हें सफलता मिली।
जिंदगी और मौत के बीच 11 दिनों का इंतजार
कल्पना कीजिए कि कोई व्यक्ति ऐसी जगह फंसा हो, जहां बाहर निकलने का कोई रास्ता न हो। चारों ओर मलबा हो और मदद की कोई निश्चित उम्मीद दिखाई न दे। ऊपर से यह पता भी न हो कि बचाव दल कब तक वहां पहुंच पाएगा। ऐसी स्थिति में 11 दिन गुजारना अपने आप में असाधारण संघर्ष है।
64 वर्षीय महिला का इस संघर्ष के बाद सुरक्षित बाहर निकलना लोगों को भावुक कर रहा है। यह घटना केवल एक सफल रेस्क्यू ऑपरेशन नहीं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में जीवन की अद्भुत क्षमता का उदाहरण भी बन गई है।
प्रकृति जब अपना विकराल रूप दिखाती है तो इंसान की सारी तैयारियां छोटी पड़ जाती हैं। लेकिन उसी आपदा के बीच कभी-कभी ऐसी घटनाएं सामने आती हैं, जो लोगों को उम्मीद, धैर्य और विश्वास का संदेश देती हैं।
'जाको राखे साइयां, मार सके न कोय'
इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी यही कहावत याद की जा रही है—“जाको राखे साइयां, मार सके न कोय।” बाढ़ के मलबे में 11 दिनों तक फंसे रहने के बाद महिला का जिंदा बचना लोगों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं है।
कई बार जिंदगी और मौत के बीच परिस्थितियां इतनी कठिन हो जाती हैं कि इंसान की उम्मीद टूटने लगती है। लेकिन बेत्रावती की यह घटना बताती है कि जब तक सांस है, तब तक उम्मीद भी है।
यह घटना उन परिवारों के लिए भी संदेश है, जो प्राकृतिक आपदा के बाद अपने लापता परिजनों की तलाश में हैं। किसी भी बचाव अभियान में हर छोटी संभावना महत्वपूर्ण होती है और जब तक पूरी तरह पुष्टि न हो जाए, तब तक उम्मीद छोड़ी नहीं जानी चाहिए।
प्रकृति के इस कहर ने भले ही भारी नुकसान पहुंचाया हो, लेकिन 64 वर्षीय महिला का 11 दिन बाद जिंदा मिलना उसी विनाश के बीच जिंदगी की जीत की कहानी बन गया है।
ईश्वर कभी-कभी ऐसी घटनाओं के जरिए इंसान को यह याद दिलाता है कि मुश्किल से मुश्किल समय में भी उम्मीद का दामन नहीं छोड़ना चाहिए। जिस जिंदगी को बचना होता है, वह मलबे के पहाड़ों के बीच भी अपना रास्ता बना लेती है।
बेत्रावती की 64 वर्षीय महिला की यह कहानी आज सिर्फ एक रेस्क्यू की खबर नहीं है, बल्कि यह विश्वास दिलाने वाली घटना है कि जब सारी उम्मीदें खत्म होती दिखाई दें, तब भी जिंदगी किसी न किसी कोने में सांस ले रही हो सकती है।

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