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दिल दे रहा है खतरे की घंटी और आपको पता भी नहीं! रोज की ये छोटी-सी गलती बढ़ा सकती है हार्ट अटैक का खतरा



नई दिल्ली: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में दिल की सेहत को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है। खराब खान-पान, घंटों बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी, तनाव, धूम्रपान, बढ़ता वजन, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी समस्याएं हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। खास बात यह है कि कई बार व्यक्ति को लंबे समय तक किसी गंभीर परेशानी का एहसास भी नहीं होता।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि हार्ट अटैक का खतरा आखिर कब बढ़ता है? विशेषज्ञों के अनुसार किसी एक आदत को अकेले जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता, लेकिन लगातार निष्क्रिय जीवनशैली, असंतुलित भोजन और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को नजरअंदाज करना दिल के लिए भारी पड़ सकता है।

घंटों बैठे रहना बन सकता है बड़ी समस्या

आज बहुत से लोगों का काम ऐसा है जिसमें उन्हें लगातार कई घंटे कुर्सी पर बैठना पड़ता है। ऑफिस में कंप्यूटर के सामने बैठने के बाद घर पर मोबाइल और टीवी के सामने समय गुजर जाता है।

यानी पूरे दिन शरीर को पर्याप्त गतिविधि नहीं मिल पाती।

शारीरिक निष्क्रियता हृदय रोग के महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में शामिल है। शरीर को नियमित रूप से सक्रिय रखने से हृदय और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को जिम में घंटों पसीना बहाना जरूरी है। अपनी क्षमता के अनुसार पैदल चलना, सीढ़ियां चढ़ना, घर के काम करना और नियमित व्यायाम करना भी शारीरिक गतिविधि बढ़ाने में मदद कर सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि कई लोगों में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते।

व्यक्ति सामान्य महसूस कर सकता है, लेकिन उसका ब्लड प्रेशर लगातार बढ़ा हुआ हो सकता है। लंबे समय तक अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर हृदय और रक्त वाहिकाओं पर दबाव डाल सकता है।

यही वजह है कि केवल लक्षणों के आधार पर यह तय करना सही नहीं है कि ब्लड प्रेशर सामान्य है या नहीं।

समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच कराना और अगर डॉक्टर ने दवा लिखी है तो उसे अपनी मर्जी से बंद न करना बेहद जरूरी है।

बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल भी खतरे की घंटी

कोलेस्ट्रॉल शरीर के लिए जरूरी है, लेकिन इसका असंतुलन समस्या पैदा कर सकता है।

खून में खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक होने पर रक्त वाहिकाओं में प्लाक जमा होने की प्रक्रिया बढ़ सकती है। इससे रक्त प्रवाह प्रभावित होने का खतरा रहता है।

खास बात यह है कि हाई कोलेस्ट्रॉल भी कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के मौजूद रहता है।

इसलिए केवल यह सोचकर निश्चिंत नहीं होना चाहिए कि शरीर बिल्कुल ठीक महसूस कर रहा है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार जरूरी जांच कराना महत्वपूर्ण है।

खाने की छोटी गलती धीरे-धीरे बढ़ा सकती है खतरा

दिल की सेहत में खान-पान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

बहुत ज्यादा नमक, अत्यधिक तला-भुना खाना, ज्यादा प्रोसेस्ड फूड, अत्यधिक चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा का नियमित सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह हो सकता है।

दूसरी तरफ फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, मेवे और संतुलित आहार को प्राथमिकता देना बेहतर विकल्प हो सकता है।

यह भी समझना जरूरी है कि कोई एक सुपरफूड हार्ट अटैक से सुरक्षा की गारंटी नहीं देता। पूरी जीवनशैली का संतुलित होना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

धूम्रपान दिल का बड़ा दुश्मन

अगर कोई व्यक्ति धूम्रपान करता है तो इसे सामान्य आदत मानकर नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।

तंबाकू का सेवन हृदय और रक्त वाहिकाओं पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। धूम्रपान करने वालों में हृदय रोग का जोखिम बढ़ सकता है।

कई लोग यह सोचते हैं कि दिन में सिर्फ एक या दो सिगरेट पीने से कोई खास नुकसान नहीं होगा, लेकिन ऐसी सोच सुरक्षित नहीं मानी जा सकती।

दिल की सेहत के लिए धूम्रपान छोड़ना महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।

डायबिटीज वाले लोगों को विशेष सावधानी

डायबिटीज भी हृदय रोग से जुड़ा महत्वपूर्ण जोखिम कारक है।

लंबे समय तक ब्लड शुगर नियंत्रित न रहने पर शरीर की रक्त वाहिकाओं और दूसरे अंगों पर असर पड़ सकता है।

इसलिए डायबिटीज वाले लोगों को नियमित रूप से ब्लड शुगर की निगरानी करनी चाहिए और डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार और खान-पान की योजना का पालन करना चाहिए।

दवा की मात्रा खुद से बढ़ाना या घटाना उचित नहीं है।

बढ़ता वजन भी दे सकता है खतरे का संकेत

मोटापा और खासकर पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी कई स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी हो सकती है।

बढ़ते वजन के साथ हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। ये सभी स्थितियां मिलकर हृदय स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं।

इसलिए वजन कम करने के लिए अचानक किसी कठोर डाइट या इंटरनेट पर वायरल नुस्खे को अपनाने के बजाय संतुलित भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि पर ध्यान देना बेहतर है।

तनाव और नींद की कमी को भी न करें नजरअंदाज

आजकल तनाव जिंदगी का हिस्सा बन गया है। नौकरी, कारोबार, आर्थिक दबाव, पारिवारिक समस्याएं और लगातार काम का बोझ मानसिक तनाव बढ़ा सकता है।

लंबे समय तक तनाव रहने पर व्यक्ति की जीवनशैली भी खराब हो सकती है। कुछ लोग तनाव में ज्यादा खाना शुरू कर देते हैं, कुछ धूम्रपान या शराब की ओर बढ़ सकते हैं और कुछ शारीरिक गतिविधि पूरी तरह छोड़ देते हैं।

पर्याप्त नींद और तनाव को नियंत्रित करने के तरीके अपनाना इसलिए जरूरी है।

परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताना, घूमना, पढ़ना, योग या अपनी पसंद की गतिविधियां करना तनाव कम करने में मदद कर सकता है।

हार्ट अटैक के संकेत कैसे पहचानें?

हार्ट अटैक हमेशा अचानक तेज सीने के दर्द के रूप में ही सामने आए, यह जरूरी नहीं है।

कुछ संभावित संकेतों में सीने में दबाव, भारीपन या दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना, चक्कर, मतली और बांह, पीठ, गर्दन या जबड़े में असहजता शामिल हो सकती है।

कुछ लोगों में लक्षण हल्के भी हो सकते हैं।

महिलाओं में कभी-कभी असामान्य थकान, सांस फूलना, मतली या पीठ और कंधे में असहजता जैसे लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं।

इसलिए किसी असामान्य लक्षण को केवल गैस, थकान या एसिडिटी मानकर लंबे समय तक इंतजार करना सही नहीं है।

सीने के दर्द को गैस समझना खतरनाक हो सकता है

कई लोग सीने में दर्द होने पर सबसे पहले गैस या एसिडिटी के बारे में सोचते हैं।

हर सीने का दर्द हार्ट अटैक नहीं होता, लेकिन नया, अचानक या असामान्य सीने का दर्द गंभीरता से लेना जरूरी है।

अगर सीने में दबाव या दर्द के साथ सांस फूल रही है, ठंडा पसीना आ रहा है, चक्कर आ रहा है या दर्द शरीर के दूसरे हिस्सों तक जा रहा है तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

ऐसी स्थिति में खुद से इलाज करने या घर पर इंतजार करने के बजाय तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

दिल की सेहत को बेहतर रखने के लिए रोजमर्रा की कुछ आदतों पर ध्यान देना जरूरी है।

नियमित चलें और सक्रिय रहें

लंबे समय तक लगातार बैठने से बचें। बीच-बीच में उठकर कुछ कदम चलें। अपनी क्षमता के अनुसार नियमित पैदल चलना या व्यायाम करना उपयोगी हो सकता है।

वयस्कों के लिए सप्ताह में कम से कम 150 मिनट की मध्यम तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि का लक्ष्य रखा जा सकता है, हालांकि उम्र और स्वास्थ्य की स्थिति के अनुसार व्यायाम का स्तर अलग हो सकता है।

संतुलित खाना खाएं

अपनी प्लेट में सब्जियों, फलों, साबुत अनाज और दालों को पर्याप्त जगह दें।

बहुत ज्यादा नमक, तला-भुना खाना, प्रोसेस्ड फूड और अत्यधिक चीनी से बचने की कोशिश करें।

तंबाकू से दूरी रखें

सिगरेट, बीड़ी और दूसरे तंबाकू उत्पादों से दूरी बनाना हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

नियमित जांच कराएं

ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसे जोखिम कारकों की समय-समय पर जांच कराना उपयोगी हो सकता है, खासकर अगर डॉक्टर ने इसकी सलाह दी हो।

उम्र बढ़ने के साथ सावधानी जरूरी

उम्र बढ़ना हृदय रोग के जोखिम को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है। परिवार में पहले से हृदय रोग का इतिहास भी जोखिम बढ़ा सकता है।

लेकिन उम्र बढ़ने का मतलब यह नहीं कि हार्ट अटैक होना निश्चित है।

कई जोखिम कारक ऐसे हैं जिन पर व्यक्ति अपनी जीवनशैली और चिकित्सा देखभाल के जरिए काम कर सकता है।

यही वजह है कि स्वस्थ आदतें कम उम्र से ही अपनाना फायदेमंद हो सकता है।

हार्ट अटैक का खतरा किसी एक गलती से नहीं, बल्कि कई जोखिम कारकों के लंबे समय तक बने रहने से बढ़ सकता है। घंटों बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी, खराब खान-पान, धूम्रपान, हाई ब्लड प्रेशर, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, मोटापा और लगातार तनाव दिल पर दबाव बढ़ा सकते हैं।

इसलिए दिल को स्वस्थ रखने के लिए किसी चमत्कारी उपाय की जरूरत नहीं, बल्कि रोज की छोटी-छोटी अच्छी आदतों को जीवन का हिस्सा बनाना जरूरी है।

नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, तंबाकू से दूरी, पर्याप्त नींद और स्वास्थ्य संबंधी जरूरी जांच दिल की सेहत के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं।

अगर सीने में दबाव या दर्द, सांस फूलना, ठंडा पसीना, चक्कर, मतली या बांह, पीठ, गर्दन या जबड़े में अचानक असामान्य दर्द जैसे लक्षण दिखाई दें, तो इसे सामान्य गैस या थकान समझकर नजरअंदाज न करें। तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

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