किडनी खराब होने से पहले शरीर देता है ये 5 खामोश संकेत! चौथा वाला दिखे तो तुरंत हो जाएं सावधान
किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। इसका मुख्य काम खून को फिल्टर करना और शरीर में मौजूद अतिरिक्त पानी, नमक तथा अपशिष्ट पदार्थों को पेशाब के जरिए बाहर निकालना है। इसके अलावा किडनी शरीर में पानी और कई जरूरी खनिजों का संतुलन बनाए रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने पर शरीर में धीरे-धीरे कई बदलाव दिखाई देने लगते हैं। सबसे बड़ी समस्या यह है कि किडनी की बीमारी शुरुआती चरण में कई बार स्पष्ट लक्षण नहीं देती। यही कारण है कि लोग छोटी-छोटी परेशानियों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं और बीमारी का पता काफी देर से चलता है।
हालांकि, शरीर में दिखाई देने वाला कोई भी एक लक्षण सीधे किडनी की बीमारी साबित नहीं करता। सूजन, थकान, पेशाब में बदलाव या कमर दर्द के पीछे कई दूसरी वजहें भी हो सकती हैं। इसलिए लगातार या असामान्य लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से जांच और सलाह लेना जरूरी है।
आइए जानते हैं ऐसे 5 संकेत, जिन्हें नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है।
1. पैरों और चेहरे पर बार-बार सूजन
अगर पैरों, टखनों, हाथों या आंखों के आसपास बार-बार सूजन दिखाई देती है, तो इसे सामान्य समझकर छोड़ना सही नहीं है।
किडनी शरीर से अतिरिक्त पानी और नमक को ठीक तरह से बाहर नहीं निकाल पाती तो शरीर में अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा हो सकता है। इसका असर खासतौर पर पैरों और टखनों में सूजन के रूप में दिखाई दे सकता है। कुछ लोगों में सुबह उठने के बाद आंखों के आसपास भी फूला हुआ नजर आ सकता है।
कई बार मोजे उतारने के बाद पैरों पर गहरे निशान दिखाई देते हैं या जूते अचानक पहले की तुलना में ज्यादा टाइट महसूस होने लगते हैं। यह शरीर में तरल पदार्थ जमा होने का संकेत हो सकता है।
हालांकि, शरीर में सूजन सिर्फ किडनी की बीमारी की वजह से नहीं होती। हृदय, लिवर और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी इसके पीछे हो सकती हैं। इसलिए अगर सूजन लगातार बनी रहती है या धीरे-धीरे बढ़ रही है, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
2. पेशाब के रंग और मात्रा में बदलाव
किडनी की सेहत और पेशाब का सीधा संबंध है। इसलिए पेशाब में होने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अगर अचानक बार-बार पेशाब आने लगे, रात में कई बार पेशाब के लिए उठना पड़े या पेशाब की मात्रा में असामान्य बदलाव दिखाई दे, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।
इसी तरह पेशाब में अत्यधिक झाग या बुलबुले दिखाई देना भी ध्यान देने योग्य है। कुछ मामलों में यह पेशाब में प्रोटीन के रिसाव से जुड़ा हो सकता है।
अगर पेशाब का रंग गुलाबी, लाल या गहरे भूरे रंग जैसा दिखाई दे और उसमें खून होने की आशंका हो, तो इसे बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। पेशाब में खून कई अलग-अलग स्वास्थ्य समस्याओं का संकेत हो सकता है और इसकी जांच जरूरी है।
यह भी ध्यान रखें कि पेशाब के रंग में बदलाव हमेशा किडनी की बीमारी का संकेत नहीं होता। पानी की कमी, कुछ खाद्य पदार्थ, दवाएं और संक्रमण भी पेशाब के रंग या गंध को बदल सकते हैं।
लेकिन अगर बदलाव बार-बार हो रहा है या इसके साथ दर्द, जलन, सूजन अथवा खून दिखाई दे रहा है, तो डॉक्टर से संपर्क करना बेहतर है।
3. लगातार थकान और कमजोरी
अगर पर्याप्त नींद लेने के बावजूद लगातार थकान महसूस होती है और रोजमर्रा के काम करने में भी पहले की तुलना में ज्यादा कमजोरी महसूस होने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
किडनी की कार्यक्षमता काफी कम होने पर शरीर में अपशिष्ट पदार्थ जमा हो सकते हैं। इसके अलावा किडनी की बीमारी के साथ कुछ लोगों में खून की कमी यानी एनीमिया की समस्या भी हो सकती है।
इस स्थिति में व्यक्ति को हर समय थकान, कमजोरी, ऊर्जा की कमी और किसी काम में मन न लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ लोगों को ध्यान केंद्रित करने में भी परेशानी महसूस हो सकती है।
हालांकि, थकान एक बहुत सामान्य लक्षण है और इसके पीछे नींद की कमी, तनाव, एनीमिया, थायरॉयड, संक्रमण और कई अन्य कारण हो सकते हैं। इसलिए सिर्फ थकान के आधार पर किडनी की बीमारी का निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा।
लेकिन अगर थकान लंबे समय से बनी हुई है और साथ में सूजन या पेशाब में बदलाव जैसे अन्य लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी हो सकता है।
4. भूख कम लगना और मतली
किडनी की कार्यक्षमता गंभीर रूप से प्रभावित होने पर शरीर से अपशिष्ट पदार्थ पर्याप्त मात्रा में बाहर नहीं निकल पाते। ऐसे में कुछ लोगों को भूख कम लगने, मतली या उल्टी जैसी समस्या हो सकती है।
कई बार व्यक्ति को खाने का मन नहीं करता। मुंह में अजीब स्वाद महसूस हो सकता है और पहले पसंद आने वाला खाना भी अच्छा नहीं लगता।
अगर यह समस्या लंबे समय तक बनी रहे तो कमजोरी और वजन कम होने जैसी परेशानियां भी बढ़ सकती हैं।
हालांकि, भूख कम लगना या मतली केवल किडनी की बीमारी का लक्षण नहीं है। पेट की बीमारी, संक्रमण, दवाओं के दुष्प्रभाव और कई अन्य कारण भी इसके लिए जिम्मेदार हो सकते हैं।
लेकिन अगर भूख में लगातार कमी के साथ सूजन, पेशाब में बदलाव, कमजोरी या बार-बार उल्टी जैसी समस्याएं भी मौजूद हैं, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
5. कमर या शरीर के एक तरफ दर्द
कमर या शरीर के एक तरफ होने वाला दर्द भी कई बार किडनी से जुड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। खासकर अगर दर्द के साथ पेशाब में जलन, बुखार, पेशाब में खून या बार-बार पेशाब आने जैसी समस्याएं भी मौजूद हों तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए।
किडनी स्टोन यानी गुर्दे की पथरी में कमर, पीठ, शरीर के किनारे या पेट के निचले हिस्से में तेज दर्द हो सकता है। कई बार यह दर्द अचानक शुरू होता है और काफी तेज हो सकता है।
वहीं, किडनी संक्रमण की स्थिति में कमर या शरीर के किनारे दर्द के साथ बुखार, ठंड लगना, पेशाब करते समय जलन, बार-बार पेशाब आना और मतली जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
हालांकि, हर कमर दर्द का संबंध किडनी से नहीं होता। मांसपेशियों में खिंचाव, रीढ़ की समस्या और गलत मुद्रा में बैठने से भी कमर दर्द हो सकता है।
इसलिए दर्द के साथ मौजूद दूसरे लक्षणों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
किडनी की बीमारी का पता कैसे चलता है?
किडनी की बीमारी का सबसे बड़ा खतरा यही है कि शुरुआती चरण में कई लोगों को कोई स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होता। ऐसे में केवल शरीर में होने वाले बदलावों के आधार पर बीमारी का पता लगाना मुश्किल हो सकता है।
डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट और यूरिन टेस्ट कराने की सलाह दे सकते हैं। खून की जांच से किडनी की फिल्टर करने की क्षमता का आकलन किया जा सकता है। वहीं, यूरिन टेस्ट से पेशाब में प्रोटीन या अन्य असामान्य चीजों की जांच की जा सकती है।
कुछ लोगों में डॉक्टर अल्ट्रासाउंड या अन्य जांच भी लिख सकते हैं, खासकर जब किडनी स्टोन, संक्रमण या किसी संरचनात्मक समस्या का संदेह हो।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?
जिन लोगों को डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर की समस्या है, उन्हें किडनी की सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर किडनी को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
इसके अलावा परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास होने पर भी डॉक्टर से नियमित स्वास्थ्य जांच के बारे में सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर पेशाब में साफ तौर पर खून दिखाई दे, पेशाब की मात्रा अचानक बहुत कम हो जाए, तेज कमर या साइड दर्द के साथ बुखार हो, लगातार उल्टी हो, शरीर में तेजी से सूजन बढ़ रही हो या सांस लेने में परेशानी महसूस हो, तो चिकित्सा सहायता लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।
जरूरी बात
किडनी की बीमारी को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लक्षणों का इंतजार करना हमेशा सही तरीका नहीं है। शुरुआती किडनी रोग में कई बार कोई खास संकेत नहीं दिखाई देता।
पैरों और चेहरे पर लगातार सूजन, पेशाब में असामान्य बदलाव, लंबे समय से थकान, भूख कम लगना, मतली या कमर और शरीर के एक तरफ दर्द—इनमें से कोई भी लक्षण अकेले किडनी की बीमारी साबित नहीं करता। लेकिन अगर ये समस्याएं बार-बार हो रही हैं, लंबे समय तक बनी हुई हैं या एक साथ कई लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो डॉक्टर से जांच कराना समझदारी है।
किसी भी लक्षण के आधार पर खुद से दवा शुरू न करें और न ही स्वयं किडनी की बीमारी का निष्कर्ष निकालें। सही कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

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