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कम उम्र में हार्ट अटैक क्यों? ये रोजमर्रा की आदतें चुपचाप बिगाड़ रही हैं दिल की सेहत



नई दिल्ली। कभी हार्ट अटैक, हाई ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी बीमारियों को मुख्य रूप से उम्रदराज लोगों की समस्या माना जाता था। लेकिन बदलती जीवनशैली के दौर में कम उम्र में भी हृदय संबंधी जोखिमों को लेकर चिंता बढ़ रही है। युवाओं की दिनचर्या में लंबे समय तक बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी, असंतुलित खान-पान, तंबाकू का सेवन, बढ़ता वजन और लगातार तनाव जैसी आदतें हृदय स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारियां दुनिया में मृत्यु का प्रमुख कारण हैं। इनके प्रमुख व्यवहार संबंधी जोखिमों में अस्वास्थ्यकर भोजन, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू का इस्तेमाल और हानिकारक शराब सेवन शामिल हैं। इन आदतों के कारण हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, कोलेस्ट्रॉल और मोटापे जैसे जोखिम बढ़ सकते हैं, जो आगे चलकर हृदय रोग का खतरा बढ़ाते हैं।

युवाओं के लिए क्यों बढ़ रही चिंता?

आज की जीवनशैली में काम, पढ़ाई और मनोरंजन का बड़ा हिस्सा स्क्रीन के सामने गुजरता है। ऑफिस में घंटों बैठना, घर पहुंचने के बाद मोबाइल या टीवी देखना और नियमित व्यायाम के लिए समय नहीं निकालना धीरे-धीरे शारीरिक सक्रियता को कम कर सकता है।

शारीरिक गतिविधि की कमी केवल वजन बढ़ने तक सीमित नहीं रहती। यह मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस, डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर जैसे जोखिम कारकों से जुड़ी हो सकती है। भारतीय स्वास्थ्य संबंधी दस्तावेजों में भी शारीरिक निष्क्रियता को कोरोनरी हृदय रोग के महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में शामिल किया गया है।

यही वजह है कि कम उम्र में भी दिल की सेहत को लेकर लापरवाही करना उचित नहीं माना जाता। हालांकि किसी व्यक्ति को हृदय रोग होने का जोखिम केवल उसकी उम्र से तय नहीं होता। परिवार का मेडिकल इतिहास, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज, वजन, तंबाकू का सेवन और अन्य स्वास्थ्य परिस्थितियां भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

पहली गलती- घंटों तक बैठे रहना

अगर आपकी दिनचर्या में लगातार कई घंटे बैठकर काम करना शामिल है तो इसे सामान्य मानकर पूरी तरह नजरअंदाज करना ठीक नहीं है। लंबे समय तक निष्क्रिय रहना और पर्याप्त शारीरिक गतिविधि न करना हृदय संबंधी जोखिमों से जुड़ा हुआ है।

कई युवाओं की दिनचर्या सुबह ऑफिस या कॉलेज जाने से शुरू होती है और दिन का अधिकांश समय कुर्सी पर बैठकर बीत जाता है। इसके बाद घर पहुंचकर भी मोबाइल, कंप्यूटर या टीवी के सामने समय गुजरता है।

नियमित शारीरिक गतिविधि हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। WHO भी हृदय रोग के जोखिम को कम करने के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि को महत्वपूर्ण उपायों में शामिल करता है।

दूसरी गलती- फास्ट फूड और अनहेल्दी डाइट

युवाओं में बाहर का खाना, पैकेज्ड फूड, ज्यादा नमक, ज्यादा चीनी और अत्यधिक वसा वाले खाद्य पदार्थों का सेवन आम होता जा रहा है। कभी-कभार ऐसा भोजन करना और रोजाना ऐसी डाइट लेना दो अलग बातें हैं।

WHO के अनुसार अस्वास्थ्यकर आहार, जिसमें जरूरत से ज्यादा नमक, चीनी और वसा शामिल हो, हृदय रोग के जोखिम को बढ़ाने वाले व्यवहार संबंधी कारकों में शामिल है।

लगातार खराब खान-पान का असर वजन, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और ब्लड लिपिड्स पर पड़ सकता है। इसलिए कम उम्र में ही खाने की आदतों पर ध्यान देना लंबे समय में महत्वपूर्ण हो सकता है।

तीसरी गलती- सिगरेट और तंबाकू

धूम्रपान और तंबाकू का सेवन हृदय के लिए गंभीर जोखिम कारकों में शामिल है। कई युवा इसे तनाव कम करने या दोस्तों के साथ सामाजिक आदत के रूप में शुरू करते हैं, लेकिन धीरे-धीरे यह नियमित आदत बन सकती है।

WHO तंबाकू के इस्तेमाल को हृदय रोग और स्ट्रोक के प्रमुख व्यवहार संबंधी जोखिम कारकों में शामिल करता है। तंबाकू छोड़ना हृदय संबंधी जोखिम कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जाता है।

सिर्फ खुद धूम्रपान करने वाला व्यक्ति ही प्रभावित नहीं होता। सेकेंड-हैंड स्मोक यानी दूसरे व्यक्ति के धुएं के संपर्क में आना भी स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है।

चौथी गलती- लगातार तनाव और खराब रूटीन

आज युवाओं में नौकरी, पढ़ाई, आर्थिक दबाव, प्रतियोगिता और निजी जीवन से जुड़ा तनाव आम चर्चा का विषय है। हर तनाव सीधे हार्ट अटैक का कारण है, ऐसा कहना सही नहीं होगा, लेकिन लंबे समय तक खराब जीवनशैली और अन्य जोखिम कारकों के साथ तनाव हृदय स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय बन सकता है।

WHO हृदय रोग के व्यापक जोखिमों में सामाजिक और पर्यावरणीय परिस्थितियों के साथ तनाव तथा आनुवंशिक कारकों का भी उल्लेख करता है।

अगर तनाव के कारण नींद, खान-पान और शारीरिक गतिविधि भी प्रभावित होने लगे तो समस्या और बढ़ सकती है। इसलिए मानसिक तनाव को नजरअंदाज करने के बजाय उसकी वजह और दिनचर्या पर ध्यान देना जरूरी है।

पांचवीं गलती- बढ़ता वजन और पेट की चर्बी

मोटापा और खासकर शरीर में अतिरिक्त वसा कई मेटाबॉलिक समस्याओं से जुड़ी हो सकती है। बढ़ता वजन हाई ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और असामान्य कोलेस्ट्रॉल जैसे जोखिम कारकों के साथ जुड़ सकता है।

WHO के अनुसार अस्वास्थ्यकर भोजन और शारीरिक निष्क्रियता से मोटापा, बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर, ब्लड ग्लूकोज और ब्लड लिपिड्स जैसे जोखिम कारक विकसित हो सकते हैं।

इसलिए सिर्फ वजन कम दिखने को लक्ष्य बनाने के बजाय संपूर्ण स्वास्थ्य पर ध्यान देना जरूरी है।

डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर को न करें नजरअंदाज

कई बार युवाओं को लगता है कि ब्लड प्रेशर या डायबिटीज उम्र बढ़ने के बाद ही होती है। यह सोच जोखिम पैदा कर सकती है। WHO के अनुसार भारत में डायबिटीज का बोझ बड़ा है और डायबिटीज वाले वयस्कों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है।

हाई ब्लड प्रेशर भी हृदय रोग का महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। समस्या यह है कि कई लोगों में हाई ब्लड प्रेशर लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण नहीं देता। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर स्वास्थ्य की स्थिति का अनुमान लगाना सही नहीं है।

कोलेस्ट्रॉल भी कम उम्र में महत्वपूर्ण

कोलेस्ट्रॉल को अक्सर उम्रदराज लोगों की समस्या समझा जाता है, लेकिन युवा वयस्कों में भी असामान्य लिपिड स्तर महत्वपूर्ण हो सकते हैं। 18 से 40 वर्ष की उम्र के युवा वयस्कों में डिस्लिपिडेमिया यानी रक्त में वसा के असामान्य स्तर को लेकर भारतीय हृदय विशेषज्ञों ने भी शुरुआती पहचान और जोखिम मूल्यांकन पर जोर दिया है।

कुछ लोगों में पारिवारिक कारणों से कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है। इसलिए अगर परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास रहा है तो डॉक्टर से उचित जांच और जोखिम मूल्यांकन के बारे में बात करना उपयोगी हो सकता है।

दिल की बीमारी के संकेतों को पहचानना जरूरी

हृदय संबंधी समस्या हमेशा पहले से स्पष्ट संकेत देकर नहीं आती। WHO के अनुसार कई मामलों में रक्त वाहिकाओं से जुड़ी बीमारी के शुरुआती चरण में लक्षण नहीं होते और हार्ट अटैक या स्ट्रोक पहली बड़ी चेतावनी हो सकता है।

सीने में दबाव या दर्द, सांस लेने में परेशानी, अचानक कमजोरी या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई देने पर उन्हें सामान्य थकान मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसे लक्षण होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।

यह भी ध्यान रखना चाहिए कि हर सीने का दर्द हार्ट अटैक नहीं होता और हर व्यक्ति में लक्षण एक जैसे नहीं होते। इसलिए इंटरनेट पर लक्षण देखकर खुद बीमारी तय करने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर है।

रोजमर्रा में क्या बदलाव करें?

दिल की सेहत को बेहतर रखने के लिए किसी एक दिन का बदलाव पर्याप्त नहीं होता। लगातार स्वस्थ आदतों को दिनचर्या का हिस्सा बनाना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

कुछ जरूरी कदम इस प्रकार हैं:

  • नियमित शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या में शामिल करें।

  • लंबे समय तक लगातार बैठने से बचें और बीच-बीच में उठकर चलें।

  • फल, सब्जियों और संतुलित भोजन को प्राथमिकता दें।

  • ज्यादा नमक, चीनी और अत्यधिक वसा वाले भोजन को सीमित करें।

  • धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाएं।

  • शराब का सेवन करते हैं तो उसके नुकसान और जोखिम को समझें।

  • वजन, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल पर नजर रखें।

  • परिवार में कम उम्र में हृदय रोग का इतिहास हो तो डॉक्टर से जोखिम मूल्यांकन पर चर्चा करें।

  • तनाव और नींद की समस्या को लगातार नजरअंदाज न करें।

WHO के मुताबिक तंबाकू छोड़ना, नमक का सेवन कम करना, फल-सब्जियां खाना और नियमित शारीरिक गतिविधि जैसे कदम हृदय रोग के जोखिम को कम करने में मदद कर सकते हैं।

कम उम्र का मतलब पूरी तरह सुरक्षित होना नहीं

कम उम्र निश्चित रूप से कई बीमारियों के जोखिम को प्रभावित करती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि युवा व्यक्ति हृदय संबंधी समस्याओं से पूरी तरह सुरक्षित है। आनुवंशिक कारणों, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, उच्च कोलेस्ट्रॉल, तंबाकू और खराब जीवनशैली जैसे कई कारक कम उम्र में भी जोखिम बढ़ा सकते हैं।

इसलिए सबसे जरूरी बात यह है कि दिल की बीमारी से बचाव को उम्र बढ़ने के बाद शुरू करने वाली चीज न माना जाए। स्वस्थ खान-पान, पर्याप्त शारीरिक गतिविधि, तंबाकू से दूरी और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच जैसी आदतें कम उम्र से ही अपनाना बेहतर है।

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