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न उम्र देखती है, न पहले चेतावनी देती है! युवाओं में तेजी से बढ़ रही इस बीमारी का राज क्या है?



नई दिल्ली। हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन को लंबे समय तक उम्रदराज लोगों की बीमारी माना जाता रहा है, लेकिन बदलती जीवनशैली ने इस सोच को बदल दिया है। आज कम उम्र के लोगों में भी ब्लड प्रेशर बढ़ने का जोखिम चिंता का विषय बन रहा है। लंबे समय तक बैठे रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी, अधिक नमक और प्रोसेस्ड भोजन, बढ़ता वजन, तंबाकू का सेवन, शराब और लगातार तनाव जैसी आदतें हाई ब्लड प्रेशर समेत कई गैर-संचारी बीमारियों के जोखिम को बढ़ा सकती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार भारत में गैर-संचारी बीमारियां कुल मौतों का करीब 63 प्रतिशत हिस्सा हैं और हृदय संबंधी बीमारियां इसका बड़ा हिस्सा हैं।

सबसे बड़ी परेशानी यह है कि हाई ब्लड प्रेशर को कई बार 'साइलेंट किलर' कहा जाता है, क्योंकि शुरुआत में इसके कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई दे सकते। व्यक्ति सामान्य तरीके से काम करता रहता है और उसे पता भी नहीं होता कि उसके शरीर में रक्तचाप लगातार बढ़ा हुआ है। लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड प्रेशर रहने पर हृदय, मस्तिष्क, किडनी और आंखों जैसे महत्वपूर्ण अंगों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

युवाओं में क्यों बढ़ रहा है खतरा?

बदलती दिनचर्या हाई ब्लड प्रेशर के जोखिम को बढ़ाने वाले कई कारकों से जुड़ी हुई है। आज पढ़ाई और नौकरी का बड़ा हिस्सा कंप्यूटर, मोबाइल और अन्य स्क्रीन के सामने बैठकर पूरा होता है। कई लोगों की दिनचर्या में घंटों बैठना, कम चलना और व्यायाम के लिए समय नहीं निकालना सामान्य हो गया है।

इसके साथ ही बाहर का खाना, पैकेज्ड फूड, फास्ट फूड और नमक की अधिक मात्रा वाली चीजों का सेवन भी बढ़ा है। WHO के मुताबिक अस्वास्थ्यकर भोजन और शारीरिक निष्क्रियता से मोटापा, बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और असामान्य ब्लड लिपिड जैसे मेटाबॉलिक जोखिम कारक पैदा हो सकते हैं।

यही कारण है कि कम उम्र में भी ब्लड प्रेशर की जांच और स्वस्थ जीवनशैली को महत्व देना जरूरी हो गया है।

सबसे खतरनाक बात- शुरुआत में पता ही नहीं चलता

हाई ब्लड प्रेशर की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि बहुत से लोगों में शुरुआत में कोई खास लक्षण नहीं होते। व्यक्ति खुद को बिल्कुल स्वस्थ महसूस कर सकता है, लेकिन जांच कराने पर उसका रक्तचाप सामान्य सीमा से अधिक निकल सकता है।

भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के दिशानिर्देशों के अनुसार हाइपरटेंशन अक्सर बिना लक्षण के रह सकता है। जब ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तब सिरदर्द, नाक से खून आना, धड़कन में अनियमितता, नजर में बदलाव, थकान या मितली जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।

इसलिए केवल लक्षणों का इंतजार करना सही तरीका नहीं है। ब्लड प्रेशर की वास्तविक स्थिति जानने के लिए इसकी नियमित जांच जरूरी है।

ये लक्षण दिखें तो सावधान

हालांकि हाई ब्लड प्रेशर हमेशा लक्षण नहीं देता, लेकिन बहुत अधिक बढ़ने पर कुछ संकेत सामने आ सकते हैं। इनमें शामिल हैं—

  • बार-बार या तेज सिरदर्द

  • चक्कर या असामान्य कमजोरी

  • नजर धुंधली होना या देखने में बदलाव

  • असामान्य थकान

  • दिल की धड़कन अनियमित महसूस होना

  • मितली या बेचैनी

  • बहुत अधिक रक्तचाप की स्थिति में अन्य गंभीर लक्षण

इनमें से किसी भी लक्षण को देखकर खुद से यह तय नहीं करना चाहिए कि समस्या हाई ब्लड प्रेशर ही है। इसके लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

नमक की अधिक मात्रा बन सकती है समस्या

युवाओं की डाइट में नमक की मात्रा पर अक्सर ध्यान नहीं दिया जाता। घर के भोजन के अलावा चिप्स, नमकीन, इंस्टेंट नूडल्स, पैकेज्ड स्नैक्स, सॉस और कई अन्य प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के जरिए शरीर में अतिरिक्त सोडियम पहुंच सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ लंबे समय से ज्यादा नमक के सेवन को ब्लड प्रेशर के लिए जोखिम कारक मानते हैं। भारत सरकार के दिशानिर्देश भी हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में नमक का सेवन कम करने को महत्वपूर्ण उपायों में शामिल करते हैं।

इसलिए खाने में ऊपर से अतिरिक्त नमक डालने की आदत के साथ-साथ पैकेज्ड और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की मात्रा पर भी नजर रखना जरूरी है।

घंटों बैठे रहना भी नुकसानदायक

ऑफिस या पढ़ाई के दौरान लगातार कई घंटे बैठे रहना और रोजाना पर्याप्त शारीरिक गतिविधि नहीं करना भी स्वास्थ्य के लिए ठीक नहीं माना जाता। शारीरिक निष्क्रियता हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और अन्य मेटाबॉलिक जोखिमों से जुड़ी है।

WHO के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि गैर-संचारी बीमारियों के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को कठिन या भारी व्यायाम ही करना चाहिए। अपनी उम्र, स्वास्थ्य और क्षमता के अनुसार नियमित चलना-फिरना और शारीरिक गतिविधि बढ़ाना भी उपयोगी हो सकता है।

बढ़ता वजन भी खतरे की घंटी

कम उम्र में तेजी से बढ़ता वजन भी नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। मोटापा और अधिक वजन हाई ब्लड प्रेशर के साथ-साथ ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं।

आज कई युवाओं की दिनचर्या में ज्यादा कैलोरी वाला भोजन और कम शारीरिक गतिविधि शामिल है। इसका परिणाम धीरे-धीरे वजन बढ़ने के रूप में सामने आ सकता है। अगर वजन लगातार बढ़ रहा है तो केवल दिखावट के नजरिए से नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के नजरिए से भी इसे गंभीरता से लेना चाहिए।

तनाव और नींद को भी न करें नजरअंदाज

काम का दबाव, पढ़ाई की चिंता, आर्थिक तनाव, लगातार मोबाइल का इस्तेमाल और अनियमित दिनचर्या युवाओं की नींद को प्रभावित कर सकती है। तनाव और खराब जीवनशैली अक्सर एक-दूसरे को बढ़ावा दे सकते हैं।

अगर कोई व्यक्ति लगातार तनाव में है और इसके कारण उसकी नींद, खान-पान या शारीरिक गतिविधि प्रभावित हो रही है तो अपनी दिनचर्या में बदलाव करना जरूरी है। स्वस्थ नींद, संतुलित भोजन और नियमित शारीरिक गतिविधि समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं।

तंबाकू और शराब से बढ़ सकता है जोखिम

सिगरेट, बीड़ी, गुटखा और अन्य तंबाकू उत्पादों का इस्तेमाल स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। WHO तंबाकू सेवन, शारीरिक निष्क्रियता, अस्वास्थ्यकर आहार और हानिकारक शराब सेवन को गैर-संचारी बीमारियों के प्रमुख व्यवहार संबंधी जोखिम कारकों में शामिल करता है।

कई युवा तनाव या दोस्तों के दबाव में तंबाकू का सेवन शुरू करते हैं और बाद में यह आदत बन जाती है। इसे सामान्य मानना भारी पड़ सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर का असर सिर्फ दिल पर नहीं

लंबे समय तक अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर शरीर के कई महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है। भारत सरकार के दिशानिर्देशों के अनुसार लंबे समय तक नियंत्रित न रहने वाला हाइपरटेंशन हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी फेलियर और आंखों से संबंधित गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है।

इसीलिए ब्लड प्रेशर को केवल एक मशीन पर दिखाई देने वाला नंबर समझना सही नहीं है। यह पूरे शरीर के स्वास्थ्य से जुड़ा महत्वपूर्ण संकेतक है।

ब्लड प्रेशर की जांच कब करानी चाहिए?

ब्लड प्रेशर की जांच तेज और सामान्य तौर पर आसान प्रक्रिया है। WHO के अनुसार नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की जांच कराना महत्वपूर्ण है, क्योंकि हाई ब्लड प्रेशर में कई बार कोई लक्षण नहीं होते।

अगर किसी व्यक्ति का वजन अधिक है, परिवार में हाई ब्लड प्रेशर या हृदय रोग का इतिहास है, वह तंबाकू का सेवन करता है या उसकी जीवनशैली काफी निष्क्रिय है, तो डॉक्टर से व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार जांच की सलाह के बारे में बात करनी चाहिए।

एक बार ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ आने पर खुद से बीमारी तय नहीं करनी चाहिए। डॉक्टर आवश्यकता के अनुसार अलग-अलग दिनों में रक्तचाप की जांच और अन्य परीक्षणों की सलाह दे सकते हैं।

युवाओं को अभी से बदलनी होंगी ये आदतें

हाई ब्लड प्रेशर से बचाव का सबसे महत्वपूर्ण तरीका स्वस्थ जीवनशैली है। रोजमर्रा में छोटे-छोटे बदलाव लंबे समय में बड़ा फायदा दे सकते हैं।

इन आदतों को अपनाना फायदेमंद हो सकता है—

  • नियमित शारीरिक गतिविधि करें।

  • लंबे समय तक लगातार बैठने से बचें।

  • नमक और अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन की मात्रा कम करें।

  • फल, सब्जियां और संतुलित भोजन को प्राथमिकता दें।

  • वजन को स्वस्थ सीमा में रखने की कोशिश करें।

  • तंबाकू से पूरी तरह दूरी बनाएं।

  • शराब का सेवन करते हैं तो उसके स्वास्थ्य जोखिमों को समझें।

  • पर्याप्त और नियमित नींद लेने की कोशिश करें।

  • लंबे समय तक बने रहने वाले तनाव को नजरअंदाज न करें।

  • समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच कराएं।

कम उम्र में लापरवाही पड़ सकती है भारी

यह मान लेना कि हाई ब्लड प्रेशर केवल बुजुर्गों की बीमारी है, युवाओं के लिए खतरनाक सोच साबित हो सकती है। WHO के अनुसार गैर-संचारी बीमारियों के जोखिम कारक सभी उम्र के लोगों को प्रभावित कर सकते हैं और अस्वास्थ्यकर खान-पान, शारीरिक निष्क्रियता, तंबाकू और अन्य जोखिम समय के साथ गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में बदल सकते हैं।

सबसे जरूरी बात यह है कि बीमारी के लक्षण आने का इंतजार न किया जाए। खासकर हाई ब्लड प्रेशर जैसी स्थिति में नियमित जांच ज्यादा महत्वपूर्ण है, क्योंकि व्यक्ति पूरी तरह सामान्य महसूस करते हुए भी इसके साथ जी रहा हो सकता है।

निष्कर्ष यही है कि कम उम्र में स्वस्थ दिखना और वास्तव में स्वस्थ होना एक ही बात नहीं है। अगर दिनचर्या में लगातार तनाव, कम शारीरिक गतिविधि, असंतुलित भोजन, बढ़ता वजन या तंबाकू जैसी आदतें शामिल हैं तो अभी से बदलाव करना बेहतर है। समय पर जांच, सही खान-पान और स्वस्थ जीवनशैली भविष्य में गंभीर बीमारियों के जोखिम को कम करने में मदद कर सकती है।

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