जिसे समझा सिर्फ थकान, निकला लिवर का खतरनाक राज! ये 8 संकेत दिखें तो संभल जाएं, वरना देर हो सकती है
लिवर हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह शरीर में कई जरूरी काम करता है, जिनमें पोषक तत्वों के इस्तेमाल, शरीर से हानिकारक पदार्थों को प्रोसेस करने और कई महत्वपूर्ण प्रोटीन बनाने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। लेकिन जब लिवर को लंबे समय तक बार-बार नुकसान पहुंचता है तो स्वस्थ लिवर टिश्यू की जगह धीरे-धीरे स्कार टिश्यू बनने लगते हैं। इसी गंभीर स्थिति को लिवर सिरोसिस कहा जाता है। सिरोसिस बढ़ने पर लिवर की सामान्य कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है और गंभीर स्थिति में लिवर फेलियर तक हो सकता है।
लिवर सिरोसिस की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती दौर में कई लोगों को इसके स्पष्ट लक्षण महसूस नहीं होते। कई बार व्यक्ति थकान, कमजोरी या भूख कम लगने जैसी सामान्य परेशानियों को नजरअंदाज कर देता है। जब तक बीमारी के गंभीर संकेत सामने आते हैं, तब तक लिवर को काफी नुकसान हो चुका हो सकता है।
यही वजह है कि लिवर से जुड़े संकेतों को समझना और जोखिम होने पर समय रहते डॉक्टर से जांच कराना बेहद महत्वपूर्ण है।
आखिर क्या होता है लिवर सिरोसिस?
लिवर सिरोसिस कोई अचानक होने वाली बीमारी नहीं है। यह आमतौर पर लंबे समय तक चलने वाली लिवर की क्षति का परिणाम होता है। बार-बार चोट या सूजन के कारण लिवर में फाइब्रोसिस यानी स्कारिंग बढ़ सकती है। धीरे-धीरे स्वस्थ कोशिकाओं की जगह यह क्षतिग्रस्त और कठोर टिश्यू ले सकता है।
इससे लिवर की संरचना और उसमें रक्त के प्रवाह पर भी असर पड़ सकता है। बीमारी बढ़ने पर शरीर में कई तरह की जटिलताएं दिखाई दे सकती हैं।
लिवर सिरोसिस के पीछे कई कारण हो सकते हैं। इनमें लंबे समय तक अत्यधिक शराब का सेवन, क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी या सी संक्रमण और फैटी लिवर से जुड़ी बीमारी प्रमुख कारणों में शामिल हैं। इसके अलावा कुछ ऑटोइम्यून बीमारियां, पित्त नलिकाओं से जुड़ी समस्याएं और कुछ आनुवंशिक बीमारियां भी सिरोसिस का कारण बन सकती हैं।
सिर्फ थकान समझकर न टालें
लिवर सिरोसिस की शुरुआती समस्या यह है कि इसके लक्षण बेहद सामान्य लग सकते हैं। लगातार थकान और कमजोरी को अक्सर लोग काम का दबाव, नींद की कमी या तनाव से जोड़ देते हैं। लेकिन अगर थकान लगातार बनी हुई है और इसके साथ अन्य लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
विशेषज्ञ स्रोतों के अनुसार सिरोसिस के शुरुआती लक्षणों में थकान या कमजोरी, भूख कम लगना, बिना कोशिश वजन कम होना, जी मिचलाना और उल्टी जैसी समस्याएं शामिल हो सकती हैं। कुछ लोगों में त्वचा में खुजली या पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में असहजता भी हो सकती है।
पेट और पैरों में सूजन भी हो सकती है संकेत
अगर किसी व्यक्ति के पेट में असामान्य रूप से सूजन दिखाई देने लगे या पैरों, टखनों और पंजों में सूजन रहने लगे तो इसके कई कारण हो सकते हैं। लिवर सिरोसिस में शरीर में तरल पदार्थ जमा होने की वजह से पेट में पानी भरने यानी असाइटिस और पैरों में सूजन की समस्या हो सकती है।
ऐसी स्थिति को केवल गैस, मोटापा या सामान्य सूजन समझकर लंबे समय तक टालना सही नहीं है। खासकर यदि व्यक्ति को पहले से फैटी लिवर, हेपेटाइटिस या शराब के सेवन से जुड़ी लिवर की समस्या है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
आंखों और त्वचा का पीला पड़ना
लिवर की गंभीर समस्या का एक जाना-पहचाना संकेत पीलिया भी हो सकता है। इसमें आंखों के सफेद हिस्से और त्वचा पर पीला रंग दिखाई दे सकता है। पेशाब का रंग भी गहरा हो सकता है। सिरोसिस के बढ़ने पर ऐसे संकेत सामने आ सकते हैं।
यदि किसी व्यक्ति की आंखें या त्वचा अचानक पीली दिखाई देने लगे, तो इसे घरेलू उपायों से ठीक करने की कोशिश करने के बजाय चिकित्सकीय जांच कराना चाहिए।
भूख कम लगना और वजन घटना
लगातार भूख न लगना और बिना किसी स्पष्ट कारण के वजन कम होना भी लिवर की बीमारी से जुड़े संभावित संकेतों में शामिल हो सकता है। कई बार व्यक्ति इसे तनाव या पाचन की सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज कर देता है।
लेकिन अगर वजन लगातार कम हो रहा है, कमजोरी बढ़ रही है और खाने की इच्छा भी कम हो गई है, तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।
खून की उल्टी आए तो तुरंत अस्पताल जाएं
लिवर सिरोसिस की गंभीर जटिलताओं में आंतरिक रक्तस्राव भी शामिल हो सकता है। सिरोसिस के कारण पोर्टल हाइपरटेंशन विकसित होने पर भोजन नली या पेट की कुछ नसें असामान्य रूप से फैल सकती हैं। इन्हें वैरिसेज कहा जाता है और इनके फटने पर गंभीर रक्तस्राव हो सकता है।
खून की उल्टी या काला अथवा खून मिला मल जैसी स्थिति को मेडिकल इमरजेंसी माना जाना चाहिए। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत अस्पताल जाना चाहिए।
बेहोशी, भ्रम और याददाश्त में बदलाव भी गंभीर संकेत
सिरोसिस बढ़ने पर कुछ मरीजों में लिवर से संबंधित एन्सेफैलोपैथी जैसी जटिलता हो सकती है। इसमें व्यक्ति को भ्रम, सोचने में परेशानी, याददाश्त में बदलाव, व्यवहार में परिवर्तन या नींद से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
अगर किसी लिवर मरीज के व्यवहार या मानसिक स्थिति में अचानक बदलाव आता है, तो इसे सामान्य थकान या कमजोरी मानकर छोड़ना खतरनाक हो सकता है।
लिवर सिरोसिस की जांच कैसे होती है?
सिरोसिस की जांच केवल लक्षण देखकर नहीं की जाती। डॉक्टर मरीज की मेडिकल हिस्ट्री, शारीरिक जांच और विभिन्न टेस्ट के आधार पर स्थिति का आकलन करते हैं।
खून की जांच से लिवर की स्थिति, संक्रमण और बीमारी की गंभीरता से जुड़े संकेत मिल सकते हैं। इसके अलावा अल्ट्रासाउंड जैसे इमेजिंग टेस्ट और जरूरत के अनुसार अन्य जांचों का इस्तेमाल किया जा सकता है। कुछ जांचें लिवर की कठोरता और संरचना के बारे में भी जानकारी देती हैं।
इसलिए केवल यह सोचकर जांच टालना ठीक नहीं है कि कोई बड़ा लक्षण नहीं है। जिन लोगों में सिरोसिस का जोखिम अधिक है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर जांच करानी चाहिए।
क्या लिवर सिरोसिस का इलाज संभव है?
सिरोसिस में बन चुके स्कार टिश्यू को सामान्य लिवर टिश्यू में बदलने का कोई सामान्य इलाज नहीं है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि सिरोसिस का पता चलने के बाद कुछ किया ही नहीं जा सकता।
बीमारी के मूल कारण का इलाज करने से लिवर को आगे होने वाले नुकसान को धीमा किया जा सकता है। उदाहरण के लिए क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी और सी के लिए चिकित्सकीय उपचार उपलब्ध हैं। शराब से संबंधित लिवर बीमारी में शराब पूरी तरह बंद करना महत्वपूर्ण होता है। फैटी लिवर से जुड़ी स्थिति में डॉक्टर वजन, खान-पान और शारीरिक गतिविधि पर काम करने की सलाह दे सकते हैं।
साथ ही सिरोसिस से होने वाली जटिलताओं के लिए अलग-अलग दवाएं और उपचार उपलब्ध हैं। इसलिए बीमारी का पता लगने पर नियमित मेडिकल फॉलोअप जरूरी है।
गंभीर स्थिति में कब पड़ सकती है ट्रांसप्लांट की जरूरत?
लिवर सिरोसिस की हर स्थिति में ट्रांसप्लांट की जरूरत नहीं होती। लेकिन जब सिरोसिस बढ़कर लिवर फेलियर तक पहुंच जाता है और दूसरे उपचार पर्याप्त नहीं रहते, तब डॉक्टर लिवर ट्रांसप्लांट पर विचार कर सकते हैं।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सिरोसिस का पता चलते ही ट्रांसप्लांट ही एकमात्र रास्ता है। बीमारी की अवस्था, कारण और लिवर की कार्यक्षमता के आधार पर डॉक्टर उपचार की रणनीति तय करते हैं।
सिरोसिस से बचने के लिए क्या करें?
लिवर सिरोसिस के सभी मामलों को रोका नहीं जा सकता, लेकिन कई जोखिमों को कम किया जा सकता है। शराब का सेवन करने वाले लोगों के लिए शराब से दूरी बनाना महत्वपूर्ण है। वजन को स्वस्थ सीमा में रखना, संतुलित भोजन करना और नियमित शारीरिक गतिविधि भी लिवर की सेहत के लिए उपयोगी है।
हेपेटाइटिस बी से बचाव के लिए टीका उपलब्ध है। WHO के अनुसार हेपेटाइटिस बी संक्रमण को वैक्सीनेशन से रोका जा सकता है। क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण लंबे समय में सिरोसिस तथा लिवर कैंसर का जोखिम बढ़ा सकते हैं, इसलिए जरूरत के अनुसार इनकी जांच और उपचार भी महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा डॉक्टर की सलाह के बिना दवाएं, दर्द की कुछ दवाएं या हर्बल सप्लीमेंट लेने से बचना चाहिए, क्योंकि कुछ पदार्थ लिवर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें?
अगर लगातार थकान, भूख कम लगना, बिना वजह वजन घटना, पेट या पैरों में सूजन, आंखों या त्वचा का पीला पड़ना जैसे लक्षण बने हुए हैं तो डॉक्टर से जांच कराना चाहिए। वहीं खून की उल्टी, काला या खूनी मल, अचानक भ्रम या चेतना में बदलाव जैसी स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
लिवर सिरोसिस लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षणों के भी बढ़ सकता है। इसलिए लगातार थकान या शरीर में हो रहे असामान्य बदलावों को केवल सामान्य कमजोरी मानकर टालना उचित नहीं है। समय पर जांच, बीमारी के मूल कारण का इलाज, शराब से दूरी और डॉक्टर की नियमित निगरानी लिवर को आगे होने वाले नुकसान से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। इसमें दी गई जानकारी किसी व्यक्ति के लिए व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह नहीं है। यदि आपको ऊपर बताए गए लक्षण हैं या लिवर से जुड़ी कोई बीमारी पहले से है, तो योग्य डॉक्टर या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से जांच और उपचार की सलाह लें। गंभीर लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

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