3 बच्चों की मां ने 6 बच्चों के पिता से छिपकर किया निकाह… खुला राज तो गांव में मच गया हंगामा, फिर पंचायत में हुआ बड़ा फैसला!
उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले से रिश्तों, जिम्मेदारी और मोहब्बत से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने स्थानीय लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। भोजपुर थाना क्षेत्र के रानीनागल गांव में तीन बच्चों की मां ने छह बच्चों के पिता के साथ निकाह कर अपनी जिंदगी की नई शुरुआत की है। दोनों की कहानी इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि शादी के बाद दोनों परिवारों के कुल नौ बच्चे एक ही परिवार का हिस्सा बन गए हैं।
बताया जा रहा है कि इस रिश्ते की शुरुआत उस समय हुई, जब दोनों अपनी-अपनी जिंदगी में मुश्किल दौर से गुजर रहे थे। एक तरफ तबस्सुम ने सड़क हादसे में अपने पति को खो दिया था और तीन बच्चों की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई थी। दूसरी तरफ मोहम्मद उमर पहले से छह बच्चों के पिता हैं और पेशे से मैकेनिक बताए जा रहे हैं। समय के साथ दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ीं और आखिरकार उन्होंने साथ जीवन बिताने का फैसला कर लिया।
हादसे के बाद बदल गई थी तबस्सुम की जिंदगी
रानीनागल गांव की रहने वाली तबस्सुम के जीवन में करीब पांच साल पहले बड़ा बदलाव आया। सड़क हादसे में उनके पति रियाजुल की मौत हो गई। पति की अचानक मौत के बाद परिवार की जिम्मेदारी पूरी तरह तबस्सुम के ऊपर आ गई। तीन बच्चों की परवरिश, घर संभालना और रोजमर्रा की जिंदगी की चुनौतियों का सामना करना उनके लिए आसान नहीं था।
पति के निधन के बाद तबस्सुम ने अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए जिंदगी को आगे बढ़ाने की कोशिश जारी रखी। इसी दौरान उनकी मुलाकात कोरबांकू गांव के रहने वाले मोहम्मद उमर से हुई। शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य जान-पहचान और बातचीत थी, लेकिन धीरे-धीरे यह रिश्ता गहरा होता चला गया।
तीन साल पहले हुई मुलाकात प्यार में बदली
जानकारी के मुताबिक, तबस्सुम और उमर की मुलाकात करीब तीन साल पहले हुई थी। उमर मैकेनिक का काम करते हैं और उनके छह बच्चे हैं। दोनों की परिस्थितियां अलग होने के बावजूद उनके बीच बातचीत बढ़ती गई। धीरे-धीरे दोनों को महसूस हुआ कि वे एक-दूसरे की परेशानियों को समझते हैं और जिंदगी के मुश्किल समय में एक-दूसरे का सहारा बन सकते हैं।
समय के साथ यह रिश्ता दोस्ती से आगे बढ़कर प्रेम संबंध में बदल गया। दोनों ने शादी करने का फैसला किया, लेकिन उन्हें अंदेशा था कि परिवार और समाज उनके फैसले का विरोध कर सकता है। इसी वजह से उन्होंने शुरुआत में अपने रिश्ते को परिवार से दूर रखा।
कलियर शरीफ में किया निकाह, फिर कोर्ट मैरिज
परिवार की संभावित नाराजगी के बीच दोनों ने कलियर शरीफ जाकर निकाह कर लिया। इसके बाद उन्होंने अपनी शादी को कानूनी रूप देने के लिए कोर्ट मैरिज भी की। यानी दोनों ने अपने रिश्ते को केवल सामाजिक स्तर पर ही नहीं, बल्कि कानूनी तौर पर भी आगे बढ़ाने का फैसला किया।
हालांकि, जब परिवार और ग्रामीणों को इस निकाह की जानकारी हुई तो मामला चर्चा में आ गया। बताया जा रहा है कि दोनों पक्षों में विरोध और नाराजगी की स्थिति पैदा हो गई। इसके बाद मामले को सुलझाने के लिए गांव में पंचायत बुलाई गई।
पंचायत में आमने-सामने आए दोनों पक्ष
गांव में हुई पंचायत में ग्राम प्रधान जाहिद हुसैन की मौजूदगी में दोनों पक्षों की बात सुनी गई। पंचायत में तबस्सुम और मोहम्मद उमर को भी अपनी बात रखने का मौका दिया गया। दोनों ने स्पष्ट किया कि वे बालिग हैं और अपनी इच्छा से एक-दूसरे के साथ जीवन बिताने का फैसला कर चुके हैं।
दोनों ने पंचायत के सामने यह भी स्पष्ट किया कि उनका निर्णय किसी दबाव में नहीं लिया गया है। वे अपनी जिंदगी आगे साथ बिताना चाहते हैं और एक-दूसरे की जिम्मेदारियों को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं।
पंचायत में दोनों की सहमति और उनके स्पष्ट फैसले को देखते हुए उनके रिश्ते को स्वीकार कर लिया गया। इसके बाद विवाद शांत हुआ और तबस्सुम अपने तीन बच्चों तथा घरेलू सामान के साथ उमर के घर चली गईं।
अब नौ बच्चों की जिम्मेदारी
इस शादी के बाद दोनों का परिवार अपने आप में काफी बड़ा हो गया है। मोहम्मद उमर के छह बच्चे हैं, जबकि तबस्सुम के तीन बच्चे हैं। इस तरह अब दोनों के परिवार में कुल नौ बच्चे हैं। इन बच्चों की देखभाल और भविष्य की जिम्मेदारी भी इस नए दंपती के सामने है।
उमर ने कथित तौर पर यह भरोसा दिलाया है कि वह तबस्सुम के तीनों बच्चों को भी अपने बच्चों की तरह स्वीकार करेंगे और उनकी जिम्मेदारी निभाएंगे। वहीं तबस्सुम ने भी उमर और उनके बच्चों के साथ नई जिंदगी शुरू करने का फैसला किया है।
यह पहलू इस कहानी को सिर्फ प्रेम विवाह का मामला नहीं रहने देता, बल्कि इसे जिम्मेदारियों के एक बड़े फैसले के रूप में भी सामने लाता है। दो अलग-अलग परिवारों के बच्चों को एक साथ लेकर आगे बढ़ना निश्चित रूप से इस दंपती के लिए नई चुनौतियां लेकर आएगा।
गांव में चर्चा का विषय बनी कहानी
रानीनागल और आसपास के इलाके में यह मामला लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। कुछ लोग इस रिश्ते को लेकर अलग-अलग तरह की बातें कर रहे हैं, जबकि कई लोग दोनों के फैसले की सराहना भी कर रहे हैं। समर्थकों का कहना है कि जिंदगी में अकेलेपन और कठिन परिस्थितियों से गुजर रहे दो लोगों ने एक-दूसरे का साथ चुना है और उन्हें अपनी जिंदगी के बारे में फैसला लेने का अधिकार है।
वहीं, इस रिश्ते की सबसे बड़ी चुनौती अब नौ बच्चों की परवरिश, शिक्षा और भविष्य से जुड़ी जिम्मेदारियां होंगी। दोनों परिवारों के बच्चों के बीच आपसी तालमेल बनाना भी इस नए परिवार के लिए महत्वपूर्ण होगा।
मुश्किल दौर में मिला एक-दूसरे का साथ
तबस्सुम और उमर की कहानी की शुरुआत भले ही विरोध और विवाद से हुई हो, लेकिन अंत में दोनों ने अपने फैसले पर कायम रहते हुए साथ रहने का रास्ता चुना। तबस्सुम ने पति को खोने के बाद जिस कठिन दौर का सामना किया, उसमें उन्हें एक नया साथी मिला। वहीं उमर ने भी अपने जीवन में एक ऐसी महिला को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया, जिसके साथ तीन बच्चों की जिम्मेदारी जुड़ी हुई है।
इस कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि दोनों ने केवल एक-दूसरे को स्वीकार नहीं किया, बल्कि एक-दूसरे से जुड़ी जिम्मेदारियों को भी स्वीकार करने का दावा किया है। अब आने वाला समय बताएगा कि नौ बच्चों वाला यह नया परिवार किस तरह अपने रिश्तों, जिम्मेदारियों और रोजमर्रा की चुनौतियों के बीच संतुलन बनाता है।
फिलहाल, मुरादाबाद के रानीनागल गांव की यह कहानी इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। एक तरफ जहां लोगों के बीच इस अनोखे रिश्ते को लेकर जिज्ञासा है, वहीं दूसरी तरफ यह मामला इस बात की ओर भी ध्यान खींचता है कि जीवन में मुश्किल परिस्थितियों के बीच इंसान किस तरह नए रिश्तों और नई उम्मीदों के सहारे आगे बढ़ने का फैसला कर सकता है।

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