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दिल के अंदर चुपचाप बढ़ रही ये बीमारी! थकान और सांस फूलना हो सकता है बड़ा संकेत, कहीं कमजोर तो नहीं हो रही हार्ट मसल्स?



नई दिल्ली: दिल हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह बिना रुके पूरे शरीर में रक्त पहुंचाने का काम करता है। जब दिल की सेहत की बात होती है तो आमतौर पर हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल और हार्ट अटैक जैसे जोखिमों पर ज्यादा चर्चा होती है। लेकिन दिल की मांसपेशियों से जुड़ी बीमारियां भी गंभीर हो सकती हैं और कई बार इनके शुरुआती लक्षण इतने सामान्य होते हैं कि लोग उन्हें सामान्य थकान या कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।

ऐसी ही एक स्थिति है कार्डियोमायोपैथी। यह दिल की मांसपेशियों से जुड़ी बीमारी है, जिसमें हृदय की मांसपेशियां कमजोर, मोटी या कठोर हो सकती हैं। इसके कारण दिल की रक्त पंप करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और गंभीर स्थिति में शरीर के दूसरे अंगों तक पर्याप्त रक्त पहुंचने में परेशानी हो सकती है।

कार्डियोमायोपैथी हर व्यक्ति को अलग-अलग तरीके से प्रभावित कर सकती है। कुछ लोगों में इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं, जबकि कुछ मामलों में सांस फूलना, थकान, चक्कर, सीने में दर्द और अनियमित धड़कन जैसी परेशानियां सामने आ सकती हैं। कई बार बीमारी लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के भी रह सकती है।

क्या है कार्डियोमायोपैथी?

कार्डियोमायोपैथी दिल की मांसपेशियों की ऐसी स्थिति है, जिसमें हृदय की संरचना या उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। दिल की मांसपेशियां कमजोर होने पर वह शरीर में पर्याप्त मात्रा में रक्त पंप नहीं कर पाता।

बीमारी बढ़ने पर हार्ट फेलियर और दिल की धड़कन अनियमित होने जैसी गंभीर जटिलताओं का खतरा बढ़ सकता है।

इस बीमारी का कारण हर मरीज में एक जैसा नहीं होता। कुछ मामलों में यह आनुवंशिक हो सकती है, जबकि कुछ लोगों में दूसरी हृदय संबंधी बीमारियों, हाई ब्लड प्रेशर या अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के कारण इसका खतरा बढ़ सकता है।

कार्डियोमायोपैथी के प्रमुख प्रकार

कार्डियोमायोपैथी कई प्रकार की होती है। इनमें डाइलेटेड, हाइपरट्रॉफिक, रेस्ट्रिक्टिव और अरिदमोजेनिक कार्डियोमायोपैथी प्रमुख हैं।

1. डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी

इस स्थिति में दिल के कक्ष, खासकर मुख्य पंपिंग चैंबर, फैल सकते हैं और हृदय की मांसपेशियों की पंप करने की क्षमता कमजोर हो सकती है।

ऐसे में दिल को शरीर के विभिन्न हिस्सों तक पर्याप्त रक्त पहुंचाने में कठिनाई हो सकती है। कुछ मामलों में यह आनुवंशिक कारणों से हो सकती है, जबकि कुछ हृदय संबंधी बीमारियां भी इसके जोखिम को बढ़ा सकती हैं।

2. हाइपरट्रॉफिक कार्डियोमायोपैथी

इस प्रकार में हृदय की मांसपेशियां असामान्य रूप से मोटी हो जाती हैं। मांसपेशियों के मोटे होने से दिल के लिए सामान्य तरीके से रक्त को पंप करना मुश्किल हो सकता है।

यह समस्या कई मामलों में आनुवंशिक हो सकती है। अगर परिवार में किसी व्यक्ति को इस तरह की हृदय संबंधी बीमारी रही है, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी देना जरूरी है।

3. रेस्ट्रिक्टिव कार्डियोमायोपैथी

इसमें हृदय की मांसपेशियां कठोर हो जाती हैं। इससे धड़कनों के बीच दिल में पर्याप्त रक्त भरने में परेशानी हो सकती है।

यह कार्डियोमायोपैथी का अपेक्षाकृत कम सामान्य प्रकार है और कई बार शरीर में मौजूद अन्य बीमारियों से इसका संबंध हो सकता है।

4. अरिदमोजेनिक कार्डियोमायोपैथी

इस स्थिति में हृदय की मांसपेशियों के कुछ हिस्सों में सामान्य मांसपेशी की जगह असामान्य या स्कार टिश्यू विकसित हो सकता है।

इससे दिल की इलेक्ट्रिकल गतिविधि प्रभावित हो सकती है और अनियमित धड़कन का खतरा बढ़ सकता है।

ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सावधान

कार्डियोमायोपैथी के लक्षण बीमारी के प्रकार और उसकी गंभीरता के आधार पर अलग-अलग हो सकते हैं। शुरुआती चरण में कुछ लोगों को कोई खास परेशानी नहीं होती, लेकिन समय के साथ कई संकेत दिखाई दे सकते हैं।

इनमें शामिल हैं:

  • सामान्य काम करने पर भी सांस फूलना

  • लगातार थकान या कमजोरी महसूस होना

  • सीने में दर्द या भारीपन

  • दिल की धड़कन तेज या अनियमित होना

  • चक्कर आना

  • बेहोशी या बेहोशी जैसा महसूस होना

  • पैरों और टखनों में सूजन

  • लेटने पर सांस लेने में परेशानी

  • रात में सांस फूलने के कारण नींद खुलना

  • शारीरिक गतिविधि करने में परेशानी

हालांकि, इन लक्षणों का मतलब यह जरूरी नहीं है कि व्यक्ति को कार्डियोमायोपैथी ही है। कई अन्य बीमारियों में भी ऐसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। इसलिए सही कारण जानने के लिए डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

किन लोगों में बढ़ सकता है खतरा?

कार्डियोमायोपैथी के कई संभावित कारण हो सकते हैं। लंबे समय तक हाई ब्लड प्रेशर रहने वाले लोगों में इसका जोखिम बढ़ सकता है। इसके अलावा पहले हार्ट अटैक हो चुका हो, कोरोनरी आर्टरी डिजीज हो या हृदय के वाल्व से जुड़ी समस्या हो, तो भी खतरा बढ़ सकता है।

कुछ मामलों में अत्यधिक शराब का सेवन, नशीले पदार्थों का इस्तेमाल और कुछ दवाएं भी हृदय की मांसपेशियों को प्रभावित कर सकती हैं।

कुछ मेटाबॉलिक और हार्मोनल समस्याएं भी हृदय पर असर डाल सकती हैं। इसके अलावा वायरल संक्रमण और कुछ अन्य बीमारियां भी कुछ प्रकार की कार्डियोमायोपैथी से जुड़ी हो सकती हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि कार्डियोमायोपैथी के कुछ प्रकार आनुवंशिक होते हैं। यदि परिवार में किसी व्यक्ति को कार्डियोमायोपैथी या अचानक गंभीर हृदय संबंधी समस्या रही है, तो डॉक्टर को इसकी जानकारी देना जरूरी है।

कैसे होती है इसकी जांच?

कार्डियोमायोपैथी की जांच के लिए डॉक्टर सबसे पहले मरीज के लक्षणों और मेडिकल हिस्ट्री के बारे में जानकारी लेते हैं। परिवार में हृदय संबंधी बीमारी का इतिहास भी पूछा जा सकता है।

इसके बाद जरूरत के अनुसार कई जांच की जा सकती हैं।

ईसीजी

ईसीजी यानी इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम से दिल की इलेक्ट्रिकल गतिविधि और धड़कन की जानकारी मिलती है। इससे कुछ प्रकार की अनियमित धड़कन का पता लगाने में मदद मिल सकती है।

इकोकार्डियोग्राफी

इकोकार्डियोग्राफी में अल्ट्रासाउंड तकनीक की मदद से दिल की संरचना और उसके काम करने के तरीके को देखा जाता है। इससे हृदय की मांसपेशियों और रक्त प्रवाह की स्थिति समझने में मदद मिलती है।

चेस्ट एक्स-रे

चेस्ट एक्स-रे से डॉक्टर दिल के आकार और फेफड़ों की स्थिति के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

कार्डियक एमआरआई

कुछ मरीजों में हृदय की संरचना और मांसपेशियों की स्थिति को ज्यादा विस्तार से समझने के लिए कार्डियक एमआरआई की जरूरत पड़ सकती है।

इसके अलावा स्थिति के अनुसार ब्लड टेस्ट, कार्डियक सीटी स्कैन या आनुवंशिक जांच भी कराई जा सकती है।

कार्डियोमायोपैथी का इलाज कैसे होता है?

इस बीमारी का इलाज हर मरीज में एक जैसा नहीं होता। उपचार बीमारी के प्रकार, कारण, लक्षण और हृदय की कार्यक्षमता पर निर्भर करता है।

डॉक्टर ऐसी दवाएं दे सकते हैं जो ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने, दिल की धड़कन को सामान्य रखने, शरीर में जमा अतिरिक्त तरल पदार्थ को कम करने या हृदय पर पड़ने वाले दबाव को कम करने में मदद करें।

कुछ मरीजों में अनियमित धड़कन को नियंत्रित करने के लिए विशेष उपकरण या प्रक्रियाओं की जरूरत पड़ सकती है।

गंभीर मामलों में पेसमेकर, इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर या अन्य उपचारों की जरूरत हो सकती है। बेहद गंभीर स्थिति में हार्ट ट्रांसप्लांट भी उपचार का विकल्प हो सकता है।

दिल को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

कार्डियोमायोपैथी के सभी प्रकारों को रोका नहीं जा सकता, खासकर जब बीमारी आनुवंशिक हो। लेकिन स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर हृदय को स्वस्थ रखने और कई जोखिमों को कम करने में मदद मिल सकती है।

इसके लिए:

  • संतुलित और पौष्टिक भोजन करें।

  • फल और हरी सब्जियां पर्याप्त मात्रा में लें।

  • साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थों को डाइट में शामिल करें।

  • ज्यादा नमक और अत्यधिक वसा वाले खाद्य पदार्थों को सीमित करें।

  • ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं।

  • डायबिटीज है तो ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें।

  • धूम्रपान से बचें।

  • शराब से दूरी बनाना बेहतर है।

  • डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित शारीरिक गतिविधि करें।

  • पर्याप्त नींद लें।

  • तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश करें।

अगर पहले से हृदय संबंधी बीमारी है तो एक्सरसाइज की तीव्रता खुद तय करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

अचानक सीने में दर्द को न करें नजरअंदाज

अगर अचानक तेज सीने में दर्द हो, सांस लेने में गंभीर परेशानी हो, व्यक्ति बेहोश हो जाए या दिल की धड़कन बहुत ज्यादा अनियमित महसूस हो, तो इसे सामान्य समस्या समझकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए।

ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है, क्योंकि ये गंभीर हृदय समस्या के संकेत हो सकते हैं।

समय पर जांच से कम हो सकता है खतरा

कार्डियोमायोपैथी ऐसी बीमारी है जिसे कई बार शुरुआती चरण में पहचानना आसान नहीं होता। कुछ मरीजों में लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखता। यही कारण है कि लगातार रहने वाली असामान्य थकान, सांस फूलना, चक्कर, बेहोशी या अनियमित धड़कन को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

अगर परिवार में हृदय संबंधी बीमारी का इतिहास है या पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसी समस्या है, तो नियमित स्वास्थ्य जांच और डॉक्टर से सलाह लेना और भी महत्वपूर्ण हो जाता है।

कार्डियोमायोपैथी का मतलब हमेशा गंभीर स्थिति होना नहीं है। सही समय पर पहचान, उचित उपचार और स्वस्थ जीवनशैली की मदद से कई मरीज अपनी स्थिति को नियंत्रित कर सकते हैं।

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