रात में सोते वक्त शरीर में हो रहा है ये खतरनाक बदलाव! सुबह उठने से पहले ही बढ़ सकता है दिल का खतरा, जानें नींद का छिपा राज
नई दिल्ली: अगर आप रोजाना हेल्दी खाना खाते हैं, एक्सरसाइज करते हैं, वजन नियंत्रित रखते हैं और धूम्रपान से दूर रहते हैं, लेकिन रात में आपकी नींद पूरी नहीं होती या सोने-जागने का समय लगातार बदलता रहता है, तो दिल की सेहत को लेकर सावधान होने की जरूरत है। विशेषज्ञों के मुताबिक खराब नींद भी हार्ट हेल्थ के लिए एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक हो सकती है।
अक्सर लोग दिल को स्वस्थ रखने के लिए खान-पान और एक्सरसाइज पर तो पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन नींद को नजरअंदाज कर देते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक यह गलती लंबे समय में ब्लड प्रेशर, सूजन, मेटाबॉलिक समस्याओं और हृदय संबंधी जोखिमों को बढ़ा सकती है।
स्वस्थ वयस्कों के लिए आम तौर पर हर रात 7 से 9 घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है। हालांकि, सिर्फ नींद की अवधि ही महत्वपूर्ण नहीं है। नींद कितनी नियमित और आरामदायक है, यह भी काफी मायने रखता है।
सिर्फ कितने घंटे सोते हैं, यही मायने नहीं रखता
नींद को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि अगर आपने 7-8 घंटे बिस्तर पर गुजार दिए तो आपकी नींद अच्छी मानी जाएगी। विशेषज्ञों के मुताबिक ऐसा जरूरी नहीं है।
नींद की सेहत में कई चीजें शामिल होती हैं—आप कितने घंटे सोते हैं, कितनी जल्दी नींद आती है, रात में कितनी बार नींद टूटती है, रोज किस समय सोते और जागते हैं और दिन में आपको कितनी नींद या थकान महसूस होती है।
अगर कोई व्यक्ति पर्याप्त समय बिस्तर पर रहने के बावजूद बार-बार जागता है या सुबह उठने के बाद भी थका हुआ महसूस करता है, तो उसकी नींद की गुणवत्ता अच्छी नहीं मानी जा सकती।
नींद कम होने पर ब्लड प्रेशर क्यों बढ़ सकता है?
जब हम सोते हैं तो शरीर आराम की अवस्था में जाता है और सामान्य तौर पर रात में ब्लड प्रेशर दिन की तुलना में कम होता है। लेकिन खराब या अपर्याप्त नींद इस प्राकृतिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकती है।
लंबे समय तक नींद की कमी रहने पर शरीर तनाव की स्थिति में रह सकता है। इससे ब्लड प्रेशर और शरीर में सूजन से जुड़े बदलावों का जोखिम बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार खराब नींद को लगातार नजरअंदाज करना खासतौर पर उन लोगों के लिए चिंता का विषय हो सकता है जिन्हें पहले से हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या अन्य हृदय संबंधी जोखिम हैं।
रात में बार-बार नींद टूटना भी समस्या
अगर कोई व्यक्ति 7-8 घंटे बिस्तर पर रहता है लेकिन रात में बार-बार जागता है, तो इसे अच्छी नींद नहीं माना जा सकता।
रात में लगातार नींद टूटने से शरीर को पर्याप्त आराम नहीं मिल पाता। इसका असर अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता पर पड़ सकता है।
लंबे समय तक ऐसा होने पर हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है।
इसलिए केवल सोने के कुल घंटों पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। यह भी देखना जरूरी है कि आपकी नींद लगातार और आरामदायक है या नहीं।
सोने-जागने का समय रोज बदलना भी समस्या
कई लोगों की आदत होती है कि सप्ताह के दिनों में देर रात तक काम करते हैं और सप्ताहांत में बहुत देर से सोते या जागते हैं। कभी रात 10 बजे सोना और कभी 1-2 बजे सोना शरीर की प्राकृतिक घड़ी को प्रभावित कर सकता है।
सोने-जागने का समय लगातार बदलने से शरीर की आंतरिक जैविक घड़ी प्रभावित हो सकती है। इसका असर नींद के साथ-साथ ऊर्जा, मूड और मेटाबॉलिज्म पर भी पड़ सकता है।
इसलिए रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की आदत बनाना फायदेमंद हो सकता है।
क्या देर रात तक जागना दिल के लिए खतरा है?
अगर देर रात सोने की आदत लगातार बनी हुई है तो इसे भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। रात में देर तक जागने से नींद की अवधि कम हो सकती है और शरीर की प्राकृतिक लय प्रभावित हो सकती है।
कुछ शोधों में देर से सोने की आदत और मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस तथा ब्लड प्रेशर जैसे जोखिम कारकों के बीच संबंध देखा गया है। हालांकि, इस विषय पर अभी और शोध की आवश्यकता है।
इसलिए रोजाना देर रात तक जागने और फिर सुबह जल्दी उठने की आदत को सामान्य नहीं बनाना चाहिए।
खर्राटों को भी हल्के में न लें
अगर कोई व्यक्ति रात में जोरदार खर्राटे लेता है, बार-बार नींद से जागता है या सोते समय सांस रुकने जैसी समस्या महसूस होती है, तो यह स्लीप एपनिया का संकेत हो सकता है।
स्लीप एपनिया में नींद के दौरान सांस बार-बार रुक सकती है और इससे नींद की गुणवत्ता खराब होती है। लंबे समय तक अनुपचारित रहने पर यह हाई ब्लड प्रेशर और अन्य हृदय संबंधी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है।
अगर परिवार का कोई सदस्य बताता है कि आप सोते समय बहुत जोर से खर्राटे लेते हैं या आपकी सांस रुकती हुई महसूस होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।
दिन में हर समय नींद आना भी संकेत हो सकता है
अगर रात में सोने के बावजूद दिनभर नींद आती रहती है, काम में मन नहीं लगता या बार-बार झपकी लेने की जरूरत महसूस होती है, तो इसके पीछे खराब नींद या कोई sleep disorder हो सकता है।
इसे केवल आलस्य समझकर नजरअंदाज करना सही नहीं है।
खासकर अगर दिन में अत्यधिक नींद के साथ खर्राटे, सांस रुकना या सुबह सिरदर्द जैसी समस्याएं भी होती हैं तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर रहेगा।
सप्ताहांत में ज्यादा सोना सही है या गलत?
यह सवाल भी काफी चर्चा में रहता है। कई लोग पूरे सप्ताह कम सोने के बाद सप्ताहांत में कई घंटे अतिरिक्त सोते हैं।
थोड़ी अतिरिक्त नींद शरीर को आराम देने में मदद कर सकती है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि पूरे सप्ताह नींद की कमी रखें और केवल शनिवार-रविवार को उसकी भरपाई करने की कोशिश करें।
सबसे बेहतर तरीका यही है कि पूरे सप्ताह पर्याप्त और नियमित नींद लेने की कोशिश की जाए।
कितनी नींद जरूरी है?
अधिकांश वयस्कों के लिए 7 से 9 घंटे की नींद एक अच्छा लक्ष्य माना जाता है। बच्चों और किशोरों को उम्र के अनुसार इससे अधिक नींद की जरूरत होती है।
लेकिन हर व्यक्ति की जरूरत थोड़ी अलग हो सकती है। अगर 8 घंटे सोने के बाद भी लगातार थकान रहती है तो नींद की गुणवत्ता या किसी sleep problem की जांच की जरूरत हो सकती है।
दिल को बचाने के लिए नींद की ये आदतें अपनाएं
रात में अच्छी नींद के लिए कुछ सामान्य आदतें मददगार हो सकती हैं।
रोज लगभग एक ही समय पर सोने और जागने की कोशिश करें।
सोने से पहले मोबाइल और अन्य स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें।
शाम के बाद अत्यधिक कैफीन लेने से बचें।
सोने से ठीक पहले बहुत भारी भोजन न करें।
कमरे को शांत, आरामदायक और अंधेरा रखने की कोशिश करें।
दिन में नियमित शारीरिक गतिविधि करें।
लगातार खर्राटे, सांस रुकने या अत्यधिक दिन की नींद को नजरअंदाज न करें।
सिर्फ एक्सरसाइज काफी नहीं
यह खबर उन लोगों के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण है जो मानते हैं कि रोज एक्सरसाइज करने से नींद की कमी की भरपाई हो जाती है।
एक स्वस्थ जीवनशैली में व्यायाम, संतुलित आहार, धूम्रपान से दूरी और अच्छी नींद सभी महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
इसलिए अगर आप रोज जिम जाते हैं लेकिन लगातार 5-6 घंटे ही सोते हैं या आपकी नींद बहुत अनियमित है, तो अपनी sleep routine पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है।
दिल की सेहत के लिए नींद क्यों जरूरी?
अच्छी नींद के दौरान शरीर को आराम मिलता है और कई जरूरी शारीरिक प्रक्रियाएं बेहतर तरीके से संचालित होती हैं। नींद की कमी होने पर शरीर में तनाव, हार्मोनल बदलाव और मेटाबॉलिक असंतुलन जैसी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।
लंबे समय तक खराब नींद रहने पर इसका असर ब्लड प्रेशर और हृदय स्वास्थ्य पर पड़ सकता है।
इसलिए नींद को सिर्फ आराम करने का समय नहीं समझना चाहिए। यह स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर आपको लंबे समय से नींद आने में परेशानी है, रात में बार-बार नींद टूटती है, तेज खर्राटे आते हैं, सोते समय सांस रुकती है या दिनभर अत्यधिक नींद आती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
अगर नींद की समस्या के साथ सीने में दर्द, सांस लेने में गंभीर परेशानी या बेहोशी जैसी समस्या हो तो तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है
दिल को स्वस्थ रखने के लिए सिर्फ प्लेट में क्या है और जिम में कितना पसीना बहाया, यह देखना काफी नहीं है। रात में कितनी और कैसी नींद मिल रही है, यह भी उतना ही महत्वपूर्ण हो सकता है।
लगातार कम नींद, बार-बार नींद टूटना, अनियमित सोने का समय और स्लीप एपनिया जैसी समस्याएं लंबे समय में हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं।
इसलिए आज से अपनी नींद को भी उतनी ही गंभीरता से लें जितनी डाइट और एक्सरसाइज को देते हैं। रात की अच्छी नींद सिर्फ अगले दिन की ताजगी नहीं, बल्कि लंबे समय तक बेहतर स्वास्थ्य की बुनियाद भी हो सकती है।

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