सुबह से रात तक की ये 5 आदतें चुपचाप खराब कर सकती हैं किडनी! दर्द न हो तब भी रहें सावधान
नई दिल्ली: शरीर के अंदर किडनी लगातार ऐसा काम करती है, जिसके बारे में हम अक्सर सोचते भी नहीं। यह खून से अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त तरल बाहर निकालने, शरीर में पानी और मिनरल्स का संतुलन बनाए रखने तथा ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। समस्या यह है कि किडनी से जुड़ी परेशानी कई बार शुरुआती दौर में साफ संकेत नहीं देती। इसी वजह से कुछ लोग तब डॉक्टर के पास पहुंचते हैं, जब किडनी की कार्यक्षमता पहले ही प्रभावित हो चुकी होती है।
विशेषज्ञ संस्थाओं के अनुसार डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी की बीमारी के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। इसके अलावा कुछ रोजमर्रा की आदतें भी किडनी पर अतिरिक्त दबाव डाल सकती हैं। नेशनल किडनी फाउंडेशन ने दर्द की दवाओं का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल, अधिक नमक, प्रोसेस्ड फूड, पर्याप्त पानी न पीना, कम नींद और शारीरिक गतिविधि की कमी जैसी आदतों को किडनी के लिए नुकसानदेह हो सकने वाले व्यवहारों में शामिल किया है।
ऐसे में सवाल यह है कि रोजमर्रा की कौन-सी आदतों पर सबसे पहले ध्यान देना चाहिए?
1. बार-बार दर्द की दवा लेना पड़ सकता है भारी
सिरदर्द, कमर दर्द, मांसपेशियों के दर्द या दूसरे सामान्य दर्द में लोग अक्सर बिना डॉक्टर से सलाह लिए दर्द की दवा ले लेते हैं। कभी-कभार और सही तरीके से दवा लेना अलग बात है, लेकिन कुछ दर्द निवारक दवाओं का लंबे समय तक या ज्यादा मात्रा में इस्तेमाल किडनी के लिए नुकसानदेह हो सकता है।
खास तौर पर NSAIDs यानी कुछ नॉन-स्टेरॉयडल एंटी-इंफ्लेमेटरी दवाएं, जैसे इबुप्रोफेन और नेप्रोक्सेन, ज्यादा मात्रा में या लंबे समय तक लेने पर किडनी को नुकसान पहुंचा सकती हैं। जिन लोगों को पहले से किडनी की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर या हृदय संबंधी समस्या है, उन्हें ऐसी दवाएं लेने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना और भी जरूरी है।
इसका मतलब यह नहीं है कि हर दर्द की दवा किडनी को नुकसान पहुंचाती है। असली चिंता दवा के प्रकार, मात्रा, कितने समय तक ली जा रही है और व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति से जुड़ी होती है। इसलिए रोज दर्द की दवा लेना आपकी आदत बन चुका है तो इसका कारण जानना जरूरी है।
2. खाने में जरूरत से ज्यादा नमक भी बन सकता है खतरा
भारतीय घरों में खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए नमक का इस्तेमाल सामान्य है, लेकिन समस्या तब पैदा होती है जब कुल सोडियम सेवन जरूरत से ज्यादा हो जाता है। पैकेट वाले स्नैक्स, इंस्टेंट नूडल्स, प्रोसेस्ड मीट, नमकीन, कुछ सॉस और दूसरे प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में भी सोडियम काफी मात्रा में हो सकता है।
ज्यादा नमक ब्लड प्रेशर बढ़ाने में योगदान कर सकता है और लंबे समय तक अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। नेशनल किडनी फाउंडेशन के मुताबिक हाई ब्लड प्रेशर किडनी की बीमारी का प्रमुख कारण है और अक्सर इसके स्पष्ट लक्षण भी नहीं होते।
यानी अगर आपको लगता है कि आप सिर्फ इसलिए सुरक्षित हैं क्योंकि आपको कोई दर्द नहीं है, तो यह जरूरी नहीं। ब्लड प्रेशर की नियमित जांच किडनी की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।
3. पानी कम पीना भी बन सकता है परेशानी
गर्मी, उमस, ज्यादा पसीना या लंबे समय तक काम करने के दौरान शरीर में पानी की कमी हो सकती है। पर्याप्त तरल न मिलने पर शरीर पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है और किडनी के लिए अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना मुश्किल हो सकता है।
लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है—हर व्यक्ति के लिए रोजाना पानी की मात्रा एक जैसी नहीं होती। उम्र, मौसम, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार जरूरत बदल सकती है। जिन लोगों को एडवांस किडनी डिजीज या कुछ हृदय संबंधी समस्याएं हैं, उन्हें डॉक्टर द्वारा बताई गई तरल मात्रा का ही पालन करना पड़ सकता है।
इसलिए सोशल मीडिया पर बताए गए किसी निश्चित संख्या के गिलास को हर व्यक्ति के लिए अनिवार्य मानना सही नहीं है। अपने शरीर और डॉक्टर की सलाह के अनुसार हाइड्रेशन बनाए रखना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
4. रोज पैकेट वाला और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड खाना खाना
आज की व्यस्त जीवनशैली में पैकेट वाले स्नैक्स, इंस्टेंट फूड और रेडी-टू-ईट उत्पाद आसानी से उपलब्ध हैं। कभी-कभार इनका सेवन और रोजाना इन्हीं पर निर्भर रहना एक जैसी बात नहीं है।
कई प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों में सोडियम, अतिरिक्त चीनी और अस्वास्थ्यकर वसा अधिक हो सकती है। ज्यादा नमक ब्लड प्रेशर को प्रभावित कर सकता है, जबकि ज्यादा चीनी का सेवन मोटापा और डायबिटीज जैसे जोखिमों में योगदान दे सकता है। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर दोनों किडनी की बीमारी के प्रमुख जोखिम कारक हैं।
इसलिए खाने की पैकिंग पर सिर्फ कीमत और स्वाद देखकर फैसला न करें। न्यूट्रिशन लेबल पर सोडियम, अतिरिक्त चीनी और दूसरे पोषण संबंधी तत्वों की जानकारी देखना एक अच्छी आदत हो सकती है।
5. घंटों बैठे रहना और व्यायाम से दूरी
ऑफिस का काम, मोबाइल, कंप्यूटर और टीवी की वजह से कई लोगों का ज्यादातर दिन बैठे-बैठे गुजर जाता है। लंबे समय तक शारीरिक गतिविधि कम रहने से वजन, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
ये सभी कारक लंबे समय में किडनी के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकते हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और वजन को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है। नेशनल किडनी फाउंडेशन भी नियमित व्यायाम को किडनी स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण मानता है।
इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को जिम जाना ही जरूरी है। अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार पैदल चलना, सीढ़ियां चढ़ना या दूसरी नियमित शारीरिक गतिविधियां भी उपयोगी हो सकती हैं।
किडनी की बीमारी का खतरा किन लोगों में ज्यादा?
हर व्यक्ति का जोखिम समान नहीं होता। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग, परिवार में किडनी फेलियर का इतिहास, मोटापा और पहले कभी गंभीर किडनी चोट यानी acute kidney injury होना किडनी की बीमारी के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। उम्र बढ़ने के साथ भी जोखिम बढ़ सकता है।
इसलिए यदि किसी व्यक्ति को डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है तो केवल इन बीमारियों का इलाज कराना ही पर्याप्त नहीं है। ब्लड शुगर और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना किडनी की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण है।
किडनी खराब होने पर कौन से संकेत दिखाई दे सकते हैं?
किडनी की बीमारी शुरुआती चरणों में कई बार बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकती है। इसी कारण जोखिम वाले लोगों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।
बाद के चरणों में कुछ लोगों को पेशाब में बदलाव, शरीर में सूजन, थकान, भूख में कमी या अन्य स्वास्थ्य समस्याएं महसूस हो सकती हैं। हालांकि इन लक्षणों के कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं। इसलिए केवल किसी एक लक्षण को देखकर किडनी की बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
यदि किसी व्यक्ति को लगातार असामान्य लक्षण महसूस हो रहे हैं या वह हाई-रिस्क ग्रुप में है, तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।
किडनी की जांच कैसे होती है?
किडनी की कार्यक्षमता का आकलन करने के लिए डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड और यूरिन टेस्ट करा सकते हैं। eGFR जैसी जांच से किडनी की फिल्ट्रेशन क्षमता का अनुमान लगाया जाता है, जबकि यूरिन में एल्ब्यूमिन की जांच किडनी डैमेज के शुरुआती संकेतों की पहचान में मदद कर सकती है।
किसी भी रिपोर्ट को अकेले देखकर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। डॉक्टर मरीज की उम्र, स्वास्थ्य इतिहास, दवाओं और अन्य जांचों को साथ देखकर स्थिति का मूल्यांकन करते हैं।
आज से बदलें ये आदतें
किडनी को स्वस्थ रखने के लिए किसी एक चमत्कारी घरेलू नुस्खे की जरूरत नहीं है। रोजमर्रा की छोटी-छोटी आदतें ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती हैं।
खाने में अतिरिक्त नमक कम करना, पैकेट वाले भोजन का सेवन सीमित करना, पर्याप्त लेकिन अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार तरल लेना, अनावश्यक दर्द की दवाओं से बचना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, वजन नियंत्रित रखना और ब्लड प्रेशर व ब्लड शुगर की निगरानी करना उपयोगी कदम हो सकते हैं।
खासकर अगर आप पहले से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या किडनी से जुड़ी समस्या से जूझ रहे हैं, तो खान-पान या दवाओं में बड़े बदलाव खुद से न करें। ऐसी स्थिति में डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन की सलाह जरूरी है।
सबसे जरूरी बात—दर्द का इंतजार न करें
किडनी को लेकर सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक यह है कि जब तक कमर या शरीर में दर्द नहीं होगा, तब तक किडनी ठीक होगी। वास्तव में शुरुआती किडनी बीमारी कई बार बिना स्पष्ट लक्षणों के रह सकती है।
इसलिए अगर आपको डायबिटीज या हाई ब्लड प्रेशर है, परिवार में किडनी की बीमारी का इतिहास है या आप लंबे समय से दर्द की दवाएं लेते हैं, तो नियमित स्वास्थ्य जांच को नजरअंदाज न करें।
किडनी की सेहत बचाने का सबसे अच्छा तरीका बीमारी के संकेत आने का इंतजार करना नहीं, बल्कि जोखिम को पहले से कम करना है। रोजमर्रा की छोटी आदतों पर ध्यान देकर आप अपनी किडनी के साथ-साथ दिल, ब्लड प्रेशर और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य को भी बेहतर रखने में मदद कर सकते हैं।
यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। किसी बीमारी, दवा, पानी की मात्रा या डाइट में बदलाव से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार डॉक्टर की सलाह लें।

कोई टिप्पणी नहीं