डेंगू का नया खतरा: सिर्फ बुखार समझकर न करें नजरअंदाज, इन मरीजों में बढ़ सकता है गंभीर बीमारी का जोखिम
नई दिल्ली: बारिश और उमस के बीच देश के कई हिस्सों में मच्छरजनित बीमारियों को लेकर चिंता बढ़ जाती है। इनमें डेंगू सबसे ज्यादा चर्चा में रहने वाली बीमारियों में से एक है। शुरुआत में डेंगू सामान्य वायरल बुखार जैसा दिखाई दे सकता है, लेकिन कुछ मरीजों में यह गंभीर रूप ले सकता है। खास तौर पर पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे लोगों में डेंगू को हल्के में लेना नुकसानदायक हो सकता है।
भारत के राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केंद्र (NCVBDC) की मौजूदा क्लिनिकल गाइडलाइन में गर्भावस्था, बच्चों की उम्र और कई तरह की पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्याओं को डेंगू में गंभीर स्थिति के जोखिम से जुड़ा माना गया है। इनमें हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, थायरॉयड बीमारी, लिवर की बीमारी, हृदय रोग और किडनी की बीमारी शामिल हैं।
यही वजह है कि इस मौसम में डेंगू को लेकर सबसे जरूरी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि बुखार है या नहीं, बल्कि यह भी है कि मरीज में कोई जोखिम कारक मौजूद है या नहीं।
डेंगू को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?
डेंगू एक वायरल बीमारी है, जो संक्रमित Aedes मच्छर के काटने से फैलती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक डेंगू गर्म और उष्णकटिबंधीय इलाकों में आम है और बारिश के मौसम के दौरान मच्छरों की संख्या बढ़ने से इसके संक्रमण का जोखिम भी बढ़ सकता है।
भारत में भी डेंगू को लेकर स्वास्थ्य एजेंसियां लगातार निगरानी करती हैं। NCVBDC के आधिकारिक आंकड़ों में 2026 के लिए राज्यवार डेंगू मामले दर्ज किए जा रहे हैं। हालांकि उपलब्ध आंकड़ों के साथ यह ध्यान रखना जरूरी है कि 2026 के आंकड़े प्रोविजनल और तारीख-विशिष्ट हैं, इसलिए इन्हें पूरे वर्ष की अंतिम स्थिति नहीं माना जा सकता।
इसका मतलब यह है कि फिलहाल लोगों को आंकड़ों से घबराने के बजाय बीमारी की पहचान, समय पर डॉक्टर से संपर्क और मच्छरों से बचाव पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए।
शुरुआत में कैसे पहचानें डेंगू?
डेंगू के शुरुआती लक्षण कई बार सामान्य वायरल बुखार जैसे लग सकते हैं। NCVBDC के अनुसार अचानक तेज बुखार, तेज सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, भूख कम लगना, स्वाद में बदलाव, त्वचा पर चकत्ते, जी मिचलाना और उल्टी जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं।
WHO के मुताबिक डेंगू के लक्षण आमतौर पर संक्रमित मच्छर के काटने के कुछ दिनों बाद शुरू हो सकते हैं। बुखार के साथ सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, उल्टी और त्वचा पर रैश जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
यही वजह है कि सिर्फ यह सोच लेना कि मौसम बदलने के कारण वायरल बुखार होगा, सही नहीं है। अगर तेज बुखार के साथ डेंगू जैसे लक्षण दिखाई दे रहे हैं, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
सबसे खतरनाक बात—बुखार उतरने के बाद भी खतरा हो सकता है
डेंगू को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण बात यह है कि बुखार कम होना हमेशा पूरी तरह ठीक होने का संकेत नहीं होता।
WHO के अनुसार गंभीर डेंगू के चेतावनी संकेत अक्सर बुखार कम होने के आसपास दिखाई दे सकते हैं। इस दौरान तेज पेट दर्द, लगातार उल्टी, तेजी से सांस लेना, मसूड़ों या नाक से खून आना, अत्यधिक कमजोरी या बेचैनी, उल्टी अथवा मल में खून और बहुत ज्यादा प्यास जैसे लक्षण गंभीर स्थिति की ओर संकेत कर सकते हैं।
इसलिए यदि मरीज का बुखार कम हो गया है लेकिन उसकी हालत खराब लग रही है, तो परिवार को लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
इन मरीजों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत
NCVBDC की 2023 की राष्ट्रीय क्लिनिकल गाइडलाइन में कई स्वास्थ्य स्थितियों को डेंगू में गंभीर अभिव्यक्तियों के जोखिम कारक के तौर पर बताया गया है।
इनमें:
डायबिटीज
हाई ब्लड प्रेशर
हृदय रोग
किडनी की बीमारी
लिवर या हेपेटाइटिस से जुड़ी समस्याएं
थायरॉयड बीमारी
गर्भावस्था
बच्चों की उम्र
शामिल हैं।
इसका मतलब यह नहीं है कि इन बीमारियों से जूझ रहे हर व्यक्ति को गंभीर डेंगू होगा। बल्कि इसका अर्थ यह है कि ऐसे मरीजों में डेंगू होने पर चिकित्सकीय निगरानी और जोखिम का आकलन अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है।
विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं में डेंगू के दौरान मां और बच्चे दोनों से जुड़े जटिलताओं का जोखिम हो सकता है, इसलिए उन्हें बिना चिकित्सकीय सलाह के घर पर उपचार करने के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
प्लेटलेट्स कम होना ही पूरी कहानी नहीं
डेंगू का नाम आते ही सबसे पहले लोगों के मन में प्लेटलेट्स का सवाल आता है। लेकिन डेंगू की गंभीरता को केवल प्लेटलेट्स की संख्या देखकर तय करना सही नहीं है।
राष्ट्रीय गाइडलाइन डेंगू की गंभीर स्थिति को प्लाज्मा लीकेज से होने वाले शॉक, सांस की तकलीफ के साथ फ्लूइड जमा होना, गंभीर रक्तस्राव और गंभीर अंगों की खराबी जैसी स्थितियों से जोड़ती है।
इसलिए मरीज के लक्षण, ब्लड टेस्ट और डॉक्टर के क्लिनिकल आकलन को साथ देखकर ही बीमारी की स्थिति समझी जाती है।
परिवार को किसी एक रिपोर्ट के आधार पर खुद से निष्कर्ष निकालने के बजाय डॉक्टर की सलाह का पालन करना चाहिए।
डेंगू में कौन-सी दवा खतरनाक हो सकती है?
डेंगू के संदिग्ध मरीजों को खुद से दर्द या बुखार की दवा शुरू करने से बचना चाहिए। WHO के अनुसार बुखार और दर्द के लिए पैरासिटामोल का इस्तेमाल किया जा सकता है, जबकि एस्पिरिन और आइबुप्रोफेन जैसी दवाओं से बचना चाहिए, क्योंकि इनसे रक्तस्राव का खतरा बढ़ सकता है।
हालांकि किसी भी दवा की सही मात्रा और इस्तेमाल मरीज की स्थिति पर निर्भर करता है। खासकर यदि मरीज को पहले से कोई बीमारी है या वह अन्य दवाएं ले रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
डेंगू के लिए कोई ऐसी विशिष्ट दवा नहीं है जो सीधे वायरस को खत्म कर दे। उपचार मुख्य रूप से लक्षणों और मरीज की स्थिति के अनुसार supportive care पर आधारित होता है। गंभीर मामलों में अस्पताल में विशेष उपचार की आवश्यकता हो सकती है।
ये लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल जाएं
डेंगू में कुछ संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। यदि मरीज को लगातार उल्टी हो रही है, तेज पेट दर्द है, नाक या मसूड़ों से खून आ रहा है, उल्टी या मल में खून दिखाई दे रहा है, सांस लेने में परेशानी है, अत्यधिक कमजोरी या बेचैनी है या त्वचा ठंडी और पीली पड़ रही है, तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
खासकर बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे मरीजों में लक्षणों को नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
मच्छर से बचाव ही सबसे बड़ा हथियार
डेंगू से बचाव के लिए मच्छर के काटने से बचना सबसे महत्वपूर्ण उपायों में से एक है। WHO के मुताबिक डेंगू फैलाने वाले मच्छर दिन के समय भी सक्रिय हो सकते हैं। इसलिए केवल रात में मच्छरदानी का इस्तेमाल करना पर्याप्त नहीं माना जाना चाहिए।
घर के आसपास पानी जमा नहीं होने देना, कूलर और पानी के कंटेनरों को नियमित रूप से साफ करना, खिड़की-दरवाजों पर स्क्रीन लगाना, शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनना और उपयुक्त मच्छर रिपेलेंट का इस्तेमाल करना संक्रमण के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
अगर परिवार के किसी सदस्य को डेंगू हो गया है तो उसके आसपास भी मच्छरों से बचाव पर विशेष ध्यान देना चाहिए, ताकि संक्रमित व्यक्ति से मच्छर के जरिए संक्रमण आगे न फैल सके।
डर नहीं, सावधानी जरूरी
डेंगू का नाम सुनकर घबराने की जरूरत नहीं है। WHO के अनुसार डेंगू के ज्यादातर मामले हल्के होते हैं और मरीज ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ मामलों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है। समय पर पहचान और उचित चिकित्सा देखभाल गंभीर डेंगू में मृत्यु के जोखिम को काफी कम कर सकती है।
इसलिए इस मौसम में सबसे जरूरी बात यह है कि तेज बुखार को सामान्य वायरल मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज न किया जाए। खासकर यदि मरीज को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हृदय, किडनी, लिवर या थायरॉयड से जुड़ी बीमारी है, गर्भावस्था है या मरीज बच्चा है, तो डॉक्टर से जल्द सलाह लेना अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है।
डेंगू में सबसे बड़ा खतरा केवल बुखार नहीं, बल्कि गंभीर लक्षणों को समय पर पहचान न पाना है। इसलिए तेज बुखार के साथ चेतावनी संकेत दिखाई दें तो घरेलू नुस्खों के भरोसे रहने के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लेना ही सबसे सुरक्षित कदम है।

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