दर्शन के लिए निकला पूरा परिवार, लौटकर आईं सिर्फ अर्थियां! 6 शव एक साथ देखकर कांप उठा गांव, गर्भवती बहू का भी दर्दनाक अंत
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देवास/राजगढ़। मध्य प्रदेश के देवास जिले के धांसड़ गांव में मंगलवार को ऐसा दर्दनाक मंजर देखने को मिला, जिसे देखकर हर किसी की आंखें नम हो गईं। एक ही परिवार के छह सदस्यों की मौत के बाद जब एक साथ चार अर्थियां गांव से निकलीं तो पूरा माहौल चीख-पुकार और मातम में बदल गया। हल्की बारिश के बीच परिवार के छह सदस्यों के शव मुक्तिधाम पहुंचे और वहां एक ही चिता पर उनका अंतिम संस्कार किया गया। इस दर्दनाक दृश्य ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया।
सबसे ज्यादा भावुक कर देने वाला पल उस समय आया जब परिवार के छोटे बेटे खुशाल ने अपने माता-पिता, भाई-भाभी और दो मासूम बच्चों को एक साथ मुखाग्नि दी। जिस घर में कुछ समय पहले तक परिवार के सदस्य साथ रहते थे, वहां अब मातम पसरा हुआ है। हादसे ने परिवार से एक साथ कई पीढ़ियों को छीन लिया।
चार अर्थियों में पहुंचे छह शव
धांसड़ गांव में मंगलवार सुबह से ही माहौल गमगीन था। हादसे में जान गंवाने वाले परिवार के छह सदस्यों की अंतिम यात्रा निकली तो बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए पहुंच गए।
चार अर्थियों में छह शवों को मुक्तिधाम ले जाया गया। एक अर्थी पर पिता विशाल का शव था, जबकि दूसरी अर्थी पर उनकी पत्नी पूजा और उनकी मासूम बेटियों के शव रखे गए थे। परिवार के लोगों की हालत देखकर वहां मौजूद ग्रामीण भी अपने आंसू नहीं रोक सके।
हल्की बारिश के बीच जब अंतिम यात्रा गांव की गलियों से गुजरी तो हर तरफ सन्नाटा था। जिन रास्तों से कभी परिवार के लोग सामान्य जिंदगी जीते हुए गुजरते थे, उन्हीं रास्तों से मंगलवार को उनकी अंतिम यात्रा निकली।
गर्भवती थी पूजा, अजन्मे बच्चे की भी मौत
इस हादसे का सबसे दर्दनाक पहलू यह है कि मृतकों में शामिल पूजा गर्भवती थीं। परिवार के अनुसार हादसे में उनकी और उनके अजन्मे बच्चे की भी मौत हो गई।
एक परिवार की छह जिंदगियां एक ही हादसे में खत्म हो गईं और इसके साथ ही एक अजन्मा बच्चा भी दुनिया में आने से पहले ही इस हादसे का शिकार हो गया।
परिजनों के लिए इस दुख को शब्दों में बयान करना मुश्किल है। परिवार में एक साथ कई मौतों ने ऐसा खालीपन छोड़ दिया है, जिसे भर पाना बेहद मुश्किल होगा।
शंकर चौहान से लेकर मासूम पोतियों तक ने गंवाई जान
हादसे में धांसड़ निवासी शंकर चौहान, उनकी पत्नी सागर बाई, बेटे विशाल, बहू पूजा और पोतियों महक व वंशिका की मौत हुई है।
एक ही परिवार के इतने सदस्यों की मौत से गांव में शोक की लहर दौड़ गई है। बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक हर कोई इस हादसे को लेकर स्तब्ध है।
परिवार के छह सदस्यों का अंतिम संस्कार एक ही चिता पर किया गया। इस दौरान मुक्तिधाम में मौजूद लोगों के बीच भारी भावुक माहौल रहा।
छोटे बेटे ने दी सभी को मुखाग्नि
अंतिम संस्कार का सबसे दर्दनाक दृश्य उस समय सामने आया जब शंकर चौहान के छोटे बेटे खुशाल ने अपने परिवार के छह सदस्यों को मुखाग्नि दी।
जिस बेटे को अपने माता-पिता का अंतिम संस्कार करना था, उसे एक ही दिन में अपने भाई, भाभी और मासूम बच्चों को भी अंतिम विदाई देनी पड़ी।
परिवार के लोगों के मुताबिक खुशाल के लिए यह पल बेहद कठिन था। अपने सामने माता-पिता और भाई के शव देखना ही किसी के लिए असहनीय होता है, लेकिन यहां उसे परिवार के कई सदस्यों को एक साथ अंतिम विदाई देनी पड़ी।
वहां मौजूद ग्रामीणों ने परिवार को संभालने की कोशिश की, लेकिन इस त्रासदी के सामने हर किसी की आंखें नम थीं।
क्षेत्रीय विधायक ने दी श्रद्धांजलि
अंतिम यात्रा में बड़ी संख्या में ग्रामीण शामिल हुए। क्षेत्रीय विधायक मुरली भंवरा सहित अन्य लोगों ने भी मृतकों को श्रद्धांजलि दी।
ग्रामीणों ने मौन रखकर मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। गांव में ऐसा माहौल था कि कोई किसी से ज्यादा बात नहीं कर पा रहा था।
हर तरफ एक ही चर्चा थी कि आखिर कुछ ही समय में एक पूरा परिवार कैसे उजड़ गया।
हादसे में एक ही परिवार के 9 लोगों की मौत
यह हादसा सिर्फ धांसड़ गांव के छह लोगों की मौत तक सीमित नहीं है। राजगढ़ जिले में हुए इस दर्दनाक हादसे में एक ही परिवार के कुल नौ लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है।
परिवार के कुछ अन्य सदस्यों के शवों का अंतिम संस्कार खंडवा जिले के पुनासा में किया गया। इस तरह एक ही हादसे ने परिवार के कई सदस्यों को हमेशा के लिए अलग कर दिया।
उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार हादसे में शामिल वाहन में कुल 11 लोग सवार थे। बारिश के कारण पानी का बहाव तेज था और इसी दौरान वाहन बह गया। घटना में दो लोग सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे।
कैसे हुआ इतना बड़ा हादसा?
दर्दनाक हादसा राजगढ़ जिले के सारंगपुर थाना क्षेत्र के पास हुआ। परिवार के लोग एक ईको वैन में सवार होकर धार्मिक दर्शन के लिए जा रहे थे।
बताया जा रहा है कि रास्ते में बारिश के कारण पानी का बहाव काफी तेज था। वाहन को पानी से भरे रास्ते या पुलिया से पार कराने की कोशिश की गई और इसी दौरान वाहन तेज बहाव की चपेट में आ गया।
कुछ रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि स्थानीय ग्रामीणों ने वाहन चालक को तेज बहाव वाले रास्ते को पार नहीं करने की सलाह दी थी। इसके बावजूद वाहन आगे बढ़ा और देखते ही देखते पानी के तेज बहाव में बह गया।
बारिश बनी हादसे की बड़ी वजह
मध्य प्रदेश में इन दिनों कई इलाकों में भारी बारिश के कारण नदी-नालों और छोटे पुल-पुलियों में पानी का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। कई जगह अचानक आने वाले तेज बहाव के कारण रास्ते खतरनाक हो जाते हैं।
ऐसे में पानी से भरी पुलिया या सड़क को पार करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है। कई बार वाहन चालक को पानी की गहराई का अंदाजा नहीं होता और तेज बहाव वाहन को कुछ ही सेकंड में अपनी चपेट में ले लेता है।
राजगढ़ की यह घटना भी बारिश के मौसम में सड़क सुरक्षा को लेकर एक गंभीर चेतावनी है।
दो लोग कैसे बच पाए?
हादसे के दौरान वाहन में सवार 11 लोगों में से दो लोगों के सुरक्षित बच निकलने की जानकारी सामने आई है। बाकी लोगों को बचाने के लिए स्थानीय लोगों और प्रशासन की ओर से राहत एवं बचाव अभियान चलाया गया।
तेज बहाव के कारण रेस्क्यू टीमों के सामने भी बड़ी चुनौती थी। पानी में शवों की तलाश करना आसान नहीं था। हादसे के बाद जैसे-जैसे शव बरामद होते गए, परिवार और गांव का दुख बढ़ता गया।
एक-एक शव के मिलने के साथ परिजनों को यह अहसास होता गया कि उनके परिवार का कितना बड़ा नुकसान हो चुका है।
एक साथ कई पीढ़ियां खत्म
इस हादसे ने एक ही परिवार की कई पीढ़ियों को खत्म कर दिया। परिवार के बुजुर्ग, उनके बेटे, बहू और मासूम बच्चे—सभी एक ही हादसे में चले गए।
ऐसी घटनाएं केवल परिवार को ही नहीं, बल्कि पूरे गांव को लंबे समय तक प्रभावित करती हैं। गांव में परिवार से जुड़े लोगों की यादें हर जगह दिखाई देती हैं।
जिस घर में बच्चों की आवाजें गूंजती थीं, वहां अब मातम है। जिस परिवार के लोग धार्मिक यात्रा पर निकले थे, उन्हें इस बात का अंदाजा तक नहीं था कि यह यात्रा उनके लिए आखिरी सफर बन जाएगी।
मासूम बच्चों की मौत ने सबको झकझोर दिया
हादसे में दो मासूम बच्चियों महक और वंशिका की मौत ने लोगों को सबसे ज्यादा भावुक कर दिया। बच्चों की मौत की खबर सुनकर गांव में मातम और गहरा गया।
अंतिम यात्रा में जब मासूम बच्चों के शव अर्थी पर रखे गए तो वहां मौजूद कई लोग फूट-फूटकर रोने लगे।
किसी भी परिवार के लिए बच्चों को खोना सबसे बड़ा दुख माना जाता है, लेकिन यहां परिवार ने एक साथ दो मासूम बच्चियों को खो दिया।
अब गांव में सिर्फ यादें रह गईं
धांसड़ गांव में मंगलवार को अंतिम संस्कार के बाद हर तरफ सन्नाटा था। लोग एक-दूसरे को सांत्वना देते रहे, लेकिन किसी के पास परिवार के इस असहनीय दुख को कम करने के लिए शब्द नहीं थे।
परिवार के छोटे बेटे खुशाल के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती अपने जीवन को संभालना है। जिस परिवार के साथ वह जीवन की खुशियां बांटता था, उसी परिवार के अधिकांश सदस्य अब उसके साथ नहीं हैं।
बारिश के मौसम में बड़ा सबक
राजगढ़ की यह घटना बारिश के मौसम में एक बड़ा सबक भी देती है। नदी, नाले या पुलिया के ऊपर तेज बहाव होने की स्थिति में वाहन लेकर आगे बढ़ना बेहद खतरनाक हो सकता है।
पानी की गहराई कम दिखाई देने पर भी उसके नीचे सड़क की स्थिति बदल चुकी हो सकती है। तेज बहाव वाहन का संतुलन बिगाड़ सकता है और कुछ ही सेकंड में पूरा वाहन पानी में बह सकता है।
प्रशासन की ओर से भी लोगों को लगातार सलाह दी जाती है कि तेज बहाव वाले रास्तों को पार करने की कोशिश न करें और पानी का स्तर कम होने का इंतजार करें।
देवास के धांसड़ गांव में छह लोगों का एक साथ अंतिम संस्कार पूरे इलाके के लिए कभी न भूल पाने वाला दुखद दिन बन गया। शंकर चौहान, उनकी पत्नी सागर बाई, बेटे विशाल, बहू पूजा और मासूम पोतियों महक व वंशिका की मौत ने पूरे परिवार को उजाड़ दिया।
हादसे में गर्भवती पूजा और उनके अजन्मे बच्चे की मौत ने इस त्रासदी को और भी दर्दनाक बना दिया। वहीं छोटे बेटे खुशाल द्वारा परिवार के सदस्यों को एक साथ मुखाग्नि देने का दृश्य हर किसी को भावुक कर गया।
राजगढ़ का यह हादसा बारिश के मौसम में तेज बहाव वाले रास्तों पर अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत को भी सामने लाता है। एक छोटी-सी लापरवाही कभी-कभी पूरे परिवार की जिंदगी बदल सकती है।

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