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OPS पर केंद्र का बड़ा खुलासा! संसद में साफ हुआ पुरानी पेंशन लौटेगी या नहीं, कर्मचारियों के लिए आया चौंकाने वाला फैसला

 


नई दिल्ली। देशभर में सरकारी कर्मचारियों के बीच पुरानी पेंशन योजना यानी Old Pension Scheme (OPS) की बहाली की मांग लगातार उठती रही है। कर्मचारी संगठन लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि नई पेंशन व्यवस्था में बाजार आधारित जोखिम को खत्म करके पुरानी व्यवस्था जैसी सुनिश्चित पेंशन दी जाए। इसी बीच केंद्र सरकार ने संसद में एक बार फिर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है।

सरकार की ओर से कहा गया है कि केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों के लिए OPS को दोबारा लागू करने का फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने संसद में सरकार की स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया है कि केंद्र की मौजूदा व्यवस्था NPS और उसके तहत उपलब्ध Unified Pension Scheme (UPS) पर आधारित है।

यानी केंद्रीय कर्मचारियों के लिए फिलहाल पुरानी पेंशन की वापसी की उम्मीद नहीं है। हालांकि सरकार ने कर्मचारियों की उस चिंता को ध्यान में रखते हुए UPS लागू किया है, जिसमें रिटायरमेंट के बाद एक निश्चित और महंगाई से जुड़ी आय की मांग प्रमुख रही है।

OPS की वापसी पर केंद्र का क्या है रुख?

केंद्र सरकार ने अलग-अलग मौकों पर संसद में यह स्पष्ट किया है कि केंद्रीय कर्मचारियों के लिए OPS बहाल करने की कोई योजना नहीं है। दिसंबर 2025 में भी वित्त मंत्रालय की ओर से लोकसभा में यही स्थिति दोहराई गई थी। सरकार का कहना है कि OPS एक defined benefit और non-contributory pension व्यवस्था है, जिसका पूरा वित्तीय भार सरकार पर पड़ता है।

मार्च 2026 में राज्यसभा में भी सरकार से OPS को लेकर सवाल पूछा गया था। जवाब में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने कहा कि राज्यों द्वारा OPS पर वापस जाना उनका अपना नीतिगत निर्णय है। साथ ही नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक यानी CAG की राज्य वित्त संबंधी रिपोर्टों में इस तरह की व्यवस्था के दीर्घकालीन वित्तीय प्रभावों को लेकर चिंता जताई गई है।

इससे साफ है कि केंद्र सरकार खुद OPS की ओर लौटने के बजाय मौजूदा पेंशन व्यवस्था को आगे बढ़ाने के पक्ष में है।

राज्यों को OPS लागू करने की आजादी

केंद्र और राज्यों की पेंशन व्यवस्था को लेकर एक महत्वपूर्ण बात यह है कि राज्य सरकारें अपने कर्मचारियों के लिए पेंशन नीति के संबंध में अपने स्तर पर निर्णय ले सकती हैं।

सरकार के संसदीय जवाब के अनुसार राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश ने NPS से OPS की ओर लौटने के अपने फैसले की जानकारी केंद्र या PFRDA को दी है।

हालांकि यहां एक बड़ी वित्तीय और कानूनी चुनौती भी है। NPS में जमा कर्मचारी और सरकार के योगदान तथा उससे बने निवेश को राज्यों को वापस करने के लिए मौजूदा PFRDA व्यवस्था में सीधी वापसी का प्रावधान नहीं है। इस वजह से OPS में लौटने वाले राज्यों के सामने पुराने NPS कॉर्पस को लेकर अलग चुनौती बनी हुई है।

आखिर OPS को लेकर इतना विवाद क्यों?

OPS और NPS के बीच सबसे बड़ा अंतर पेंशन की प्रकृति का है।

पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारी को रिटायरमेंट के बाद एक निर्धारित फॉर्मूले के आधार पर पेंशन मिलती थी। इसमें कर्मचारी को अपने वेतन से NPS की तरह नियमित अंशदान नहीं करना पड़ता था। पेंशन का वित्तीय भार सरकार के बजट से पूरा किया जाता था।

दूसरी तरफ NPS एक defined contribution व्यवस्था है। इसमें कर्मचारी और सरकार दोनों योगदान करते हैं। यह राशि पेंशन खाते में जमा होती है और निवेश के माध्यम से रिटायरमेंट फंड तैयार होता है।

इस व्यवस्था में रिटायरमेंट के बाद मिलने वाला अंतिम लाभ निवेश और एन्युटी से जुड़े कारकों पर निर्भर कर सकता है। यही अनिश्चितता कर्मचारी संगठनों की सबसे बड़ी चिंता रही है।

NPS से कर्मचारी क्यों नाराज रहे?

कर्मचारी संगठनों का तर्क है कि NPS में रिटायरमेंट के समय मिलने वाली पेंशन पहले से निश्चित नहीं होती। कर्मचारी वर्षों तक सेवा करता है, लेकिन भविष्य में उसे कितनी मासिक पेंशन मिलेगी, यह कई वित्तीय कारकों से प्रभावित हो सकता है।

बाजार में उतार-चढ़ाव, पेंशन फंड का प्रदर्शन और रिटायरमेंट के समय उपलब्ध एन्युटी दर जैसे कारक अंतिम भुगतान को प्रभावित कर सकते हैं।

इसी वजह से कर्मचारी संगठन चाहते रहे हैं कि उन्हें रिटायरमेंट के बाद निश्चित पेंशन की गारंटी मिले।

यही वह समस्या है जिसे केंद्र सरकार ने UPS के जरिए हल करने की कोशिश की है।

UPS बना सरकार का बड़ा विकल्प

केंद्र सरकार ने Unified Pension Scheme (UPS) को 24 अगस्त 2024 को मंजूरी दी थी। इसे NPS के तहत एक विकल्प के रूप में तैयार किया गया और यह 1 अप्रैल 2025 से लागू हुआ। इसका उद्देश्य केंद्रीय कर्मचारियों को रिटायरमेंट के बाद अधिक निश्चित और महंगाई से जुड़ी पेंशन उपलब्ध कराना है।

UPS में कर्मचारी और सरकार दोनों का योगदान रहता है, लेकिन इसमें निर्धारित शर्तों को पूरा करने पर assured payout का प्रावधान किया गया है।

यानी सरकार ने OPS को वापस लाने के बजाय NPS के ढांचे के भीतर ऐसी व्यवस्था तैयार करने की कोशिश की है जिसमें कर्मचारी को पेंशन को लेकर अधिक निश्चितता मिले।

25 साल की नौकरी पर 50 फीसदी सुनिश्चित पेंशन

UPS की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता assured pension है।

अगर कर्मचारी ने कम से कम 25 साल की qualifying service पूरी कर ली है तो उसे रिटायरमेंट से पहले के अंतिम 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50 प्रतिशत सुनिश्चित पेंशन के रूप में मिल सकता है। 10 से 25 साल के बीच की सेवा अवधि वाले कर्मचारियों के लिए यह राशि सेवा अवधि के अनुपात में तय होती है।

उदाहरण के तौर पर अगर किसी कर्मचारी का रिटायरमेंट से पहले अंतिम 12 महीनों का औसत मूल वेतन 80,000 रुपये है और उसकी qualifying service 25 साल या उससे अधिक है, तो निर्धारित शर्तों के अनुसार assured payout 40,000 रुपये प्रति माह होगा।

हालांकि वास्तविक पेंशन की गणना संबंधित नियमों और पात्रता शर्तों के अनुसार होगी।

न्यूनतम 10,000 रुपये की पेंशन

UPS में कम सेवा अवधि वाले कर्मचारियों के लिए भी न्यूनतम पेंशन का प्रावधान है।

कम से कम 10 साल की qualifying service पूरी करने वाले पात्र कर्मचारी को सुपरएनुएशन पर न्यूनतम 10,000 रुपये प्रति माह की assured pension का प्रावधान है।

इस प्रावधान का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कम सेवा अवधि वाले कर्मचारी भी रिटायरमेंट के बाद पूरी तरह पेंशन सुरक्षा से वंचित न रहें।

महंगाई बढ़ेगी तो पेंशन पर भी मिलेगा राहत का लाभ

UPS की एक बड़ी खासियत inflation indexation है।

सरकार के अनुसार assured pension, assured family pension और minimum pension पर महंगाई राहत यानी Dearness Relief (DR) का प्रावधान है। यह AICPI-IW यानी औद्योगिक श्रमिकों के लिए अखिल भारतीय उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आधार पर निर्धारित व्यवस्था से जुड़ा है।

इसका मतलब यह है कि पेंशन की क्रय शक्ति को महंगाई के असर से बचाने की कोशिश की गई है।

कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार को भी सुरक्षा

UPS में केवल कर्मचारी की पेंशन का ही प्रावधान नहीं है, बल्कि उसके परिवार की आर्थिक सुरक्षा का भी ध्यान रखा गया है।

यदि पेंशन प्राप्त कर रहे कर्मचारी की मृत्यु हो जाती है तो उसके वैध रूप से विवाहित जीवनसाथी को कर्मचारी की पेंशन का 60 प्रतिशत assured family pension के रूप में मिलने का प्रावधान है। इसके साथ महंगाई राहत का लाभ भी नियमों के अनुसार उपलब्ध है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य कर्मचारी की मृत्यु के बाद परिवार पर अचानक पड़ने वाले आर्थिक दबाव को कम करना है।

रिटायरमेंट पर ग्रेच्युटी के अलावा एकमुश्त रकम

UPS में रिटायरमेंट के समय कर्मचारी को केवल मासिक पेंशन ही नहीं मिलती। सरकार ने ग्रेच्युटी के अतिरिक्त एकमुश्त भुगतान का भी प्रावधान किया है।

यह भुगतान प्रत्येक पूर्ण छह महीने की सेवा के लिए रिटायरमेंट के समय मिलने वाले मासिक emoluments यानी मूल वेतन और DA के 10वें हिस्से के आधार पर निर्धारित होता है। खास बात यह है कि इस एकमुश्त भुगतान से assured pension की राशि कम नहीं होती।

NPS और UPS में क्या बदला?

सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार UPS में कर्मचारी का योगदान मूल वेतन और DA का 10 प्रतिशत रहता है, जबकि सरकार का योगदान बढ़ाकर 18.5 प्रतिशत किया गया है। इसमें व्यक्तिगत पेंशन फंड के अलावा एक अलग pool corpus की व्यवस्था भी की गई है।

यही वजह है कि सरकार UPS को NPS से अलग एक ऐसा विकल्प मानती है जो contributory structure को बनाए रखते हुए pension payout में अधिक निश्चितता देता है।

अब कर्मचारियों के सामने क्या विकल्प है?

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए मौजूदा स्थिति को सरल शब्दों में समझें तो OPS की वापसी का प्रस्ताव केंद्र के पास नहीं है। NPS व्यवस्था जारी है और पात्र केंद्रीय कर्मचारियों के लिए UPS एक विकल्प के रूप में मौजूद है।

2025 में सरकार ने UPS के implementation rules भी अधिसूचित किए। इनमें qualifying service, voluntary retirement और assured payout से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।

इसलिए कर्मचारियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वे अपनी सेवा अवधि, नियुक्ति की तारीख और लागू नियमों के आधार पर अपनी पेंशन व्यवस्था को समझें।

सरकार बनाम कर्मचारी संगठन की बहस जारी

OPS की मांग अभी खत्म नहीं हुई है। कर्मचारी संगठनों का कहना है कि पुरानी पेंशन की तरह निश्चित और पूरी तरह सुरक्षित व्यवस्था ही रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा दे सकती है।

वहीं केंद्र सरकार का तर्क है कि पुरानी व्यवस्था का पूरा वित्तीय भार सरकार पर पड़ता है और लंबे समय में ऐसी व्यवस्था सरकारी वित्त पर दबाव डाल सकती है। इसी कारण केंद्र ने OPS को वापस लाने के बजाय UPS के जरिए assured pension का रास्ता चुना है।

केंद्रीय कर्मचारियों के लिए OPS की वापसी पर फिलहाल केंद्र सरकार का जवाब साफ है—ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है। मार्च 2026 के संसदीय जवाब में भी केंद्र ने यही रुख दोहराया है।

इसके बजाय सरकार UPS को पेंशन सुरक्षा का विकल्प बता रही है, जिसमें 25 साल की qualifying service पर अंतिम 12 महीनों के औसत मूल वेतन का 50 प्रतिशत assured payout, न्यूनतम 10,000 रुपये की पेंशन, 60 प्रतिशत family pension, महंगाई राहत और ग्रेच्युटी के अतिरिक्त lump-sum benefit जैसे प्रावधान हैं।

अब आने वाले समय में असली सवाल यह होगा कि क्या UPS कर्मचारियों की उस चिंता को पूरी तरह दूर कर पाएगा, जिसके कारण वे वर्षों से OPS की वापसी की मांग कर रहे हैं। फिलहाल केंद्र की दिशा स्पष्ट है—OPS नहीं, बल्कि UPS के जरिए पेंशन सुरक्षा को मजबूत करने की कोशिश।

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