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BP चेक करते समय कहीं आप भी तो ये गलती नहीं कर रहे? एक छिपा नंबर खोल सकता है हार्ट हेल्थ का बड़ा राज!



नई दिल्ली। आज के समय में हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन की समस्या काफी आम हो गई है। यही वजह है कि बहुत से लोग घर में डिजिटल बीपी मशीन रखते हैं और समय-समय पर अपना ब्लड प्रेशर चेक करते रहते हैं। आम तौर पर मशीन पर दो नंबर दिखाई देते हैं और लोग इन्हीं दोनों नंबरों को देखकर यह तय करने की कोशिश करते हैं कि उनका बीपी सामान्य है या नहीं।

लेकिन ब्लड प्रेशर की यही रीडिंग एक और महत्वपूर्ण संख्या निकालने में मदद कर सकती है, जिसे पल्स प्रेशर (Pulse Pressure) कहा जाता है। यह कोई अलग मशीन से मापने वाली चीज नहीं है। ब्लड प्रेशर की रीडिंग के दो नंबरों की मदद से इसे आसानी से निकाला जा सकता है।

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार पल्स प्रेशर को देखकर अकेले किसी व्यक्ति की हार्ट हेल्थ का फैसला नहीं किया जा सकता। यह हृदय और रक्त वाहिकाओं की स्थिति के बारे में अतिरिक्त जानकारी देने वाला एक संकेतक है। लगातार असामान्य रीडिंग आने पर डॉक्टर मरीज की पूरी स्वास्थ्य स्थिति को देखकर इसका अर्थ समझते हैं।

क्या होता है पल्स प्रेशर?

ब्लड प्रेशर की मशीन पर दो नंबर आते हैं। ऊपर वाला नंबर सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर और नीचे वाला नंबर डायस्टोलिक ब्लड प्रेशर होता है।

सिस्टोलिक प्रेशर उस समय धमनियों में दबाव को दर्शाता है जब दिल सिकुड़कर रक्त को शरीर में पंप करता है। डायस्टोलिक प्रेशर उस समय का दबाव बताता है जब दिल धड़कनों के बीच आराम कर रहा होता है।

इन दोनों नंबरों के बीच का अंतर ही पल्स प्रेशर कहलाता है। इसे निकालने का बेहद आसान तरीका है:

पल्स प्रेशर = सिस्टोलिक BP - डायस्टोलिक BP

उदाहरण के लिए अगर किसी व्यक्ति का ब्लड प्रेशर 120/80 mmHg है, तो:

120 - 80 = 40 mmHg

इस स्थिति में पल्स प्रेशर 40 mmHg होगा। Cleveland Clinic के अनुसार लगभग 40 mmHg को सामान्य पल्स प्रेशर का उदाहरण माना जाता है, लेकिन व्यक्ति की उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार इसका अर्थ अलग हो सकता है।

पल्स प्रेशर क्यों महत्वपूर्ण है?

पल्स प्रेशर से डॉक्टरों को हृदय और धमनियों की स्थिति के बारे में अतिरिक्त जानकारी मिल सकती है। उम्र बढ़ने के साथ धमनियां कम लचीली हो सकती हैं और इस वजह से पल्स प्रेशर बढ़ सकता है।

विशेष रूप से लगातार बढ़ा हुआ पल्स प्रेशर कुछ लोगों में हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़े जोखिमों का संकेत हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि एक बार पल्स प्रेशर 50 या 60 आने पर व्यक्ति को कोई गंभीर हृदय रोग है।

कई परिस्थितियों में ब्लड प्रेशर कुछ समय के लिए बदल सकता है। तनाव, चिंता, शारीरिक गतिविधि, शरीर की स्थिति और दिन के अलग-अलग समय में भी रक्तचाप में बदलाव हो सकता है। इसलिए एक ही रीडिंग के आधार पर निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है।

60 mmHg या उससे ज्यादा आए तो क्या करें?

सोशल मीडिया और कुछ स्वास्थ्य वीडियो में 60 mmHg या उससे ज्यादा पल्स प्रेशर को लेकर चिंता जताई जाती है। लेकिन चिकित्सा दृष्टि से इसे समझना जरूरी है।

Cleveland Clinic के अनुसार 60 mmHg या उससे अधिक का पल्स प्रेशर लगातार बना रहे तो डॉक्टर से चर्चा करना उचित है। वहीं 100 mmHg से अधिक को वास्तव में बहुत ज्यादा widened pulse pressure माना जाता है।

इसलिए अगर घर पर किसी दिन ब्लड प्रेशर 130/70 आता है तो पल्स प्रेशर 60 होगा। केवल इस एक रीडिंग को देखकर यह कहना सही नहीं होगा कि व्यक्ति के दिल पर खतरनाक दबाव पड़ रहा है।

बेहतर तरीका यह है कि सही तरीके से कई दिनों तक ब्लड प्रेशर की रीडिंग ली जाए और उसका रिकॉर्ड रखा जाए। अगर पल्स प्रेशर लगातार ज्यादा बना रहता है, तो डॉक्टर से सलाह लेना चाहिए।

बढ़ा हुआ पल्स प्रेशर किन वजहों से हो सकता है?

पल्स प्रेशर उम्र के साथ बढ़ सकता है। इसका एक कारण धमनियों का कम लचीला होना भी हो सकता है। कुछ मामलों में हृदय और रक्त वाहिकाओं से जुड़ी स्थितियां भी इसके बढ़ने से संबंधित हो सकती हैं।

उदाहरण के तौर पर एओर्टिक वाल्व से जुड़ी कुछ समस्याएं, जैसे aortic regurgitation, में पल्स प्रेशर बढ़ सकता है। कुछ अन्य हृदय या रक्त वाहिका संबंधी स्थितियों में भी ऐसा देखा जा सकता है।

लेकिन यह याद रखना जरूरी है कि पल्स प्रेशर बढ़ने के पीछे हर बार गंभीर बीमारी ही जिम्मेदार हो, ऐसा नहीं है।

तनाव और चिंता के दौरान ब्लड प्रेशर अस्थायी रूप से बढ़ सकता है। इसी कारण डॉक्टर आम तौर पर एक से ज्यादा रीडिंग और मरीज की पूरी मेडिकल हिस्ट्री को ध्यान में रखते हैं।

क्या ज्यादा पल्स प्रेशर का मतलब धमनियां हार्ड हो गईं?

यह दावा अक्सर सोशल मीडिया पर सुनने को मिलता है कि पल्स प्रेशर बढ़ने का मतलब सीधे तौर पर धमनियां हार्ड हो रही हैं। इसमें कुछ वैज्ञानिक आधार जरूर है, क्योंकि arterial stiffness बढ़ने पर पल्स प्रेशर बढ़ सकता है। American Heart Association की सामग्री भी कम लचीली एओर्टा और widened pulse pressure के बीच संबंध को दर्शाती है।

लेकिन केवल घर की एक BP रीडिंग से किसी व्यक्ति में arterial stiffness की पुष्टि नहीं की जा सकती।

इसके लिए डॉक्टर उम्र, ब्लड प्रेशर का इतिहास, डायबिटीज, किडनी की बीमारी, कोलेस्ट्रॉल, धूम्रपान, वजन और अन्य जोखिम कारकों को देखते हैं। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त जांच भी कराई जा सकती है।

कम पल्स प्रेशर भी हो सकता है संकेत

जहां ज्यादा पल्स प्रेशर पर ध्यान देना जरूरी है, वहीं बहुत कम पल्स प्रेशर भी कुछ परिस्थितियों में महत्वपूर्ण हो सकता है।

Cleveland Clinic के अनुसार जब पल्स प्रेशर सिस्टोलिक प्रेशर के लगभग एक-चौथाई या उससे कम हो, तो इसे narrow pulse pressure कहा जाता है। यह कम cardiac output, गंभीर रक्तस्राव या कुछ हृदय संबंधी स्थितियों में देखा जा सकता है।

उदाहरण के तौर पर यदि किसी व्यक्ति का BP 80/65 है, तो पल्स प्रेशर सिर्फ 15 mmHg होगा। ऐसी रीडिंग के साथ अगर चक्कर, कमजोरी, बेहोशी, सांस लेने में परेशानी या अन्य गंभीर लक्षण हों तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता की जरूरत हो सकती है।

घर पर BP कैसे सही तरीके से चेक करें?

पल्स प्रेशर की गणना तभी उपयोगी होगी जब ब्लड प्रेशर की मूल रीडिंग सही हो।

BP चेक करने से पहले कुछ मिनट शांत बैठना चाहिए। हाथ को उचित स्थिति में रखना और सही आकार का कफ इस्तेमाल करना महत्वपूर्ण है।

यदि पहली रीडिंग सामान्य से बहुत अलग आती है तो कुछ मिनट आराम करने के बाद दोबारा रीडिंग ली जा सकती है। Cleveland Clinic की सलाह के अनुसार घर पर BP मॉनिटर करते समय सुबह और शाम रीडिंग लेना और प्रत्येक अवसर पर कम से कम दो रीडिंग लेना उपयोगी हो सकता है।

हर रीडिंग का समय, सिस्टोलिक BP, डायस्टोलिक BP और पल्स रेट लिखकर रखना डॉक्टर के लिए भी उपयोगी हो सकता है।

सिर्फ पल्स प्रेशर देखकर दवा न बदलें

यह सबसे महत्वपूर्ण सावधानी है। यदि किसी व्यक्ति का पल्स प्रेशर बढ़ा हुआ दिखाई देता है तो उसे अपनी BP की दवा खुद से बंद या बदलनी नहीं चाहिए।

ब्लड प्रेशर की दवाएं डॉक्टर द्वारा मरीज की स्थिति के अनुसार निर्धारित की जाती हैं। इसी तरह किसी सोशल मीडिया वीडियो के आधार पर खुद को हृदय रोगी मान लेना भी सही नहीं है।

अगर लगातार कई दिनों तक BP या पल्स प्रेशर सामान्य से अलग दिखाई दे रहा है तो डॉक्टर को रिकॉर्ड दिखाना बेहतर रहेगा।

कब तुरंत चिकित्सा सहायता जरूरी है?

यदि ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा हो और साथ में सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, कमजोरी, बोलने में दिक्कत, दृष्टि में बदलाव या गंभीर सिरदर्द जैसे लक्षण हों तो इसे सामान्य BP समस्या समझकर घर पर इंतजार नहीं करना चाहिए।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार 180 mmHg से अधिक सिस्टोलिक या 120 mmHg से अधिक डायस्टोलिक BP गंभीर स्थिति हो सकती है, खासकर जब इसके साथ ऐसे लक्षण मौजूद हों।

आखिर कितना पल्स प्रेशर रखें ध्यान में?

पल्स प्रेशर का एक सामान्य उदाहरण 40 mmHg है, लेकिन इसे हर व्यक्ति के लिए कठोर लक्ष्य नहीं माना जाना चाहिए। उम्र, स्वास्थ्य और दूसरी चिकित्सकीय परिस्थितियां इसके अर्थ को बदल सकती हैं।

अगर कभी-कभार पल्स प्रेशर 50 या 60 mmHg आता है तो तुरंत घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन यदि यह लगातार ऊंचा बना हुआ है, खासकर 60 mmHg या उससे अधिक, तो डॉक्टर से चर्चा करना उचित है।

घर पर ब्लड प्रेशर चेक करते समय सिर्फ ऊपर और नीचे के नंबर देखकर मशीन रख देना पर्याप्त नहीं है। उन्हीं दो नंबरों से पल्स प्रेशर भी निकाला जा सकता है, जो हृदय और रक्त वाहिकाओं की स्थिति के बारे में अतिरिक्त जानकारी दे सकता है।

लेकिन पल्स प्रेशर कोई अकेला हार्ट टेस्ट नहीं है। 40 mmHg को सामान्य उदाहरण माना जाता है, जबकि लगातार 60 mmHg या उससे अधिक आने पर डॉक्टर से सलाह लेना उचित है। एक रीडिंग के आधार पर बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।

नियमित BP मॉनिटरिंग, सही तरीके से रीडिंग लेना, उसका रिकॉर्ड रखना और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सलाह लेना ही हार्ट हेल्थ की निगरानी का सुरक्षित तरीका है।

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