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दिल्ली में चुपके-चुपके बढ़ रहा H1N1 का खतरा! 1,777 केस के बाद स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, क्या आने वाला है बड़ा संकट?



नई दिल्ली: दिल्ली में इन दिनों इन्फ्लुएंजा यानी फ्लू के मामलों में बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। राजधानी में इस साल अब तक 1,777 H1N1 मामलों की पुष्टि हो चुकी है। बढ़ते मामलों को देखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को स्थिति की समीक्षा की और अस्पतालों तथा स्वास्थ्य अधिकारियों को निगरानी, समय पर जांच और उपचार व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए।

स्वास्थ्य विभाग के लिए चिंता की बात यह है कि केवल एक दिन में दिल्ली में 159 नए इन्फ्लुएंजा मामले सामने आए, जिनमें 114 H1N1 संक्रमण के थे। उस दिन सामने आए नए फ्लू मामलों में H1N1 की हिस्सेदारी करीब 72 प्रतिशत रही। कुल मिलाकर दिल्ली में इस साल इन्फ्लुएंजा के 2,602 मामले दर्ज किए जा चुके हैं।

अचानक क्यों बढ़ रहे हैं H1N1 के मामले?

H1N1 इन्फ्लुएंजा वायरस से होने वाला संक्रमण है। इसे आम बोलचाल में स्वाइन फ्लू भी कहा जाता है। इसके लक्षण कई बार सामान्य वायरल या सर्दी-जुकाम जैसे दिखाई दे सकते हैं, जिसके कारण शुरुआत में लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने मौजूदा स्थिति को देखते हुए इन्फ्लुएंजा जैसी बीमारी यानी ILI और गंभीर श्वसन संक्रमण यानी SARI के मामलों पर निगरानी बढ़ाने को कहा है। अस्पतालों में जांच और प्रयोगशाला निगरानी की स्थिति की भी समीक्षा की गई है।

अस्पतालों में बेड और ऑक्सीजन की तैयारी पर नजर

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री की समीक्षा बैठक में केवल मरीजों की संख्या पर चर्चा नहीं हुई, बल्कि अस्पतालों की तैयारियों का भी जायजा लिया गया। इसमें सामान्य बेड, गंभीर मरीजों के लिए क्रिटिकल केयर बेड, ऑक्सीजन सपोर्ट वाले बेड, वेंटिलेटर, दवाओं और डायग्नोस्टिक सुविधाओं की उपलब्धता शामिल रही।

अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया कि यदि मरीजों की संख्या अचानक बढ़ती है तो अस्पतालों के पास अतिरिक्त क्षमता मौजूद हो। गंभीर मरीजों को जरूरत पड़ने पर बेहतर चिकित्सा सुविधा वाले अस्पताल तक पहुंचाने की व्यवस्था भी सुचारू रखने पर जोर दिया गया।

इसका मतलब है कि स्वास्थ्य विभाग केवल मौजूदा मामलों का इलाज करने के बजाय संभावित बढ़ोतरी के लिए भी तैयारी कर रहा है।

H1N1 और सामान्य सर्दी-जुकाम में क्या अंतर है?

फ्लू और सामान्य सर्दी-जुकाम को एक जैसा समझना खतरनाक हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, इन्फ्लुएंजा कुछ मरीजों में गंभीर बीमारी का रूप ले सकता है और निमोनिया जैसी जटिलताएं पैदा कर सकता है।

विशेष रूप से बुजुर्गों और पहले से स्वास्थ्य संबंधी जोखिम वाले लोगों में गंभीर बीमारी का खतरा अधिक हो सकता है। इसलिए लंबे समय तक बने रहने वाले या गंभीर श्वसन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

H1N1 के कौन-कौन से लक्षण दिखाई दे सकते हैं?

इन्फ्लुएंजा में आम तौर पर अचानक बुखार, खांसी, गले में खराश, शरीर में दर्द, कमजोरी और थकान जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ लोगों में सिरदर्द और अन्य श्वसन संबंधी परेशानियां भी हो सकती हैं।

हर मरीज में सभी लक्षण एक जैसे नहीं होते। कुछ लोगों में बीमारी हल्की रह सकती है, जबकि कुछ मरीजों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है।

अगर बुखार या सांस से जुड़ी समस्या लगातार बनी रहती है, सांस लेने में कठिनाई होती है या हालत तेजी से बिगड़ती है, तो डॉक्टर से जल्द संपर्क करना जरूरी है।

फ्लू वैक्सीन को लेकर क्या कहा गया?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, मौसमी फ्लू वैक्सीन H1N1, H3N2 और इन्फ्लुएंजा B सहित कई प्रमुख इन्फ्लुएंजा वायरस के खिलाफ सुरक्षा प्रदान करने के लिए तैयार की जाती है।

विशेषज्ञों ने बताया कि फ्लू वायरस समय के साथ अपने कुछ हिस्सों में बदलाव करता रहता है। इसी वजह से वैक्सीन के फॉर्मूलेशन को भी समय-समय पर अपडेट किया जाता है।

हालांकि, वैक्सीन संक्रमण को हर स्थिति में पूरी तरह रोक दे, यह जरूरी नहीं है। लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार टीकाकरण गंभीर बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।

स्वास्थ्य मंत्री ने लोगों को दी सावधानी बरतने की सलाह

बढ़ते मामलों के बीच लोगों को भी सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। स्वास्थ्य मंत्री ने हाथों और श्वसन संबंधी स्वच्छता बनाए रखने तथा गंभीर या लगातार बने रहने वाले लक्षणों में जल्द चिकित्सा सलाह लेने पर जोर दिया।

भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी रखना, खांसते या छींकते समय मुंह-नाक ढकना और बीमार होने पर दूसरों के बेहद करीब जाने से बचना संक्रमण के प्रसार को कम करने में मदद कर सकता है।

किन लोगों को ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?

फ्लू किसी भी व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन गंभीर बीमारी का खतरा कुछ समूहों में अधिक हो सकता है। इनमें बुजुर्ग और कमजोर प्रतिरक्षा वाले लोग शामिल हो सकते हैं।

ऐसे लोगों में फ्लू के लक्षण दिखाई देने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना ज्यादा सुरक्षित है। खासकर अगर मरीज को सांस लेने में परेशानी, लगातार तेज बुखार या हालत बिगड़ने जैसे संकेत दिखाई दें।

दिल्ली में निगरानी क्यों बढ़ाई जा रही है?

दिल्ली में इस साल 1,777 H1N1 मामलों की पुष्टि और एक दिन में 114 नए H1N1 मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य व्यवस्था की निगरानी बढ़ाना महत्वपूर्ण हो गया है।

सरकार ने पहले भी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तीव्र श्वसन बीमारी के मामलों पर निगरानी और तैयारी मजबूत करने के लिए कहा था। अब दिल्ली में बढ़ते मामलों के बीच अस्पतालों की क्षमता और जांच व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

आगे क्या होगा?

फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की नजर नए मामलों की संख्या, गंभीर मरीजों की स्थिति और अस्पतालों में उपलब्ध संसाधनों पर बनी हुई है। यदि संक्रमण के मामले आगे भी बढ़ते हैं तो अतिरिक्त चिकित्सा क्षमता की जरूरत पड़ सकती है।

विशेषज्ञों की सलाह है कि लोग H1N1 को लेकर अनावश्यक घबराहट न फैलाएं, लेकिन लक्षणों को नजरअंदाज भी न करें। सामान्य सावधानी, साफ-सफाई, जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच और गंभीर लक्षणों में समय पर इलाज संक्रमण से होने वाली जटिलताओं को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

फिलहाल दिल्ली में H1N1 के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य विभाग को सतर्क कर दिया है। 1,777 पुष्ट मामलों के बीच अब सबसे बड़ी चुनौती संक्रमण की निगरानी, गंभीर मरीजों की समय पर पहचान और अस्पतालों में पर्याप्त उपचार क्षमता बनाए रखना है।

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