अस्पताल में छिपा था डेंगू का खौफनाक राज! कबाड़ के टायरों में मिला ऐसा खतरा, खुलासा होते ही मचा हड़कंप
चंडीगढ़: डेंगू का खतरा आमतौर पर घरों, खाली प्लॉटों और जमा पानी वाली जगहों से जोड़ा जाता है, लेकिन पंजाब के मोहाली से सामने आई एक घटना ने स्वास्थ्य व्यवस्था के बीच भी चिंता पैदा कर दी है। सिविल अस्पताल परिसर में रखे कबाड़ के पुराने वाहन टायरों में जमा बारिश के पानी के अंदर डेंगू मच्छर के लार्वा मिले हैं। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शुक्रवार को एंटी-डेंगू निरीक्षण के दौरान इन लार्वा की पहचान की, जिसके बाद प्रभावित जगह पर तत्काल कीटनाशक का छिड़काव कराया गया।
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब मानसून के दौरान जगह-जगह पानी जमा होने से मच्छरों के प्रजनन का खतरा बढ़ जाता है। स्वास्थ्य विभाग पहले से ही मोहाली जिले में डेंगू की रोकथाम के लिए घर-घर सर्वे और विभिन्न संस्थानों का निरीक्षण कर रहा है। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर ही मच्छरों के पनपने की जगह मिलना यह सवाल खड़ा करता है कि अगर स्वास्थ्य संस्थानों में ही पानी जमा होने वाली चीजों की नियमित जांच नहीं हुई तो संक्रमण रोकने की कोशिश कितनी प्रभावी होगी।
अस्पताल परिसर में कहां मिला डेंगू का लार्वा?
रिपोर्ट के मुताबिक, मोहाली सिविल अस्पताल में एंटी-डेंगू निरीक्षण के दौरान स्वास्थ्य टीम को पुराने और कबाड़ में रखे वाहन टायरों में बारिश का पानी जमा मिला। इसी पानी में डेंगू मच्छर के लार्वा पाए गए।
पुराने टायर मच्छरों के लिए खास तौर पर जोखिम वाली जगह बन सकते हैं, क्योंकि बारिश के बाद उनमें थोड़ी मात्रा में पानी भी लंबे समय तक जमा रह सकता है। यदि यह पानी कई दिनों तक नहीं हटाया जाए तो मच्छरों के प्रजनन की संभावना बढ़ जाती है।
स्वास्थ्य टीम ने लार्वा मिलने के बाद प्रभावित क्षेत्र में कीटनाशक का छिड़काव किया। अस्पताल प्रशासन को भी ऐसी वस्तुओं को हटाने और यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई कि भविष्य में उनमें पानी जमा न हो।
शुक्रवार को चला विशेष एंटी-डेंगू अभियान
यह निरीक्षण पंजाब सरकार के “हर शुक्रवार डेंगू ’ते वार” अभियान के तहत किया गया था। इसके अंतर्गत स्वास्थ्य विभाग की टीमें मोहाली में सरकारी और निजी अस्पतालों समेत अलग-अलग स्थानों पर जाकर मच्छरों के प्रजनन की संभावित जगहों की जांच कर रही हैं।
टीमों ने केवल टायरों की ही जांच नहीं की, बल्कि फूलों के गमले, कूलर, फ्रिज, पानी के कंटेनर, कबाड़ और ऐसी दूसरी जगहों को भी देखा जहां बारिश या अन्य कारणों से पानी जमा हो सकता है।
इस अभियान का मकसद मच्छर पैदा होने के बाद उन्हें खत्म करने से पहले उनके प्रजनन स्थलों की पहचान करना है। यानी जहां पानी जमा है, वहां मच्छर पैदा होने की संभावना को ही खत्म करने पर जोर दिया जा रहा है।
कुछ बूंद पानी भी बन सकती हैं खतरा
डेंगू की रोकथाम में सबसे बड़ी चुनौती यह है कि मच्छरों के प्रजनन के लिए बहुत ज्यादा पानी की जरूरत नहीं होती। घरों और संस्थानों में रखे छोटे कंटेनर, गमले, पुराने टायर, कूलर या अन्य सामान में जमा पानी भी समस्या बन सकता है।
स्वास्थ्य अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि डेंगू के लार्वा कुछ ही दिनों में वयस्क मच्छरों में विकसित हो सकते हैं। इसलिए बारिश के बाद जमा पानी को लंबे समय तक छोड़ना जोखिम बढ़ा सकता है।
यही कारण है कि स्वास्थ्य विभाग लोगों से अपने आसपास पानी जमा न होने देने की अपील कर रहा है।
घर ही नहीं, अस्पतालों की भी जिम्मेदारी
डेंगू की रोकथाम में अक्सर लोगों से अपने घरों की सफाई रखने और पानी जमा न होने देने की अपील की जाती है। लेकिन मोहाली की घटना यह भी दिखाती है कि अस्पताल, स्कूल, कार्यालय और सार्वजनिक संस्थान भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं।
अस्पतालों में रोजाना बड़ी संख्या में मरीज और उनके परिवार आते हैं। ऐसे स्थान पर मच्छरों का प्रजनन स्थल मिलना स्वास्थ्य के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय हो सकता है।
इसलिए अस्पताल परिसर में कबाड़, पुराने टायर, टूटे कंटेनर और अन्य ऐसी चीजों की नियमित जांच जरूरी है जिनमें बारिश का पानी जमा हो सकता है।
स्वास्थ्य विभाग ने बढ़ाई निगरानी
मोहाली के जिला स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, जिले में कई सप्ताह से एंटी-डेंगू अभियान, घर-घर सर्वे और निरीक्षण जारी हैं। निरीक्षण के दौरान जहां भी नियमों का उल्लंघन पाया जा रहा है, वहां चालान भी किए जा रहे हैं।
इसका उद्देश्य सिर्फ अस्पताल या किसी एक इलाके में मच्छरों को नियंत्रित करना नहीं है, बल्कि पूरे जिले में संभावित प्रजनन स्थलों को खत्म करना है।
मानसून के दौरान यह निगरानी इसलिए महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि बारिश के बाद जमा पानी कई जगहों पर मच्छरों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर सकता है।
डेंगू कैसे फैलता है?
डेंगू एक वायरल संक्रमण है जो मुख्य रूप से Aedes aegypti मच्छर के काटने से फैलता है। यह मच्छर संक्रमित व्यक्ति से वायरस लेकर दूसरे व्यक्ति तक पहुंचा सकता है।
डेंगू के सामान्य लक्षणों में तेज बुखार, तेज सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, आंखों के पीछे दर्द, मतली और उल्टी शामिल हो सकती है। गंभीर मामलों में नाक, मुंह या मसूड़ों से खून आने जैसी समस्या भी हो सकती है।
हालांकि, हर बुखार डेंगू नहीं होता। लक्षण दिखाई देने पर उचित जांच और चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
डेंगू के लक्षण दिखें तो क्या करें?
अगर किसी व्यक्ति को तेज बुखार के साथ शरीर में दर्द, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द या अन्य संबंधित लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। खासकर यदि मरीज की हालत बिगड़ रही हो या रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सा सहायता जरूरी है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू की जांच और इलाज की सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध हैं। मोहाली में स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और सहायता के लिए विभाग ने 104 हेल्पलाइन का भी उल्लेख किया है।
अपने घर में इन जगहों की जरूर करें जांच
डेंगू से बचाव के लिए लोगों को सप्ताह में कम से कम एक बार अपने आसपास की ऐसी जगहों की जांच करनी चाहिए जहां पानी जमा हो सकता है।
खास तौर पर:
पुराने टायरों में पानी जमा न होने दें।
कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें और उसकी सफाई करें।
गमलों और उनके नीचे रखी प्लेटों में पानी जमा न रहने दें।
खुले पानी के कंटेनरों को ढककर रखें।
घर के आसपास कबाड़ या ऐसी वस्तुएं न रखें जिनमें बारिश का पानी रुक सकता है।
छत और बालकनी में जमा पानी को तुरंत हटाएं।
इन छोटे कदमों से मच्छरों के प्रजनन की संभावना कम की जा सकती है।
अस्पताल में लार्वा मिलने से क्या संदेश?
मोहाली सिविल अस्पताल में डेंगू मच्छर के लार्वा मिलना सिर्फ एक स्थानीय घटना नहीं है। यह एक महत्वपूर्ण चेतावनी भी है कि डेंगू की रोकथाम के लिए सिर्फ मरीजों का इलाज करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि मच्छरों के प्रजनन स्थल को खत्म करना भी जरूरी है।
अगर अस्पताल जैसे संस्थान में पुराने टायरों में जमा पानी स्वास्थ्य टीम की जांच में सामने आ सकता है, तो घरों और आसपास की छोटी-छोटी जगहों पर भी ऐसी अनदेखी संभव है।
यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार निरीक्षण और लोगों की भागीदारी दोनों जरूरी हैं।
मानसून में सावधानी सबसे बड़ा बचाव
डेंगू के खिलाफ लड़ाई में सबसे प्रभावी कदमों में से एक है मच्छरों को पैदा होने से रोकना। बारिश के बाद घर, अस्पताल, स्कूल या किसी भी सार्वजनिक जगह पर पानी जमा होने पर उसे जल्द से जल्द हटाना चाहिए।
मोहाली की घटना में स्वास्थ्य टीम ने लार्वा मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई की, लेकिन यह मामला यह भी बताता है कि डेंगू का खतरा हमेशा बाहर से नहीं आता—कभी-कभी लापरवाही से जमा हुआ कुछ पानी भी इसके लिए पर्याप्त हो सकता है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और एंटी-डेंगू अभियान जारी है। लोगों से अपील है कि वे अपने घर और आसपास पानी जमा न होने दें और डेंगू जैसे लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लें।

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