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स्कूल बना दिया… सड़क बनाना भूल गया सिस्टम! हाथ में किताब-चप्पल, पैरों के नीचे कीचड़-पानी; बिहार के बच्चों की दर्दनाक तस्वीर ने खोली विकास की पोल



बिहार के बसमतिया शेख टोला, वार्ड नंबर-01 से सामने आई तस्वीरें सरकारी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं। यहां बच्चों के लिए मध्य विद्यालय की इमारत तो बन गई, लेकिन स्कूल तक पहुंचने के लिए बेहतर सड़क की व्यवस्था नहीं होने का आरोप है। नतीजा यह है कि मासूम बच्चों को हाथों में किताब-कॉपी और चप्पल लेकर कीचड़ और पानी से भरे रास्ते से होकर स्कूल जाना पड़ रहा है।

स्थानीय लोगों की ओर से सामने आए वीडियो और तस्वीरों में बच्चों की परेशानी साफ दिखाई देती है। कहीं रास्ते पर पानी जमा है तो कहीं घुटनों तक कीचड़ नजर आ रहा है। स्कूल जाने वाले बच्चों को इस मुश्किल रास्ते से रोजाना गुजरना पड़ता है। बारिश के दिनों में समस्या और गंभीर हो जाती है।

स्कूल की इमारत बनी, लेकिन रास्ते की समस्या बरकरार

बसमतिया शेख टोला में मध्य विद्यालय का निर्माण होने के बाद उम्मीद थी कि आसपास के बच्चों को पढ़ाई के लिए बेहतर सुविधा मिलेगी। स्कूल की इमारत तैयार होने से बच्चों को शिक्षा का अवसर तो मिला, लेकिन विद्यालय तक पहुंचने वाले रास्ते की स्थिति ने पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि स्कूल तक पहुंचने के लिए सुरक्षित और पक्का रास्ता ही नहीं है तो बच्चों के लिए बनाई गई स्कूल की सुविधा अधूरी रह जाती है। बारिश के मौसम में कच्चा रास्ता कीचड़ में तब्दील हो जाता है और जगह-जगह पानी भर जाता है।

हाथ में चप्पल, कंधे पर किताबें और सामने कीचड़

वायरल तस्वीरों में सबसे परेशान करने वाला दृश्य बच्चों का है। बच्चे अपने हाथों में चप्पल और किताबें लेकर पानी और कीचड़ से भरे रास्ते से गुजरते दिखाई दे रहे हैं।

बच्चों को इस तरह स्कूल जाना पड़ रहा है ताकि उनकी चप्पल और कपड़े कीचड़ में खराब न हों। कई जगह पानी जमा होने के कारण उन्हें रास्ता तलाशकर आगे बढ़ना पड़ता है। छोटे बच्चों के लिए यह स्थिति और भी मुश्किल बन जाती है।

बारिश में बढ़ जाती है परेशानी

बारिश के दौरान ग्रामीण इलाकों में जलभराव और कीचड़ की समस्या आम है, लेकिन स्कूल जाने वाले बच्चों के लिए यह गंभीर समस्या बन सकती है। गंदे पानी और कीचड़ से होकर गुजरने के कारण बच्चों के कपड़े और जूते खराब होने के साथ-साथ उनके फिसलकर गिरने का खतरा भी बना रहता है।

स्थानीय लोगों का सवाल है कि जब स्कूल का निर्माण कराया गया, तो विद्यालय तक पहुंचने वाले रास्ते को लेकर पहले से योजना क्यों नहीं बनाई गई। स्कूल भवन के साथ सड़क और जलनिकासी जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी प्राथमिकता देने की जरूरत थी।

स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

स्कूल तक खराब रास्ते की तस्वीरें सामने आने के बाद स्थानीय स्तर पर व्यवस्था को लेकर नाराजगी देखने को मिल रही है। लोगों का कहना है कि बच्चों को शिक्षा का अधिकार देने के लिए सिर्फ स्कूल की इमारत बना देना पर्याप्त नहीं है। बच्चों के सुरक्षित तरीके से विद्यालय तक पहुंचने की व्यवस्था करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।

स्थानीय लोगों ने सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि स्कूल तक जाने वाले रास्ते की स्थिति का तत्काल निरीक्षण कराया जाए और जलभराव तथा कीचड़ की समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।

सम्राट चौधरी से भी पूछा गया सवाल

इस मामले को लेकर स्थानीय स्तर पर सम्राट चौधरी से भी सवाल किया जा रहा है कि जब क्षेत्र में मध्य विद्यालय का निर्माण कराया गया है, तो बच्चों के स्कूल पहुंचने के लिए सड़क की व्यवस्था क्यों नहीं की गई।

हालांकि इस संबंध में संबंधित विभाग या प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आती है तो स्थिति का दूसरा पक्ष भी स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल सामने आई तस्वीरें बच्चों की परेशानी को जरूर उजागर कर रही हैं।

शिक्षा के साथ सुरक्षित रास्ता भी जरूरी

बच्चों के लिए स्कूल भवन, शिक्षक और किताबें जितनी जरूरी हैं, उतना ही जरूरी सुरक्षित आवागमन भी है। यदि स्कूल तक पहुंचने का रास्ता ही बारिश में कीचड़ और पानी से भर जाए तो बच्चों की नियमित पढ़ाई प्रभावित हो सकती है।

बसमतिया शेख टोला की यह तस्वीर सिर्फ एक स्कूल की समस्या नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति पर भी सवाल उठाती है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस मामले का संज्ञान लेकर स्कूल तक जाने वाले रास्ते को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाता है।

बच्चों के हाथों में किताबें हैं, पढ़ने का जज्बा है, लेकिन स्कूल तक पहुंचने के लिए उन्हें कीचड़ और पानी से जूझना पड़ रहा है। सवाल यही है—जब स्कूल बन सकता है, तो बच्चों के लिए सुरक्षित सड़क क्यों नहीं बन सकती?

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