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आखिरी मैसेज में लिखा- ‘आकर शव ले जाना’… फिर घर में मिले एक ही परिवार के 4 शव, खुला खौफनाक राज



मुंबई। दक्षिण मुंबई के नेवी नगर इलाके में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, घटना की तस्वीर और ज्यादा भयावह होती जा रही है। पोस्टमार्टम की प्राथमिक रिपोर्ट में सामने आई जानकारी ने जांच अधिकारियों के सामने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच के मुताबिक, नौसेना के जवान पूरणमल मेहरा ने कथित तौर पर पहले अपनी पत्नी ओमा और छोटे बेटे दर्श की हत्या की। इसके बाद बड़े बेटे यश को कथित रूप से जहरीला पदार्थ खिलाकर मौत के घाट उतार दिया। तीनों की मौत के बाद पूरणमल ने भी घर के लिविंग रूम में नायलॉन की रस्सी से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली।

एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत की खबर सामने आने के बाद इलाके में सनसनी फैल गई। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कफ परेड पुलिस मृत जवान के खिलाफ ही हत्या का मामला दर्ज करने की प्रक्रिया में जुटी है।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सामने आया घटनाक्रम

प्राथमिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर पुलिस को आशंका है कि परिवार के सदस्यों की मौत एक ही समय पर नहीं हुई थी। जांच में कथित तौर पर सामने आया है कि पूरणमल ने सबसे पहले अपनी पत्नी ओमा और छोटे बेटे दर्श को निशाना बनाया।

प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, दोनों का मुंह तकिये से दबाकर दम घोंटने की बात सामने आई है। इसके बाद बड़े बेटे यश को खाने के जरिए जहरीला पदार्थ दिए जाने की आशंका है। पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि जहरीला पदार्थ क्या था, वह कहां से लाया गया और उसे खाने में किस तरह मिलाया गया।

तीनों की मौत के बाद पूरणमल ने कथित तौर पर अपने जीवन का भी अंत कर लिया। पुलिस के लिए अब यह पता लगाना महत्वपूर्ण है कि घटनाओं के बीच कितना समय अंतराल था और क्या पूरणमल ने इस पूरी घटना की पहले से योजना बनाई थी।

आर्थिक परेशानी और डिप्रेशन की जांच

जांच के दौरान पूरणमल की मानसिक और पारिवारिक स्थिति से जुड़े कई पहलू सामने आए हैं। जानकारी के अनुसार, नौसेना में नौकरी होने के बावजूद वह गंभीर आर्थिक परेशानियों से जूझ रहा था। इसके अलावा परिवार में तनाव और कथित तौर पर लगातार मिलने वाले तानों ने उसकी मानसिक स्थिति को प्रभावित किया था।

बताया जा रहा है कि पूरणमल पिछले करीब दो वर्षों से अपने माता-पिता से बातचीत नहीं कर रहा था। पारिवारिक विवादों और तनाव के बीच उसकी मानसिक स्थिति भी खराब होती गई।

पुलिस के मुताबिक, पिछले करीब एक साल से उसका आईएनएस अश्विनी अस्पताल में डिप्रेशन का इलाज चल रहा था। वह सिक लीव पर भी था। जांच एजेंसियां अब उसके इलाज से जुड़े रिकॉर्ड और डॉक्टरों की जानकारी भी जुटा रही हैं, ताकि यह समझा जा सके कि घटना से पहले उसकी मानसिक स्थिति कैसी थी।

पहले भी दे चुका था आत्महत्या की धमकी

जांच में यह बात भी सामने आई है कि पूरणमल ने कथित तौर पर कई बार परिवार के सामने आत्महत्या करने की धमकी दी थी। हालांकि, परिवार के लोगों ने शायद यह नहीं सोचा होगा कि स्थिति इतनी गंभीर दिशा में पहुंच सकती है।

घटना से करीब 10 दिन पहले उसकी पत्नी के पिता उसे गांव ले जाने के लिए आए थे। बताया जा रहा है कि पूरणमल ने उनके साथ जाने से इनकार कर दिया था। इसी दौरान उसने अपना फोन भी तोड़ दिया था।

पुलिस अब इस घटना को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा मान रही है। अधिकारियों की कोशिश है कि घटना से पहले परिवार के भीतर क्या बातचीत हुई थी और पूरणमल की मानसिक स्थिति में अचानक क्या बदलाव आया, इसका पता लगाया जा सके।

मौत से एक दिन पहले भेजा था खौफनाक मैसेज

इस पूरे मामले में सबसे अहम सुराग पूरणमल द्वारा अपने पिता को भेजा गया एक मैसेज माना जा रहा है। घटना से करीब 24 घंटे पहले 14 अगस्त की रात लगभग 11 बजे उसने अपने पिता को वॉट्सऐप पर मैसेज भेजा था।

मैसेज में कथित तौर पर लिखा था, "आना और हमारा शव लेकर जाना।"

यह संदेश सामने आने के बाद परिवार में चिंता बढ़नी स्वाभाविक थी, लेकिन जब तक परिवार और संबंधित लोग स्थिति समझ पाते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। 15 अगस्त की सुबह पूरणमल की मां ने यह संदेश देखा और इसकी सूचना नौसेना कंट्रोल रूम को दी।

इसके बाद जब संबंधित अधिकारी और पुलिस मौके पर पहुंचे तो परिवार के चारों सदस्यों की मौत हो चुकी थी।

मोबाइल फॉर्मेट करने से गहराया रहस्य

मामले की जांच में एक और ऐसा पहलू सामने आया है, जिसने पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि घटना से पहले पूरणमल ने अपना और अपनी पत्नी का मोबाइल फोन फॉर्मेट कर दिया था।

फोन फॉर्मेट करने की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। यही कारण है कि पुलिस इस पहलू को बेहद महत्वपूर्ण मान रही है। जांच एजेंसियों को शक है कि मोबाइल में मौजूद कुछ बातचीत, मैसेज, फोटो, वीडियो या अन्य डिजिटल जानकारी घटना की वजह और उसकी तैयारी से जुड़े अहम सुराग दे सकती थी।

अब पुलिस फॉरेंसिक और साइबर विशेषज्ञों की मदद से फोन से डेटा रिकवर करने की कोशिश कर रही है। विशेषज्ञ यह पता लगाने की कोशिश करेंगे कि फोन फॉर्मेट होने के बाद कौन-कौन सी जानकारी वापस हासिल की जा सकती है।

क्या पहले से बनाई गई थी योजना?

मामले की सबसे बड़ी पहेली यही है कि क्या पूरणमल ने परिवार की हत्या और अपनी आत्महत्या की योजना पहले से बना ली थी या फिर किसी अचानक पैदा हुई मानसिक स्थिति में यह कदम उठाया गया।

पिता को घटना से एक दिन पहले भेजा गया संदेश यह संकेत देता है कि उसे अपने कदम का अंदाजा था। वहीं मोबाइल फॉर्मेट करने की जानकारी भी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण है। पुलिस अब इन दोनों घटनाओं को जोड़कर देख रही है।

अगर डिजिटल जांच से यह पता चलता है कि घटना से पहले किसी व्यक्ति से लंबी बातचीत हुई थी या किसी तरह की योजना से जुड़े दस्तावेज अथवा संदेश मौजूद थे, तो जांच को नई दिशा मिल सकती है।

परिवार और नौसेना के बीच भी जांच का दायरा

पूरणमल नौसेना में कार्यरत था, इसलिए पुलिस इस मामले में उसके पेशेवर जीवन से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर सकती है। उसकी आर्थिक स्थिति, नौकरी से जुड़ा तनाव, मेडिकल लीव, पारिवारिक संबंध और घटना से पहले की गतिविधियों को जांच के दायरे में रखा जा रहा है।

साथ ही पुलिस यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि घटना से पहले घर में कौन-कौन लोग आए थे, परिवार के सदस्यों से किसकी बातचीत हुई थी और घटना से ठीक पहले पूरणमल की गतिविधियां क्या थीं।

कई सवालों के जवाब अभी बाकी

नेवी नगर की इस घटना में फिलहाल कई सवाल ऐसे हैं, जिनके जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। परिवार के चारों सदस्यों की मौत के पीछे वास्तविक कारण क्या था? क्या आर्थिक परेशानी और डिप्रेशन ही इसकी मुख्य वजह थी? पूरणमल ने मोबाइल फॉर्मेट क्यों किए? क्या फोन से कोई महत्वपूर्ण डिजिटल सबूत मिटाने की कोशिश की गई थी? और पिता को भेजे गए आखिरी संदेश के पीछे उसकी मानसिक स्थिति क्या थी?

पुलिस इन सभी सवालों के जवाब तलाश रही है। पोस्टमार्टम की प्राथमिक जानकारी से घटनाक्रम की शुरुआती तस्वीर सामने आई है, लेकिन अंतिम निष्कर्ष के लिए फॉरेंसिक रिपोर्ट, साइबर जांच और अन्य साक्ष्यों का इंतजार किया जा रहा है।

फिलहाल नेवी नगर का यह मामला एक परिवार के भीतर लंबे समय से चल रहे तनाव, मानसिक परेशानी और कथित आर्थिक दबाव के बेहद दुखद परिणाम के रूप में सामने आया है। पुलिस की जांच अब इस बात पर केंद्रित है कि घटना से पहले आखिर क्या हुआ था और क्या इस त्रासदी को टाला जा सकता था।

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