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सोना खरीदने से पहले रुकिए! दाम में आया बड़ा बदलाव, आगे तेजी होगी या फिर गिरेगा भाव?



नई दिल्ली, 18 अगस्त 2026। सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए मंगलवार का दिन उतार-चढ़ाव भरा रहा। घरेलू वायदा बाजार यानी एमसीएक्स पर मंगलवार दोपहर तक दोनों कीमती धातुओं में गिरावट देखने को मिली। उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार, MCX पर सोना करीब 1,55,174 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा था, जबकि चांदी करीब 2,35,078 रुपये प्रति किलोग्राम पर थी। पिछले बंद भाव की तुलना में सोने में करीब 766 रुपये और चांदी में करीब 2,970 रुपये की गिरावट दर्ज की गई।

सोने-चांदी में यह कमजोरी ऐसे समय आई है, जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में निवेशक अमेरिकी ब्याज दरों की दिशा और अमेरिकी फेडरल रिजर्व के अगले फैसले को लेकर सतर्क हैं। दूसरी ओर, बढ़ती तेल कीमतों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में मजबूती ने भी सोने जैसे गैर-ब्याज देने वाले निवेश पर दबाव बनाया है।

सोना 1.55 लाख रुपये के नीचे फिसला

मंगलवार को घरेलू बाजार में सोने की कीमतों पर दबाव साफ दिखाई दिया। एमसीएक्स पर सोने का भाव 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बना रहा और एक समय यह इस महत्वपूर्ण स्तर के नीचे भी कारोबार करता नजर आया। बाजार में निवेशकों की नजर अब अमेरिकी फेड की जुलाई बैठक के मिनट्स पर है, क्योंकि इससे आने वाले महीनों में ब्याज दरों को लेकर संकेत मिल सकते हैं।

सोने के लिए ब्याज दरों की दिशा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। जब बाजार में ब्याज दरों में कटौती या दरों में नरमी की उम्मीद बढ़ती है, तो सोने को समर्थन मिल सकता है। इसके उलट, बॉन्ड यील्ड बढ़ने और ब्याज दरें ऊंची रहने की संभावना से सोने पर दबाव आ सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी मंगलवार को सोने में कमजोरी दर्ज हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, स्पॉट गोल्ड करीब 0.4 प्रतिशत नीचे आकर 4,397 डॉलर प्रति औंस के आसपास रहा, जबकि अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स में भी गिरावट देखी गई।

चांदी में सोने से ज्यादा गिरावट

चांदी की चाल मंगलवार को और ज्यादा कमजोर रही। घरेलू एमसीएक्स बाजार में चांदी करीब 2.35 लाख रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास कारोबार करती दिखाई दी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, चांदी पिछले बंद भाव से करीब 2,970 रुपये नीचे थी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी दबाव में रही और इसमें करीब 0.7 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। चांदी की कीमतों पर निवेश मांग के साथ-साथ औद्योगिक मांग का भी असर पड़ता है। इसलिए वैश्विक आर्थिक गतिविधियों, डॉलर की चाल और औद्योगिक क्षेत्र की मांग में बदलाव का असर चांदी पर तेजी से दिखाई दे सकता है।

चांदी की कीमत पिछले कुछ समय में काफी ऊंचे स्तरों तक पहुंच चुकी है। ऐसे में ऊंचे भाव पर मुनाफावसूली भी कीमतों में अचानक गिरावट की वजह बन सकती है।

खुदरा बाजार में भी असर

एमसीएक्स पर कीमतों में गिरावट का असर खुदरा बाजार में भी देखने को मिल सकता है। हालांकि, सराफा बाजार में ग्राहकों को मिलने वाला अंतिम भाव केवल अंतरराष्ट्रीय कीमत या एमसीएक्स रेट पर निर्भर नहीं करता। इसमें स्थानीय बाजार की स्थिति, शुद्धता, मेकिंग चार्ज, टैक्स और अन्य लागत शामिल हो सकती हैं।

मंगलवार को खुदरा बाजार में 24 कैरेट सोने का भाव लगभग 1.55 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास बताया गया। उपलब्ध खुदरा आंकड़ों में पिछले दिन की तुलना में 24 कैरेट सोने की कीमत में भी कमी दिखाई गई।

इसलिए अगर कोई ग्राहक सोना या चांदी खरीदने की तैयारी कर रहा है तो केवल एक वेबसाइट या एक बाजार भाव देखकर फैसला करने के बजाय स्थानीय ज्वेलर से उस समय का अंतिम बिक्री भाव जरूर पूछना चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कहानी थोड़ी अलग

दिलचस्प बात यह है कि घरेलू बाजार में मंगलवार को सोने में गिरावट आई, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाल की तस्वीर पूरी तरह कमजोर नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार, अगस्त में अंतरराष्ट्रीय सोने की कीमतों में करीब 9 प्रतिशत की रिकवरी हुई और कीमत लगभग 4,400 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंची। इससे पता चलता है कि निवेशकों की सोने में रुचि पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।

हालांकि, विशेषज्ञों के सामने कुछ जोखिम भी हैं। सोना हाल की तेजी के बाद तकनीकी रूप से ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है। ऐसे में अगर निवेशक मुनाफावसूली करते हैं या अमेरिकी डॉलर और बॉन्ड यील्ड मजबूत होती है, तो सोने में फिर दबाव बन सकता है।

फेड के फैसले पर टिकी बाजार की नजर

फिलहाल सोने और चांदी के निवेशकों की निगाह अमेरिकी फेडरल रिजर्व पर टिकी हुई है। बाजार यह समझने की कोशिश कर रहा है कि आने वाले समय में अमेरिकी केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को लेकर क्या रुख अपनाएगा।

कम ब्याज दरें आम तौर पर सोने के लिए सकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि इससे बिना ब्याज वाले सोने को रखने की अवसर लागत घटती है। इसके विपरीत, ऊंची ब्याज दरें और बढ़ती ट्रेजरी यील्ड सोने की मांग पर दबाव डाल सकती हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर में फेड के ब्याज दरों को स्थिर रखने की संभावना को लेकर बाजार में उम्मीद बनी हुई है। हालांकि, अंतिम दिशा आगामी आर्थिक आंकड़ों और फेड अधिकारियों के संकेतों पर निर्भर करेगी।

तेल की कीमतें भी बन सकती हैं बड़ा फैक्टर

सोने की कीमतों के लिए इस समय कच्चे तेल की चाल भी महत्वपूर्ण हो गई है। तेल की कीमतों में तेजी से महंगाई का दबाव बढ़ सकता है। इससे केंद्रीय बैंकों के लिए ब्याज दरों में जल्द कटौती करना मुश्किल हो सकता है।

मंगलवार को बढ़ती तेल कीमतों और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड ने सोने पर दबाव बनाया। इसके अलावा भू-राजनीतिक तनाव भी बाजार की दिशा बदल सकता है।

यानी आने वाले दिनों में सोने की कीमत केवल घरेलू मांग से तय नहीं होगी। अमेरिकी डॉलर, फेड की नीति, तेल की कीमत, वैश्विक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीद जैसे कई कारक मिलकर बाजार की दिशा तय करेंगे।

क्या अभी सोना-चांदी खरीदना सही रहेगा?

सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए मौजूदा स्थिति में जल्दबाजी से बचना जरूरी है। दोनों धातुओं की कीमतें पहले ही काफी ऊंचे स्तर पर हैं और बाजार में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। ऐसे में निवेश का फैसला व्यक्ति के उद्देश्य, समय अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता के आधार पर किया जाना चाहिए।

अगर उद्देश्य शादी या किसी जरूरी पारिवारिक जरूरत के लिए सोना खरीदना है, तो पूरी खरीदारी एक ही दिन करने के बजाय अलग-अलग चरणों में खरीदारी करने से कीमतों के उतार-चढ़ाव का जोखिम कुछ हद तक कम किया जा सकता है। वहीं निवेश के उद्देश्य से खरीदारी करने वालों को बाजार की दिशा और अपने निवेश लक्ष्य को ध्यान में रखना चाहिए।

आगे कैसी रह सकती है चाल?

फिलहाल सोने और चांदी दोनों में उतार-चढ़ाव जारी रहने की संभावना है। सोने के लिए अमेरिकी फेड की नीति और बॉन्ड यील्ड प्रमुख संकेतक बने रहेंगे, जबकि चांदी के लिए निवेश मांग के साथ औद्योगिक मांग भी महत्वपूर्ण होगी।

मंगलवार की गिरावट को देखकर यह कहना जल्दबाजी होगी कि सोने और चांदी में बड़ी गिरावट का दौर शुरू हो गया है। दूसरी तरफ, लगातार तेजी की उम्मीद करना भी जोखिम भरा हो सकता है। बाजार में इस समय दोनों तरफ के संकेत मौजूद हैं।

इसलिए आने वाले दिनों में फेड के संकेत, अमेरिकी आर्थिक आंकड़े, डॉलर की चाल, तेल की कीमत और वैश्विक तनाव सोने-चांदी की दिशा तय करने वाले सबसे बड़े फैक्टर हो सकते हैं। निवेशकों को कीमतों के साथ इन संकेतकों पर भी नजर रखनी होगी।

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