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1.20 करोड़ का लालच बना हत्या की वजह! कत्ल के बाद गुप्तांग काटकर पॉलिथीन में रखा, 3 दिन तक खरीदार की तलाश



भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में छोटे तालाब के धोबीघाट से 10 अगस्त को मिले अज्ञात शव की गुत्थी पुलिस ने सुलझाने का दावा किया है। पुलिस जांच में जो कहानी सामने आई है, उसने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, यह मामला सिर्फ एक हत्या तक सीमित नहीं था, बल्कि कथित तौर पर सोशल मीडिया पर देखे गए एक वीडियो, अंधविश्वास और 1 करोड़ 20 लाख रुपये कमाने के लालच से जुड़ी एक खतरनाक साजिश का हिस्सा था।

पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने एक युवक को अपना निशाना बनाया और हत्या के बाद उसके शरीर के एक हिस्से को बेचकर करोड़ों रुपये हासिल करने की योजना बनाई थी। इस कथित योजना में मुख्य आरोपी ने दो नाबालिगों को भी शामिल किया। पुलिस का कहना है कि नाबालिग आरोपियों को एक वीडियो दिखाकर यह विश्वास दिलाया गया कि ऐसा करने से उन्हें बड़ी रकम मिल सकती है।

मामले में मुख्य आरोपी जोहेब खान और आमिर कुरैशी को गिरफ्तार किए जाने की बात सामने आई है, जबकि तीन नाबालिगों को भी पुलिस ने हिरासत में लिया है। पुलिस अब इस मामले की कड़ियों को जोड़ने के साथ यह पता लगाने में जुटी है कि कथित वीडियो कहां से आया और क्या इस पूरी साजिश के पीछे केवल ऑनलाइन अंधविश्वास था या इसके पीछे कोई और नेटवर्क भी सक्रिय है।

तालाब से मिला था कई दिन पुराना शव

10 अगस्त को श्यामला हिल्स थाना क्षेत्र के छोटे तालाब के धोबीघाट इलाके में गोताखोरों ने एक शव बरामद किया था। शव कई दिन पुराना बताया गया। शरीर पर धारदार हथियार से चोट के निशान मिलने के बाद पुलिस को शुरुआत में ही हत्या की आशंका हो गई थी।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में भी हत्या की पुष्टि होने के बाद पुलिस ने अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू की। शुरुआती चुनौती मृतक की पहचान करना थी, क्योंकि उस समय पुलिस के पास ऐसी कोई जानकारी नहीं थी, जिससे शव की पहचान तुरंत हो सके।

इसके बाद पुलिस ने आसपास के इलाकों में पूछताछ शुरू की। साथ ही सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों से मृतक की तस्वीर लोगों तक पहुंचाई गई। इसी दौरान पांच दिन बाद मामले में एक अहम मोड़ आया।

टैटू ने खोला मृतक की पहचान का राज

15 अगस्त को जहांगीराबाद निवासी रानी शाह पुलिस के पास पहुंचीं। उन्होंने शव की पहचान अपने बेटे रेहान के रूप में की। बताया गया कि रेहान के बाएं हाथ पर एक खास टैटू बना था, जिसके आधार पर उसकी मां ने उसे पहचाना।

रेहान परिवार की मदद के लिए मोती मस्जिद के आसपास पेन और चाबी के छल्ले बेचने का काम करता था। उसकी पहचान होने के बाद पुलिस ने उसके संपर्कों, आने-जाने के रास्तों और आखिरी दिनों की गतिविधियों की जांच शुरू की।

यहीं से पुलिस को इस हत्याकांड के पीछे मौजूद कथित साजिश तक पहुंचने में महत्वपूर्ण सुराग मिलने लगे।

खुद को डॉक्टर बताता था मुख्य आरोपी

पुलिस की जांच के मुताबिक, इस मामले में जोहेब खान को कथित तौर पर मुख्य साजिशकर्ता माना जा रहा है। बताया जा रहा है कि वह बीबीए का छात्र है, लेकिन खुद को डॉक्टर बताता था। पुलिस को उसके पास से कथित तौर पर फर्जी डॉक्टर आईडी जैसी सामग्री मिलने की बात भी सामने आई है।

जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि जोहेब ने इंटरनेट पर मौजूद एक वीडियो देखा था। कथित तौर पर उस वीडियो में एक नाबालिग के शरीर के अंग से जुड़ी ऐसी बात कही गई थी, जिससे बड़ी रकम हासिल करने का दावा किया गया था।

पुलिस के अनुसार, इसी दावे को सच मानकर जोहेब ने पैसों के लालच में योजना तैयार की। उसने दो नाबालिगों से दोस्ती की और उन्हें भी कथित वीडियो दिखाकर इस योजना में शामिल किया।

नाबालिगों को बनाया गया साजिश का हिस्सा

पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने ऐसे व्यक्ति को निशाना बनाने की योजना बनाई, जिसके गायब होने पर तत्काल किसी बड़े विवाद की आशंका कम हो। इसी दौरान रेहान को कथित तौर पर टारगेट किया गया।

जांच में सामने आया कि 6 अगस्त को दो नाबालिगों ने रेहान को 100 रुपये देने का लालच दिया। उन्होंने उससे कहा कि खटलापुरा चलना है और वहां एक लड़ाई में मदद करनी है। भरोसा होने के बाद रेहान उनके साथ चला गया।

रास्ते में कथित तौर पर आमिर कुरैशी और जोहेब खान भी उनके साथ जुड़ गए। इसके बाद सभी लोग छोटे तालाब के धोबीघाट की सुनसान जगह की तरफ गए।

पुलिस के अनुसार, वहां पहले से बनाई गई योजना के तहत रेहान पर धारदार हथियार से हमला किया गया और उसकी हत्या कर दी गई।

हत्या के बाद भी जारी रहा खौफनाक प्लान

पुलिस की पूछताछ में कथित तौर पर सामने आया कि हत्या के बाद आरोपियों ने शरीर के एक हिस्से को अलग कर उसे बेचने की कोशिश की। उनका विश्वास था कि इससे उन्हें 1.20 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।

इसके बाद नाबालिग आरोपी कथित तौर पर कई दिनों तक भोपाल में संभावित खरीदार की तलाश करते रहे। हालांकि, उन्हें कोई खरीदार नहीं मिला। पुलिस के मुताबिक, जिस व्यक्ति से इस सामग्री को लेने की उम्मीद की जा रही थी, उसने भी इसे स्वीकार नहीं किया।

करीब तीन दिन तक प्रयास करने के बाद जब आरोपियों को सफलता नहीं मिली तो वे कथित तौर पर वापस धोबीघाट पहुंचे और वहां उसे छोड़ दिया। उन्हें उम्मीद थी कि मामला अज्ञात शव के रूप में ही रह जाएगा और पुलिस उनकी पहचान तक नहीं पहुंच पाएगी।

लेकिन मृतक की पहचान होने के बाद जांच तेजी से आगे बढ़ी।

टैटू से पहचान और फिर आरोपियों तक पहुंची पुलिस

रेहान की पहचान होने के बाद पुलिस ने उसके मोबाइल, संपर्कों और आखिरी समय में उसके साथ मौजूद लोगों की जानकारी जुटानी शुरू की। इसके साथ ही इलाके में लगे संभावित सीसीटीवी कैमरों, तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई।

पुलिस को मिले सुरागों के आधार पर कथित तौर पर नाबालिगों तक पहुंच बनाई गई। पूछताछ में घटनाक्रम से जुड़ी कई अहम जानकारियां सामने आईं। इसके बाद मुख्य आरोपियों तक पहुंचने का रास्ता साफ हुआ।

पुलिस ने जोहेब खान और आमिर कुरैशी को गिरफ्तार किया है, जबकि तीन नाबालिगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपियों के संपर्क में और कौन-कौन लोग थे।

क्या किसी बड़े गिरोह का कनेक्शन है?

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर वह वीडियो कहां से आया, जिसने कथित तौर पर नाबालिगों और मुख्य आरोपी को इस खतरनाक साजिश के लिए प्रेरित किया।

क्या यह केवल इंटरनेट पर फैली झूठी और अंधविश्वास वाली जानकारी थी? क्या आरोपियों ने बिना किसी वास्तविक खरीदार के सिर्फ लालच में हत्या कर दी? या फिर किसी व्यक्ति ने उन्हें इस काम के लिए उकसाया था?

पुलिस इन सभी सवालों के जवाब तलाश रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या आरोपियों का किसी ऐसे व्यक्ति से संपर्क था, जो शरीर के अंगों की खरीद-बिक्री से जुड़ा हो।

फिलहाल पुलिस की जांच जारी है और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर मामले की अन्य कड़ियां सामने आने की उम्मीद है।

सोशल मीडिया के खतरनाक असर ने बढ़ाई चिंता

भोपाल का यह मामला एक बार फिर इस सवाल को सामने लाता है कि इंटरनेट पर मौजूद हर जानकारी को सच मान लेना कितना खतरनाक हो सकता है। खासकर नाबालिगों पर सनसनीखेज और भ्रामक वीडियो का असर गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है।

करोड़ों रुपये कमाने का झूठा लालच, सोशल मीडिया से मिली भ्रामक जानकारी और अपराध की योजना ने इस मामले को बेहद गंभीर बना दिया है। पुलिस अब हत्या के आरोपों की जांच के साथ-साथ कथित ऑनलाइन वीडियो के स्रोत और उसके पीछे की वास्तविकता का पता लगाने में भी जुटी है।

फिलहाल इस हत्याकांड में कई सवालों के जवाब मिलना बाकी हैं। हालांकि, मृतक की पहचान से लेकर आरोपियों की गिरफ्तारी तक पुलिस जांच ने मामले को एक नई दिशा दी है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि पूछताछ और आगे की जांच में इस कथित 1.20 करोड़ रुपये वाली साजिश के पीछे कितनी बड़ी कहानी सामने आती है।

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