किडनी चुपचाप हो रही थी खराब और मरीज को पता तक नहीं चला! शरीर के ये संकेत दिखें तो तुरंत हो जाएं सावधान
नई दिल्ली: किडनी हमारे शरीर के उन महत्वपूर्ण अंगों में शामिल है जो लगातार बिना रुके काम करते हैं। यह खून से अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त पानी बाहर निकालने, शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बनाए रखने तथा कई जरूरी हार्मोनल प्रक्रियाओं में भूमिका निभाती है। लेकिन किडनी की बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरणों में अक्सर इसके लक्षण बहुत हल्के होते हैं या बिल्कुल दिखाई नहीं देते।
यही वजह है कि कई लोगों को Chronic Kidney Disease यानी CKD का पता तब चलता है जब किडनी की कार्यक्षमता काफी कम हो चुकी होती है। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर CKD के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। इसलिए इन बीमारियों से जूझ रहे लोगों के लिए किडनी की नियमित जांच विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है।
किडनी खराब होने पर शुरुआत में क्यों नहीं पता चलता?
किडनी में नुकसान धीरे-धीरे बढ़ सकता है। शुरुआती अवस्था में शरीर बची हुई kidney function के सहारे सामान्य तरीके से काम करता रहता है। व्यक्ति को न तो कोई तेज दर्द होता है और न ही ऐसा कोई स्पष्ट संकेत मिलता है जिससे उसे तुरंत किडनी की बीमारी का शक हो।
इसी कारण CKD को कई बार “silent disease” भी कहा जाता है।
जब kidney function काफी कम होने लगती है, तब शरीर में fluid और waste products जमा होने लग सकते हैं। इसके बाद थकान, सूजन, पेशाब में बदलाव और भूख कम लगने जैसे लक्षण सामने आ सकते हैं।
पेशाब में बदलाव को न करें नजरअंदाज
किडनी से जुड़ी समस्या का एक महत्वपूर्ण संकेत urine में बदलाव हो सकता है।
अगर किसी व्यक्ति को बार-बार पेशाब आने लगे, रात में कई बार पेशाब के लिए उठना पड़े, पेशाब की मात्रा में असामान्य बदलाव हो, पेशाब बहुत झागदार दिखाई दे या पेशाब में खून नजर आए, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।
झागदार पेशाब हमेशा kidney disease का संकेत नहीं होता। कई बार तेज urine flow या dehydration जैसी स्थितियों में भी ऐसा हो सकता है। लेकिन यदि यह समस्या लगातार बनी रहती है तो urine test कराना उपयोगी हो सकता है।
पेशाब में blood भी कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है, इसलिए इसका कारण जानने के लिए चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
चेहरे और पैरों में सूजन क्यों आती है?
जब किडनी शरीर से अतिरिक्त fluid और sodium को पर्याप्त रूप से बाहर नहीं निकाल पाती, तो शरीर में पानी जमा हो सकता है।
इससे खासकर पैरों, टखनों, हाथों या आंखों के आसपास सूजन दिखाई दे सकती है।
सुबह आंखों के आसपास puffiness और दिन बढ़ने के साथ पैरों में सूजन कुछ लोगों में दिखाई दे सकती है। लेकिन edema के कई अन्य कारण भी हो सकते हैं, जैसे heart disease, liver disease, कुछ दवाएं या अन्य medical conditions।
इसलिए केवल सूजन के आधार पर kidney disease का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
हर समय थकान भी हो सकती है संकेत
किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर में waste products जमा होने लग सकते हैं। इसके अलावा CKD में anemia भी विकसित हो सकता है।
इस वजह से कुछ लोगों को लगातार थकान, कमजोरी, ध्यान लगाने में परेशानी या सामान्य काम करने में पहले की तुलना में ज्यादा मेहनत महसूस हो सकती है।
लेकिन थकान बहुत सामान्य symptom है और इसके पीछे नींद की कमी, तनाव, anemia, thyroid disease, infection और कई अन्य कारण हो सकते हैं।
यदि थकान लंबे समय तक बनी रहती है या अन्य symptoms के साथ दिखाई देती है तो डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।
हाई BP और Kidney का खतरनाक संबंध
High Blood Pressure यानी hypertension और kidney disease के बीच दोतरफा संबंध हो सकता है।
लंबे समय तक uncontrolled blood pressure kidney की छोटी blood vessels को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे kidney function धीरे-धीरे कम हो सकता है।
दूसरी ओर, kidney disease भी blood pressure को बढ़ा सकती है क्योंकि किडनी शरीर में sodium और fluid balance तथा blood pressure regulation में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
यानी किसी व्यक्ति को लंबे समय से हाई BP है तो सिर्फ BP की दवा लेना ही नहीं, बल्कि डॉक्टर की सलाह के अनुसार kidney health की निगरानी करना भी जरूरी हो सकता है।
Diabetes वालों को ज्यादा सतर्क क्यों रहना चाहिए?
डायबिटीज CKD का एक महत्वपूर्ण risk factor है।
लंबे समय तक blood glucose अधिक रहने से kidney की छोटी blood vessels और filtering system पर असर पड़ सकता है। समय के साथ urine में albumin/protein आने और kidney function कम होने का जोखिम बढ़ सकता है।
इसीलिए diabetes वाले लोगों में urine albumin test और kidney function blood tests डॉक्टर की सलाह के अनुसार किए जा सकते हैं।
शुरुआत में kidney damage का पता चल जाए तो treatment और lifestyle changes के जरिए disease progression को धीमा करने की संभावना बेहतर हो सकती है।
किडनी की जांच कैसे होती है?
किडनी की स्थिति जानने के लिए डॉक्टर कई प्रकार की जांच कर सकते हैं।
Blood test में serum creatinine और उससे निकाला गया estimated glomerular filtration rate यानी eGFR kidney function का महत्वपूर्ण संकेत देते हैं।
इसके अलावा urine में albumin या protein की जांच की जा सकती है। Diabetes और high BP वाले लोगों में urine albumin-to-creatinine ratio यानी UACR का इस्तेमाल kidney damage के शुरुआती संकेतों की पहचान में किया जा सकता है।
कुछ मामलों में ultrasound या अन्य imaging की जरूरत भी पड़ सकती है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि केवल creatinine का एक सामान्य परिणाम हर स्थिति में kidney पूरी तरह स्वस्थ होने की गारंटी नहीं देता। डॉक्टर आमतौर पर कई factors को साथ देखकर assessment करते हैं।
किन लोगों को Kidney Test पर विशेष ध्यान देना चाहिए?
हर स्वस्थ व्यक्ति को बार-बार kidney tests कराने की जरूरत नहीं होती। लेकिन कुछ लोगों में risk ज्यादा हो सकता है।
इनमें शामिल हैं:
लंबे समय से diabetes वाले लोग
high blood pressure वाले लोग
heart disease से पीड़ित लोग
परिवार में kidney disease का इतिहास रखने वाले लोग
मोटापे से जूझ रहे लोग
बार-बार kidney stones होने वाले लोग
लंबे समय तक कुछ ऐसी दवाएं लेने वाले लोग जो kidney को प्रभावित कर सकती हैं
उम्र बढ़ने के साथ अन्य chronic diseases वाले लोग
इन लोगों को जांच की frequency अपने डॉक्टर से तय करनी चाहिए।
दर्द न होने का मतलब किडनी पूरी तरह स्वस्थ है?
जरूरी नहीं।
किडनी disease के शुरुआती और कई advanced stages में भी व्यक्ति को kidney के स्थान पर कोई खास दर्द नहीं हो सकता। इसी कारण केवल back pain या kidney pain को देखकर बीमारी का अनुमान लगाना सही तरीका नहीं है।
किडनी stones या infection जैसी कुछ स्थितियों में तेज flank pain हो सकता है, लेकिन CKD का progression अक्सर बिना किसी तेज दर्द के हो सकता है।
इसलिए kidney health का पता लगाने के लिए symptoms के साथ blood और urine tests भी महत्वपूर्ण हैं।
किन आदतों से Kidney Health को नुकसान पहुंच सकता है?
किडनी को स्वस्थ रखने के लिए blood pressure और blood sugar को नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण है।
इसके अलावा अत्यधिक नमक का सेवन कम करना, पर्याप्त पानी पीना, स्वस्थ वजन बनाए रखना, नियमित physical activity करना और smoking से दूरी बनाना overall kidney health के लिए फायदेमंद हो सकता है।
बिना डॉक्टर की सलाह के painkillers या अन्य medicines का लंबे समय तक इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए। कुछ pain medicines, विशेष रूप से NSAIDs, कुछ परिस्थितियों में kidney को नुकसान पहुंचा सकती हैं।
यह भी जरूरी है कि किसी व्यक्ति को kidney disease होने पर पानी, नमक या protein की मात्रा खुद से बहुत ज्यादा कम या ज्यादा न करें। Diet का निर्णय kidney function और अन्य medical conditions के अनुसार डॉक्टर या dietitian की सलाह से होना चाहिए।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
यदि पेशाब में स्पष्ट खून दिखाई दे, अचानक पेशाब बहुत कम हो जाए, शरीर में तेजी से सूजन बढ़े, सांस लेने में परेशानी हो, अत्यधिक कमजोरी या confusion हो या kidney infection जैसे तेज बुखार और कमर के एक तरफ दर्द के साथ पेशाब में जलन हो, तो तुरंत चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी हो सकता है।
ऐसे लक्षणों के कई कारण हो सकते हैं, इसलिए खुद से diagnosis या treatment करना सही नहीं है।
Kidney Disease को रोकना कितना संभव है?
हर kidney disease को रोका नहीं जा सकता। कुछ स्थितियां genetic या अन्य कारणों से हो सकती हैं। लेकिन diabetes और hypertension जैसे प्रमुख risk factors को अच्छी तरह नियंत्रित करके CKD के जोखिम को कम करने और disease progression को धीमा करने में मदद मिल सकती है।
सबसे महत्वपूर्ण बात है कि बीमारी का पता देर से न चले।
यदि किसी व्यक्ति में diabetes, high BP या अन्य risk factors मौजूद हैं, तो डॉक्टर से नियमित health monitoring के बारे में बात करना उपयोगी हो सकता है।
किडनी की बीमारी अक्सर अचानक सामने नहीं आती। कई मामलों में इसका नुकसान धीरे-धीरे बढ़ता है और शुरुआती चरणों में कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देता। यही कारण है कि पेशाब में बदलाव, शरीर में सूजन, लगातार थकान, हाई BP और diabetes जैसी स्थितियों को गंभीरता से लेना जरूरी है।
हालांकि इन लक्षणों में से कोई भी अकेले kidney disease की पुष्टि नहीं करता, लेकिन लगातार समस्या रहने पर जांच कराना महत्वपूर्ण हो सकता है।
खासकर diabetes और high BP वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार kidney function और urine protein/albumin की जांच कराते रहना चाहिए। समय पर पहचान होने पर कई मामलों में kidney disease की progression को धीमा करने के लिए कदम उठाए जा सकते हैं।

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