नौकरी के नाम पर शुरू हुआ खेल… आगरा के इस कॉल सेंटर का राज खुलते ही पुलिस के उड़े होश!
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में बेरोजगार युवाओं को नौकरी का सपना दिखाकर उनसे लाखों रुपये की ठगी करने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है। ताजगंज थाना क्षेत्र में साइबर प्रकोष्ठ और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में दो महिलाओं समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि यह गिरोह देश के अलग-अलग राज्यों में बैठे बेरोजगार लोगों को निशाना बनाता था।
आरोपी पहले एक फर्जी कंपनी के नाम से नौकरी के विज्ञापन जारी करते थे। इसके बाद कॉल सेंटर में बैठी महिलाएं और अन्य सदस्य बेरोजगारों से फोन पर संपर्क करते थे। उन्हें अलग-अलग कंपनियों में गार्ड, सुपरवाइजर और दूसरे पदों पर नौकरी दिलाने का भरोसा दिया जाता था।
नौकरी की जरूरत और आकर्षक वेतन का लालच देकर पीड़ितों से अलग-अलग चरणों में पैसे जमा कराए जाते थे। पुलिस के मुताबिक, गिरोह ने अब तक ढाई हजार से अधिक लोगों को अपना शिकार बनाया हो सकता है।
15 राज्यों से मिलीं 100 से ज्यादा शिकायतें
पुलिस के मुताबिक, इस गिरोह का खुलासा अचानक नहीं हुआ। देश के अलग-अलग हिस्सों से लगातार शिकायतें पुलिस तक पहुंच रही थीं।
बताया गया कि करीब 15 राज्यों से 100 से अधिक शिकायतें मिली थीं। इन शिकायतों में लोगों ने आरोप लगाया था कि नौकरी दिलाने के नाम पर उनसे पैसे लिए गए, लेकिन नौकरी नहीं दी गई।
शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए पुलिस और साइबर प्रकोष्ठ ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान फोन नंबर, बैंक खातों, डिजिटल लेनदेन और आरोपियों की गतिविधियों से जुड़े सुराग जुटाए गए।
जांच आगे बढ़ी तो पुलिस को आगरा के ताजगंज क्षेत्र में चल रहे एक संदिग्ध कॉल सेंटर के बारे में जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस टीम ने वहां कार्रवाई की।
फर्जी कंपनी बनाकर जारी करते थे नौकरी के विज्ञापन
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपियों ने बेरोजगार युवाओं को फंसाने के लिए बाकायदा एक फर्जी कंपनी का ढांचा तैयार किया था।
नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को आकर्षित करने के लिए अलग-अलग पदों के विज्ञापन जारी किए जाते थे। विज्ञापनों में गार्ड, सुपरवाइजर और अन्य नौकरियों का उल्लेख किया जाता था।
जिन लोगों को नौकरी की जरूरत होती थी, वे विज्ञापन देखकर संपर्क करते थे। इसके बाद कॉल सेंटर से उन्हें फोन किया जाता था।
बातचीत के दौरान उन्हें भरोसा दिलाया जाता था कि कंपनी में उनके लिए नौकरी उपलब्ध है। इसके बाद ठगी का सिलसिला शुरू होता था।
पहले रजिस्ट्रेशन के नाम पर लेते थे 2 हजार रुपये
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने ठगी के लिए कई चरणों वाला तरीका अपनाया था।
सबसे पहले नौकरी के इच्छुक व्यक्ति से रजिस्ट्रेशन के नाम पर करीब 2 हजार रुपये जमा कराने को कहा जाता था।
बेरोजगार व्यक्ति जब रजिस्ट्रेशन फीस जमा कर देता था तो उसे लगता था कि उसकी नौकरी लगभग पक्की हो गई है।
यहीं से आरोपी अगला बहाना शुरू कर देते थे।
उम्मीदवार को बताया जाता था कि नौकरी के लिए वर्दी और दूसरी जरूरी चीजों की व्यवस्था करनी होगी। इसके लिए उससे अलग से रकम मांगी जाती थी।
वर्दी के नाम पर 8 हजार रुपये की मांग
रजिस्ट्रेशन के बाद आरोपी उम्मीदवारों से कहते थे कि नौकरी ज्वाइन करने के लिए वर्दी और अन्य सामान जरूरी है।
इसके नाम पर उनसे करीब 8 हजार रुपये और जमा कराए जाते थे।
पीड़ित जब यह रकम भी दे देता था तो उसे लगता था कि अब उसे जल्द ही नौकरी मिल जाएगी।
लेकिन इसके बाद ठगी का तीसरा चरण शुरू होता था।
आरोपियों ने कथित तौर पर नियुक्ति प्रमाण पत्र देने के नाम पर भी पैसे वसूले।
नियुक्ति पत्र के नाम पर फिर 10 हजार रुपये
पुलिस के मुताबिक, उम्मीदवारों से अंत में नियुक्ति प्रमाण पत्र लेने के नाम पर करीब 10 हजार रुपये की मांग की जाती थी।
इस तरह एक व्यक्ति से अलग-अलग बहानों से हजारों रुपये वसूल लिए जाते थे।
कई पीड़ितों को नौकरी मिलने की उम्मीद में लगातार भुगतान करना पड़ता था। जब उन्हें नौकरी नहीं मिली तो उन्होंने आरोपियों से संपर्क करने की कोशिश की।
इसके बाद कई लोगों को पता चला कि जिस कंपनी और नौकरी का दावा किया गया था, वह वास्तव में फर्जी थी।
ढाई हजार से ज्यादा लोग हो चुके हैं शिकार
पूछताछ के दौरान पुलिस को इस गिरोह के नेटवर्क को लेकर बड़ी जानकारी मिलने का दावा किया गया है।
पुलिस के मुताबिक, अब तक की जांच में ढाई हजार से अधिक लोगों के ठगी का शिकार होने की बात सामने आई है।
हालांकि, वास्तविक पीड़ितों और ठगी गई रकम का आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
पुलिस अब अलग-अलग राज्यों से मिली शिकायतों और आरोपियों के बैंकिंग रिकॉर्ड का मिलान कर रही है।
जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों ने कितने बैंक खातों में रकम मंगाई और इस पैसे को आगे किन लोगों तक पहुंचाया गया।
छापेमारी में मिला सामान देखकर पुलिस भी हैरान
फर्जी कॉल सेंटर पर कार्रवाई के दौरान पुलिस ने कई महत्वपूर्ण सामान और दस्तावेज बरामद किए हैं।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के पास से:
10 मोबाइल फोन
32 पासबुक
28 एटीएम कार्ड
12 क्यूआर कोड
नियुक्ति पत्र
नौकरी से संबंधित दस्तावेज
अन्य संदिग्ध कागजात
बरामद किए गए हैं।
इतनी बड़ी संख्या में बैंकिंग दस्तावेज और एटीएम कार्ड मिलने के बाद पुलिस को आशंका है कि गिरोह का नेटवर्क केवल एक कमरे या एक कॉल सेंटर तक सीमित नहीं था।
दो आरोपियों की पहचान बिहार और जौनपुर से
गिरफ्तार किए गए आरोपियों में एक आरोपी तरुण बिहार का रहने वाला बताया गया है, जबकि दूसरा आरोपी अजय जौनपुर का निवासी बताया गया है।
मामले में दो महिलाओं को भी गिरफ्तार किया गया है।
पुलिस अब आरोपियों से पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कॉल सेंटर में किसकी क्या भूमिका थी।
कॉल करने वाले लोग संभावित पीड़ितों तक कैसे पहुंचते थे, उनके मोबाइल नंबर कहां से जुटाए जाते थे और ठगी की रकम किस खाते में जमा होती थी—इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं।
गिरोह में और लोग शामिल होने की आशंका
पुलिस को आशंका है कि इस नेटवर्क में गिरफ्तार किए गए चार आरोपियों के अलावा कई और लोग शामिल हो सकते हैं।
अधिकारियों के अनुसार, गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि आरोपियों ने अलग-अलग राज्यों में कितने लोगों को फोन किया और कितने लोगों से पैसे लिए।
बैंक खातों और डिजिटल भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड की जांच के बाद ठगी के नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।
बेरोजगार युवाओं को बनाया जाता था निशाना
इस गिरोह ने कथित तौर पर बेरोजगार युवाओं की मजबूरी और नौकरी पाने की उम्मीद को अपना हथियार बनाया।
आज के समय में हजारों युवा रोजगार की तलाश में ऑनलाइन विज्ञापन और सोशल मीडिया का सहारा लेते हैं। इसी का फायदा उठाकर साइबर ठग आकर्षक नौकरी के विज्ञापन जारी करते हैं।
कई बार विज्ञापन देखने में बिल्कुल वास्तविक लगता है। उम्मीदवार से फोन पर बातचीत भी पेशेवर तरीके से की जाती है, जिससे उसे शक नहीं होता।
इसके बाद रजिस्ट्रेशन, डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन, यूनिफॉर्म, सिक्योरिटी फीस या नियुक्ति पत्र जैसे अलग-अलग नामों पर पैसे मांगे जाते हैं।
नौकरी के नाम पर पैसे मांगना बड़ा संकेत
विशेषज्ञों के अनुसार, नौकरी देने के नाम पर लगातार अलग-अलग शुल्क मांगना एक बड़ा चेतावनी संकेत हो सकता है।
अगर कोई कंपनी बिना उचित प्रक्रिया के बार-बार निजी बैंक खाते, अनजान QR कोड या व्यक्तिगत नंबर पर पैसे जमा कराने के लिए कहती है तो उम्मीदवार को सावधान हो जाना चाहिए।
किसी भी नौकरी के लिए आवेदन करने से पहले कंपनी की आधिकारिक जानकारी, कार्यालय का पता, वेबसाइट और भर्ती प्रक्रिया की स्वतंत्र रूप से जांच करना जरूरी है।
पुलिस की जांच में खुलेंगे कई और राज
फर्जी कॉल सेंटर के खुलासे के बाद पुलिस अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही है।
जांचकर्ताओं के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरोपियों ने इतने बड़े पैमाने पर लोगों के मोबाइल नंबर और व्यक्तिगत जानकारी कैसे हासिल की।
इसके अलावा बरामद किए गए 32 पासबुक, 28 एटीएम कार्ड और 12 क्यूआर कोड की भी जांच की जा रही है।
इन बैंकिंग माध्यमों के जरिए हुई लेनदेन की जानकारी से पुलिस को ठगी की कुल रकम और नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
आगरा के ताजगंज इलाके में फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ साइबर और नौकरी के नाम पर होने वाली ठगी के बढ़ते खतरे की ओर इशारा करता है। पुलिस ने दो महिलाओं समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है और पूछताछ के दौरान ढाई हजार से अधिक लोगों के इस गिरोह के जाल में फंसने की जानकारी सामने आने की बात कही गई है।
आरोपी कथित तौर पर फर्जी कंपनी बनाकर नौकरी के विज्ञापन जारी करते थे और फिर बेरोजगारों को गार्ड, सुपरवाइजर समेत अन्य पदों पर नौकरी दिलाने का झांसा देते थे। रजिस्ट्रेशन से लेकर वर्दी और नियुक्ति पत्र तक के नाम पर अलग-अलग चरणों में पैसे वसूले जाते थे।
छापेमारी में मिले मोबाइल फोन, पासबुक, एटीएम कार्ड, QR कोड और नियुक्ति पत्र इस पूरे नेटवर्क की जांच में अहम सबूत साबित हो सकते हैं।
फिलहाल पुलिस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह भी सामने आने की उम्मीद है कि इस नेटवर्क ने कुल कितने लोगों को ठगा और कितनी रकम की धोखाधड़ी की गई।

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