तीसरे विश्व युद्ध की तस्वीरें सामने आने का दावा! ‘भविष्य से लौटे’ शख्स ने दिखाए सबूत, तबाही को लेकर मची सनसनी
नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर एक बार फिर टाइम ट्रैवल और भविष्य की भविष्यवाणी से जुड़ा दावा तेजी से चर्चा में है। एक सोशल मीडिया अकाउंट ने खुद को कथित तौर पर “असली टाइम ट्रैवलर” बताते हुए तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत और उसके अंत से जुड़ी कुछ तस्वीरें शेयर की हैं। दावा किया जा रहा है कि ये तस्वीरें भविष्य से लाई गई हैं और आने वाले समय में होने वाली एक बेहद विनाशकारी घटना की झलक दिखाती हैं।
इन पोस्ट्स के वायरल होने के बाद इंटरनेट पर बहस छिड़ गई है। कुछ लोग तस्वीरों को देखकर हैरान हैं और इसे भविष्य की चेतावनी मान रहे हैं, जबकि बड़ी संख्या में यूजर्स ने पूरे दावे पर सवाल खड़े किए हैं। कई लोगों का कहना है कि तस्वीरें आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI या कंप्यूटर ग्राफिक्स की मदद से तैयार की गई हो सकती हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इन तस्वीरों के भविष्य से आने का कोई स्वतंत्र या वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है।
खुद को बताया असली टाइम ट्रैवलर
वायरल कहानी @timevoyagin नाम के सोशल मीडिया अकाउंट से जुड़ी बताई जा रही है। अकाउंट संचालक ने खुद को वास्तविक टाइम ट्रैवलर बताया है।
एक वीडियो में दावा किया गया कि उसे अब भविष्य में होने वाली कुछ घटनाओं के “सबूत” दिखाने की अनुमति मिल गई है। इसके बाद उसने तीसरे विश्व युद्ध से संबंधित कथित तस्वीरें शेयर कीं।
पोस्ट में बताया गया कि तीसरे विश्व युद्ध को लेकर किए गए कमेंट को सबसे ज्यादा लाइक मिले थे। इसी वजह से उसने कथित तौर पर युद्ध से जुड़ी तस्वीरें सामने रखने का फैसला किया।
वीडियो की शुरुआत में लोगों का ध्यान खींचने के लिए “ATTENTION” जैसे शब्द का इस्तेमाल किया गया और तस्वीरों को “फोटोग्राफिक एविडेंस” यानी तस्वीरों के रूप में सबूत बताया गया।
तस्वीरों में दिखे तबाही के दृश्य
वायरल तस्वीरों में बड़े विस्फोट, धुएं और तबाही जैसे दृश्य दिखाई देने का दावा किया गया है। कुछ तस्वीरों को युद्ध की शुरुआत से जोड़कर पेश किया गया, जबकि कुछ को कथित तौर पर युद्ध के बाद की स्थिति बताया गया।
इन तस्वीरों को देखकर ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की गई है मानो दुनिया किसी बहुत बड़े वैश्विक संघर्ष के बाद तबाह हो चुकी हो।
अकाउंट संचालक का दावा इससे भी आगे जाता है। उसके अनुसार भविष्य में होने वाला यह युद्ध इतना विनाशकारी होगा कि पृथ्वी पर इंसानों का रहना मुश्किल हो सकता है।
यही दावा इस पूरे कंटेंट को और ज्यादा सनसनीखेज बना रहा है।
क्या इंसानों को छोड़नी पड़ेगी पृथ्वी?
कथित टाइम ट्रैवलर के दावे के मुताबिक, तीसरे विश्व युद्ध के बाद पृथ्वी की परिस्थितियां इतनी खराब हो सकती हैं कि मानवता को किसी दूसरे ग्रह या दुनिया की ओर जाना पड़े।
कुछ पोस्ट में एक काल्पनिक जगह का नाम “Planet Delta” बताया गया है।
हालांकि, इस दावे के समर्थन में कोई वैज्ञानिक प्रमाण, अंतरिक्ष एजेंसी की रिपोर्ट या किसी विश्वसनीय वैज्ञानिक संस्थान की पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
इसलिए इसे फिलहाल केवल सोशल मीडिया पर किया गया दावा ही माना जा सकता है।
AI ने बढ़ा दी तस्वीरों की सच्चाई पहचानने की मुश्किल
आज के समय में वायरल तस्वीरों की वास्तविकता पहचानना पहले के मुकाबले काफी मुश्किल हो गया है।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से अब कुछ ही समय में बेहद वास्तविक दिखाई देने वाली तस्वीरें बनाई जा सकती हैं। इनमें युद्ध, प्राकृतिक आपदा, अंतरिक्ष, एलियन और भविष्य के शहर जैसे किसी भी काल्पनिक दृश्य को वास्तविक फोटो जैसा दिखाया जा सकता है।
यही कारण है कि किसी तस्वीर का वास्तविक जैसा दिखाई देना यह साबित नहीं करता कि वह तस्वीर वास्तविक घटना की है।
वायरल तस्वीरों के मामले में भी कई यूजर्स ने सवाल उठाया है कि अगर ये वास्तव में भविष्य की तस्वीरें हैं तो इनके साथ कोई स्वतंत्र प्रमाण क्यों नहीं दिया गया।
पहले भी सामने आते रहे हैं टाइम ट्रैवलर के दावे
सोशल मीडिया पर खुद को भविष्य से आया हुआ बताने वाले लोगों की कमी नहीं है।
समय-समय पर अलग-अलग अकाउंट्स भविष्य की महामारियों, प्राकृतिक आपदाओं, युद्धों, एलियन और दुनिया के अंत से जुड़ी भविष्यवाणियां करते रहे हैं।
इनमें से कई दावे कुछ समय के लिए वायरल होते हैं और फिर धीरे-धीरे चर्चा से गायब हो जाते हैं।
कई पुरानी भविष्यवाणियां ऐसी भी रही हैं जिनमें किसी निश्चित तारीख पर बड़ी घटना होने का दावा किया गया था, लेकिन वह घटना कभी हुई ही नहीं।
इसी वजह से विशेषज्ञ आम तौर पर ऐसे दावों को लेकर सावधानी बरतने की सलाह देते हैं।
लोग ऐसे वीडियो पर विश्वास क्यों करने लगते हैं?
ऐसे कंटेंट की सबसे बड़ी ताकत होती है डर और जिज्ञासा।
जब कोई व्यक्ति कहता है कि उसके पास भविष्य की तस्वीरें हैं, तो लोगों के मन में तुरंत सवाल पैदा होता है कि आखिर भविष्य में क्या होने वाला है।
अगर विषय तीसरे विश्व युद्ध जैसा हो तो लोगों की दिलचस्पी और भी बढ़ जाती है।
एक तरफ युद्ध का डर होता है और दूसरी तरफ यह जानने की उत्सुकता कि दुनिया का भविष्य कैसा होगा।
यही मिश्रण सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो को तेजी से फैलाने में मदद करता है।
कुछ लोग हुए परेशान, कुछ ने बताया फर्जी
वायरल पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं अलग-अलग हैं।
कुछ यूजर्स ने तस्वीरों को देखकर चिंता जताई और सवाल किया कि अगर ऐसा युद्ध वास्तव में हुआ तो दुनिया का क्या होगा।
वहीं कई लोगों ने इसे पूरी तरह फर्जी बताया।
कुछ यूजर्स का कहना है कि तस्वीरों में AI-generated content के संकेत नजर आते हैं। कुछ ने यह भी पूछा कि अगर यह वास्तविक फोटोग्राफिक सबूत है तो तस्वीरों का मूल स्रोत, कैमरा रिकॉर्ड या अन्य तकनीकी जानकारी क्यों उपलब्ध नहीं कराई गई।
यानी सोशल मीडिया पर वायरल होने के बावजूद इन तस्वीरों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल मौजूद हैं।
क्या टाइम ट्रैवल सच में संभव है?
टाइम ट्रैवल विज्ञान और कल्पना दोनों में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है।
आधुनिक भौतिक विज्ञान में समय और अंतरिक्ष को लेकर बेहद जटिल सिद्धांत मौजूद हैं। सापेक्षता के सिद्धांत के अनुसार गति और गुरुत्वाकर्षण जैसी परिस्थितियां समय के गुजरने की दर को प्रभावित कर सकती हैं।
लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से भविष्य में जाकर वहां की तस्वीरें खींच सकता है और फिर वर्तमान समय में वापस लौट सकता है।
आज तक ऐसा कोई विश्वसनीय वैज्ञानिक प्रमाण सामने नहीं आया है जो यह साबित करे कि कोई इंसान भविष्य में जाकर वापस लौटकर भविष्य की घटनाओं की तस्वीरें ला सकता है।
इसलिए किसी सोशल मीडिया यूजर का खुद को टाइम ट्रैवलर बताना वैज्ञानिक प्रमाण नहीं माना जा सकता।
तीसरे विश्व युद्ध की भविष्यवाणी कितनी विश्वसनीय?
सोशल मीडिया पर किसी अकाउंट द्वारा युद्ध की तस्वीरें शेयर करना किसी संभावित विश्व युद्ध की आधिकारिक पुष्टि नहीं है।
दुनिया में अलग-अलग देशों के बीच तनाव और संघर्ष जरूर होते हैं, लेकिन किसी वायरल पोस्ट के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि तीसरा विश्व युद्ध निश्चित रूप से होने वाला है।
किसी बड़े वैश्विक संघर्ष को लेकर वास्तविक जानकारी के लिए सरकारी बयान, आधिकारिक संस्थानों की रिपोर्ट और विश्वसनीय समाचार स्रोतों को आधार बनाना जरूरी है।
तस्वीरों का सच क्या है?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इन तस्वीरों को भविष्य से आई वास्तविक तस्वीरें मानने का कोई ठोस आधार नहीं है।
तस्वीरों की वास्तविक उत्पत्ति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में इन्हें AI, CGI या किसी अन्य डिजिटल तकनीक से बनाए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
सोशल मीडिया पर किसी दावे के साथ “फोटोग्राफिक एविडेंस” लिख देना उसे वास्तविक प्रमाण नहीं बना देता।
किसी भी वायरल तस्वीर की सच्चाई जानने के लिए उसके मूल स्रोत, तारीख, स्थान, तकनीकी जानकारी और स्वतंत्र पुष्टि की जरूरत होती है।
@timevoyagin नाम के अकाउंट से कथित टाइम ट्रैवलर द्वारा तीसरे विश्व युद्ध की तस्वीरें शेयर किए जाने के बाद सोशल मीडिया पर सनसनी फैल गई है। अकाउंट संचालक का दावा है कि तस्वीरें भविष्य से लाई गई हैं और इनमें युद्ध की शुरुआत तथा उसके बाद की तबाही दिखाई गई है।
दावा यह भी किया गया है कि भविष्य में हालात इतने खराब हो सकते हैं कि इंसानों को पृथ्वी छोड़कर किसी दूसरी दुनिया की ओर जाना पड़े।
लेकिन फिलहाल इन दावों की कोई वैज्ञानिक या स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। तस्वीरों को लेकर AI और डिजिटल एडिटिंग की संभावना भी जताई जा रही है।
इसलिए इन तस्वीरों को भविष्य की सच्ची तस्वीर मानने के बजाय फिलहाल सोशल मीडिया पर वायरल एक अप्रमाणित दावा समझना ही उचित है।

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