किडनी फेल होने से पहले शरीर देता है ये 3 संकेत! पेशाब में दिखे ये बदलाव तो तुरंत हो जाएं सावधान
नई दिल्ली: किडनी यानी गुर्दे शरीर के बेहद महत्वपूर्ण अंग हैं। ये खून से अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त तरल पदार्थ को बाहर निकालने के साथ शरीर में कई जरूरी संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं। किडनी की बीमारी की सबसे बड़ी चुनौती यह है कि शुरुआती चरणों में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। कई लोगों को बीमारी का पता तब चलता है, जब किडनी को काफी नुकसान हो चुका होता है।
अमेरिका की National Kidney Foundation (NKF) के अनुसार, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी फेलियर का पारिवारिक इतिहास और 60 वर्ष से अधिक उम्र क्रॉनिक किडनी डिजीज के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। ऐसे लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित किडनी जांच करानी चाहिए।
किडनी की बीमारी को ‘साइलेंट’ क्यों कहा जाता है?
किडनी डिजीज को कई बार ‘साइलेंट’ बीमारी कहा जाता है क्योंकि शुरुआती दौर में इसके लक्षण बेहद हल्के हो सकते हैं या बिल्कुल नजर नहीं आते। NKF के मुताबिक, कई मरीजों में लक्षण तब सामने आते हैं जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है।
यही वजह है कि केवल लक्षणों का इंतजार करना पर्याप्त नहीं है। जोखिम वाले लोगों में समय-समय पर ब्लड और यूरिन टेस्ट कराना महत्वपूर्ण हो सकता है। किडनी की कार्यक्षमता देखने के लिए eGFR और पेशाब में एल्ब्यूमिन/प्रोटीन की जांच के लिए uACR जैसे टेस्ट इस्तेमाल किए जाते हैं।
1. बार-बार पेशाब आना
अगर आपको सामान्य से ज्यादा बार पेशाब करने की जरूरत महसूस हो रही है, खासकर रात में बार-बार उठना पड़ता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। NKF के अनुसार, बार-बार पेशाब आना किडनी की बीमारी के संभावित संकेतों में शामिल है।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि बार-बार पेशाब आना हमेशा किडनी खराब होने का संकेत है। पुरुषों में बढ़ा हुआ प्रोस्टेट या यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन जैसी दूसरी स्थितियां भी इसकी वजह हो सकती हैं। इसलिए लगातार समस्या रहने पर डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
खास तौर पर अगर बार-बार पेशाब आने के साथ पैरों में सूजन, थकान, पेशाब में झाग या खून जैसे अन्य लक्षण भी दिखाई दें, तो चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।
2. पेशाब में खून दिखाई देना
पेशाब का रंग लाल, गुलाबी या चाय/कोला जैसा दिखाई दे तो इसे सामान्य नहीं मानना चाहिए। पेशाब में खून आने को हेमाट्यूरिया कहा जाता है। किडनी के फिल्टर को नुकसान होने पर रक्त कोशिकाएं पेशाब में आ सकती हैं।
लेकिन पेशाब में खून आने की वजह केवल किडनी की बीमारी नहीं होती। यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन, किडनी स्टोन और कुछ अन्य स्वास्थ्य समस्याएं भी इसका कारण बन सकती हैं। इसलिए केवल देखकर खुद कोई निष्कर्ष निकालने के बजाय जांच कराना जरूरी है।
NKF के अनुसार, पेशाब में दिखाई देने वाला खून ऐसा लक्षण है जिसे स्वास्थ्य विशेषज्ञ से जांच करवाए बिना नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
3. पेशाब में लगातार झाग बनना
टॉयलेट में पेशाब करने के बाद अगर बहुत ज्यादा झाग या बुलबुले दिखाई देते हैं और यह स्थिति बार-बार हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।
लगातार झागदार पेशाब प्रोटीन के पेशाब में निकलने, यानी प्रोटीन्यूरिया या एल्ब्यूमिन्यूरिया का संकेत हो सकता है। स्वस्थ किडनी के फिल्टर आमतौर पर प्रोटीन जैसे महत्वपूर्ण पदार्थों को खून में बनाए रखते हैं। फिल्टर को नुकसान पहुंचने पर प्रोटीन पेशाब में लीक हो सकता है।
हालांकि, हर बार पेशाब में झाग दिखना किडनी की बीमारी का प्रमाण नहीं है। कभी-कभी तेज धार से पेशाब करने पर भी बुलबुले बन सकते हैं। अगर झाग लगातार और ज्यादा मात्रा में दिखाई दे रहा है, तो यूरिन टेस्ट से इसकी वजह पता लगाई जा सकती है।
सिर्फ इन तीन लक्षणों तक सीमित नहीं है खतरा
किडनी की बीमारी बढ़ने पर कई अन्य संकेत भी दिखाई दे सकते हैं। इनमें लगातार थकान, भूख कम लगना, नींद में परेशानी, त्वचा में खुजली, पैरों और टखनों में सूजन, आंखों के आसपास सुबह के समय सूजन, मांसपेशियों में ऐंठन और सांस लेने में परेशानी शामिल हो सकती है।
लेकिन इन लक्षणों का संबंध दूसरी बीमारियों से भी हो सकता है। इसलिए लक्षणों के आधार पर खुद से किडनी फेलियर का निष्कर्ष निकालना सही नहीं है।
किन लोगों को ज्यादा सावधान रहना चाहिए?
कुछ लोगों में क्रॉनिक किडनी डिजीज का खतरा दूसरों की तुलना में अधिक होता है। NKF के अनुसार प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं:
डायबिटीज
हाई ब्लड प्रेशर
हृदय रोग या हार्ट फेलियर
मोटापा
60 वर्ष से अधिक उम्र
परिवार में किडनी डिजीज या किडनी फेलियर का इतिहास
पहले कभी एक्यूट किडनी इंजरी होना
धूम्रपान या तंबाकू का सेवन
डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर किडनी की बीमारी के दो प्रमुख जोखिम कारक हैं। लंबे समय तक ब्लड शुगर या ब्लड प्रेशर नियंत्रित न रहने पर किडनी के फिल्टर को नुकसान पहुंच सकता है।
किडनी की जांच में कौन से टेस्ट होते हैं?
किडनी की स्थिति जानने के लिए डॉक्टर आमतौर पर ब्लड और यूरिन की जांच का सहारा लेते हैं। eGFR ब्लड टेस्ट के जरिए किडनी की फिल्ट्रेशन क्षमता का अनुमान लगाने में मदद करता है, जबकि uACR पेशाब में एल्ब्यूमिन यानी प्रोटीन की मात्रा का पता लगाने में मदद करता है।
यूरिन टेस्ट से पेशाब में खून, प्रोटीन, शुगर और संक्रमण से जुड़े संकेतों का भी पता लगाया जा सकता है। बीमारी की जल्दी पहचान होने पर आगे होने वाले नुकसान को कम करने के लिए समय रहते कदम उठाए जा सकते हैं।
क्या हर बार झागदार पेशाब या बार-बार पेशाब आना किडनी फेलियर है?
नहीं। यही बात सबसे महत्वपूर्ण है। किसी एक लक्षण के आधार पर किडनी फेलियर की पुष्टि नहीं की जा सकती। बार-बार पेशाब आने के कई कारण हो सकते हैं और कभी-कभार झागदार पेशाब सामान्य कारणों से भी हो सकता है।
इसी तरह पेशाब में खून आने का कारण किडनी के अलावा यूरिनरी ट्रैक्ट की अन्य समस्या भी हो सकती है। इसलिए इन संकेतों को डर की वजह बनाने के बजाय डॉक्टर से सही जांच कराने का संकेत समझना चाहिए।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर पेशाब में बार-बार या लगातार खून दिखाई दे, लगातार अत्यधिक झाग बनता रहे, पेशाब की आदत में स्पष्ट बदलाव आए या इसके साथ शरीर में सूजन और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण हों, तो चिकित्सकीय सलाह लें।
विशेष रूप से डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, पारिवारिक इतिहास या 60 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों को लक्षणों का इंतजार नहीं करना चाहिए। NKF जोखिम वाले लोगों में नियमित जांच की सलाह देता है।
यह जानकारी सामान्य जागरूकता के लिए है। केवल लक्षणों के आधार पर किडनी की बीमारी या किडनी फेलियर का निदान नहीं किया जा सकता। सही स्थिति जानने के लिए डॉक्टर से परामर्श और आवश्यक ब्लड-यूरिन टेस्ट जरूरी हैं।

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