चीनी को लेकर सबसे बड़ा भ्रम! क्या सच में मीठा खाते ही हो जाती है डायबिटीज? डॉक्टरों की बात जानकर चौंक जाएंगे आप
आज के समय में डायबिटीज एक ऐसी बीमारी बन चुकी है, जिसका नाम सुनते ही बहुत से लोगों के मन में सबसे पहले चीनी का ख्याल आता है। कई लोग मानते हैं कि अगर कोई व्यक्ति चाय में ज्यादा चीनी डालता है, मिठाई खाता है या मीठे पेय पीता है तो उसे डायबिटीज होना तय है। इसी डर की वजह से कुछ लोग चीनी को पूरी तरह छोड़ने की कोशिश भी करते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ सफेद चीनी खाने से किसी व्यक्ति को डायबिटीज हो जाती है?
इस सवाल का जवाब इतना सीधा नहीं है। सिर्फ सफेद चीनी खाना अपने आप में टाइप-2 डायबिटीज का एकमात्र कारण नहीं है। डायबिटीज कई कारकों से जुड़ी बीमारी है। इसमें शरीर की इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया, आनुवंशिक कारण, वजन, शारीरिक गतिविधि और खान-पान जैसी कई चीजें भूमिका निभाती हैं। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डायबिटीज एंड डाइजेस्टिव एंड किडनी डिजीज (NIDDK) के मुताबिक ज्यादा वजन या मोटापा, शारीरिक निष्क्रियता और परिवार में डायबिटीज का इतिहास टाइप-2 डायबिटीज के महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में शामिल हैं।
इसका मतलब यह नहीं है कि ज्यादा चीनी खाना पूरी तरह सुरक्षित है। लंबे समय तक जरूरत से ज्यादा मीठा खाना, खासकर शुगर वाली ड्रिंक का अधिक सेवन, शरीर में अतिरिक्त कैलोरी पहुंचा सकता है। इससे वजन बढ़ सकता है और वजन बढ़ना टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकता है।
क्या सिर्फ चीनी से डायबिटीज हो जाती है?
डायबिटीज उस समय होती है जब शरीर में ब्लड ग्लूकोज यानी ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से ज्यादा हो जाता है। टाइप-2 डायबिटीज में शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पातीं और समय के साथ शरीर पर्याप्त इंसुलिन भी नहीं बना पाता। इसका कारण केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं होता।
इसलिए यह कहना कि “मैंने चीनी खाई और इसी वजह से मुझे डायबिटीज हो गई” चिकित्सा दृष्टि से बहुत सरल निष्कर्ष होगा। किसी व्यक्ति का पूरा खान-पान, वजन, शारीरिक गतिविधि, उम्र, पारिवारिक इतिहास और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारक मिलकर जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।
वहीं, अगर कोई व्यक्ति लंबे समय तक बहुत अधिक मीठा खाता है और उसके कारण उसकी कुल कैलोरी जरूरत से ज्यादा हो जाती है, तो वजन बढ़ सकता है। ज्यादा वजन या मोटापा टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम से मजबूती से जुड़ा हुआ है।
फिर ज्यादा मीठा खाना चिंता की बात क्यों है?
यहां सबसे महत्वपूर्ण बात मात्रा की है। कभी-कभार मिठाई खाना और हर दिन बड़ी मात्रा में मीठी चीजें खाना एक जैसी बात नहीं है।
अगर किसी व्यक्ति की डाइट में लगातार मिठाई, केक, चॉकलेट, मीठे बिस्किट, मीठी चाय, शुगर वाले पेय और दूसरे मीठे खाद्य पदार्थ ज्यादा मात्रा में शामिल हैं, तो उसके शरीर में अतिरिक्त ऊर्जा पहुंच सकती है। अगर यह ऊर्जा शारीरिक गतिविधि के जरिए खर्च नहीं होती तो समय के साथ वजन बढ़ सकता है।
NIDDK के अनुसार ज्यादा वजन या मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता टाइप-2 डायबिटीज के प्रमुख जोखिम कारकों में हैं। स्वस्थ वजन बनाए रखना और नियमित शारीरिक गतिविधि करना डायबिटीज के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
यानी चीनी को लेकर सही सोच यह होनी चाहिए कि चीनी अकेली बीमारी की पूरी कहानी नहीं है, लेकिन बहुत ज्यादा मीठा और असंतुलित खान-पान लंबे समय में नुकसान पहुंचा सकता है।
मीठे ड्रिंक पर सबसे ज्यादा ध्यान क्यों देना चाहिए?
कोल्ड ड्रिंक, मीठे सोडा, कई तरह के पैकेज्ड मीठे पेय, एनर्जी ड्रिंक और दूसरे शुगर-स्वीटेंड बेवरेज रोजमर्रा की डाइट में अतिरिक्त चीनी का बड़ा स्रोत बन सकते हैं।
इनका एक बड़ा नुकसान यह है कि इन्हें पीना आसान होता है। व्यक्ति एक बार में काफी मात्रा में पेय पी सकता है और उसे उतना पेट भरा हुआ महसूस नहीं होता जितना ठोस भोजन खाने पर हो सकता है। इससे कुल कैलोरी का सेवन बढ़ सकता है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अधिक मात्रा में फ्री शुगर का सेवन अतिरिक्त ऊर्जा पहुंचा सकता है और अस्वस्थ वजन बढ़ने तथा मोटापे के जोखिम से जुड़ा है। WHO मीठे पेय का सेवन सीमित करने की सलाह देता है।
इसलिए अगर कोई व्यक्ति डायबिटीज के खतरे को कम करने के लिए अपनी डाइट में एक बड़ा बदलाव करना चाहता है, तो मीठे पेय कम करना एक उपयोगी कदम हो सकता है।
चाय की चीनी और कोल्ड ड्रिंक में फर्क समझना जरूरी
कई लोग सोचते हैं कि अगर उन्होंने दिन में एक कप चाय में चीनी डाल ली तो अब डायबिटीज का खतरा बढ़ गया। ऐसा निष्कर्ष सही नहीं है।
किसी व्यक्ति की पूरी डाइट को देखना जरूरी है। अगर कोई व्यक्ति दिनभर में कई बार मीठी चाय पीता है और इसके साथ मिठाई, बिस्किट, मीठे पेय और दूसरे शुगर वाले खाद्य पदार्थ भी बड़ी मात्रा में लेता है, तो कुल चीनी का सेवन काफी बढ़ सकता है।
इसके विपरीत, कभी-कभार सीमित मात्रा में मीठा खाने को अकेले डायबिटीज का कारण मानना उचित नहीं होगा। जोखिम को समझने के लिए पूरे खान-पान और जीवनशैली पर ध्यान देना ज्यादा महत्वपूर्ण है।
WHO के अनुसार कितनी चीनी?
विश्व स्वास्थ्य संगठन फ्री शुगर का सेवन कुल दैनिक ऊर्जा सेवन के 10 प्रतिशत से कम रखने की सलाह देता है। WHO के अनुसार 2,000 कैलोरी वाली डाइट में यह लगभग 50 ग्राम या करीब 12 छोटी चम्मच के बराबर है। WHO यह भी कहता है कि इसे 5 प्रतिशत या उससे कम तक सीमित करने से अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।
यहां “फ्री शुगर” को समझना भी जरूरी है। इसमें खाने और पेय में निर्माता, रसोइया या उपभोक्ता द्वारा जोड़ी गई शक्कर के साथ-साथ शहद, सिरप और फलों के रस में मौजूद शर्करा भी शामिल होती है।
इसलिए केवल चाय में डाली जाने वाली सफेद चीनी पर ध्यान देना पर्याप्त नहीं है। कई बार व्यक्ति अनजाने में अलग-अलग खाद्य पदार्थों और पेय के जरिए भी काफी मात्रा में चीनी ले रहा होता है।
क्या फल खाने से भी डायबिटीज का खतरा बढ़ता है?
यहां भी भ्रम की स्थिति देखने को मिलती है। फल में प्राकृतिक रूप से शुगर होती है, लेकिन पूरा फल केवल शुगर का स्रोत नहीं होता। उसमें पानी, फाइबर और दूसरे पोषक तत्व भी होते हैं।
WHO की फ्री शुगर संबंधी परिभाषा में पूरे फल में स्वाभाविक रूप से मौजूद शुगर को उसी तरह शामिल नहीं किया जाता जैसे फलों के रस में मौजूद शुगर को किया जाता है।
इसलिए स्वस्थ डाइट में फल महत्वपूर्ण हो सकते हैं। हालांकि यदि किसी व्यक्ति को पहले से डायबिटीज है, उसकी ब्लड शुगर नियंत्रित नहीं है या डॉक्टर ने किसी विशेष डाइट की सलाह दी है, तो उसे अपनी व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार भोजन तय करना चाहिए।
डायबिटीज के दूसरे बड़े कारण क्या हैं?
टाइप-2 डायबिटीज का जोखिम कई चीजों से प्रभावित होता है। इनमें सबसे महत्वपूर्ण कारकों में ज्यादा वजन या मोटापा, कम शारीरिक गतिविधि, परिवार में डायबिटीज का इतिहास और उम्र शामिल हैं। प्रीडायबिटीज और कुछ अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी जोखिम बढ़ा सकती हैं।
इसलिए केवल चीनी छोड़ देने से हर व्यक्ति का डायबिटीज का खतरा खत्म नहीं हो जाता।
अगर किसी व्यक्ति का वजन ज्यादा है, वह दिनभर बैठा रहता है, शारीरिक गतिविधि बहुत कम करता है और परिवार में डायबिटीज का इतिहास भी है, तो उसे अपनी पूरी जीवनशैली पर ध्यान देना चाहिए।
वजन और डायबिटीज का क्या संबंध है?
वजन और टाइप-2 डायबिटीज के बीच महत्वपूर्ण संबंध है। ज्यादा वजन या मोटापा शरीर में इंसुलिन के सही इस्तेमाल को प्रभावित कर सकता है। इससे ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में परेशानी बढ़ सकती है।
NIDDK के मुताबिक जिन लोगों को ज्यादा वजन या मोटापा है, वे वजन कम करके और शारीरिक गतिविधि बढ़ाकर टाइप-2 डायबिटीज को रोकने या देर से होने में मदद कर सकते हैं।
इसीलिए डायबिटीज से बचाव की रणनीति केवल “चीनी मत खाओ” तक सीमित नहीं होनी चाहिए। संतुलित भोजन, नियमित गतिविधि और स्वस्थ वजन पर ध्यान देना ज्यादा व्यापक और उपयोगी तरीका है।
क्या चीनी पूरी तरह छोड़ना जरूरी है?
हर स्वस्थ व्यक्ति के लिए चीनी को पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है। ज्यादा महत्वपूर्ण है कि फ्री शुगर का सेवन सीमित रखा जाए और मीठे खाद्य पदार्थों तथा पेय को रोज की डाइट का बड़ा हिस्सा न बनने दिया जाए।
चाय में चीनी की मात्रा कम करना, मिठाई और मीठे स्नैक्स को सीमित करना तथा शुगर वाली ड्रिंक की जगह पानी या बिना चीनी वाले पेय चुनना व्यावहारिक कदम हो सकते हैं।
WHO भी फ्री शुगर को कुल ऊर्जा सेवन के 10 प्रतिशत से कम रखने की सलाह देता है और 5 प्रतिशत या उससे कम को अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ से जोड़ता है।
अगर परिवार में डायबिटीज है तो क्या करें?
अगर माता-पिता या भाई-बहन में टाइप-2 डायबिटीज है तो व्यक्ति का जोखिम बढ़ सकता है। इसका मतलब यह नहीं है कि उसे निश्चित रूप से डायबिटीज होगी, लेकिन जीवनशैली और नियमित स्वास्थ्य जांच पर ज्यादा ध्यान देना समझदारी है।
ऐसे लोगों के लिए स्वस्थ वजन बनाए रखना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और संतुलित आहार लेना महत्वपूर्ण है। यदि डॉक्टर सलाह दें तो समय-समय पर ब्लड ग्लूकोज या अन्य संबंधित जांच भी कराई जा सकती है।
अगर पहले से डायबिटीज है तो क्या करें?
जिन लोगों को पहले से डायबिटीज है, उनके लिए मामला अलग हो सकता है। उन्हें अपनी डाइट और दवाओं का प्रबंधन डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार करना चाहिए।
डायबिटीज होने के बाद केवल चीनी बंद कर देना पर्याप्त नहीं होता। कुल कार्बोहाइड्रेट, भोजन की मात्रा, शारीरिक गतिविधि, दवाएं और ब्लड शुगर की निगरानी जैसे कई पहलुओं पर ध्यान देना पड़ सकता है।
इसलिए किसी व्यक्ति को अपनी दवा बंद करने, अचानक बहुत सख्त डाइट शुरू करने या किसी एक खाद्य पदार्थ को पूरी तरह जिम्मेदार मानने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए।
असली खतरा सिर्फ चीनी नहीं, पूरी जीवनशैली है
तो क्या सफेद चीनी खाने से डायबिटीज होती है? सिर्फ चीनी को टाइप-2 डायबिटीज का अकेला कारण मानना सही नहीं है। बीमारी कई कारकों के कारण विकसित हो सकती है, जिनमें आनुवंशिक जोखिम, ज्यादा वजन, शारीरिक निष्क्रियता और इंसुलिन से जुड़ी समस्याएं शामिल हैं।
लेकिन इसका यह मतलब भी नहीं कि ज्यादा चीनी खाना बेफिक्र होकर जारी रखा जाए। जरूरत से ज्यादा फ्री शुगर, खासकर मीठे पेय और अतिरिक्त कैलोरी का अधिक सेवन, वजन बढ़ने और मोटापे के जोखिम में योगदान कर सकता है, जो आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज के खतरे को बढ़ा सकता है।
इसलिए सबसे बेहतर तरीका चीनी से डरना नहीं, बल्कि मात्रा और पूरी जीवनशैली पर नियंत्रण रखना है। मीठा सीमित मात्रा में लें, शुगर वाली ड्रिंक कम करें, संतुलित भोजन करें और नियमित शारीरिक गतिविधि को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। यही तरीका लंबे समय में डायबिटीज समेत कई स्वास्थ्य समस्याओं के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
डिस्क्लेमर: यह सामान्य स्वास्थ्य जानकारी है। डायबिटीज, प्रीडायबिटीज या ब्लड शुगर से जुड़ी व्यक्तिगत समस्या होने पर डॉक्टर से सलाह लेकर ही डाइट या उपचार में बदलाव करें।

कोई टिप्पणी नहीं