नेपाल में नदी बनी मौत का सैलाब! 105 भारतीय समेत 384 लोग लापता, आखिर भोटेकोशी में अचानक ऐसा क्या हुआ?
नेपाल में बुधवार सुबह प्रकृति ने ऐसा कहर बरपाया कि देखते ही देखते पूरा इलाका तबाही के मंजर में बदल गया। तिब्बत सीमा के पास नेपाल के रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी अचानक उफान पर आ गई और देखते ही देखते तेज बहाव ने घरों, सड़कों, पुलों, वाहनों और दूसरे बुनियादी ढांचे को अपनी चपेट में ले लिया। इस भीषण फ्लैश फ्लड के बाद बड़ी संख्या में लोगों का संपर्क टूट गया है। नेपाल टूरिज्म बोर्ड के शुरुआती आंकड़ों के मुताबिक करीब 384 यात्रियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है, जिनमें 105 भारतीय नागरिक शामिल हैं।
यह आपदा केवल नेपाल तक सीमित चिंता का विषय नहीं है। लापता लोगों में भारत के अलावा अमेरिका, ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया, मलेशिया, ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अफ्रीका और नीदरलैंड समेत कई देशों के नागरिक बताए जा रहे हैं। 37 लोगों को एनआरआई के तौर पर सूचीबद्ध किए जाने की भी जानकारी सामने आई है। प्रभावित क्षेत्र में संचार व्यवस्था और सड़क संपर्क बाधित होने के कारण लापता लोगों की वास्तविक संख्या और नुकसान का आकलन अभी लगातार बदल रहा है।
आखिर अचानक कैसे आया इतना खौफनाक सैलाब?
शुरुआती जांच और उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक यह सामान्य बारिश से आई बाढ़ नहीं थी। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास भोटेकोशी नदी के ऊपरी हिस्से में पहाड़ी चट्टानों और बर्फ के बड़े हिस्से के खिसकने से अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा नीचे की ओर आया। रॉयटर्स के मुताबिक प्रारंभिक आकलन में भूकंप से प्रेरित बर्फ-चट्टान के मलबे के खिसकने को इस आपदा का संभावित कारण बताया गया है। इस घटना ने नदी के बहाव को अचानक बेहद खतरनाक बना दिया और कुछ ही समय में नीचे के इलाकों में फ्लैश फ्लड जैसी स्थिति पैदा हो गई।
रसुवा जिले के टिमुरे और स्याफ्रूबेसी इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में बताए जा रहे हैं। तेज पानी अपने साथ मलबा और बड़े पत्थर लेकर आया, जिससे नदी के किनारे मौजूद ढांचे बुरी तरह प्रभावित हुए। कई वाहन बह गए और पुलों को नुकसान पहुंचा। सीमा क्षेत्र में व्यापार और आवाजाही पर भी इसका असर पड़ा है।
स्थानीय प्रशासन के मुताबिक पानी का स्तर असामान्य रूप से तेजी से बढ़ा। लोगों को संभलने का मौका भी नहीं मिला और कई जगहों पर संपर्क मार्ग टूट गए। यही वजह है कि राहत और बचाव दलों के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित इलाकों तक पहुंचना बनी हुई है।
105 भारतीयों के लापता होने से बढ़ी चिंता
इस आपदा के बाद भारत में भी चिंता बढ़ गई है क्योंकि लापता लोगों की सूची में 105 भारतीय नागरिकों के नाम बताए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे लोग बताए जा रहे हैं जो नेपाल के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा से जुड़े थे। कुछ भारतीय यात्रियों के समूहों का संपर्क टूटने की जानकारी भी सामने आई है।
नेपाल में मौजूद भारतीय नागरिकों और उनके परिवारों की मदद के लिए भारतीय दूतावास ने आपातकालीन हेल्पलाइन जारी की है। विदेश मंत्रालय और भारतीय मिशन नेपाल के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में हैं ताकि प्रभावित भारतीयों की जानकारी जुटाई जा सके और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके।
अधिकारियों के लिए समस्या यह है कि कई प्रभावित इलाकों में मोबाइल नेटवर्क, सड़क और बिजली जैसी सुविधाएं बाधित हुई हैं। ऐसे में किसी व्यक्ति के सुरक्षित होने की पुष्टि करने में भी समय लग रहा है। इसलिए शुरुआती आंकड़ों को अंतिम संख्या नहीं माना जा रहा है।
पीएम मोदी ने बालेन शाह से की बात
नेपाल में आई इस बड़ी प्राकृतिक आपदा पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताया है। उन्होंने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह से फोन पर बातचीत कर स्थिति की जानकारी ली और भारत की ओर से हर संभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया।
भारत की ओर से राहत सामग्री भेजने की तैयारी भी की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक भारतीय वायुसेना के विमान के जरिए राहत सामग्री नेपाल भेजने की योजना बनाई गई है। भारत सरकार का कहना है कि वह स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत के मुताबिक नेपाल को सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
दोनों देशों के बीच इस तरह के संकट के समय सहयोग पहले भी देखने को मिला है। इस बार भी भारतीय और नेपाली एजेंसियां लापता लोगों की तलाश तथा राहत-बचाव अभियान के समन्वय में जुटी हुई हैं।
खराब मौसम बना सबसे बड़ी चुनौती
फ्लैश फ्लड के बाद राहत और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है, लेकिन खराब मौसम ने मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रभावित क्षेत्र पहाड़ी और दुर्गम है। कई स्थानों पर सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ऐसे में जमीन के रास्ते राहत दलों को पहुंचाने में कठिनाई हो रही है।
हेलीकॉप्टरों के जरिए भी प्रभावित इलाकों का जायजा लेने और लोगों को निकालने की कोशिश की जा रही है, लेकिन मौसम और कम दृश्यता के कारण हवाई अभियान आसान नहीं है। मलबे और कीचड़ के कारण कई जगह हेलीकॉप्टर उतारना भी चुनौतीपूर्ण बताया गया है।
नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां और सेना प्रभावित क्षेत्रों में खोज एवं बचाव अभियान चला रही हैं। चीन की तरफ भी बचाव दल सक्रिय हैं, क्योंकि आपदा का असर सीमा के दोनों ओर महसूस किया गया है। रॉयटर्स के अनुसार चीन की ओर से सैकड़ों बचावकर्मी भी अभियान में लगाए गए हैं।
कई जिलों में हाई अलर्ट
भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ के बाद केवल रसुवा ही नहीं बल्कि आसपास के कई जिलों को भी अलर्ट पर रखा गया है। नदियों के किनारे रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर रहने और नदी के पास जाने से बचने की अपील की गई है।
रसुवा के अलावा नुवाकोट, धादिंग, चितवन और आसपास के क्षेत्रों में भी प्रशासन ने सतर्कता बढ़ाई है। लोगों को विशेष रूप से नदी किनारे, पुलों और हाईवे के आसपास अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है। बाढ़ के बाद मलबे और पानी के कारण आगे भी खतरा बना रह सकता है।
क्या और बड़ी बाढ़ का खतरा है?
इस आपदा के बाद एक और चिंता सामने आई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक नदी के ऊपरी हिस्से में किसी अवरोध के कारण आगे और पानी जमा होने तथा अचानक दूसरी बाढ़ आने का खतरा जताया गया है। इसी वजह से नदी के निचले हिस्सों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। भारत में भी सीमा पार बहने वाली नदियों को लेकर बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में निगरानी बढ़ाई गई है।
इस स्थिति में सबसे जरूरी यह है कि लोग सोशल मीडिया पर चल रही अपुष्ट सूचनाओं पर भरोसा न करें और केवल प्रशासन तथा आधिकारिक एजेंसियों की जानकारी के आधार पर निर्णय लें।
मौतों और नुकसान का आंकड़ा लगातार बदल रहा
आपदा के शुरुआती घंटों में मृतकों की संख्या को लेकर अलग-अलग रिपोर्टें सामने आई हैं। विभिन्न समय पर अलग-अलग आंकड़े बताए गए हैं, क्योंकि प्रभावित इलाकों तक पहुंचना मुश्किल है और कई स्थानों पर संचार व्यवस्था बाधित है। इसलिए मृतकों और लापता लोगों की संख्या को लेकर अंतिम आधिकारिक आंकड़े का इंतजार करना जरूरी है।
हालांकि इतना साफ है कि नुकसान काफी व्यापक है। घर, वाहन, पुल, सड़कें और बिजली से जुड़े बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं। कई हाइड्रोपावर परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचने की खबर है। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और आवाजाही पर भी बड़ा असर पड़ सकता है।
कैलाश मानसरोवर यात्रियों की सुरक्षा पर भी नजर
प्रभावित इलाका कैलाश मानसरोवर यात्रा के मार्गों से जुड़ा हुआ है। इस वजह से वहां मौजूद भारतीय यात्रियों को लेकर विशेष चिंता पैदा हुई है। कई यात्री टूर ऑपरेटरों और यात्रा एजेंसियों के माध्यम से इस क्षेत्र में पहुंचे थे। अब संबंधित एजेंसियां अपने यात्रियों की सूची के आधार पर लोगों की स्थिति की जानकारी जुटा रही हैं।
नेपाल टूरिज्म बोर्ड ने भी अलग-अलग ट्रैवल और टूरिज्म एजेंसियों से प्राप्त जानकारी के आधार पर लापता यात्रियों की सूची तैयार की है। इसका अर्थ यह है कि संख्या में आगे बदलाव संभव है। कुछ लोगों की सुरक्षित होने की पुष्टि हो सकती है, जबकि संचार टूटने के कारण फिलहाल संपर्क से बाहर लोग भी लापता सूची में शामिल हो सकते हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल—लापता लोगों का क्या हुआ?
भोटेकोशी नदी की इस तबाही ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। अचानक इतनी बड़ी मात्रा में पानी कहां से आया? कितने लोग वास्तव में लापता हैं? 105 भारतीयों में कितने लोग सुरक्षित हैं? प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक राहत दल कब पहुंच पाएंगे? और क्या आने वाले घंटों में नदी का जलस्तर फिर बढ़ सकता है?
फिलहाल इन सवालों के जवाब खोजने के लिए नेपाल की सेना, स्थानीय प्रशासन, पुलिस और राहत एजेंसियां अभियान चला रही हैं। भारत भी अपने नागरिकों की जानकारी जुटाने और जरूरत पड़ने पर सहायता पहुंचाने में नेपाल के साथ समन्वय कर रहा है।
नेपाल की इस त्रासदी ने एक बार फिर हिमालयी क्षेत्र की प्राकृतिक संवेदनशीलता को सामने ला दिया है। पहाड़ी इलाकों में भूस्खलन, अचानक बर्फ और चट्टानों के खिसकने तथा फ्लैश फ्लड जैसी घटनाएं बेहद कम समय में बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकती हैं। फिलहाल सबसे बड़ी प्राथमिकता लापता लोगों को ढूंढना, फंसे यात्रियों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना है।
आपदा के दौरान आंकड़े तेजी से बदल रहे हैं। 384 लापता यात्रियों और 105 भारतीयों का आंकड़ा शुरुआती पर्यटन-एजेंसी आधारित सूची से जुड़ा है; अंतिम सरकारी आंकड़ा अलग हो सकता है। इसी तरह मृतकों की संख्या को लेकर भी शुरुआती रिपोर्टों में अंतर है। इसलिए अंतिम स्थिति के लिए आधिकारिक अपडेट को प्राथमिकता देना जरूरी है।

कोई टिप्पणी नहीं