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किराए के कमरे में 4 युवक और एक महिला को देखकर पुलिस को हुआ शक, छापेमारी में खुला ऐसा राज कि उड़ गए होश!



बिहार के वैशाली जिले से साइबर ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां एक किराए के मकान में चार युवक और एक महिला रह रहे थे। बाहर से देखने पर यह सामान्य किराएदारों की तरह लग सकता था, लेकिन कमरे के अंदर से चल रहे काम की भनक लगते ही पुलिस ने जब छापेमारी की तो पूरा मामला सामने आ गया। पुलिस टीम को देखकर कमरे में मौजूद लोग छिपने की कोशिश करने लगे। इसके बाद जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की तो जो जानकारी सामने आई, उसने अधिकारियों को भी चौंका दिया।

पुलिस के मुताबिक, यह पूरा गिरोह लोगों को नौकरी दिलाने का झांसा देकर साइबर ठगी करता था। गिरोह के सदस्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और व्हाट्सऐप के जरिए बेरोजगार लोगों को निशाना बनाते थे। नौकरी का लालच देकर पहले उनसे जरूरी दस्तावेज और सर्टिफिकेट मंगाए जाते थे और फिर रजिस्ट्रेशन फीस, प्रोसेसिंग चार्ज तथा अन्य शुल्क के नाम पर पैसे की मांग की जाती थी।

इस मामले में पुलिस ने गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में चार युवक वैशाली जिले के रहने वाले बताए गए हैं, जबकि महिला आरोपी की पहचान रूपा सरकार के रूप में हुई है, जो पश्चिम बंगाल की रहने वाली बताई गई है।

दो मोबाइल नंबरों ने खोला पूरे गिरोह का राज

इस पूरे मामले की शुरुआत साइबर थाना वैशाली को मिली जानकारी से हुई। पुलिस को प्रतिबिंब पोर्टल के जरिए पता चला कि दो मोबाइल नंबरों के खिलाफ पटना और बेतिया में नौकरी दिलाने के नाम पर साइबर ठगी से संबंधित शिकायतें दर्ज हैं। शिकायतों की जांच के दौरान पुलिस ने इन मोबाइल नंबरों की गतिविधियों को खंगाला।

जांच में सामने आया कि दोनों मोबाइल नंबर वैशाली के औद्योगिक थाना क्षेत्र में एक्टिव थे। इसके बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मोबाइल लोकेशन और तकनीकी जानकारी के आधार पर संदिग्ध ठिकाने की पहचान की।

साइबर डीएसपी चांदनी सुमन के नेतृत्व में पुलिस टीम ने इसके बाद संबंधित इलाके में छापेमारी की। टीम जब उस किराए के मकान तक पहुंची तो वहां चार युवक और एक महिला मौजूद मिले।

पुलिस को देखकर छिपने लगे आरोपी

पुलिस के पहुंचते ही कमरे में मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया। बताया जा रहा है कि महिला और चारों युवक पुलिस टीम को देखकर छिपने का प्रयास करने लगे। पुलिस को उनके व्यवहार पर शक हुआ और सभी से पूछताछ शुरू की गई।

शुरुआत में कमरे में मौजूद लोगों ने पुलिस को कोई स्पष्ट जानकारी देने की कोशिश की, लेकिन पूछताछ आगे बढ़ने के साथ कथित तौर पर पूरा मामला सामने आने लगा। पुलिस के अनुसार, सभी लोग मिलकर नौकरी दिलाने के नाम पर लोगों से संपर्क करते थे।

युवाओं को आकर्षित करने के लिए नौकरी से संबंधित फर्जी विज्ञापन तैयार किए जाते थे। इसके बाद इच्छुक लोगों से बातचीत की जाती थी और उन्हें नौकरी मिलने का भरोसा दिलाया जाता था। इसी दौरान उनसे उनके सर्टिफिकेट और दूसरे व्यक्तिगत दस्तावेज मांगे जाते थे।

व्हाट्सऐप पर बनाया जाता था शिकार

पुलिस जांच के मुताबिक, गिरोह कथित तौर पर व्हाट्सऐप का इस्तेमाल लोगों से संपर्क करने और उनसे दस्तावेज हासिल करने के लिए करता था। नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को भरोसा दिलाया जाता था कि उनकी नौकरी की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

इसके बाद उनसे रजिस्ट्रेशन फीस और प्रोसेसिंग चार्ज के नाम पर पैसे मांगे जाते थे। बेरोजगार युवक और युवतियां नौकरी मिलने की उम्मीद में इन आरोपियों के झांसे में आ जाते थे।

साइबर ठगी के ऐसे मामलों में अक्सर ठग पहले पीड़ित का भरोसा जीतने की कोशिश करते हैं। नौकरी, लोन, निवेश या किसी अन्य आकर्षक ऑफर का लालच देकर व्यक्ति से बातचीत शुरू की जाती है। इसके बाद अलग-अलग शुल्क के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं। वैशाली के इस मामले में भी पुलिस को इसी तरह की कथित गतिविधियों के सबूत मिले हैं।

OLX पर भी लगाए जाते थे फर्जी नौकरी के विज्ञापन

पुलिस के अनुसार, गिरोह सिर्फ व्हाट्सऐप तक सीमित नहीं था। आरोपियों द्वारा OLX पर भी नौकरी से जुड़े फर्जी विज्ञापन दिए जाते थे। इन विज्ञापनों के जरिए नौकरी तलाशने वाले लोगों को संपर्क में लाया जाता था।

एक बार संपर्क होने के बाद उन्हें नौकरी दिलाने का भरोसा दिया जाता था और फिर रजिस्ट्रेशन तथा प्रोसेसिंग जैसे अलग-अलग शुल्क के नाम पर रकम मांगी जाती थी।

यही तरीका साइबर ठगी का सबसे बड़ा हथियार बन जाता है, क्योंकि नौकरी की तलाश कर रहे लोग जल्द रोजगार पाने की उम्मीद में अपनी व्यक्तिगत जानकारी और पैसे दोनों साझा कर बैठते हैं।

कमरे से बरामद हुआ सामान

छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से कई महत्वपूर्ण सामान बरामद किए हैं। पुलिस के अनुसार, मौके से 9 मोबाइल फोन और 13 सिम कार्ड बरामद किए गए। इसके अलावा 8 एटीएम कार्ड भी मिले।

पुलिस ने 2 पासबुक और 2 पैन कार्ड भी बरामद किए हैं। इसके साथ ही 2 आधार कार्ड और 1 वोटर आईडी कार्ड भी पुलिस के हाथ लगे हैं।

इतनी संख्या में मोबाइल फोन और सिम कार्ड मिलने के बाद पुलिस को गिरोह के साइबर ठगी के नेटवर्क के बारे में और जानकारी मिलने की उम्मीद है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इन नंबरों से कितने लोगों को संपर्क किया गया और कितने लोगों से कथित तौर पर पैसे की वसूली की गई।

कई राज्यों तक पहुंच सकता है नेटवर्क

मामले में सामने आए पटना और बेतिया से जुड़े शिकायतों के कारण पुलिस की जांच का दायरा बढ़ सकता है। अभी तक सामने आई जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट है कि कथित गिरोह नौकरी के नाम पर लोगों को निशाना बना रहा था।

जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर सकती हैं कि आरोपियों के संपर्क में और कितने लोग थे और बरामद किए गए मोबाइल फोन तथा सिम कार्ड का इस्तेमाल किन-किन गतिविधियों में किया गया।

महिला आरोपी के पश्चिम बंगाल से होने की जानकारी सामने आने के बाद पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि क्या गिरोह के तार बिहार के बाहर भी जुड़े हुए थे।

बेरोजगार युवाओं को बनाया जाता था निशाना

नौकरी की तलाश कर रहे युवा साइबर ठगों के लिए आसान निशाना बन सकते हैं। खासकर जब किसी विज्ञापन में अच्छी नौकरी, बेहतर वेतन और कम समय में नियुक्ति का दावा किया जाता है, तो कई लोग बिना पर्याप्त जांच किए संपर्क कर लेते हैं।

ऐसे में किसी भी नौकरी के लिए रजिस्ट्रेशन, दस्तावेज सत्यापन या प्रोसेसिंग के नाम पर पैसे मांगने पर सावधानी बेहद जरूरी है। कंपनी या संस्था की आधिकारिक वेबसाइट, भर्ती प्रक्रिया और संपर्क विवरण की स्वतंत्र रूप से जांच करनी चाहिए।

पुलिस जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल वैशाली पुलिस ने पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और बरामद मोबाइल फोन, सिम कार्ड, बैंकिंग दस्तावेज तथा अन्य सामान की जांच की जा रही है। इन उपकरणों और दस्तावेजों से गिरोह की गतिविधियों के बारे में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है।

सबसे बड़ा सवाल यही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को नौकरी का सपना दिखाकर अपना शिकार बनाया और कितनी रकम की कथित ठगी की। पुलिस की आगे की जांच में इन सवालों के जवाब सामने आ सकते हैं।

वैशाली में हुई यह कार्रवाई एक बार फिर बताती है कि साइबर ठगी करने वाले गिरोह किस तरह नौकरी की जरूरत और बेरोजगारी की मजबूरी का फायदा उठाकर लोगों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में ऑनलाइन नौकरी के विज्ञापनों को लेकर सावधानी बरतना और किसी भी अनजान व्यक्ति या नंबर पर पैसे भेजने से पहले पूरी जानकारी सत्यापित करना बेहद जरूरी है।

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