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आधी रात 79 छात्राओं के बीच घुसा जहरीला सांप! सुबह तक 3 की मौत… छात्रावास की सुरक्षा पर उठे बड़े सवाल

 


गढ़चिरौली: महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले से एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई है। धानोरा तहसील के जपतलाई गांव स्थित एक आवासीय आश्रम स्कूल के छात्रावास में आधी रात उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब सो रही छात्राओं के बीच अचानक जहरीला सांप पहुंच गया। सांप के डसने से कई छात्राएं प्रभावित हुईं। हादसे में तीन आदिवासी छात्राओं की मौत हो गई, जबकि अन्य छात्राओं को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। घटना के बाद पूरे इलाके में शोक और दहशत का माहौल है।

यह हादसा सोमवार की देर रात करीब 2 बजे हुआ बताया जा रहा है। उस समय छात्रावास के कमरे में बड़ी संख्या में छात्राएं सो रही थीं। अचानक सांप के पहुंचने और कुछ छात्राओं को डसने के बाद छात्रावास में चीख-पुकार मच गई। आनन-फानन में प्रभावित छात्राओं को अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन इलाज के दौरान तीन छात्राओं की जान नहीं बचाई जा सकी। एक अन्य छात्रा की हालत गंभीर होने के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए उच्च चिकित्सा केंद्र भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।

घटना के बाद जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है और आश्रम स्कूल की व्यवस्थाओं की जांच शुरू कर दी गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी घटना पर चिंता जताते हुए तत्काल रिपोर्ट मांगी है।

आधी रात अचानक मची चीख-पुकार

बताया जा रहा है कि जपतलाई स्थित आश्रम स्कूल के छात्रावास में रात के समय छात्राएं सो रही थीं। इसी दौरान एक जहरीला सांप कमरे के भीतर पहुंच गया। सांप ने सो रही छात्राओं को निशाना बनाया और कई छात्राओं को डस लिया।

अचानक छात्राओं को सांप के काटने की जानकारी मिलने के बाद कमरे में अफरा-तफरी मच गई। छात्राएं डर के कारण चीखने लगीं। आसपास मौजूद कर्मचारियों और अन्य लोगों को घटना की जानकारी दी गई। इसके बाद प्रभावित छात्राओं को तत्काल स्थानीय स्वास्थ्य केंद्र ले जाने की व्यवस्था की गई।

शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि सांप ने कुल छह छात्राओं को डसा था। इनमें से तीन की हालत उपचार के दौरान बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। तीन अन्य छात्राओं को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया है।

तीन छात्राओं की मौत से मचा कोहराम

इस हादसे में तीन छात्राओं की मौत ने उनके परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। जिन बच्चियों को उनके माता-पिता ने पढ़ाई और बेहतर भविष्य की उम्मीद के साथ आश्रम स्कूल भेजा था, उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवारों में मातम छा गया।

घटना की सूचना मिलने के बाद परिजन अस्पताल और स्कूल की ओर दौड़ पड़े। वहां मौजूद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों के बीच भी घटना को लेकर गहरा आक्रोश और चिंता है।

इलाके में इस बात को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है कि आखिर छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था कितनी मजबूत थी और जहरीला सांप कमरे के अंदर तक कैसे पहुंच गया।

एक छात्रा की हालत गंभीर

सर्पदंश की घटना में घायल छात्राओं को तत्काल उपचार उपलब्ध कराया गया। कुछ छात्राओं की हालत में उपचार के बाद सुधार की जानकारी सामने आई है, जबकि एक छात्रा की स्थिति गंभीर बताई गई है।

गंभीर छात्रा को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए आगे रेफर किया गया। एक रिपोर्ट के मुताबिक गंभीर हालत को देखते हुए छात्रा को हेलीकॉप्टर के जरिए नागपुर ले जाने की व्यवस्था की गई।

डॉक्टरों की निगरानी में घायल छात्राओं का उपचार जारी है। प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को भी स्थिति पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

एक कमरे में बड़ी संख्या में छात्राओं के सोने की जानकारी

घटना के बाद छात्रावास में सोने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। रिपोर्टों के मुताबिक बड़ी संख्या में छात्राएं एक ही कमरे में फर्श पर सो रही थीं। कुछ रिपोर्टों में एक कमरे में करीब 79 छात्राओं के रहने और सोने की जानकारी सामने आई है।

आरोप और दावे यह भी हैं कि छात्राओं के लिए पर्याप्त बेड उपलब्ध नहीं थे और उन्हें जमीन पर गद्दे बिछाकर सोना पड़ता था। हालांकि इन व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति और नियमों के मुताबिक वहां कितनी छात्राओं के रहने की अनुमति थी, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

यही वजह है कि अब आश्रम स्कूल की व्यवस्थाओं की विस्तृत जांच की मांग उठ रही है।

सबसे बड़ा सवाल- सांप कमरे के अंदर पहुंचा कैसे?

इस घटना के बाद सबसे अहम सवाल छात्रावास की सुरक्षा को लेकर है। आखिर जहरीला सांप छात्राओं के सोने वाले कमरे तक कैसे पहुंचा?

क्या कमरे और भवन के आसपास ऐसी जगहें थीं, जहां से सांप अंदर आ सकता था? क्या नियमित रूप से परिसर में सांपों और दूसरे जहरीले जीवों की रोकथाम के उपाय किए जाते थे? क्या छात्रावास की खिड़कियों, दरवाजों और फर्श के आसपास पर्याप्त सुरक्षा थी?

इन सभी सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।

गढ़चिरौली का बड़ा हिस्सा वन क्षेत्र और ग्रामीण इलाकों से जुड़ा है। ऐसे क्षेत्रों में सांपों और अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी असामान्य नहीं मानी जाती। इसलिए आवासीय स्कूलों और छात्रावासों में अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की जरूरत होती है।

प्रशासन ने शुरू की जांच

घटना की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है। अधिकारी घटनास्थल का निरीक्षण कर रहे हैं और छात्रावास में उपलब्ध सुविधाओं की जानकारी जुटाई जा रही है।

जांच में यह देखा जा सकता है कि छात्रावास में रहने वाली छात्राओं की संख्या कितनी थी, उनके लिए कितने कमरे और बेड उपलब्ध थे, सुरक्षा व्यवस्था क्या थी और सांप के प्रवेश को रोकने के लिए क्या इंतजाम किए गए थे।

महाराष्ट्र सरकार ने भी घटना को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने घटना पर चिंता जताते हुए तत्काल रिपोर्ट मांगी है। प्रशासनिक अधिकारी घटनास्थल पर पहुंचे और स्थिति की जानकारी ली।

आश्रम स्कूलों की सुरक्षा पर बड़ा सवाल

गढ़चिरौली जैसे आदिवासी बहुल और दूरदराज के इलाकों में आश्रम स्कूल बच्चों की शिक्षा का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। इन संस्थानों में बड़ी संख्या में बच्चे रहकर पढ़ाई करते हैं। इसलिए यहां केवल शिक्षा ही नहीं, बल्कि भोजन, स्वास्थ्य, स्वच्छता, आवास और सुरक्षा की जिम्मेदारी भी बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।

जपतलाई की घटना ने इसी व्यवस्था की गंभीरता को सामने ला दिया है। तीन छात्राओं की मौत के बाद यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या छात्रावासों में नियमित सुरक्षा निरीक्षण होता है या नहीं।

यदि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग तेज हो सकती है।

दूसरी छात्राओं में भी डर का माहौल

घटना के बाद छात्रावास में रहने वाली अन्य छात्राओं के बीच भी भय का माहौल है। जिस कमरे में रात के समय सांप ने छात्राओं को डसा, वहां दोबारा सोने को लेकर छात्राओं में स्वाभाविक रूप से डर पैदा होना माना जा रहा है।

सर्पदंश की घटना के बाद छात्राओं की चिकित्सकीय निगरानी भी की जा रही है। प्रशासन के सामने अब यह चुनौती है कि बाकी छात्राओं को सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराया जाए और उन्हें मानसिक रूप से भी संभाला जाए।

ऐसी घटना के बाद केवल घायल छात्राओं का उपचार ही जरूरी नहीं होता, बल्कि घटना को देखने वाली या उसी कमरे में मौजूद दूसरी छात्राओं की मानसिक स्थिति पर भी ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

अब जांच रिपोर्ट का इंतजार

फिलहाल इस दर्दनाक घटना के बाद सबसे ज्यादा ध्यान जांच पर है। प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि सांप छात्रावास के कमरे तक कैसे पहुंचा और क्या सुरक्षा व्यवस्था में कोई कमी थी।

साथ ही यह भी देखा जाएगा कि छात्रावास में क्षमता के मुकाबले कितनी छात्राएं रह रही थीं और उनके लिए पर्याप्त बिस्तर तथा अन्य सुविधाएं उपलब्ध थीं या नहीं।

तीन छात्राओं की मौत ने पूरे गढ़चिरौली को झकझोर दिया है। जिन परिवारों ने अपनी बेटियों को शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए आश्रम स्कूल भेजा था, उनके लिए यह घटना कभी न भूलने वाला दुख बन गई है।

अब जरूरत केवल दोष तय करने की नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था तैयार करने की भी है जिससे भविष्य में किसी आवासीय स्कूल में बच्चों की जिंदगी इस तरह खतरे में न पड़े। अगर जांच में लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी तय करने के साथ-साथ सभी आश्रम स्कूलों की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा भी जरूरी होगी।

जपतलाई की इस घटना ने एक बेहद गंभीर सवाल छोड़ दिया है—जब दर्जनों छात्राएं रात में एक ही छात्रावास में सो रही थीं, तब उनकी सुरक्षा के लिए क्या इंतजाम थे और जहरीला सांप आखिर उनके बीच तक कैसे पहुंच गया? इस सवाल का जवाब अब प्रशासन की जांच से सामने आने का इंतजार है।

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