देखते ही देखते गायब हो गया 40 मीटर का पुल! उफनते नाले में बहा BRO चालक, 16 गांवों का संपर्क टूटा… अब तलाश में जुटीं टीमें
चमोली: उत्तराखंड के चमोली जिले में सोमवार शाम हुई तेज बारिश ने सीमांत क्षेत्र में हालात बिगाड़ दिए। नीति घाटी में भारी बारिश के बाद तमक नाला अचानक उफान पर आ गया और तेज बहाव ने सीमा सड़क संगठन (BRO) के बेली ब्रिज को अपनी चपेट में ले लिया। देखते ही देखते पानी के तेज बहाव ने पुल को बहा दिया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें तेज बहाव के बीच पुल के ढहने का भयावह दृश्य दिखाई दे रहा है।
इस हादसे ने नीति घाटी की कनेक्टिविटी को बुरी तरह प्रभावित किया है। पुल टूटने के बाद नीति, मलारी, जुम्मा समेत कई सीमांत गांवों का जिला मुख्यालय से सड़क संपर्क बाधित हो गया है। इसके साथ ही सीमा क्षेत्र में तैनात ITBP की अग्रिम चौकियों तक आवाजाही भी प्रभावित हुई है। प्रशासन और BRO की टीमें अब वैकल्पिक मार्ग तैयार करने में जुटी हैं।
अचानक बढ़ा तमक नाले का पानी
बताया जा रहा है कि सोमवार शाम चमोली के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भारी बारिश हुई। बारिश के बाद तमक नाले में अचानक पानी का स्तर बढ़ गया और देखते ही देखते बहाव बेहद तेज हो गया। पानी के साथ मलबा और पत्थर भी नीचे की ओर आने लगे।
नाले में अचानक आए इस उफान के कारण पुल पर दबाव बढ़ गया। कुछ ही देर में तेज धारा ने बेली ब्रिज को अपनी चपेट में ले लिया और पुल का ढांचा पानी के साथ बह गया। स्थानीय स्तर पर सामने आए वीडियो में पानी की ताकत का अंदाजा लगाया जा सकता है। पुल के आसपास भारी मात्रा में पानी और मलबा दिखाई देता है।
यह घटना ऐसे क्षेत्र में हुई है जहां सड़क और पुल ही गांवों तथा सीमा चौकियों को मुख्य क्षेत्र से जोड़ने का प्रमुख माध्यम हैं। इसलिए पुल के टूटने से केवल सामान्य यातायात ही प्रभावित नहीं हुआ, बल्कि सीमांत क्षेत्रों की आवाजाही भी मुश्किल हो गई है।
पानी का जायजा लेने पहुंचे चालक के बहने की खबर
हादसे के दौरान एक BRO चालक के भी तेज बहाव की चपेट में आने की जानकारी सामने आई है। बताया जा रहा है कि वह पानी की स्थिति का जायजा लेने के लिए मौके पर था, तभी अचानक तेज बहाव आया और वह उसकी चपेट में आ गया।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, लापता चालक पिथौरागढ़ का रहने वाला बताया जा रहा है। उसके पानी में बह जाने के बाद उसकी तलाश शुरू कर दी गई है। SDRF और NDRF की टीमें खोज अभियान में जुटी हैं। स्थानीय प्रशासन भी लगातार घटनास्थल की स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
हालांकि, पहाड़ी क्षेत्र में तेज बारिश, मलबे और उफनते नाले के कारण राहत एवं बचाव दलों के सामने चुनौती बनी हुई है। पानी का बहाव कम होने के बाद तलाशी अभियान को और तेज किया जा सकता है।
16 सीमांत गांवों का संपर्क प्रभावित
बेली ब्रिज के बह जाने से नीति घाटी के कई गांवों का संपर्क प्रभावित हुआ है। नीति और मलारी के अलावा जुम्मा तथा आसपास के सीमांत गांवों में रहने वाले लोगों के लिए यह पुल बेहद महत्वपूर्ण था।
नीति घाटी चीन सीमा के करीब स्थित संवेदनशील सीमांत क्षेत्र है। यहां सड़क संपर्क का महत्व केवल ग्रामीणों की आवाजाही तक सीमित नहीं है, बल्कि सुरक्षा बलों और प्रशासन के लिए भी यह मार्ग रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
पुल टूटने के कारण वाहनों की आवाजाही बाधित हो गई है। स्थानीय लोगों को अब वैकल्पिक रास्तों पर निर्भर रहना पड़ सकता है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जल्द से जल्द ऐसा रास्ता तैयार किया जाए जिससे सीमांत गांवों और अग्रिम क्षेत्रों में जरूरी सामान और सेवाओं की आवाजाही बहाल की जा सके।
ITBP की अग्रिम चौकियों पर भी असर
नीति घाटी का इलाका भारत-चीन सीमा के करीब होने के कारण रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। यहां ITBP की अग्रिम चौकियां भी मौजूद हैं। पुल टूटने से इन चौकियों तक जाने वाले मार्ग पर भी असर पड़ा है।
ऐसे संवेदनशील इलाके में सड़क संपर्क बाधित होना प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर विषय है। इसलिए BRO को जल्द से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।
प्रशासन स्थिति की निगरानी कर रहा है और जरूरत के अनुसार राहत सामग्री तथा अन्य जरूरी संसाधनों की व्यवस्था की जा रही है।
BRO ने शुरू किया वैकल्पिक रास्ते का काम
पुल टूटने के बाद BRO की टीमें सक्रिय हो गई हैं। संगठन की ओर से वैकल्पिक मार्ग तैयार करने का काम शुरू कर दिया गया है, ताकि यातायात को जल्द से जल्द बहाल किया जा सके।
पहाड़ी इलाकों में इस तरह का काम आसान नहीं होता। तेज बहाव के कारण जमीन का कटाव, मलबा और लगातार बारिश काम को प्रभावित कर सकते हैं। ऐसे में BRO को पहले सुरक्षित रास्ते की पहचान करनी होगी और उसके बाद वाहनों की आवाजाही के लिए मार्ग तैयार करना होगा।
चमोली के सीमांत क्षेत्रों में पहले भी भारी बारिश और बाढ़ के कारण पुल तथा सड़कें प्रभावित होती रही हैं। ऐसे इलाकों में BRO, ITBP, SDRF और स्थानीय प्रशासन को मिलकर तेजी से काम करना पड़ता है।
मुख्यमंत्री ने लिया घटना का संज्ञान
घटना की जानकारी मिलने के बाद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी मामले का संज्ञान लिया। प्रशासन को सतर्क रहने और प्रभावित ग्रामीणों तक जरूरी सहायता पहुंचाने के निर्देश दिए गए। NDRF और SDRF की टीमें भी घटनास्थल की ओर रवाना की गईं। मलारी की ओर यातायात को अस्थायी रूप से प्रतिबंधित किए जाने की जानकारी भी सामने आई है।
प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लापता व्यक्ति की तलाश और सीमांत क्षेत्र में फंसे लोगों तक जरूरी मदद पहुंचाना है।
बारिश ने बढ़ाई चुनौती
चमोली जैसे पहाड़ी जिले में मानसून के दौरान अचानक तेज बारिश और फ्लैश फ्लड का खतरा बना रहता है। ऊंचाई वाले इलाकों में कम समय में भारी बारिश होने पर छोटे नाले और गदेरे अचानक उफान पर आ जाते हैं। इनके साथ पहाड़ों से मलबा और बड़े पत्थर भी नीचे आने लगते हैं।
तमक नाले की घटना इसी खतरे की गंभीर तस्वीर दिखाती है। जिस पुल से कुछ समय पहले तक वाहन गुजर रहे थे, वही पुल तेज बहाव के सामने कुछ ही समय में पूरी तरह बह गया।
ऐसी घटनाएं पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क और पुलों के निर्माण के साथ-साथ मौसम की वास्तविक समय में निगरानी की जरूरत को भी सामने लाती हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल—लापता चालक का क्या हुआ?
इस पूरे हादसे में सबसे ज्यादा चिंता उस BRO चालक को लेकर है, जिसके तेज बहाव में बहने की सूचना है। SDRF और NDRF की टीमें उसकी तलाश में जुटी हैं। तलाशी अभियान के दौरान नाले के आसपास के क्षेत्रों और पानी के बहाव की दिशा में खोज की जा रही है।
तेज पानी और मलबे के कारण बचाव दलों को बेहद सावधानी बरतनी पड़ रही है। प्रशासन की कोशिश है कि मौसम और नदी-नाले की स्थिति को देखते हुए सुरक्षित तरीके से खोज अभियान चलाया जाए।
फिलहाल नीति घाटी में पुल टूटने के बाद जनजीवन और आवाजाही प्रभावित है। एक ओर लापता चालक की तलाश जारी है, वहीं दूसरी ओर BRO वैकल्पिक रास्ता तैयार करने में जुटा है। सीमांत गांवों और ITBP की चौकियों से संपर्क बहाल करना प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है। आने वाले घंटों में बारिश और नाले के जलस्तर की स्थिति इस राहत एवं बचाव अभियान के लिए बेहद महत्वपूर्ण होगी।

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