LPG सिलेंडर का खेल खत्म? 1 सितंबर से सरकार का बड़ा धमाका, PNG कनेक्शन वालों को मिलेगा सीधा फायदा!
नई दिल्ली। देश में रसोई गैस की व्यवस्था को बदलने की दिशा में केंद्र सरकार अब पाइपलाइन से मिलने वाली प्राकृतिक गैस यानी PNG (Piped Natural Gas) के नेटवर्क को तेजी से विस्तार देने की तैयारी में है। सरकार की नई प्रोत्साहन योजना के तहत 1 सितंबर से सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) कंपनियों को तय लक्ष्य से अधिक नए और सक्रिय घरेलू PNG कनेक्शन देने पर प्रति कनेक्शन 200 मानक घन मीटर (SCM) अतिरिक्त सस्ती घरेलू प्राकृतिक गैस आवंटित की जाएगी।
सरकार का फोकस केवल नए घरों को PNG नेटवर्क से जोड़ने तक सीमित नहीं है। ऐसे घरेलू कनेक्शनों को भी दोबारा सक्रिय कराने पर जोर दिया जा रहा है, जो पहले लगाए जा चुके हैं लेकिन फिलहाल किसी कारण से इस्तेमाल नहीं हो रहे हैं। माना जा रहा है कि इस कदम से देश में पाइप्ड गैस की पहुंच बढ़ेगी और घरेलू ईंधन के तौर पर LPG पर निर्भरता कम करने की कोशिश को गति मिलेगी।
1 सितंबर से लागू होगी नई प्रोत्साहन योजना
सरकार की योजना के मुताबिक पात्र CGD कंपनियों को उनके निर्धारित क्षेत्रों में तय लक्ष्य से ज्यादा नए और एक्टिव बिलिंग वाले घरेलू PNG कनेक्शन देने पर अतिरिक्त गैस का लाभ मिलेगा। प्रत्येक पात्र अतिरिक्त कनेक्शन के लिए 200 SCM अतिरिक्त घरेलू प्राकृतिक गैस आवंटित की जाएगी।
यह योजना 1 सितंबर से लागू होने जा रही है। इसे दो चरणों में लागू करने की तैयारी है और प्रत्येक चरण की अवधि छह महीने रखी गई है। योजना के तहत उपलब्ध कराई जाने वाली अतिरिक्त गैस घरेलू क्षेत्र के लिए निर्धारित अपेक्षाकृत सस्ती APM प्राकृतिक गैस होगी।
इसका सीधा उद्देश्य CGD कंपनियों को नए कनेक्शन देने के लिए आर्थिक प्रोत्साहन उपलब्ध कराना है, ताकि वे पाइपलाइन नेटवर्क के विस्तार और नए उपभोक्ताओं को जोड़ने में तेजी दिखाएं।
कंपनियों की गैस खरीद लागत हो सकती है कम
PNG नेटवर्क के विस्तार में CGD कंपनियों को पाइपलाइन, मीटर, कनेक्शन और वितरण व्यवस्था पर बड़ा निवेश करना पड़ता है। शुरुआती दौर में कम उपभोक्ता होने के कारण इस निवेश की भरपाई में लंबा समय लग सकता है।
सरकार द्वारा सस्ती APM गैस उपलब्ध कराने से कंपनियों की गैस खरीद लागत कम होने की उम्मीद है। इससे उन्हें महंगी आयातित LNG पर अपनी निर्भरता घटाने में मदद मिल सकती है।
सरकारी आकलन के अनुसार, घरेलू PNG नेटवर्क में किए जाने वाले निवेश की लागत वसूलने की अवधि में भी बड़ा अंतर आ सकता है। अनुमान है कि जहां पहले निवेश की रिकवरी में करीब 10 वर्ष तक लग सकते थे, वहीं इस तरह के प्रोत्साहनों के बाद यह अवधि लगभग 3 वर्ष तक आ सकती है।
हालांकि वास्तविक रिकवरी अवधि कंपनी, क्षेत्र, उपभोक्ताओं की संख्या, गैस की कीमत और नेटवर्क उपयोग जैसे कई कारकों पर निर्भर करेगी।
देश में 1.74 करोड़ से ज्यादा घरेलू PNG कनेक्शन
भारत में PNG नेटवर्क लगातार विस्तार कर रहा है। मौजूदा समय में देश में करीब 1.74 करोड़ से ज्यादा घरेलू PNG कनेक्शन चालू बताए जा रहे हैं।
सरकार पाइपलाइन के जरिए मिलने वाली प्राकृतिक गैस को घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सुविधाजनक और अपेक्षाकृत स्वच्छ ईंधन विकल्प के तौर पर बढ़ावा दे रही है।
LPG सिलेंडर की व्यवस्था में उपभोक्ता को सिलेंडर खत्म होने के बाद नया सिलेंडर बुक करना पड़ता है। इसके बाद डिलीवरी का इंतजार भी करना पड़ सकता है। इसके विपरीत PNG में घर तक पाइपलाइन के जरिए गैस पहुंचती है और उपभोक्ता द्वारा इस्तेमाल की गई मात्रा के आधार पर बिल तैयार किया जाता है।
यही वजह है कि बड़े शहरों और विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों में PNG नेटवर्क को बढ़ाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।
सिलेंडर बुकिंग और डिलीवरी की परेशानी से राहत
PNG कनेक्शन का एक बड़ा फायदा यह है कि उपभोक्ता को हर बार सिलेंडर खत्म होने पर रिफिल बुक कराने की जरूरत नहीं पड़ती। पाइपलाइन के जरिए गैस सीधे रसोई तक पहुंचती रहती है।
उपभोक्ता के घर में लगे मीटर के जरिए गैस की खपत दर्ज होती है और उसी के अनुसार बिल तैयार किया जाता है। इससे गैस की उपलब्धता को लेकर सिलेंडर स्टॉक करने या डिलीवरी का इंतजार करने की समस्या कम हो सकती है।
हालांकि PNG की सुविधा उन्हीं इलाकों में उपलब्ध हो सकती है जहां संबंधित क्षेत्र में गैस पाइपलाइन नेटवर्क विकसित किया गया हो। इसलिए देशभर में LPG को तत्काल PNG से बदलना संभव नहीं है। सरकार की मौजूदा रणनीति इसी नेटवर्क को अधिक से अधिक इलाकों तक पहुंचाने की है।
पश्चिम एशिया संकट के बीच घरेलू गैस पर बढ़ा जोर
हाल के पश्चिम एशिया संकट के दौरान वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता और ईंधन आपूर्ति से जुड़ी चुनौतियों ने भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के सामने जोखिम बढ़ाए हैं।
ऐसे माहौल में सरकार घरेलू स्तर पर उपलब्ध प्राकृतिक गैस और पाइप्ड गैस नेटवर्क को मजबूत करने पर जोर दे रही है। PNG का विस्तार ऊर्जा आपूर्ति के विविधीकरण की व्यापक रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।
घरेलू गैस नेटवर्क मजबूत होने से शहरी क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को वैकल्पिक गैस आपूर्ति व्यवस्था मिल सकती है। साथ ही, गैस वितरण कंपनियों के लिए भी नए ग्राहक जोड़ने का बाजार बढ़ेगा।
मार्च से अब तक लाखों नए कनेक्शन सक्रिय
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक इस साल मार्च से अब तक देशभर में 5 लाख से अधिक नए PNG कनेक्शन गैसीफाई यानी गैस आपूर्ति के लिए सक्रिय किए जा चुके हैं।
इसके अलावा 5.7 लाख से ज्यादा नए उपभोक्ताओं ने PNG कनेक्शन के लिए पंजीकरण कराया है। ये आंकड़े संकेत देते हैं कि पाइप्ड गैस की मांग बढ़ रही है और नए इलाकों में उपभोक्ता इस व्यवस्था को अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं।
सरकार अब इस गति को और बढ़ाना चाहती है। इसी उद्देश्य से CGD कंपनियों को अतिरिक्त सस्ती गैस उपलब्ध कराने की योजना लाई जा रही है।
LPG सरेंडर करने वालों को भी किया जा रहा प्रोत्साहित
सरकार की रणनीति में उन उपभोक्ताओं को भी PNG की तरफ आकर्षित करना शामिल है, जिनके घरों तक पाइपलाइन गैस पहुंच चुकी है।
इसके लिए LPG कनेक्शन सरेंडर करने वाले उपभोक्ताओं को प्रोत्साहित किया जा रहा है। साथ ही PNG Drive 2.0 जैसे अभियानों के माध्यम से हाउसिंग सोसायटियों और बड़े आवासीय परिसरों को PNG नेटवर्क से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
हाउसिंग सोसायटियों में एक साथ बड़ी संख्या में घरों को PNG से जोड़ना कंपनियों के लिए भी आर्थिक रूप से अधिक व्यावहारिक हो सकता है। इससे पाइपलाइन नेटवर्क का इस्तेमाल बढ़ेगा और प्रति उपभोक्ता बुनियादी ढांचे की लागत को कम करने में मदद मिल सकती है।
आम उपभोक्ता पर क्या पड़ेगा असर?
इस योजना का तत्काल उद्देश्य उपभोक्ताओं को सीधे 200 SCM मुफ्त गैस देना नहीं है। यह मुख्य रूप से CGD कंपनियों को अतिरिक्त घरेलू गैस आवंटित करने वाली प्रोत्साहन व्यवस्था है। कंपनियों को अतिरिक्त गैस तभी मिलेगी जब वे निर्धारित लक्ष्य से अधिक नए और सक्रिय घरेलू PNG कनेक्शन विकसित करें।
इसका अप्रत्यक्ष लाभ यह हो सकता है कि कंपनियां अधिक तेजी से नए क्षेत्रों में पाइपलाइन बिछाएं और नए उपभोक्ताओं को कनेक्शन उपलब्ध कराएं।
हालांकि किसी उपभोक्ता के लिए PNG और LPG में आर्थिक रूप से कौन सा विकल्प बेहतर होगा, यह स्थानीय गैस कीमत, मासिक खपत, कनेक्शन शुल्क और अन्य शुल्क पर निर्भर करेगा।
आगे क्या बदलेगा?
सरकार की इस पहल का सबसे बड़ा लक्ष्य देश के घरेलू ऊर्जा बाजार में PNG की हिस्सेदारी बढ़ाना है। एक तरफ नए कनेक्शन बढ़ाने के लिए CGD कंपनियों को आर्थिक प्रोत्साहन दिया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ पहले से मौजूद लेकिन निष्क्रिय कनेक्शनों को सक्रिय कराने पर भी जोर है।
अगर योजना के तहत कंपनियां निर्धारित लक्ष्य से ज्यादा कनेक्शन तेजी से सक्रिय करती हैं, तो आने वाले महीनों में PNG नेटवर्क का विस्तार तेज हो सकता है। इससे बड़े शहरों के साथ-साथ नए शहरी क्षेत्रों में भी पाइपलाइन गैस की पहुंच बढ़ने की संभावना है।
कुल मिलाकर, 1 सितंबर से शुरू होने वाली 200 SCM अतिरिक्त गैस वाली प्रोत्साहन योजना सरकार की उस बड़ी रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत घरेलू रसोई में LPG सिलेंडर की निर्भरता को धीरे-धीरे कम करते हुए पाइपलाइन से मिलने वाली प्राकृतिक गैस की पहुंच बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। आने वाले समय में इस योजना का असली असर इस बात पर निर्भर करेगा कि CGD कंपनियां कितनी तेजी से नए कनेक्शन जोड़ती हैं और निष्क्रिय कनेक्शनों को दोबारा सक्रिय कर पाती हैं।

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