थायराइड के इन संकेतों को नजरअंदाज किया तो बढ़ सकती है परेशानी! जानिए वो गलती जो मरीज अक्सर करते हैं
आज के समय में थायराइड की समस्या काफी आम हो गई है। थकान, वजन में बदलाव, बाल झड़ना, कब्ज, दिल की धड़कन तेज होना या शरीर में लगातार कमजोरी जैसे लक्षण कई बार सामान्य समझकर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं। लेकिन इन संकेतों के पीछे थायराइड की गड़बड़ी भी हो सकती है।
थायराइड गर्दन के सामने स्थित तितली के आकार की एक छोटी ग्रंथि है। यह मुख्य रूप से T4 यानी थायरॉक्सिन और T3 यानी ट्राईआयोडोथायरोनिन जैसे हार्मोन बनाती है। ये हार्मोन शरीर के ऊर्जा इस्तेमाल करने के तरीके और कई अंगों के सामान्य कामकाज को प्रभावित करते हैं। थायराइड की गतिविधि को नियंत्रित करने में दिमाग में मौजूद पिट्यूटरी ग्रंथि से निकलने वाला TSH महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सबसे जरूरी बात यह है कि थायराइड की समस्या का इलाज किसी एक घरेलू नुस्खे से करने का दावा सही नहीं है। थायराइड के अलग-अलग प्रकार और कारण होते हैं, इसलिए सही जांच के बाद ही उपचार तय किया जाता है। अमेरिकन थायराइड एसोसिएशन भी स्पष्ट करता है कि कोई विशेष डाइट, विटामिन या सप्लीमेंट थायराइड की बीमारी को खत्म करने के लिए प्रमाणित इलाज नहीं है।
थायराइड क्या है और शरीर में इसका काम क्या है?
थायराइड ग्रंथि गर्दन के निचले सामने वाले हिस्से में स्थित होती है। यह शरीर में हार्मोन बनाकर ऊर्जा के इस्तेमाल, शरीर के तापमान और कई महत्वपूर्ण शारीरिक प्रक्रियाओं को प्रभावित करती है।
जब थायराइड पर्याप्त हार्मोन नहीं बनाता तो हाइपोथायरायडिज्म हो सकता है। इसके विपरीत जब शरीर में थायराइड हार्मोन जरूरत से ज्यादा बनने लगे तो हाइपरथायरायडिज्म की स्थिति पैदा हो सकती है।
दोनों स्थितियों के लक्षण अलग हो सकते हैं और दोनों का इलाज भी अलग होता है। इसलिए केवल लक्षणों के आधार पर खुद से दवा शुरू करना सही नहीं है।
हाइपोथायरायडिज्म में क्या होता है?
हाइपोथायरायडिज्म में थायराइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में हार्मोन नहीं बना पाती। इसके कारण शरीर की कई प्रक्रियाएं धीमी पड़ सकती हैं।
इसके सामान्य लक्षणों में लगातार थकान, वजन बढ़ना, ठंड अधिक लगना, त्वचा का रूखा होना, कब्ज, बालों का झड़ना और कमजोरी शामिल हो सकते हैं।
कुछ लोगों में मूड में बदलाव, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी और महिलाओं में मासिक धर्म से जुड़ी अनियमितताएं भी देखी जा सकती हैं।
लेकिन ध्यान रखना जरूरी है कि इनमें से कई लक्षण अन्य स्वास्थ्य समस्याओं में भी दिखाई दे सकते हैं। इसलिए केवल इन संकेतों के आधार पर थायराइड की पुष्टि नहीं की जा सकती।
हाइपरथायरायडिज्म के लक्षण कैसे होते हैं?
हाइपरथायरायडिज्म में थायराइड जरूरत से ज्यादा हार्मोन बनाने लगता है। इसके कारण शरीर की कई गतिविधियां तेज हो सकती हैं।
वजन कम होना, दिल की धड़कन तेज या अनियमित होना, घबराहट, चिड़चिड़ापन, हाथों में कंपकंपी, अधिक पसीना आना, गर्मी सहन न होना, नींद में परेशानी और मांसपेशियों में कमजोरी इसके संभावित लक्षण हैं। गर्दन में थायराइड बढ़ने से गलगंड यानी goiter भी दिखाई दे सकता है।
कुछ मामलों में आंखों से जुड़ी समस्या भी हो सकती है, खासकर Graves' disease में।
थायराइड होने के प्रमुख कारण क्या हैं?
थायराइड की समस्या के कई कारण हो सकते हैं। हाइपोथायरायडिज्म का एक प्रमुख कारण Hashimoto's disease है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से थायराइड ग्रंथि पर हमला करती है। थायरॉइडाइटिस, कुछ दवाएं, थायराइड की सर्जरी या रेडिएशन उपचार तथा कुछ मामलों में आयोडीन की कमी या अधिकता भी कारण बन सकती है।
हाइपरथायरायडिज्म में Graves' disease, थायराइड नोड्यूल, थायरॉइडाइटिस, बहुत अधिक आयोडीन का सेवन या जरूरत से ज्यादा थायराइड हार्मोन की दवा लेना कारण हो सकता है।
इसलिए यह मानना सही नहीं है कि थायराइड केवल तनाव, सोया या किसी एक खाद्य पदार्थ की वजह से होता है।
थायराइड की जांच कैसे होती है?
थायराइड की समस्या की पुष्टि के लिए डॉक्टर आमतौर पर रक्त जांच करवाते हैं। इनमें TSH, T4 और जरूरत के अनुसार T3 की जांच शामिल हो सकती है। यदि डॉक्टर को ऑटोइम्यून बीमारी का संदेह हो तो थायराइड एंटीबॉडी की जांच भी कराई जा सकती है।
आमतौर पर TSH को शुरुआती जांच में महत्वपूर्ण माना जाता है। TSH का स्तर सामान्य सीमा से ऊपर या नीचे होने पर डॉक्टर अन्य टेस्ट देखकर स्थिति को समझते हैं।
कुछ मामलों में थायराइड की संरचना और गांठों को देखने के लिए अल्ट्रासाउंड या अन्य इमेजिंग जांच की जरूरत पड़ सकती है।
क्या थायराइड में आयोडीन ज्यादा लेना चाहिए?
यह एक आम गलतफहमी है कि थायराइड होने पर ज्यादा से ज्यादा आयोडीन लेना चाहिए। ऐसा करना नुकसानदायक हो सकता है।
आयोडीन शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व है, लेकिन जरूरत से ज्यादा आयोडीन कुछ लोगों में थायराइड की गड़बड़ी बढ़ा सकता है। अमेरिकन थायराइड एसोसिएशन ने अधिक मात्रा में आयोडीन और केल्प जैसे आयोडीन सप्लीमेंट लेने से सावधान किया है।
इसलिए बिना डॉक्टर की सलाह के आयोडीन की गोलियां या समुद्री शैवाल से बने सप्लीमेंट लेना उचित नहीं है।
थायराइड में खान-पान कैसा रखें?
थायराइड के लिए कोई एक ऐसी डाइट नहीं है जो हर मरीज पर लागू हो। भोजन बीमारी के प्रकार, दवाओं और व्यक्ति की दूसरी स्वास्थ्य समस्याओं के अनुसार तय किया जाना चाहिए।
सामान्य तौर पर संतुलित भोजन लेना, पर्याप्त फल-सब्जियां खाना, साबुत अनाज और प्रोटीन के अच्छे स्रोत शामिल करना उपयोगी हो सकता है।
अगर आपको हाइपोथायरायडिज्म है और डॉक्टर ने दवा दी है तो दवा नियमित रूप से लेना भोजन से भी अधिक महत्वपूर्ण है। दवा की मात्रा खुद से कम या ज्यादा नहीं करनी चाहिए।
क्या सोया और पत्तागोभी बिल्कुल नहीं खानी चाहिए?
थायराइड से जुड़े मरीजों को अक्सर सोया, पत्तागोभी, फूलगोभी और ब्रोकली पूरी तरह बंद करने की सलाह दी जाती है। लेकिन ऐसा सामान्य नियम नहीं है।
किसी व्यक्ति के लिए इन खाद्य पदार्थों की मात्रा और सेवन का तरीका उसकी बीमारी और उपचार पर निर्भर कर सकता है। बिना चिकित्सकीय कारण के किसी पूरे खाद्य समूह को बंद करना सही नहीं है।
विशेष रूप से रेडियोएक्टिव आयोडीन उपचार से गुजर रहे मरीजों के लिए कुछ समय के लिए विशेष low-iodine diet की जरूरत हो सकती है। यह सामान्य थायराइड मरीजों की रोजमर्रा की डाइट से अलग स्थिति है।
क्या आयुर्वेदिक या घरेलू नुस्खों से थायराइड ठीक हो सकता है?
सोशल मीडिया पर थायराइड के लिए कई घरेलू नुस्खे बताए जाते हैं। इनमें अलग-अलग जड़ी-बूटियों, रस या सप्लीमेंट का इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है।
लेकिन किसी भी जड़ी-बूटी या घरेलू नुस्खे को थायराइड की प्रमाणित चिकित्सा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। अमेरिकन थायराइड एसोसिएशन के अनुसार कोई विशेष डाइट या सप्लीमेंट थायराइड की बीमारी को खत्म करने के लिए प्रमाणित नहीं है।
खासकर यदि आप पहले से थायराइड की दवा लेते हैं तो बिना डॉक्टर की सलाह के कोई हर्बल सप्लीमेंट शुरू करना उचित नहीं है। कुछ सप्लीमेंट में आयोडीन की मात्रा बहुत ज्यादा हो सकती है।
थायराइड की दवा बंद करना कितना खतरनाक हो सकता है?
कई मरीज कुछ समय दवा लेने के बाद जब बेहतर महसूस करने लगते हैं तो अपनी दवा बंद कर देते हैं। यह गलती नहीं करनी चाहिए।
थायराइड की दवा की जरूरत कितने समय तक होगी, यह बीमारी के कारण और व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर करता है। डॉक्टर रक्त जांच के आधार पर दवा की मात्रा तय करते हैं।
अमेरिकन थायराइड एसोसिएशन भी सलाह देता है कि मरीज डॉक्टर से बात किए बिना निर्धारित दवा बंद या उसकी खुराक में बदलाव न करें।
महिलाओं को क्यों विशेष ध्यान देना चाहिए?
थायराइड की समस्या महिलाओं में अपेक्षाकृत अधिक देखी जाती है। हार्मोनल बदलावों के कारण गर्भावस्था और प्रसव के आसपास भी थायराइड की स्थिति बदल सकती है।
अनियंत्रित थायराइड गर्भावस्था और प्रजनन क्षमता से संबंधित समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। हाइपरथायरायडिज्म में अनियमित मासिक धर्म और प्रजनन संबंधी परेशानियां भी हो सकती हैं।
इसलिए गर्भधारण की योजना बना रही महिलाओं या गर्भवती महिलाओं को थायराइड की समस्या होने पर डॉक्टर से नियमित सलाह लेना महत्वपूर्ण है।
थायराइड को कंट्रोल में रखने के लिए क्या करें?
थायराइड को नियंत्रित रखने के लिए कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखा जा सकता है—
डॉक्टर द्वारा बताई गई दवा नियमित रूप से लें।
TSH और अन्य जरूरी जांच डॉक्टर की सलाह के अनुसार कराएं।
बिना सलाह के आयोडीन या हर्बल सप्लीमेंट न लें।
संतुलित और पौष्टिक भोजन करें।
पर्याप्त नींद लें और नियमित शारीरिक गतिविधि बनाए रखें।
धूम्रपान और तंबाकू से दूरी रखें।
दवा की खुराक खुद से न बदलें।
सोशल मीडिया पर बताए गए इलाज को डॉक्टर की सलाह का विकल्प न मानें।
कब तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर वजन में बिना वजह तेजी से बदलाव हो रहा है, दिल की धड़कन लगातार तेज या अनियमित है, गर्दन में गांठ या सूजन दिखाई दे रही है, बहुत ज्यादा कमजोरी है या लगातार थकान बनी हुई है तो चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।
हाइपरथायरायडिज्म का इलाज न होने पर अनियमित धड़कन, हृदय संबंधी समस्याएं, हड्डियों के कमजोर होने और मांसपेशियों की समस्याओं जैसी जटिलताएं हो सकती हैं।
थायराइड कोई ऐसी बीमारी नहीं है जिसे देखकर घबराने की जरूरत हो, लेकिन इसे नजरअंदाज करना भी सही नहीं है। थायराइड की समस्या के कई प्रकार और कारण होते हैं और हर मरीज का इलाज अलग हो सकता है।
सबसे बड़ी गलती है बिना जांच के खुद को थायराइड का मरीज मान लेना या किसी घरेलू नुस्खे के भरोसे डॉक्टर की दवा बंद कर देना। सही रक्त जांच, डॉक्टर की सलाह, संतुलित भोजन और नियमित उपचार से थायराइड को प्रभावी ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है।
और अगर कोई व्यक्ति निर्गुंडी, प्याज या किसी अन्य घरेलू उपाय को थायराइड का पक्का इलाज बताता है, तो उस दावे को सावधानी से लें। अभी उपलब्ध चिकित्सा प्रमाणों के आधार पर इन्हें थायराइड की मानक चिकित्सा का विकल्प नहीं माना जा सकता।

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