सोना-चांदी में आया ऐसा उछाल कि बाजार में मच गया हड़कंप! चांदी ने दोगुने से ज्यादा किया पैसा, अब अगला नंबर किसका?
सोने और चांदी के बाजार में इस समय जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। एक तरफ सोना लगातार वैश्विक घटनाक्रम, अमेरिकी ब्याज दरों की उम्मीद और सुरक्षित निवेश की मांग के कारण मजबूत बना हुआ है, तो दूसरी तरफ चांदी ने निवेशकों को चौंकाने वाला रिटर्न दिया है। भारत में 999 शुद्धता वाली चांदी की कीमत पिछले एक साल में 106 फीसदी से ज्यादा बढ़ चुकी है, जिससे बाजार में इसकी तेजी को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
17 अगस्त 2026 को उपलब्ध भारतीय बाजार आंकड़ों के अनुसार 999 फाइन सिल्वर का भाव करीब ₹2,37,270 प्रति किलोग्राम रहा। वहीं 925 स्टर्लिंग सिल्वर करीब ₹2,19,475 प्रति किलोग्राम के स्तर पर थी। एक साल पहले 17 अगस्त 2025 को 999 चांदी करीब ₹1,15,010 प्रति किलोग्राम थी। यानी एक साल के भीतर कीमत में जबरदस्त उछाल आया है।
अब सवाल यह है कि आखिर सोना और चांदी इतनी तेजी से क्यों चमक रहे हैं और क्या आने वाले दिनों में इन दोनों धातुओं की कीमतों में और बड़ा उछाल देखने को मिल सकता है?
चांदी ने मचाया तहलका
सोने की चर्चा तो लंबे समय से होती रही है, लेकिन इस साल चांदी ने जिस तरह से तेजी दिखाई है, उसने निवेशकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक 999 चांदी की कीमत एक साल में 106.3 फीसदी बढ़ी है। यह सामान्य तेजी नहीं है, बल्कि निवेशकों के लिए बेहद बड़ा बदलाव है।
अगस्त के शुरुआती दिनों में भी चांदी में जोरदार तेजी देखने को मिली। एक रिपोर्ट के मुताबिक केवल तीन दिनों में चांदी करीब ₹16,200 प्रति किलोग्राम महंगी हो गई थी। इसी दौरान सोने में भी ₹6,600 प्रति 10 ग्राम तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई थी।
चांदी की कीमत पर केवल निवेश मांग का असर नहीं पड़ता। इसका इस्तेमाल इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर टेक्नोलॉजी और कई औद्योगिक क्षेत्रों में भी होता है। इसलिए औद्योगिक मांग मजबूत रहने पर चांदी को अतिरिक्त सहारा मिल सकता है।
सोना भी बना हुआ है मजबूत
चांदी की तेजी के बीच सोना भी कमजोर नहीं पड़ा है। 17 अगस्त को शुरुआती एशियाई कारोबार में स्पॉट गोल्ड करीब 0.45 फीसदी बढ़कर $4,395.96 प्रति औंस पहुंच गया। कमजोर अमेरिकी श्रम आंकड़ों और नरम महंगाई के संकेतों ने बाजार में अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति को लेकर उम्मीदों को प्रभावित किया है।
इससे पहले 13 अगस्त को सोना करीब दो महीने के उच्च स्तर तक पहुंच गया था। उस समय स्पॉट गोल्ड $4,449.39 प्रति औंस तक गया, हालांकि इसके बाद मुनाफावसूली के कारण कीमत में एक फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई।
यानी सोने में तेजी तो बनी हुई है, लेकिन ऊंचे स्तरों पर निवेशकों की मुनाफावसूली भी देखने को मिल रही है।
आखिर सोने की कीमत को कौन धक्का दे रहा है?
सोने को इस समय कई मोर्चों से समर्थन मिल रहा है। अमेरिकी डॉलर की चाल, फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें, वैश्विक महंगाई, भू-राजनीतिक तनाव और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी सोने की कीमत को प्रभावित कर रही है।
रॉयटर्स की एक हालिया रिपोर्ट के अनुसार अगस्त में सोने की कीमत करीब 10 फीसदी बढ़कर लगभग $4,400 प्रति औंस के आसपास पहुंची। केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार 2026 की दूसरी तिमाही में केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद करीब 289 टन रही।
केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने में बढ़ती दिलचस्पी को बाजार में एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। जब केंद्रीय बैंक अपने भंडार में सोना बढ़ाते हैं तो इससे लंबे समय में सोने की मांग को समर्थन मिल सकता है।
अमेरिका-ईरान तनाव भी बना बड़ा कारण
सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है। जब दुनिया में युद्ध, राजनीतिक तनाव या आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है तो कुछ निवेशक जोखिम वाले एसेट से पैसा निकालकर सोने जैसी कीमती धातुओं की ओर रुख करते हैं।
इस समय पश्चिम एशिया में तनाव और अमेरिका-ईरान संघर्ष को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। रॉयटर्स की 17 अगस्त की रिपोर्ट में भी बताया गया कि मध्य पूर्व के तनाव के कारण तेल की कीमतों पर दबाव बना हुआ है और निवेशक क्षेत्रीय घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं।
अगर भू-राजनीतिक तनाव आगे बढ़ता है तो सोने की सुरक्षित निवेश मांग को फिर से मजबूती मिल सकती है। हालांकि तनाव कम होने पर इस मांग में कमी भी आ सकती है।
क्या सोना फिर छुएगा बड़ा स्तर?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में इस समय सबसे ज्यादा चर्चा $4,500 प्रति औंस के आसपास के स्तर को लेकर है। 13 अगस्त को सोना $4,449.39 तक पहुंच चुका था, यानी यह महत्वपूर्ण स्तर अब ज्यादा दूर नहीं है।
अगर सोना इस क्षेत्र को मजबूती से पार कर लेता है तो बाजार में आगे की तेजी को लेकर उत्साह बढ़ सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि कीमत सीधे ऊपर ही जाएगी। इतनी तेज बढ़त के बाद मुनाफावसूली कभी भी बाजार में दबाव बना सकती है।
यही वजह है कि विशेषज्ञ आमतौर पर सोने में निवेश करते समय एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय अपनी जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखने की सलाह देते हैं।
चांदी में तेजी के साथ खतरा भी
चांदी ने पिछले एक साल में शानदार प्रदर्शन किया है, लेकिन इसकी तेजी के साथ जोखिम भी बढ़ा है। चांदी का बाजार सोने की तुलना में ज्यादा अस्थिर हो सकता है। कीमतें तेजी से ऊपर जाने के बाद अचानक गिर भी सकती हैं।
13 अगस्त को अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी भी सोने के साथ कमजोर हुई थी। उस दिन Comex सिल्वर करीब 1.04 फीसदी गिरकर $64.873 प्रति औंस पर बंद हुई थी।
इससे साफ है कि चांदी में तेजी के बावजूद निवेशकों को केवल पिछले रिटर्न देखकर फैसला नहीं करना चाहिए।
भारत में खरीदारों के लिए क्या मायने रखता है?
भारत में सोना और चांदी सिर्फ निवेश नहीं बल्कि शादी-ब्याह और त्योहारों से जुड़ी खरीदारी का भी बड़ा हिस्सा हैं। इसलिए कीमतों में तेजी का सीधा असर आम परिवारों के बजट पर पड़ता है।
अगर सोने की कीमत बढ़ती है तो ज्वेलरी खरीदने वालों को अधिक रकम खर्च करनी पड़ती है। वहीं चांदी की कीमत में 106 फीसदी से ज्यादा की सालाना तेजी ने चांदी के आभूषण और अन्य सामान खरीदने वालों के लिए भी लागत बढ़ा दी है।
खरीदारों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बाजार में दिखाया जाने वाला सोने या चांदी का बेस रेट अंतिम बिल नहीं होता। ज्वेलरी की कीमत में मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क शामिल हो सकते हैं।
आगे क्या होगा?
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा कई बड़े वैश्विक संकेतों पर निर्भर करेगी। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर नीति, डॉलर की चाल, अमेरिका के आर्थिक आंकड़े, केंद्रीय बैंकों की खरीदारी और पश्चिम एशिया की स्थिति बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण रहेंगे।
फिलहाल तस्वीर यह है कि सोना ऊंचे स्तरों के करीब मजबूती दिखा रहा है और चांदी पिछले एक साल की असाधारण तेजी के बाद भी निवेशकों के रडार पर बनी हुई है।
लेकिन इतनी तेज तेजी के बाद बाजार में अचानक मुनाफावसूली भी आ सकती है। इसलिए सोना-चांदी खरीदने या निवेश करने वालों के लिए सिर्फ तेजी देखकर फैसला लेना जोखिम भरा हो सकता है।

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