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क्या भारत की ओर बढ़ चुका है मौत का वायरस? 11 हजार लोगों की जांच के बाद सामने आई चौंकाने वाली सच्चाई!



विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा इबोला वायरस को लेकर वैश्विक स्तर पर चिंता जताए जाने के बाद भारत सरकार पूरी तरह सतर्क हो गई है। स्वास्थ्य मंत्रालय और एयरपोर्ट अथॉरिटी ने मिलकर देश के सभी प्रमुख अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर विशेष निगरानी अभियान शुरू कर दिया है। सरकार के अनुसार अब तक इबोला प्रभावित देशों से आने वाले 11 हजार से अधिक यात्रियों की स्क्रीनिंग की जा चुकी है। राहत की बात यह है कि अब तक किसी भी यात्री में इबोला संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है।

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस की गंभीरता को देखते हुए जरा सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। यही वजह है कि सरकार ने राज्यों, अस्पतालों और एयरपोर्ट प्रशासन को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं।

आखिर क्यों बढ़ी चिंता?

इबोला दुनिया की सबसे खतरनाक संक्रामक बीमारियों में गिनी जाती है। हाल के दिनों में अफ्रीका के कुछ देशों में इसके मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद WHO ने सभी देशों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी। भारत भी उन देशों में शामिल है जहां बड़ी संख्या में विदेशी यात्री आते-जाते हैं। इसलिए संक्रमण को सीमा पर ही रोकना सबसे बड़ी प्राथमिकता बन गया है।

स्वास्थ्य मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल भारत में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्रा के कारण जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

एयरपोर्ट पर कैसी हो रही है जांच?

दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कोलकाता और अन्य अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों पर विशेष मेडिकल टीमें तैनात की गई हैं।

यात्रियों की जांच के दौरान निम्न बातों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है—

  • शरीर का तापमान जांचा जा रहा है।

  • यात्रा इतिहास पूछा जा रहा है।

  • संक्रमित देशों से आने वाले यात्रियों की अतिरिक्त स्क्रीनिंग हो रही है।

  • संदिग्ध लक्षण मिलने पर तुरंत आइसोलेशन की व्यवस्था की जा रही है।

  • जरूरत पड़ने पर लैब टेस्ट भी कराया जा रहा है।

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार अब तक जांचे गए सभी यात्रियों की रिपोर्ट सामान्य पाई गई है।

क्या है इबोला वायरस?

इबोला वायरस एक अत्यंत गंभीर वायरल बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति या जानवर के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलती है।

यह वायरस सबसे पहले 1976 में अफ्रीका में सामने आया था। इसके बाद समय-समय पर कई देशों में इसके प्रकोप देखने को मिले।

विशेषज्ञों के अनुसार इबोला का संक्रमण बहुत तेजी से फैल सकता है यदि समय रहते मरीज को अलग न किया जाए।

इबोला के प्रमुख लक्षण

संक्रमण होने पर मरीज में निम्न लक्षण दिखाई दे सकते हैं—

  • तेज बुखार

  • सिरदर्द

  • मांसपेशियों में तेज दर्द

  • कमजोरी

  • उल्टी और दस्त

  • पेट दर्द

  • गले में खराश

  • गंभीर मामलों में शरीर के अंदर और बाहर रक्तस्राव

यदि किसी व्यक्ति में ये लक्षण दिखाई दें और उसने हाल ही में प्रभावित देश की यात्रा की हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

कितना खतरनाक है यह वायरस?

विशेषज्ञों के अनुसार इबोला की मृत्यु दर काफी अधिक हो सकती है। कुछ पुराने प्रकोपों में संक्रमित मरीजों में मृत्यु दर 25 प्रतिशत से लेकर 90 प्रतिशत तक दर्ज की गई थी।

हालांकि आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं, समय पर पहचान और बेहतर इलाज के कारण अब मरीजों के बचने की संभावना पहले की तुलना में काफी बेहतर हो गई है।

भारत सरकार ने क्या कदम उठाए?

स्वास्थ्य मंत्रालय ने राज्यों को विस्तृत एडवाइजरी जारी की है।

इसके तहत—

  • सभी सरकारी अस्पतालों को सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

  • आइसोलेशन वार्ड तैयार रखने को कहा गया है।

  • मेडिकल स्टाफ को संक्रमण नियंत्रण का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

  • लैब नेटवर्क को सक्रिय किया गया है।

  • एयरपोर्ट पर निगरानी बढ़ा दी गई है।

  • संदिग्ध मामलों की तुरंत रिपोर्टिंग सुनिश्चित की जा रही है।

सरकार का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, लेकिन सतर्कता बेहद जरूरी है।

क्या भारत में पहले भी आया है इबोला?

भारत में अब तक बड़े स्तर पर इबोला का प्रकोप नहीं देखा गया है।

कुछ वर्षों पहले विदेश से लौटे कुछ संदिग्ध मामलों की जांच हुई थी, लेकिन व्यापक संक्रमण की स्थिति कभी नहीं बनी।

यही कारण है कि स्वास्थ्य एजेंसियां शुरुआती स्तर पर ही संक्रमण रोकने की रणनीति पर काम कर रही हैं।

संक्रमण कैसे फैलता है?

इबोला सामान्य सर्दी-जुकाम की तरह हवा से नहीं फैलता।

यह मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के—

  • खून

  • पसीने

  • उल्टी

  • लार

  • मूत्र

  • अन्य शारीरिक तरल पदार्थ

के सीधे संपर्क से फैलता है।

इसी कारण संक्रमित मरीजों का इलाज करने वाले स्वास्थ्यकर्मियों के लिए विशेष सुरक्षा उपकरण पहनना अनिवार्य होता है।

क्या इसका इलाज मौजूद है?

पहले इबोला का कोई प्रभावी इलाज उपलब्ध नहीं था, लेकिन अब कुछ एंटीबॉडी आधारित दवाओं और वैक्सीन का उपयोग कई देशों में किया जा रहा है।

इसके अलावा मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाकर—

  • शरीर में पानी की कमी पूरी करना,

  • ऑक्सीजन देना,

  • रक्तचाप नियंत्रित रखना,

  • अन्य संक्रमणों का इलाज करना,

जैसी चिकित्सा सुविधाओं से मृत्यु का जोखिम काफी कम किया जा सकता है।

आम लोगों को क्या करना चाहिए?

विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें।

यदि कोई व्यक्ति हाल ही में इबोला प्रभावित देश से लौटा है और उसे बुखार या अन्य लक्षण महसूस हो रहे हैं तो तुरंत स्वास्थ्य विभाग से संपर्क करें।

इसके अलावा—

  • हाथों की नियमित सफाई करें।

  • बीमार व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के सीधे संपर्क से बचें।

  • यात्रा से पहले स्वास्थ्य संबंधी दिशा-निर्देशों की जानकारी लें।

  • केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें।

WHO की सलाह

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने देशों से कहा है कि सीमाओं पर निगरानी बढ़ाई जाए, स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत रखा जाए और संदिग्ध मामलों की तुरंत पहचान कर उन्हें अलग किया जाए।

WHO का मानना है कि शुरुआती स्तर पर संक्रमण रोक लिया जाए तो बड़े प्रकोप की संभावना काफी कम हो जाती है।

विशेषज्ञों की राय

संक्रामक रोग विशेषज्ञों का कहना है कि भारत की निगरानी व्यवस्था पहले की तुलना में काफी मजबूत हुई है। कोविड-19 महामारी के दौरान विकसित स्वास्थ्य ढांचे का फायदा अब अन्य संक्रामक रोगों की रोकथाम में भी मिल रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अभी तक भारत में कोई पुष्टि किया गया मामला नहीं मिला है, इसलिए घबराने की आवश्यकता नहीं है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के बढ़ते दौर में लगातार निगरानी बनाए रखना बेहद जरूरी है।

इबोला वायरस दुनिया के सबसे गंभीर संक्रमणों में से एक माना जाता है, लेकिन भारत ने समय रहते सतर्कता दिखाते हुए प्रभावित देशों से आने वाले 11 हजार से अधिक यात्रियों की स्क्रीनिंग कर संक्रमण को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। फिलहाल देश में इबोला का एक भी पुष्ट मामला सामने नहीं आया है, जो राहत की बात है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि जागरूकता, समय पर जांच, मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकार की सतर्क निगरानी ही इस तरह के खतरनाक संक्रमण से देश को सुरक्षित रखने की सबसे बड़ी कुंजी है। जनता को भी अफवाहों से बचते हुए केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करना चाहिए और किसी भी संदिग्ध लक्षण की स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।

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