Breaking News

हाफिज सईद की बढ़ी सुरक्षा, घर से निकलने पर भी रोक! 26/11 केस में ट्रायल शुरू होते ही क्यों मचा हड़कंप?



नई दिल्ली: मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमले के मामले में भारत ने पाकिस्तान में मौजूद आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तेज कर दी है। इसी बीच लश्कर-ए-तैयबा के संस्थापक और 26/11 मामले में आरोपी हाफिज सईद को लेकर पाकिस्तान से एक बड़ी खबर सामने आई है। रिपोर्टों के मुताबिक, उसकी सुरक्षा व्यवस्था को और कड़ा किया गया है और उसकी आवाजाही पर भी कथित तौर पर सख्त पाबंदियां लगाई गई हैं।

यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब मुंबई पुलिस ने 26/11 आतंकी हमले के छह पाकिस्तानी आरोपियों के खिलाफ गैर-मौजूदगी में मुकदमा यानी ट्रायल इन एब्सेंशिया शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। इनमें हाफिज सईद और जकी-उर-रहमान लखवी समेत छह आरोपी शामिल हैं।

हाफिज सईद के खिलाफ भारत में लंबे समय से 26/11 हमले की साजिश और आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े गंभीर आरोप लगाए जाते रहे हैं। हालांकि पाकिस्तान में उसकी स्थिति और सुरक्षा को लेकर सामने आ रही कुछ जानकारियां भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के आकलन और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित हैं, इसलिए इन दावों को उसी संदर्भ में देखना जरूरी है।

ISI ने क्यों बढ़ाई हाफिज सईद की सुरक्षा?

एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के कई आकलनों का हवाला देते हुए दावा किया गया है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI ने हाफिज सईद के आसपास सुरक्षा बढ़ा दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सईद के खिलाफ खतरे की धारणा बढ़ी है और पिछले कुछ समय में उसे निशाना बनाने की कथित कोशिशों के कारण सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक, उसके आसपास अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं और उससे मिलने वाले लोगों की जांच भी कड़ी कर दी गई है।

यह बदलाव इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाफिज सईद पहले लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े लोगों और समर्थकों के साथ बैठकों में दिखाई देता रहा है। अब उसकी गतिविधियों को सीमित किए जाने की बात सामने आई है।

आवाजाही पर भी कथित तौर पर लगाई गई रोक

रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सुरक्षा एजेंसियों ने हाफिज सईद की सार्वजनिक और संगठनात्मक गतिविधियों को सीमित कर दिया है। उसे कथित तौर पर ऐसे स्थानों पर जाने की अनुमति नहीं दी जा रही जहां लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े कैडर या समर्थक जुटते हैं।

भारतीय सुरक्षा आकलनों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया है कि सुरक्षा खतरे को देखते हुए उसकी आवाजाही पर निगरानी बढ़ाई गई है।

यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब भारत में 26/11 मामले को लेकर कानूनी प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण चरण में पहुंच गई है। मुंबई की विशेष अदालत ने पाकिस्तान में मौजूद छह आरोपियों के खिलाफ उद्घोषणा जारी की थी। निर्धारित समय तक उनके अदालत के सामने पेश नहीं होने के बाद उनके खिलाफ गैर-मौजूदगी में मुकदमा चलाने की प्रक्रिया शुरू हुई।

26/11 के छह आरोपियों पर चलेगा ट्रायल

26 नवंबर 2008 को मुंबई में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया था। हमले के दौरान मुंबई के कई महत्वपूर्ण स्थानों को निशाना बनाया गया था।

इस मामले में पाकिस्तान में मौजूद कई आरोपियों पर हमले की साजिश और आतंकियों को मदद पहुंचाने के आरोप हैं।

अब मुंबई पुलिस ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 356 के तहत इन आरोपियों के खिलाफ ट्रायल इन एब्सेंशिया की प्रक्रिया शुरू की है। यह व्यवस्था ऐसे फरार आरोपियों के खिलाफ मुकदमा आगे बढ़ाने की अनुमति देती है जो अदालत के सामने मौजूद नहीं हैं।

छह आरोपियों में हाफिज सईद, जकी-उर-रहमान लखवी, साजिद मीर, अबू अलकामा, आसिम उर्फ अबू काहफा और मेजर अब्दुर रहमान पाशा के नाम शामिल हैं।

भारत ने पाकिस्तान के आरोपियों के खिलाफ बढ़ाई कानूनी कार्रवाई

21 अगस्त को सामने आई जानकारी के मुताबिक, मुंबई पुलिस ने इन आरोपियों तक अदालत की उद्घोषणा पहुंचाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय से मदद मांगी है। इसके लिए इंटरपोल के माध्यम से पाकिस्तान में आदेश पहुंचाने की प्रक्रिया पर काम किया जा रहा है।

विशेष लोक अभियोजक उज्ज्वल निकम ने अदालत को बताया कि छह आरोपियों के खिलाफ जारी उद्घोषणा को पाकिस्तान में इंटरपोल के जरिए तामील कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।

महाराष्ट्र सरकार की ओर से भी अदालत में इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मांग की गई है। अदालत ने औपचारिक कानूनी नोटिस पाकिस्तान में आरोपियों तक पहुंचाने के लिए समय दिया है।

हाफिज सईद कहां है? बड़ा सवाल

हाफिज सईद की वास्तविक लोकेशन को लेकर भी अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। पाकिस्तान का आधिकारिक रुख लंबे समय से यह रहा है कि सईद जेल में सजा काट रहा है।

वहीं, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के आकलन का हवाला देने वाली ताजा रिपोर्टों में दावा किया गया है कि उसकी वास्तविक स्थिति और ठिकाने को लेकर अलग तस्वीर हो सकती है। रिपोर्ट में लाहौर के आसपास सुरक्षित ठिकानों का जिक्र किया गया है।

हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी से नहीं होती। इसलिए हाफिज सईद के वर्तमान ठिकाने को लेकर किसी एक दावे को अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा।

लश्कर नेटवर्क को लेकर भी बढ़ी चिंता

हाफिज सईद को लेकर सुरक्षा बढ़ाए जाने की खबर ऐसे समय में आई है जब भारत-पाकिस्तान के बीच आतंकवाद को लेकर तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है।

रिपोर्टों में दावा किया गया है कि लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े नेटवर्क को दोबारा सक्रिय करने की कोशिशों पर सुरक्षा एजेंसियों की नजर है। संगठन से जुड़े कुछ ठिकानों और गतिविधियों को लेकर भी सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हैं।

भारत की सुरक्षा एजेंसियां सीमा पार मौजूद आतंकी नेटवर्क और उनके समर्थकों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखती रही हैं।

सईद की भूमिका पर भारत का रुख

भारत लंबे समय से हाफिज सईद को 26/11 हमले से जुड़े प्रमुख आरोपियों में मानता रहा है। अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र की ओर से भी हाफिज सईद और लश्कर-ए-तैयबा के खिलाफ आतंकवाद से संबंधित कार्रवाई की जा चुकी है।

26/11 हमले में 166 लोगों की मौत हुई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। हमले की जांच में पाकिस्तान स्थित आतंकी नेटवर्क की भूमिका सामने आई थी। भारत ने कई मौकों पर पाकिस्तान से आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की है।

अब भारत में गैर-मौजूदगी में मुकदमे की प्रक्रिया शुरू होने से इस मामले में कानूनी कार्रवाई एक नए चरण में पहुंच गई है।

पाकिस्तान में सुरक्षा बढ़ने और भारत में ट्रायल का क्या संबंध?

दोनों घटनाएं एक ही समय में सामने आने के कारण इनके बीच संबंध को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। एक तरफ भारत में हाफिज सईद समेत छह आरोपियों के खिलाफ मुकदमा आगे बढ़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ रिपोर्टों में सईद के खिलाफ खतरे की धारणा बढ़ने और उसकी सुरक्षा मजबूत किए जाने की बात कही गई है।

हालांकि अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि सुरक्षा बढ़ाने का सीधा कारण भारत में शुरू हुआ मुकदमा ही है। रिपोर्टों में सुरक्षा बढ़ाने की मुख्य वजह सईद के खिलाफ कथित खतरे और उसे निशाना बनाने की आशंका बताई गई है।

आगे क्या होगा?

अब सबकी नजर 26/11 मामले की कानूनी प्रक्रिया पर है। भारत आरोपियों को अदालत के सामने लाने में असमर्थता के बावजूद नए कानूनी प्रावधानों के तहत मुकदमे को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।

21 अगस्त को पुलिस ने इंटरपोल के जरिए पाकिस्तान में अदालत के आदेश पहुंचाने की प्रक्रिया के लिए गृह मंत्रालय से संपर्क किया। अदालत ने इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए अगली समयसीमा भी तय की है।

इस बीच हाफिज सईद की सुरक्षा को लेकर सामने आई रिपोर्ट ने भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या सुरक्षा बढ़ने के पीछे वास्तव में किसी नए खतरे की आशंका है? क्या उसकी संगठनात्मक गतिविधियां पूरी तरह रोक दी गई हैं? और क्या भारत में शुरू हुआ ट्रायल आने वाले दिनों में इस मामले को और महत्वपूर्ण मोड़ देगा?

फिलहाल इन सवालों के जवाब आने बाकी हैं। इतना जरूर है कि 18 साल पुराने 26/11 मामले में भारत की कानूनी कार्रवाई अब उस चरण में पहुंच गई है, जहां पाकिस्तान में मौजूद आरोपियों की गैर-मौजूदगी भी मुकदमे को अनिश्चितकाल तक रोकने वाली नहीं है।

कोई टिप्पणी नहीं