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घुटनों की आवाज, पैरों में दर्द और उंगलियों में झुनझुनी… शरीर दे रहा है किस खतरनाक बीमारी का संकेत? डॉक्टर ने खोला राज!



आज की बदलती जीवनशैली में घुटनों, कमर, गर्दन और हाथ-पैरों से जुड़ी समस्याएं तेजी से लोगों को परेशान कर रही हैं। लंबे समय तक लैपटॉप या कंप्यूटर पर बैठकर काम करना, लगातार एक ही मुद्रा में खड़े रहना, शारीरिक गतिविधि की कमी और मांसपेशियों की कमजोरी जैसी वजहों से शरीर के अलग-अलग हिस्सों में दर्द और अकड़न की शिकायत हो सकती है। कई लोग शुरुआत में इन लक्षणों को सामान्य थकान समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन लगातार बने रहने वाला दर्द किसी अंदरूनी समस्या का संकेत भी हो सकता है।

घुटनों में दर्द, उठते-बैठते समय आवाज आना, कमर में तकलीफ, गर्दन घुमाने पर दर्द या हाथों की उंगलियों में झुनझुनी जैसे लक्षणों को लेकर लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं। इसी तरह की स्वास्थ्य संबंधी शंकाओं का समाधान करते हुए न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. अर्चना वर्मा ने ‘हैलो डॉक्टर’ कार्यक्रम में कई महत्वपूर्ण बातें बताईं। उन्होंने मांसपेशियों को मजबूत बनाने, सही तरीके से एक्सरसाइज करने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से सलाह लेने पर जोर दिया।

हालांकि, किसी भी दर्द का कारण केवल लक्षण देखकर तय नहीं किया जा सकता। घुटने का दर्द चोट, गठिया, नसों, टेंडन या दूसरी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। इसलिए लगातार या बढ़ते दर्द में चिकित्सकीय जांच जरूरी है।

घुटनों में लगातार दर्द है तो क्या करें?

घुटनों में लगातार दर्द रहने की कई वजहें हो सकती हैं। कुछ लोगों को चलते समय दर्द होता है तो कुछ को सीढ़ियां चढ़ने, बैठने या उठने में परेशानी होती है। वहीं कई लोगों को घुटने के पीछे की तरफ भी दर्द महसूस होता है।

ऐसी स्थिति में सबसे पहले दर्द के वास्तविक कारण को समझना जरूरी है। सामान्य परिस्थितियों में घुटने के आसपास की मांसपेशियों को मजबूत बनाने से जोड़ को बेहतर सपोर्ट मिल सकता है। मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, घुटने के आसपास की मांसपेशियों की मजबूती से घुटने को स्थिर रखने और उस पर पड़ने वाले दबाव को बेहतर ढंग से संभालने में मदद मिल सकती है।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि दर्द होने पर हर व्यक्ति अपने हिसाब से कोई भी कठिन एक्सरसाइज शुरू कर दे। यदि एक्सरसाइज करने से दर्द बढ़ रहा है तो उसे रोकना चाहिए और विशेषज्ञ की सलाह लेनी चाहिए।

उठते-बैठते घुटनों से आवाज क्यों आती है?

कई लोगों को कुर्सी से उठते समय या बैठते समय घुटनों से ‘कट-कट’ या ‘चरचर’ जैसी आवाज सुनाई देती है। ऐसी आवाज को लेकर लोग अक्सर चिंतित हो जाते हैं।

डॉ. अर्चना वर्मा के अनुसार, केवल आवाज आने से घबराने की जरूरत नहीं है। ऐसे मामलों में घुटनों की स्ट्रेंथ और आसपास की मांसपेशियों की ताकत पर ध्यान देना महत्वपूर्ण हो सकता है।

मेडिकल जानकारी के अनुसार घुटने में आवाज या क्रंचिंग कई कारणों से हो सकती है। लेकिन अगर इसके साथ दर्द, सूजन, कमजोरी, अस्थिरता या घुटना पूरी तरह मोड़ने-सीधा करने में परेशानी हो तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

कुर्सी पर बैठकर भी की जा सकती है एक्सरसाइज

जो लोग शुरुआत में कठिन एक्सरसाइज नहीं कर पाते, वे विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार आसान गतिविधियों से शुरुआत कर सकते हैं। डॉक्टर ने कुर्सी पर बैठकर पैरों को नियंत्रित तरीके से आगे-पीछे मूव करने जैसी एक्सरसाइज का उल्लेख किया है।

इस तरह की गतिविधियों का उद्देश्य पैरों की मांसपेशियों को सक्रिय और मजबूत बनाना है। घुटनों के लिए क्वाड्रिसेप्स और हैमस्ट्रिंग जैसी मांसपेशियों को मजबूत करना उपयोगी हो सकता है। अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑर्थोपेडिक सर्जन्स के कंडीशनिंग प्रोग्राम में भी घुटने के आसपास की मांसपेशियों के लिए विभिन्न स्ट्रेंथिंग एक्सरसाइज शामिल हैं।

हालांकि, हर व्यक्ति की समस्या अलग होती है। इसलिए दर्द की स्थिति में एक्सरसाइज की सही तकनीक और मात्रा किसी डॉक्टर या फिजियोथेरेपिस्ट से समझना बेहतर है।

लंबे समय तक लैपटॉप पर बैठने वालों के लिए जरूरी सलाह

ऑफिस या घर से लंबे समय तक लैपटॉप पर काम करने वाले लोगों में गर्दन और कमर दर्द की शिकायत आम हो सकती है। लगातार एक ही मुद्रा में बैठे रहने से मांसपेशियों पर दबाव पड़ सकता है और अकड़न महसूस हो सकती है।

ऐसे लोगों को काम के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लेने, शरीर की मुद्रा बदलने और हल्की स्ट्रेचिंग करने की सलाह दी जाती है। कुछ समय खड़े होकर काम करना या हल्की गतिविधि करना भी लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहने से बचाने में मदद कर सकता है।

अगर कमर या गर्दन का दर्द लगातार बना रहता है, काम या नींद को प्रभावित करता है या उसके साथ कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

खाना बनाते समय घुटनों और कमर में दर्द क्यों?

किचन में लंबे समय तक खड़े रहना भी कुछ लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। लंबे समय तक खड़े रहने के दौरान घुटनों पर लगातार भार पड़ता है और कमर की मांसपेशियों में थकान हो सकती है।

डॉ. अर्चना वर्मा ने ऐसे मामलों में बैक स्ट्रेंथिंग और थाई मसल्स की स्ट्रेंथिंग पर ध्यान देने की बात कही। साथ ही कैल्शियम युक्त खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करने की सलाह दी गई।

हालांकि, केवल कैल्शियम खाने से हर प्रकार का घुटने या कमर दर्द ठीक नहीं होता। दर्द का कारण पता करना और उसी के अनुसार इलाज करना अधिक महत्वपूर्ण है।

कमर में दर्द है और थेरेपी से फायदा नहीं मिला तो?

रितु तिवारी ने सवाल किया कि सही तरीके से चलने और बैठने के दौरान कमर में दर्द होता है और थेरेपी करवाने के बाद भी लाभ नहीं मिला। इसके जवाब में बैक स्ट्रेंथिंग एक्सरसाइज पर ध्यान देने की बात कही गई।

कमर की मांसपेशियों को मजबूत करना कुछ लोगों में लंबे समय तक पीठ से जुड़ी परेशानी को संभालने में मदद कर सकता है। लेकिन अगर दर्द लगातार बना हुआ है, बढ़ रहा है या पैर में कमजोरी, सुन्नपन अथवा अन्य न्यूरोलॉजिकल लक्षण मौजूद हैं, तो केवल एक्सरसाइज पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।

गर्दन और कमर दर्द में अचानक गर्दन न घुमाएं

मनीष मालवीय ने गर्दन और कमर में दर्द को लेकर सवाल किया। इस पर गर्दन की मांसपेशियों की अकड़न कम करने के लिए अचानक गर्दन घुमाने से बचने की सलाह दी गई।

गर्दन में दर्द के दौरान बहुत तेजी से गर्दन को झटका देना या जोर लगाकर घुमाना उचित नहीं माना जाता। सामान्य गर्दन दर्द में हल्की गतिविधि और डॉक्टर द्वारा बताई गई एक्सरसाइज मदद कर सकती हैं। NHS भी गर्दन को लंबे समय तक पूरी तरह स्थिर रखने के बजाय उचित परिस्थितियों में हल्की मूवमेंट और फ्लेक्सिबिलिटी एक्सरसाइज की सलाह देता है।

यदि गर्दन के दर्द के साथ हाथ-पैर में कमजोरी, चलने में परेशानी या संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण हों तो इसे सामान्य दर्द समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

लंबे समय तक खड़े रहने वालों को लेना चाहिए ब्रेक

राजेश शर्मा ने पूछा कि लंबे समय तक खड़े रहने पर क्या करना चाहिए। इसके जवाब में लगभग 45 मिनट से एक घंटे के बाद छोटा ब्रेक लेने और शरीर को हल्का मूव करने की सलाह दी गई।

काम के दौरान गर्दन, कंधे, हाथ और कमर को हल्के तरीके से मूव करने से लंबे समय तक एक ही मुद्रा में रहने से होने वाली अकड़न कम करने में मदद मिल सकती है।

हालांकि, यदि किसी व्यक्ति को खड़े रहने के दौरान लगातार तेज दर्द, पैरों में कमजोरी या सुन्नपन महसूस होता है तो केवल ब्रेक लेना पर्याप्त नहीं है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर से कारण की जांच कराना जरूरी हो सकता है।

पीछे देखने पर गर्दन में दर्द तो स्ट्रेंथिंग पर ध्यान

राजेंद्र वालेकर ने पीछे की ओर देखने पर गर्दन में दर्द होने की शिकायत बताई। इस तरह की समस्या में गर्दन की मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज की सलाह दी गई।

लेकिन गर्दन की एक्सरसाइज हमेशा धीरे-धीरे और सही तकनीक के साथ करनी चाहिए। अचानक तेज मूवमेंट से बचना जरूरी है। अगर दर्द कई सप्ताह तक बना रहता है या सामान्य उपायों से राहत नहीं मिलती तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

हाथों की उंगलियों में झुनझुनी किस ओर करती है इशारा?

अनिल देशमुख ने पैरों पर लोड न आने और हाथों की उंगलियों में झुनझुनी की समस्या के बारे में सवाल किया। जवाब में गर्दन की नस पर दबाव की संभावना का उल्लेख किया गया और विशेषज्ञ से जांच कराने की सलाह दी गई।

उंगलियों में झुनझुनी या सुन्नपन कई कारणों से हो सकता है। कार्पल टनल सिंड्रोम में खास तौर पर अंगूठे, तर्जनी और बीच वाली उंगली में झुनझुनी या सुन्नपन हो सकता है और हाथ की पकड़ कमजोर पड़ सकती है।

इसलिए हर उंगली के दर्द या झुनझुनी को सीधे कार्पल टनल सिंड्रोम मान लेना सही नहीं होगा। लक्षणों के आधार पर डॉक्टर यह तय कर सकते हैं कि समस्या कलाई की नस से जुड़ी है या गर्दन से।

कलाई में दर्द होने पर रिस्ट बेल्ट का इस्तेमाल

हाथ और कलाई से जुड़ी परेशानी में कुछ लोगों को डॉक्टर की सलाह से रिस्ट स्प्लिंट या सपोर्ट से लाभ मिल सकता है। लेकिन इसे लगातार या बिना कारण इस्तेमाल करना उचित नहीं है।

यदि उंगलियों में बार-बार झुनझुनी, रात में सुन्नपन, चीजें पकड़ने में कमजोरी या हाथ की पकड़ कम होने जैसी समस्या हो तो विशेषज्ञ से जांच कराना जरूरी है। कार्पल टनल सिंड्रोम में समय पर पहचान और उचित उपचार महत्वपूर्ण हो सकता है।

रात में पैरों का दर्द नींद उड़ा रहा है तो जांच कराएं

जीविता कोलेकर ने रात में पैरों में तेज दर्द और नींद प्रभावित होने की शिकायत बताई। जवाब में यूरिक एसिड की जांच कराने और पर्याप्त पानी पीने की सलाह दी गई।

हालांकि, रात में पैरों में दर्द केवल यूरिक एसिड बढ़ने की वजह से हो, यह जरूरी नहीं है। इसके पीछे मांसपेशियों की समस्या, नसों से जुड़ी परेशानी, रक्त संचार से संबंधित कारण या अन्य स्वास्थ्य स्थितियां भी हो सकती हैं। इसलिए लगातार रात का दर्द होने पर चिकित्सकीय मूल्यांकन जरूरी है।

अगर दर्द इतना अधिक है कि व्यक्ति की नींद और रोजमर्रा की गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। घुटने या जोड़ के दर्द में लगातार परेशानी होने पर डॉक्टर से संपर्क करने की सलाह दी जाती है।

कब तुरंत डॉक्टर के पास जाना चाहिए?

घुटने या शरीर के किसी हिस्से में दर्द होने पर हर स्थिति में घबराने की जरूरत नहीं होती, लेकिन कुछ संकेत गंभीर समस्या की ओर इशारा कर सकते हैं। उदाहरण के लिए घुटने में अचानक बहुत ज्यादा सूजन, लालिमा या गर्माहट, चोट के बाद तेज दर्द, पैर पर वजन न डाल पाना या घुटने का असामान्य दिखाई देना होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

इसी तरह गर्दन या कमर दर्द के साथ कमजोरी, चलने में असंतुलन या शरीर के किसी हिस्से में बढ़ता हुआ सुन्नपन महसूस हो तो विशेषज्ञ की सलाह में देरी नहीं करनी चाहिए।

दर्द को नजरअंदाज नहीं, कारण समझना जरूरी

घुटनों में दर्द, उठते समय आवाज, कमर की तकलीफ, गर्दन में अकड़न या हाथों की उंगलियों में झुनझुनी जैसी समस्याएं आज बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रही हैं। नियमित शारीरिक गतिविधि, सही पोस्चर, मांसपेशियों की मजबूती और काम के बीच ब्रेक लेना शरीर को सक्रिय रखने में मदद कर सकता है।

घुटनों के आसपास की मांसपेशियों की मजबूती विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो सकती है और विशेषज्ञों द्वारा अलग-अलग परिस्थितियों में स्ट्रेंथिंग एक्सरसाइज की सलाह दी जाती है।

लेकिन किसी भी दर्द के लिए एक ही इलाज सभी लोगों पर लागू नहीं होता। दर्द की वजह जाने बिना एक्सरसाइज, दवा या सपोर्ट बेल्ट का इस्तेमाल शुरू करना सही नहीं है। लगातार दर्द, सूजन, कमजोरी, सुन्नपन या चलने-फिरने में परेशानी हो तो डॉक्टर से जांच कराना सबसे सुरक्षित तरीका है।

यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी और दिए गए डॉक्टर के जवाबों पर आधारित है। इसे व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी एक्सरसाइज, दवा या सपोर्ट का इस्तेमाल अपनी स्थिति के अनुसार डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह से करें।

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