बवासीर को जड़ से खत्म करने का दावा करने वाले नुस्खों से सावधान! जानिए असली इलाज और वो गलती जो बीमारी को बढ़ा देती है
बवासीर यानी Piles या Hemorrhoids एक आम समस्या है, लेकिन इसके लक्षण कई लोगों के लिए काफी परेशान करने वाले हो सकते हैं। मल त्याग के समय दर्द, खुजली, गुदा के आसपास गांठ या सूजन और शौच के बाद चमकीले लाल रंग का खून आना इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं। बवासीर आंत के निचले हिस्से या गुदा के आसपास की सूजी हुई नसों के कारण होती है। इसे मुख्य रूप से आंतरिक और बाहरी बवासीर में बांटा जाता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बवासीर को जड़ से खत्म करने का कोई एक घरेलू नुस्खा साबित नहीं है। हल्की बवासीर में कब्ज दूर करने, फाइबर बढ़ाने और टॉयलेट की आदतों में बदलाव से लक्षण काफी कम हो सकते हैं। वहीं गंभीर, बार-बार होने वाली या खून निकलने वाली बवासीर में डॉक्टर की जांच और जरूरत के अनुसार चिकित्सा प्रक्रिया आवश्यक हो सकती है।
बवासीर आखिर होती क्यों है?
बवासीर के पीछे सबसे आम कारणों में कब्ज, मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर लगाना, लंबे समय तक टॉयलेट पर बैठे रहना और कम फाइबर वाला भोजन शामिल हैं। लगातार दस्त, उम्र बढ़ना, गर्भावस्था और नियमित रूप से भारी वजन उठाना भी जोखिम बढ़ा सकता है।
जब व्यक्ति को बार-बार कठोर मल त्याग करना पड़ता है और वह ज्यादा जोर लगाता है, तो गुदा क्षेत्र की नसों पर दबाव बढ़ सकता है। यही दबाव बवासीर की समस्या को बढ़ाने में भूमिका निभा सकता है।
पहला उपाय—कब्ज को दूर करना
बवासीर से राहत पाने के लिए सबसे पहले कब्ज को नियंत्रित करना जरूरी है। कठोर मल के कारण शौच के दौरान जोर लगाना पड़ता है, जिससे समस्या बढ़ सकती है।
अपने भोजन में धीरे-धीरे फाइबर की मात्रा बढ़ाएं। फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज और अन्य फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ मल को नरम और आसानी से बाहर निकलने में मदद कर सकते हैं।
अगर भोजन से पर्याप्त फाइबर नहीं मिल रहा है तो डॉक्टर की सलाह से इसबगोल यानी psyllium जैसे फाइबर सप्लीमेंट का इस्तेमाल किया जा सकता है। NIDDK के अनुसार फाइबर सप्लीमेंट और पर्याप्त तरल पदार्थ कब्ज तथा बवासीर के लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं।
पानी पीना भी है बेहद जरूरी
फाइबर बढ़ाने के साथ पर्याप्त तरल पदार्थ लेना भी जरूरी है। पानी और अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ फाइबर को बेहतर तरीके से काम करने में मदद करते हैं और मल को नरम रखने में सहायता कर सकते हैं।
हालांकि, हर व्यक्ति की पानी की जरूरत अलग होती है। उम्र, मौसम, शारीरिक गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार मात्रा बदल सकती है।
टॉयलेट में ज्यादा देर बैठने की आदत छोड़ें
कई लोग टॉयलेट में काफी देर तक मोबाइल चलाते रहते हैं। यह आदत बवासीर के लिए अच्छी नहीं मानी जाती। लंबे समय तक टॉयलेट पर बैठने से बचें और मल त्याग के दौरान ज्यादा जोर न लगाएं।
जब मल त्याग की इच्छा हो तो उसे अनावश्यक रूप से रोकने से भी बचना चाहिए। नियमित और स्वस्थ bowel habits कब्ज को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं।
गर्म पानी से मिल सकती है राहत
बवासीर में दर्द, खुजली या जलन होने पर गुनगुने पानी में कुछ समय बैठना यानी sitz bath राहत दे सकता है। गर्म पानी प्रभावित क्षेत्र की असहजता को कम करने में मदद कर सकता है।
इसके अलावा गुदा के आसपास की सफाई बनाए रखें और सफाई के बाद क्षेत्र को रगड़ने के बजाय धीरे से सुखाएं। अत्यधिक रगड़ने से जलन बढ़ सकती है।
खाने में किन चीजों पर दें ध्यान?
बवासीर के साथ कब्ज की समस्या है तो फाइबर कम वाले और अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन की मात्रा कम करना उपयोगी हो सकता है। फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज को भोजन का हिस्सा बनाना बेहतर विकल्प हो सकता है।
खाने में अचानक बहुत ज्यादा फाइबर शामिल करने के बजाय इसे धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर रहता है, खासकर यदि पहले आपका भोजन कम फाइबर वाला रहा हो।
नियमित व्यायाम भी जरूरी
शारीरिक रूप से सक्रिय रहना कब्ज को नियंत्रित करने और स्वस्थ bowel habits बनाए रखने में मदद कर सकता है। रोजाना अपनी क्षमता के अनुसार पैदल चलना या अन्य सामान्य शारीरिक गतिविधि अपनाई जा सकती है।
साथ ही, नियमित रूप से बहुत भारी वजन उठाने से बचना चाहिए, क्योंकि भारी वजन उठाना भी बवासीर के जोखिम को बढ़ाने वाले कारकों में शामिल है।
क्या क्रीम और दवाओं से ठीक हो सकती है?
हल्के लक्षणों में कुछ ओवर-द-काउंटर क्रीम, मलहम या suppositories दर्द, खुजली और सूजन को अस्थायी रूप से कम कर सकते हैं। लेकिन इनका इस्तेमाल लंबे समय तक अपने मन से नहीं करना चाहिए। NIDDK के अनुसार ऐसे उत्पादों से लगभग एक सप्ताह में राहत न मिले या त्वचा पर दाने जैसे दुष्प्रभाव हों तो डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
कब्ज के लिए stool softener या laxative की जरूरत भी कुछ लोगों को पड़ सकती है, लेकिन इसका चुनाव डॉक्टर या फार्मासिस्ट की सलाह से करना बेहतर है।
गंभीर बवासीर में कौन-सा इलाज होता है?
अगर घरेलू उपायों से समस्या ठीक नहीं होती या बवासीर बार-बार होती है तो डॉक्टर जांच के बाद उपचार तय कर सकते हैं।
कुछ मामलों में rubber band ligation, sclerotherapy, infrared coagulation या electrocoagulation जैसी प्रक्रियाएं की जाती हैं। बड़ी बाहरी बवासीर या ऐसी आंतरिक बवासीर जो दूसरे उपचारों से ठीक न हो, उसमें सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है।
इनमें से किसी भी प्रक्रिया को घर पर खुद करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।
खून आए तो इसे सिर्फ बवासीर न समझें
यह सबसे महत्वपूर्ण सावधानी है। शौच के समय खून आना बवासीर का लक्षण हो सकता है, लेकिन हर बार इसका कारण बवासीर ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। गुदा में दरार, आंतों की सूजन, पॉलीप या अन्य गंभीर बीमारियां भी रक्तस्राव का कारण हो सकती हैं।
इसलिए अगर मल त्याग के दौरान बार-बार खून आ रहा है तो डॉक्टर से जांच कराना जरूरी है।
किन परिस्थितियों में तुरंत डॉक्टर के पास जाएं?
अगर बहुत ज्यादा या लगातार खून निकल रहा है, बड़े रक्त के थक्के दिखाई दे रहे हैं, तेज दर्द है, बुखार है, चक्कर या कमजोरी महसूस हो रही है या पेट दर्द के साथ रक्तस्राव हो रहा है तो तुरंत चिकित्सकीय मदद लें।
इसी तरह घरेलू देखभाल के करीब एक सप्ताह बाद भी लक्षण बने रहें या समस्या बार-बार वापस आती रहे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।
क्या बवासीर हमेशा के लिए खत्म हो सकती है?
कई लोगों में हल्की बवासीर के लक्षण जीवनशैली और खान-पान में सुधार के बाद काफी कम हो जाते हैं। लेकिन इसे हमेशा के लिए खत्म होने की गारंटी देना सही नहीं है। बवासीर दोबारा भी हो सकती है, खासकर यदि कब्ज, जोर लगाकर मल त्याग करना और लंबे समय तक टॉयलेट पर बैठने जैसी आदतें जारी रहें।
इसलिए इलाज के साथ-साथ कब्ज को रोकना और स्वस्थ टॉयलेट आदतें बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।
बवासीर से राहत पाने के लिए सबसे प्रभावी शुरुआती कदम हैं—फाइबर युक्त भोजन, पर्याप्त तरल पदार्थ, कब्ज पर नियंत्रण, टॉयलेट में ज्यादा देर न बैठना, मल त्याग के दौरान जोर न लगाना और नियमित शारीरिक गतिविधि। गुनगुने पानी का sitz bath भी दर्द और खुजली में राहत दे सकता है।
लेकिन अगर खून आ रहा है, दर्द बहुत ज्यादा है या समस्या लगातार बनी हुई है तो इसे केवल घरेलू नुस्खों के भरोसे छोड़ना सही नहीं है। सही कारण पता करने और जरूरत के अनुसार उपचार लेने के लिए डॉक्टर से जांच कराना सबसे सुरक्षित तरीका है।

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