सोना-चांदी में फिर आया तूफानी उछाल! क्या अब टूटेगा रिकॉर्ड? अगले कुछ दिनों में होने वाला है बड़ा खेल
सोने और चांदी की कीमतों में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमती धातुओं को मजबूती मिल रही है और इसका असर भारतीय बाजार पर भी दिखाई दे रहा है। सोमवार, 17 अगस्त 2026 को शुरुआती एशियाई कारोबार में स्पॉट गोल्ड करीब 0.45 प्रतिशत बढ़कर 4,395.96 डॉलर प्रति औंस पहुंच गया। कमजोर अमेरिकी डॉलर और अमेरिका के हालिया आर्थिक आंकड़ों के बाद ब्याज दरों को लेकर बदली उम्मीदों ने सोने को सहारा दिया है।
भारत में भी सोना और चांदी इस समय निवेशकों और आम खरीदारों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बने हुए हैं। खास बात यह है कि पिछले कुछ दिनों में दोनों धातुओं में जबरदस्त तेजी के बाद मुनाफावसूली भी देखने को मिली थी। अब एक बार फिर सोने में मजबूती के संकेत दिखाई दे रहे हैं।
17 अगस्त को चांदी का क्या है भाव?
17 अगस्त 2026 के उपलब्ध बाजार आंकड़ों के अनुसार, भारत में 999 फाइन सिल्वर का भाव करीब ₹2,37,270 प्रति किलोग्राम रहा। वहीं 925 स्टर्लिंग सिल्वर का भाव लगभग ₹2,19,475 प्रति किलोग्राम बताया गया है। खास बात यह है कि पिछले एक साल में 999 चांदी की कीमत में करीब 106.3 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई है। एक साल पहले 17 अगस्त 2025 को इसका भाव लगभग ₹1,15,010 प्रति किलोग्राम था।
प्रमुख शहरों में भी चांदी के भाव में थोड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक मुंबई में 999 चांदी करीब ₹2,36,840, दिल्ली में ₹2,36,430, चेन्नई में ₹2,37,530 और कोलकाता में करीब ₹2,36,530 प्रति किलोग्राम रही।
इस तेजी ने चांदी को निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण बना दिया है। पिछले एक साल में 100 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी अपने आप में बताती है कि सफेद धातु ने कितना बड़ा रिटर्न दिया है। हालांकि, तेजी के साथ चांदी में उतार-चढ़ाव का जोखिम भी काफी अधिक रहता है।
सोने में फिर क्यों बढ़ रही तेजी?
सोने की कीमतों को इस समय कई वैश्विक कारकों से समर्थन मिल रहा है। अमेरिका के आर्थिक आंकड़े, डॉलर की कमजोरी, ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें और पश्चिम एशिया में जारी तनाव सोने की दिशा तय करने वाले प्रमुख कारक हैं।
सोमवार को कमजोर अमेरिकी डॉलर के बीच सोने में तेजी देखने को मिली। हालिया अमेरिकी रोजगार और महंगाई संबंधी आंकड़ों ने बाजार में यह उम्मीद बढ़ाई है कि फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति पहले की अपेक्षा कम आक्रामक हो सकती है। इससे सोने जैसे ऐसे एसेट को फायदा मिलता है, जिस पर ब्याज नहीं मिलता लेकिन जिसे निवेशक अनिश्चितता के समय सुरक्षित विकल्प के तौर पर देखते हैं।
रॉयटर्स की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त में सोने की कीमतों में जोरदार तेजी आई है और केंद्रीय बैंकों की खरीदारी भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण सहारा बनी हुई है। 2026 की दूसरी तिमाही में केंद्रीय बैंकों की सोने की खरीद 289 टन तक पहुंचने की बात रिपोर्ट में सामने आई है।
कुछ दिन पहले आई थी बड़ी गिरावट
सोने और चांदी की कहानी केवल तेजी की नहीं है। तेज उछाल के बाद पिछले दिनों दोनों धातुओं में मुनाफावसूली भी देखने को मिली।
रिपोर्टों के अनुसार, सोने की कीमत दो दिनों में करीब ₹2,600 प्रति ग्राम तक गिर गई थी, जबकि चांदी में करीब ₹5,000 प्रति किलोग्राम की गिरावट आई थी। इससे पता चलता है कि मौजूदा बाजार में कीमतें काफी तेजी से ऊपर-नीचे हो रही हैं।
इससे पहले सोना लगातार कई सत्रों में बढ़ा था और अगस्त की शुरुआत से इसमें काफी मजबूत तेजी देखने को मिली। 11 अगस्त की रिपोर्ट में बताया गया था कि केवल तीन दिनों में सोना करीब ₹6,600 प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब ₹16,200 प्रति किलोग्राम महंगी हो गई थी।
यानी बाजार में फिलहाल तेजी और मुनाफावसूली दोनों का दौर चल रहा है।
सोना 4,500 डॉलर के करीब पहुंचा
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना पिछले सप्ताह दो महीने के उच्च स्तर तक पहुंच गया था। 13 अगस्त को स्पॉट गोल्ड करीब 4,449 डॉलर प्रति औंस के उच्च स्तर तक गया, लेकिन इसके बाद निवेशकों ने मुनाफावसूली शुरू कर दी और कीमत नीचे आई।
अब बाजार की नजर 4,500 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर बनी हुई है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना इस महत्वपूर्ण स्तर के ऊपर टिकता है तो आगे की तेजी को लेकर निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है। दूसरी ओर, अगर इस स्तर के आसपास फिर से मुनाफावसूली आती है तो कीमतों में अस्थायी गिरावट भी देखी जा सकती है।
चांदी ने सोने को भी पीछे छोड़ा
इस साल चांदी का प्रदर्शन खास तौर पर चर्चा में है। पिछले एक साल में 999 चांदी के भाव में 106 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी दर्ज होना बताता है कि सफेद धातु ने निवेशकों को आकर्षित किया है।
चांदी की कीमत सिर्फ निवेश मांग से प्रभावित नहीं होती। इसका इस्तेमाल उद्योगों में भी बड़े पैमाने पर होता है। इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर पैनल और कई औद्योगिक क्षेत्रों में चांदी की मांग रहती है। इसलिए वैश्विक औद्योगिक गतिविधियों में बदलाव भी इसकी कीमत पर असर डाल सकता है।
यही कारण है कि चांदी में तेजी के साथ-साथ उतार-चढ़ाव भी सोने की तुलना में ज्यादा देखने को मिल सकता है।
अमेरिका और ईरान तनाव का भी असर
सोने और चांदी की कीमतों के लिए भू-राजनीतिक तनाव भी महत्वपूर्ण है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-ईरान विवाद के कारण वैश्विक निवेशकों के बीच अनिश्चितता बनी हुई है।
रॉयटर्स के मुताबिक, सोमवार को भी बाजार में पश्चिम एशिया के तनाव का असर दिखाई दिया। तेल की कीमतें पिछले सप्ताह बढ़ीं और निवेशक भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। ऐसे माहौल में सोने की सुरक्षित निवेश वाली मांग को समर्थन मिल सकता है।
हालांकि, अगर तनाव कम होता है और वैश्विक बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता बढ़ती है तो सोने की सुरक्षित निवेश मांग कुछ कमजोर भी हो सकती है।
खरीदारों के लिए क्या है मतलब?
अगर आप सोना या चांदी खरीदने की तैयारी कर रहे हैं तो मौजूदा बाजार में जल्दबाजी करने के बजाय कीमतों की चाल पर नजर रखना जरूरी है। सोने की कीमतें पिछले कुछ समय से काफी ऊंचे स्तरों पर हैं और चांदी में तो एक साल में 100 प्रतिशत से ज्यादा की तेजी आ चुकी है।
ज्वेलरी खरीदने वालों को यह भी ध्यान रखना चाहिए कि बाजार में बताए जाने वाले सोने के भाव और ज्वेलरी की अंतिम कीमत में अंतर होता है। मेकिंग चार्ज, GST और ज्वेलर के अन्य शुल्क के कारण अंतिम बिल ज्यादा हो सकता है।
इसी तरह चांदी खरीदते समय भी शुद्धता और वजन की सही जांच करना जरूरी है।
आगे क्या हो सकता है?
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की दिशा मुख्य रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दर संबंधी उम्मीदों, डॉलर की चाल, अमेरिका के आर्थिक आंकड़ों और पश्चिम एशिया के घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।
सोने को फिलहाल कमजोर डॉलर, केंद्रीय बैंकों की खरीद और भू-राजनीतिक अनिश्चितता से समर्थन मिल रहा है। वहीं चांदी को निवेश मांग के साथ-साथ औद्योगिक मांग से भी ताकत मिल रही है।
इसलिए आने वाले दिनों में दोनों धातुओं में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है। तेजी जारी रहती है तो नए ऊंचे स्तर देखने को मिल सकते हैं, लेकिन लगातार तेजी के बाद मुनाफावसूली का जोखिम भी बना हुआ है।
फिलहाल इतना साफ है कि सोना और चांदी दोनों ही बाजार के सबसे चर्चित एसेट बने हुए हैं। एक तरफ निवेशक इन्हें सुरक्षित विकल्प मानकर खरीदारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ रिकॉर्ड स्तरों के करीब पहुंचती कीमतें नए खरीदारों को सोचने पर मजबूर कर रही हैं। ऐसे में आने वाले कुछ दिन सोने-चांदी के बाजार के लिए बेहद अहम रहने वाले हैं।

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